Bihar Love Affair : बिहार के पूर्णिया जिले के कमालपुर गाँव की सुबह जब भी होती, खेतों में लहलहाती धान की फसल और आसपास से बहती नहर के पानी की कल-कल आवाज़ पूरे माहौल में एक अजीब सी ताज़गी भर देती। Bihar Love Affair
इसी गाँव के एक छोर पर बना था पूजा का घर। पूजा का जीवन संघर्षों और जिम्मेदारियों के बीच बीत रहा था। उसका पति पवन सालों से पंजाब की एक कपड़ा मिल में मजदूरी करता था। साल में एकाध बार उसका घर आना होता, और बाकी समय केवल चिट्ठी-पत्री या महीने के आखिर में भेजे जाने वाले कुछ पैसों के जरिए ही उनका संपर्क बना रहता था। Bihar Love Affair
पूजा अपनी दो नन्ही बेटियों—चार साल की बड़ी बेटी और दो साल की छोटी बेटी अनुष्का—के साथ गाँव में रहती थी। घर की ज़िम्मेदारी, बच्चों का पालन-पोषण और अकेलापन… इन सबने पूजा को उम्र से पहले ही गंभीर बना दिया था। उसकी आँखों में हमेशा एक ऐसी चाहत रहती थी कि कोई ऐसा हो जो उसकी तकलीफों को समझे, उसकी बातें सुने और उसके बच्चों के भविष्य के लिए उसके साथ खड़ा हो। Bihar Love Affair
दूसरी ओर था मोफिल। मोफिल उसी इलाके का रहने वाला था। वह पहले से शादीशुदा था और उसका अपना एक परिवार था। लेकिन उसकी पहचान गाँव में एक ऐसे इंसान के रूप में थी जो हर किसी की मदद के लिए आगे रहता था। वह अक्सर पूजा के घर के आसपास से गुजरता या बाजार से सामान लाते समय उससे हाल-चाल पूछ लेता। Bihar Love Affair
शुरुआत में यह महज़ एक पड़ोसी और पहचान वाले की सामान्य बातचीत थी।
“पूजा भाभी, पवन भाई का कोई फोन आया क्या इस हफ्ते?” मोफिल कभी-कभार रुककर पूछ लेता।
पूजा एक फीकी मुस्कान के साथ जवाब देती, “हाँ मोफिल, आए थे। काम बहुत ज्यादा है वहाँ, कहते हैं दीवाली पर ही आ पाएंगे।”
मोफिल उसकी बेबसी को समझता था। उसने धीरे-धीरे पूजा के छोटे-मोटे कामों में मदद करना शुरू किया—कभार राशन ला देना, तो कभी बच्चों के लिए शहर से खाने की चीजें ले आना। अकेलेपन के बियाबान में भटक रही पूजा के लिए मोफिल का यह सहारा एक छांव की तरह साबित होने लगा।

Bihar Love Affair: धीरे-धीरे पनपता विश्वास
जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, पूजा और मोफिल के बीच का फासला कम होता गया। पूजा, जो सालों से एक भावनात्मक सहारे की तलाश में थी, मोफिल पर हद से ज्यादा भरोसा करने लगी। उसे लगने लगा कि पवन भले ही दूर है, लेकिन मोफिल उसके और उसकी बेटियों के साथ हमेशा खड़ा रहेगा।
दोनों के बीच की मुलाकाते बढ़ने लगीं। जब भी मोफिल को समय मिलता, वह पूजा से मिलने आता। गाँव की संकरी गलियों में छिपकर मिलना मुश्किल था, इसलिए दोनों ने पूर्णिया शहर में एक छोटा सा कमरा किराए पर ले लिया। वहाँ वे अक्सर एक साथ समय बिताते थे। एक तरीके से, वे दोनों अपनी-अपनी असल जिंदगियों से भागकर उस छोटे से कमरे में एक काल्पनिक और सुकून भरी दुनिया बनाने की कोशिश कर रहे थे।
एक दिन, पूर्णिया के उस किराए के कमरे में बैठकर पूजा ने खिड़की से बाहर देखते हुए मोफिल से कहा, “मोफिल, मुझे अपनी परवाह नहीं है। लेकिन मेरी ये दो मासूम बच्चियाँ… पवन तो दूर रहकर भी हमसे दूर है। क्या तुम हमेशा मेरा और मेरी बेटियों का ध्यान रखोगे?”
मोफिल ने उसके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए मुस्कुराकर कहा, “पूजा, तुम इतनी चिंता क्यों करती हो? जब मैं तुम्हारे साथ हूँ, तो तुम्हें किसी बात से डरने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हारी बेटियों को अपनी बेटी जैसा ही समझता हूँ।”
ये शब्द पूजा के लिए किसी दवा की तरह थे। उसने मोफिल पर आँख बंद करके विश्वास कर लिया। उसे लगा कि उसे जिंदगी का असली सहारा मिल गया है।

Bihar Love Affair: सामाजिक मर्यादा और लिव-इन की कसौटी
कुछ महीने बीत गए। लेकिन जैसा कि अक्सर ऐसