Devar Bhabhi Love story : पंजाब और हरियाणा की सीमा पर बसे अंबाला शहर का अपना ही मिज़ाज है। अंबाला कैंट के सदर बाज़ार की तंग गलियाँ हों या विजय रतन चौक की रौनक, यहाँ की हवा में एक अजीब सा अपनापन तैरता रहता है। इसी शहर के एक शांत और खूबसूरत इलाके, मॉडल टाउन के एक बड़े से मकान में रहता था रोहन।
रोहन की उम्र यही कोई तेईस-चौबीस साल रही होगी। वह अंबाला के ही एक नामी इंजीनियरिंग कॉलेज से बी.टेक करने के बाद अपनी खुद की कंप्यूटर रिपेयरिंग और सॉफ्टवेयर टेक-शॉप चलाता था। रोहन दिल का बहुत साफ, सीधा-साधा और बेहद शर्मीला लड़का था।
उसकी शराफत का आलम यह था कि अगर सामने कोई लड़की आकर खड़ी हो जाती, तो उसकी हथेलियाँ पसीने से भीग जाती थीं, ज़ुबान लड़खड़ाने लगती थी और आँखों की पुतलियाँ ज़मीन खंगालने लगती थीं।

Devar Bhabhi Love story अवनि का आगमन और घर में नई शुरुआत
रोहन के बड़े भाई, वरुण, रोहन से पाँच साल बड़े थे और जालंधर की एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर थे। छह महीने पहले ही वरुण की शादी हुई थी, और घर में आई थीं- अवनि।
अवनि चंडीगढ़ के एक नामी सेंट जेवियर्स स्कूल से पढ़ी-लिखी, बहुत ही स्मार्ट, आत्मविश्वास से भरी और बेहद खूबसूरत लड़की थीं। वे अंबाला के ही एक बड़े प्राइवेट कॉलेज में इंग्लिश लिटरेचर की लेक्चरर थीं। अवनि का व्यक्तित्व ऐसा था कि वे जहाँ भी जातीं, अपनी बातों, हंसी और जिंदादिली से पूरे माहौल में जान फूंक देती थीं।
शादी के कुछ ही हफ्तों बाद, वरुण को कंपनी के काम से तीन महीने के लिए अमेरिका (USA) जाना पड़ा। घर में रोहन, उसके मम्मी-पापा और अवनि रह गए।
अवनि ने देखा कि रोहन पूरे घर में सबका ख्याल रखता है- पापा की दवाइयाँ लाना हो, मम्मी का चश्मा ठीक कराना हो या घर का कोई भी काम हो, रोहन हमेशा हाज़िर रहता था। लेकिन जब भी अवनि उससे कोई बात करने की कोशिश करतीं, रोहन या तो “जी भाभी” कहकर अपने कमरे में भाग जाता, या नज़रें चुराने लगता। अवनि समझ गई थीं कि उसका यह देवर ‘लड़कियों के मामले में महा-शर्मीला’ है।

Devar Bhabhi Love story मक्के की रोटी, सरसों का साग और पहला सबक
जनवरी का महीना था। अंबाला में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। शाम के सात बज रहे थे और बाहर हल्की-हल्की धुंध चादर की तरह फैलने लगी थी।
किचन में अवनि और मम्मी जी रात के खाने की तैयारी कर रही थीं। ताज़ा-ताज़ा सरसों का साग उबल रहा था और उसकी खुशबू पूरे घर में महक रही थी। रोहन दबे पाँव किचन की तरफ आया और काउंटर पर रखे खाली गिलास को उठाने लगा।
“रोहन!” अवनि ने अचानक पीछे से आवाज़ दी।
रोहन झटके से पलटा, गिलास उसके हाथ से छूटते-छूटते बचा। “जी… जी भाभी?”
अवनि ने बेलन हाथ में पकड़े-पकड़े अपनी आँखें छोटी कीं और मुस्कुराते हुए कहा, “ज़रा इधर आओ तो सही। मैं तुम्हें खा नहीं जाऊँगी।”
रोहन हिचकिचाते हुए दो कदम आगे बढ़ा। “जी भाभी, कुछ मँगाना है क्या बाज़ार से? वो मैं सदर बाज़ार जा ही रहा था…”
“बाज़ार बाद में जाना, पहले यह बताओ कि आज कॉलेज के फेयरवेल में तुम्हारी क्लास की वो जो रिया है… उसने तुम्हें जो गिफ्ट दिया था, उसका क्या किया?” अवनि ने काउंटर पर कोहनी टिकाते हुए शरारती अंदाज़ में पूछा।
रोहन का चेहरा एकदम टमाटर की तरह लाल हो गया। उसकी आँखों की पुतलियाँ ऊपर-नीचे होने लगीं। “भाभी… आपको… आपको कैसे पता?”
“अरे बुद्धू! तुम्हारी मम्मी ने मुझे सब बता दिया। बेचारी रिया आधे घंटे तक तुमसे बात करने की कोशिश करती रही, और तुम टेक-शॉप का बहाना बनाकर वहाँ से नौ-दो ग्यारह हो गए! इतनी अच्छी लड़की थी, तुम्हें कॉलेज में अप्रोच कर रही थी और तुम भाग आए?” अवनि ने सिर पीट लिया।
रोहन ने अपनी गर्दन खुजलाते हुए कहा, “भाभी… मुझे समझ ही नहीं आता कि लड़कियों से क्या बात करूँ। जब भी कोई लड़की सामने आती है, मेरा दिमाग ब्लैंक हो जाता है। मुझे लगता है मैं कुछ गलत बोल दूँगा और वह हंस पड़ेगी।”
अवनि ने रोहन के कंधों पर हाथ रखा और उसे डाइनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठा दिया। फिर खुद सामने वाली कुर्सी पर बैठ गईं।
“रोहन, तुम इतने हैंडसम हो, इतने समझदार हो, इतने केयरिंग हो… लेकिन इस शर्मीलेपन की वजह से तुम अपनी उम्र के सबसे खूबसूरत दौर को गँवा रहे हो। अब समय आ गया है कि तुम्हारा यह डर निकाला जाए।”
“डर? कैसा डर भाभी?” रोहन ने घबराकर पूछा।
“लड़कियों से बात करने का डर!” अवनि ने अपनी हुडी की आस्तीन ऊपर चढ़ाते हुए ऐलान किया। “आज से, यानी इस कड़ाके की ठंड से, तुम्हारी भाभी यानी अवनि शर्मा तुम्हारी पर्सनल ‘लव एंड पर्सनैलिटी कोच’ बनती हैं। अगले एक महीने में, मैं तुम्हें ऐसा तैयार करूँगी कि अंबाला की कोई भी लड़की तुमसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएगी!”
रोहन ने आँखें फाड़कर अवनि को देखा। “क्या? भाभी… नहीं-नहीं! यह सब मुझसे नहीं होगा। मैं ठीक हूँ अपनी किताबों और कंप्यूटर रिपेयरिंग के साथ!”
“अब तो होकर रहेगा, मिस्टर रोहन!” अवनि ने हँसते हुए कहा। “यह तुम्हारी भाभी का ऑर्डर है!”

Devar Bhabhi Love story द लव ट्रेनिंग: आई-कांटैक्ट और चाय की चुस्कियाँ
अगले ही दिन से रोहन की ‘ट्रेनिंग’ शुरू हो गई।
अवनि ने रोहन के लिए कुछ कड़े नियम बनाए थे। पहला नियम था- आई कांटैक्ट (Eye Contact) यानी बात करते वक्त सीधे आँखों में देखना, और दूसरा नियम था- कॉन्फिडेंस (आत्मविश्वास)।
शाम के पाँच बज चुके थे। अंबाला के क्लॉक टॉवर (घंटाघर) के पास वाले मशहूर ‘पंडित जी के ढाबे’ के बाहर अवनि और रोहन खड़े थे। आस-पास कॉलेज के ढेर सारे छात्र-छात्राएं चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे।
“रोहन, ध्यान से सुनो,” अवनि ने अपनी काली जैकेट का ज़िपर ऊपर करते हुए कहा। “नियम नंबर एक: जब भी किसी लड़की से बात करो, अपनी नज़रें ज़मीन पर मत रखो। जूते नहीं देखने हैं उसके! आँखों में देखना है और हल्की सी स्माइल रखनी है। समझे?”
“भाभी… यहाँ इतने सारे लोग हैं। आप मुझे यहाँ क्यों लाई हैं?” रोहन घबराकर इधर-उधर देख रहा था।
“अभ्यास (Practice) कराने!” अवनि ने रोहन को एक टेबल की तरफ इशारा किया जहाँ दो लड़कियाँ चाय पी रही थीं। “जाओ, जाकर उनसे बस इतना पूछो कि यहाँ की कुलहड़ वाली चाय का स्वाद कैसा है और क्या वे तुम्हें यहाँ का कोई अच्छा स्नैक सजेस्ट कर सकती हैं।”
“क्या? भाभी! मैं पागल लगूँगा!” रोहन के माथे पर ठंड में भी पसीने की बूंदें आ गईं।
“पागल नहीं, हैंडसम लगोगे! जाओ, वरना आज रात का खाना बंद!” अवनि ने उसे पीछे से हल्का सा धक्का दिया।
रोहन हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ा। वह उन लड़कियों के पास पहुँचा। “उम्म… एक्सक्यूज मी…”
लड़कियों ने मुड़कर देखा। रोहन ने तुरंत अपनी नज़रें ज़मीन पर गड़ा लीं और कांपती आवाज़ में बोला, “क्या… क्या चाय गरम है?”
दोनों लड़कियाँ रोहन की इस बेतुकी बात पर ज़ोर से हँस पड़ीं। रोहन का चेहरा उतर गया। वह तुरंत उलटे पाँव भागकर अवनि के पास वापस आ गया।
“देखा भाभी! मैंने कहा था न! मुझसे नहीं होगा,” रोहन ने हताश होकर कहा।
अवनि ने अपनी हंसी रोकी और रोहन के सामने आकर खड़ी हो गईं। उन्होंने रोहन का ठोड़ी (Chin) पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया।
“रोहन, आँखें मिलाओ मुझसे,” अवनि ने बहुत ही सौम्य लेकिन कड़क आवाज़ में कहा।
रोहन ने हिचकिचाते हुए अवनि की आँखों में देखा। अवनि की गहरी, भूरी आँखों में एक अजीब सा जादू था। अवनि के होठों पर एक बहुत ही प्यारी मुस्कान थी, और ठंड के कारण उनके गाल हल्के गुलाबी हो रहे थे।
“ऐसे… ठीक ऐसे ही देखना है,” अवनि ने धीमी आवाज़ में कहा। “जब तुम किसी की आँखों में देखते हो, तो सामने वाले को लगता है कि तुम सच्चे हो। अब ज़रा मुस्कुराओ।”
रोहन ने अवनि की आँखों में देखते हुए एक बहुत ही मासूम और सच्ची मुस्कान दी।
अवनि का दिल एक पल के लिए जैसे धड़कना भूल गया। रोहन की उस मुस्कान में इतनी निश्छलता और मासूमियत थी कि अवनि को लगा जैसे उन्होंने आज तक किसी लड़के के चेहरे पर इतनी खूबसूरत मुस्कान नहीं देखी थी। अवनि ने जल्दी से अपनी नज़रें हटाईं और अपना कोट सही किया।
“हम्म… नॉट बैड। इस मुस्कान पर तो कोई भी लड़की फ़िदा हो जाएगी,” अवनि ने बात को संभालते हुए कहा। “चलो, अब दो कुल्हड़ चाय मँगवाओ और मेरे साथ बैठकर पियो।”
दोनों पंडित जी के ढाबे पर बैठकर गरम-गरम कुल्हड़ चाय पीने लगे। अवनि उसे तरह-तरह के टिप्स दे रही थीं- लड़कियों की तारीफ़ कैसे की जाती है, उनकी बातों को ध्यान से कैसे सुना जाता है, और उनके लिए छोटी-छोटी परवाह कैसे दिखाई जाती है।
रोहन अवनि की बातें ध्यान से सुन रहा था, लेकिन उसका ध्यान बातों से ज़्यादा अवनि के हंसते हुए चेहरे, उनके बोलने के अंदाज़ और उनकी आँखों की चमक पर था।
रोहन के दिल में पहली बार यह खयाल आया—काश! दुनिया की हर लड़की अवनि भाभी जैसी समझदार और प्यारी होती…

Devar Bhabhi Love story मॉक डेट और दिल की अजीब सी हलचल
दो हफ्ते बीत चुके थे। अवनि की क्लास का असर दिखने लगा था। रोहन अब पहले से काफी बदल चुका था। उसका उठना-बैठना, कपड़ों का चयन और बात करने का तरीका काफी स्मार्ट हो गया था। अब वह अपनी टेक-शॉप पर आने वाली महिला कस्टमर्स से भी आसानी से बात कर लेता था।
एक शनिवार की शाम, अवनि ने रोहन के लिए एक ‘मॉक डेट’ (नकली डेट) का इंतज़ाम किया।
अवनि ने अंबाला के सबसे मशहूर कैफे ‘द कनोपी’ में एक कोना बुक किया। अवनि ने बहुत ही खूबसूरत वाइन-रेड रंग की कुर्ती और जीन्स पहन रखी थी। बाल खुले थे और कानों में बड़े-बड़े झुमके झूल रहे थे। जब वे कैफे में दाखिल हुईं, तो कैफे में मौजूद कई लोगों की नज़रें अवनि पर टिक गईं।
रोहन ने ब्लैक शर्ट और डार्क जीन्स पहनी थी, जिसमें वह बेहद आकर्षक लग रहा था।
“सो, मिस्टर रोहन,” अवनि ने टेबल पर दोनों हाथ रखकर कहा, “आज तुम्हारी फाइनल परीक्षा है। समझो मैं तुम्हारी वो ड्रीम गर्ल हूँ जिसे तुम इम्प्रेस करना चाहते हो। अब मुझे कोई अच्छी सी कॉम्प्लीमेंट (तारीफ) दो।”
रोहन ने अवनि की तरफ देखा। मोमबत्ती की हल्की पीली रोशनी में अवनि का चेहरा किसी अप्सरा जैसा दमक रहा था। रोहन ने गहरी सांस ली, इस बार उसकी आँखें नीची नहीं थीं। उसने सीधे अवनि की आँखों में देखा।
“अवनि…” रोहन ने बिना ‘भाभी’ कहे पहली बार उसका नाम लिया।
अवनि चौंक गईं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।
“अगर मैं सच कहूँ,” रोहन की आवाज़ एकदम धीमी, मखमली और गंभीर हो गई थी, “तो इस पूरी दुनिया में… आपकी आँखों से ज़्यादा खूबसूरत कोई सितारा नहीं है। जब आप मुस्कुराती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे अंबाला की इस कड़ाके की ठंड में धूप खिल आई हो। आपके साथ बिताया हर एक पल किसी ख़्वाब जैसा लगता है।”
कैफे की धीमी म्यूज़िक के बीच, रोहन के मुँह से निकले ये शब्द अवनि के सीधे दिल में उतर गए। अवनि के कानों की लौ लाल हो गई। उनका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उन्होंने सोचा था कि रोहन कोई रटा-रटाया फिल्मी डायलॉग बोलेगा, लेकिन रोहन की आँखों में जो गहराई थी, वह बिल्कुल सच्ची थी।
अवनि ने अपनी नजरें झुका लीं और टेबल पर रखी पानी की गिलास उठाई। “व-वाह रोहन! बहुत बढ़िया… तुमने तो कमाल ही कर दिया। मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम इतने रोमांटिक डायलॉग बोल लेते हो।”
“यह कोई डायलॉग नहीं था अवनि,” रोहन ने बहुत ही आत्मीयता से कहा। “यह सब वो है जो मैं पिछले एक महीने से महसूस कर रहा हूँ।”
अवनि ने नज़रें उठाकर रोहन को देखा। दोनों के बीच एक अनकहा सन्नाटा छा गया। अवनि को अहसास हुआ कि रोहन अब वह शर्मीला लड़का नहीं रहा था। वह एक परिपक्व और आकर्षक पुरुष बन चुका था। लेकिन सबसे बड़ी बात यह थी कि अवनि को खुद अपने अंदर एक अजीब सा खिंचाव महसूस हो रहा था- एक ऐसा खिंचाव जो उन्हें रोहन की तरफ खींच रहा था।
अवनि ने घबराकर बात बदली, “चलो… पास्ता ऑर्डर करते हैं। मुझे बहुत भूख लगी है।”

Devar Bhabhi Love story बारिश की रात और एक नादान भूल
उस रात लौटते वक्त अंबाला में अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। जनवरी की बारिश का मतलब था कँपकँपा देने वाली ठंड।
उनकी कार घर के पास आकर खराब हो गई। गाड़ी चालू नहीं हो रही थी। घर अभी भी आधा किलोमीटर दूर था।
“अब क्या करेंगे भाभी?” रोहन ने पूछा।
“भागकर चलते हैं, और क्या!” अवनि ने हँसते हुए कहा और कार का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गईं।
रोहन ने अपनी जैकेट उतारी और अवनि के सिर पर तान दी ताकि वे भीगने से बच सकें। दोनों भागते हुए घर के गैराज में पहुँचे। दोनों पूरी तरह भीग चुके थे। अवनि के बाल पानी से सराबोर थे और वे ठंड से थर-थर कांप रही थीं।
“अवनि! तुम तो पूरी भीग गई हो,” रोहन ने घबराकर कहा। उसने तुरंत एक सूखा तौलिया उठाया जो गैराज की शेल्फ पर रखा था।
रोहन ने तौलिया अवनि के बालों पर रखा और धीरे-धीरे उनके बाल सुखाने लगा।
अवनि ठंड से कांपते हुए रोहन के सीने से सट गईं। दोनों के बीच की दूरी पूरी तरह मिट चुकी थी। बारिश की टपटप आवाज़ और दोनों की तेज़ होती सांसें गैराज के सन्नाटे को तोड़ रही थीं।
रोहन के हाथ अवनि के गालों पर आ टिके। उसने अवनि के चेहरे से भीगे बालों को पीछे हटाया। अवनि ने आँखें उठाईं। दोनों की आँखें मिलीं। उस पल में न कोई देवर था, न कोई भाभी; न कोई ट्रेनिंग थी, न कोई गुरु। वहाँ बस दो इंसान थे जो एक-दूसरे के बेहद करीब थे और एक-दूसरे के अहसास में खो चुके थे।
रोहन का चेहरा धीरे-धीरे अवनि के चेहरे की तरफ झुकने लगा। अवनि ने भी अपनी आँखें मूँद लीं। उनकी गर्म सांसें एक-दूसरे से टकराने लगीं। रोहन के होंठ अवनि के होठों को छूने ही वाले थे कि…
अचानक घर के अंदर से मम्मी जी की आवाज़ आई, “रोहन! अवनि! तुम लोग आ गए क्या? इतनी बारिश में कहाँ रह गए थे?”
उस आवाज़ से जैसे कोई शीशा टूट गया हो!
अवनि ने तुरंत रोहन को पीछे धकेला। वे झटके से पीछे हटीं, उनका चेहरा ज़र्द पड़ गया था। रोहन भी होश में आया। उसने देखा कि वह क्या करने जा रहा था। उसका अपना ही दिल दहल गया।
“मैं… मैं कमरे में जा रही हूँ,” अवनि ने बिना रोहन की तरफ देखे कहा और भागती हुई घर के अंदर चली गई।
रोहन वहीं गैराज में खड़ा रहा। बारिश का ठंडा पानी उस पर गिर रहा था, लेकिन उसके अंदर एक ज्वाला जल रही थी। उसने अपने ही हाथों को देखा। यह मैंने क्या करने की कोशिश की? वह मेरे भाई की पत्नी हैं… मेरी भाभी हैं!
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Devar Bhabhi Love story अपराध-बोध और दूरी का अहसास
उस रात के बाद से घर का माहौल पूरी तरह बदल गया।
अवनि ने रोहन से दूरी बना ली। वे अब रोहन के सामने आने से कतराने लगी थीं। अगर रोहन डाइनिंग टेबल पर होता, तो अवनि अपने कमरे में चली जाती। नाश्ता, खाना—सब कुछ चुपचाप होने लगा।
रोहन का दिल इस दूरी से छिन्न-भिन्न हो रहा था। उसे अपनी उस नादानी पर बेहद पछतावा था। उसे लग रहा था कि उसने अवनि का भरोसा तोड़ दिया था।
तीन दिन बीत गए। घर की वो रौनक, वो हंसी-मजाक सब गायब हो चुका था।
चौथे दिन शाम को, जब मम्मी-पापा किसी रिश्तेदार के घर गए हुए थे, रोहन हिम्मत जुटाकर अवनि के कमरे के बाहर पहुँचा। उसने धीरे से दरवाजा खटखटाया।
“अवनि… क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?”
अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। रोहन ने धीरे से दरवाजा खोला। अवनि खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर बारिश के पानी से भीगी सड़क को देख रही थीं। उनका चेहरा उतरा हुआ था।
रोहन कमरे के अंदर आया और अवनि से कुछ दूरी पर खड़ा हो गया।
“अवनि… मुझे पता है कि आप मुझसे बहुत नाराज़ हैं,” रोहन की आवाज़ भारी थी, उसमें दर्द साफ छलक रहा था। “उस रात गैराज में जो हुआ… उसके लिए मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊँगा। मैंने आपकी इज़्ज़त, अपने भाई के रिश्ते और हमारी मर्यादा का ध्यान नहीं रखा। मैं एक बहुत बुरा इंसान हूँ।”
अवनि चुपचाप सुनती रहीं, उन्होंने मुड़कर नहीं देखा।
“आप मुझे जो चाहे सज़ा दे दीजिए, अवनि,” रोहन की आँखों में आंसू आ गए। “आप मुझे डाँटिए, थप्पड़ मारिए… लेकिन मुझसे इस तरह खामोश मत रहिए। आपकी यह खामोशी मुझे अंदर से मार रही है। आपने मुझे शर्मीलेपन के अंधेरे से निकाला था, लेकिन अब इस दूरी के अंधेरे में मैं घुट रहा हूँ।”
अवनि धीरे से मुड़ीं। उनकी आँखों में भी आंसू तैर रहे थे।
“रोहन…” अवनि की आवाज़ कांपी। “मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ।”
“तो फिर आप मुझसे दूर क्यों भाग रही हैं?” रोहन ने पूछा।
अवनि ने एक लंबी सांस ली और रोहन के करीब आईं। “रोहन, मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ, मैं खुद से डर गई थी।”
“खुद से?”
“हाँ,” अवनि ने रोहन की आँखों में देखते हुए कहा। “उस रात जो हुआ, उसमें सिर्फ तुम्हारी गलती नहीं थी। उस पल में… मैं भी बहक गई थी। मुझे अहसास हुआ कि तुम्हारा यह नया रूप, तुम्हारी यह मासूमियत और तुम्हारी परवाह मुझे किस हद तक प्रभावित कर रही थी। मुझे लगा कि अगर मैं तुम्हारे करीब रही, तो शायद मैं अपने रिश्ते की मर्यादा भूल जाऊँगी।”
रोहन ने अवनि की बातें सुनीं और उसका दिल बैठ गया। उसे समझ आया कि अवनि किस अंतर्द्वंद्व (conflict) से गुज़र रही थी।

Devar Bhabhi Love story मर्यादा, सम्मान और असली ‘ड्रीम गर्ल’ का बेंचमार्क
रोहन ने अपने आँसू पोंछे। उसने अवनि के आगे हाथ जोड़े।
“अवनि… मेरी तरफ देखिए,” रोहन ने बहुत ही दृढ़ और मैच्योर आवाज़ में कहा। “आपने मुझे लड़कियों से बात करना सिखाया, मुझे कॉन्फिडेंस दिया। लेकिन इस पूरे प्रोसेस में मुझे एक बहुत बड़ी बात समझ आई।”
अवनि ने रोहन को देखा।
“मुझे समझ आया कि मुझे अपनी जिंदगी में कैसी लड़की चाहिए,” रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, हालांकि उसकी आँखों में नमी थी। “मुझे ऐसी लड़की चाहिए जो आपकी तरह समझदार हो, आपकी तरह जिंदादिल हो, और आपकी तरह दूसरों की खुशियों का ख्याल रखती हो। आप मेरे लिए सिर्फ एक भाभी नहीं हैं, आप मेरी ‘ड्रीम गर्ल’ का बेंचमार्क हैं। लेकिन…”
रोहन रुका और उसने अवनि के हाथ को बहुत ही सम्मान के साथ अपने हाथों में लिया।
“लेकिन मैं आपसे वादा करता हूँ अवनि… कि मैं कभी भी अपने भाई के भरोसे और आपकी मर्यादा पर कोई आंच नहीं आने दूँगा। जो उस रात हुआ, वह एक बहकावा था, एक मानवीय भूल थी। लेकिन मेरा आपके प्रति जो सम्मान है, वह उससे कहीं बड़ा है। आप मेरे भाई की पत्नी हैं, इस घर की इज़्ज़त हैं और मेरी सबसे अच्छी दोस्त हैं। और मैं अपने इस दोस्त को खोना नहीं चाहता हूँ।”
अवनि रोहन की बातें सुनती रही। रोहन की इस परिपक्वता ने अवनि के दिल से सारा डर और सारा बोझ हटा दिया। उन्हें अहसास हुआ कि रोहन अब वाकई में एक ऐसा इंसान बन चुका था जिस पर आँख बंद करके भरोसा किया जा सकता था।
अवनि के होठों पर महीनों पुरानी वही खिलखिलाती मुस्कान वापस आ गई।
“तुम सच में बहुत बड़े हो गए हो, रोहन,” अवनि ने हँसते हुए अपने आंसू पोछे। “इतने बड़े-बड़े डायलॉग मारना कहाँ से सीखा?”
“आप ही की क्लास में, मैडम!” रोहन ने भी मुस्कुराते हुए कहा।
“अच्छा! तो अब अपनी ‘लव कोच’ को एक कप गरम-गरम अदरक वाली चाय बनाकर पिलाओगे या मैं खुद बनाऊँ?” अवनि ने अपने पुराने नटखट अंदाज में पूछा।
“जी हुज़ूर! अभी हाज़िर करता हूँ!” रोहन ने फौजी स्टाइल में सैल्यूट किया और दोनों ज़ोर-ज़ोर से हँस पड़े।
Devar Bhabhi Love story नया सवेरा और अंबाला की धूप
अगले ही दिन, अंबाला का मौसम खिल गया। कड़ाके की ठंड के बाद धूप निकली थी।
वरुण का अमेरिका से वीडियो कॉल आया। डाइनिंग टेबल पर पूरा परिवार बैठा हुआ था।
“और वरुण भाई, कैसे हो?” रोहन ने लैपटॉप की स्क्रीन में देखते हुए पूछा।
“मैं बिल्कुल ठीक हूँ रोहन! लेकिन यह क्या देख रहा हूँ मैं? अवनि बता रही थी कि तुम अब इतने स्मार्ट हो गए हो कि कॉलेज की लड़कियाँ तुम्हारे टेक-शॉप के चक्कर काट रही हैं?” वरुण ने हँसते हुए कहा।
रोहन ने अवनि की तरफ देखा, जो उसे चिढ़ाते हुए आँख मार रही थीं।
“हाँ भाई,” रोहन ने आत्मविश्वास से कहा। “आपकी वाइफ ने मुझे पूरी तरह बदल दिया है। अब मुझे किसी से बात करने में डर नहीं लगता।”
“चलो, यह तो बहुत अच्छी बात है!” वरुण ने मुस्कुराकर कहा। “अवनि, थैंक्स यार! इस शर्मीले बिल्ले को शेर बनाने के लिए।”
“थैंक्स की कोई बात नहीं है वरुण, यह तो मेरा फर्ज था,” अवनि ने रोहन के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। “वैसे, अब मैं इसके लिए अंबाला की सबसे अच्छी लड़की ढूँढने वाली हूँ!”
“अरे-अरे भाभी! अभी इतनी भी जल्दी नहीं है!” रोहन ने घबराकर कहा, और पूरे कमरे में ठहाके गूँज उठे।
Devar Bhabhi Love story in hindi
दिन बीतते गए। रोहन की ज़िंदगी में अब कोई झिझक या हीनभावना नहीं थी। वह अपनी दुकान भी बहुत अच्छे से चला रहा था और लोगों से खुलकर बात करता था। अवनि ने उसके लिए कई लड़कियों से मुलाकातें तय करवाईं, और रोहन हर बार बहुत आत्मविश्वास से मिला।
एक दिन, जब रोहन अंबाला के कैफ़े में बैठा एक नई लड़की से बात कर रहा था, उसने खिड़की के बाहर देखा। अवनि दूर खड़ी होकर उसे ‘थंब्स अप’ (Thumbs up) दिखा रही थीं।
रोहन ने मुस्कुराकर अवनि की तरफ देखा। उसने दिल ही दिल में अवनि को धन्यवाद दिया।
अवनि ने रोहन को सिर्फ लड़कियों से बात करना नहीं सिखाया था, बल्कि उसे अपने खुद के वजूद पर भरोसा करना सिखाया था। उन दोनों के बीच एक ऐसा रिश्ता बन चुका था जो प्यार, दोस्ती, सम्मान और मर्यादा की अनूठी मिसाल था।
अंबाला की उस सुनहरी धूप में, रोहन को अपनी असली पहचान मिल चुकी थी, और अवनि को मिला था एक ऐसा देवर जो उसका सबसे सच्चा दोस्त और रक्षक था। Devar Bhabhi Love story
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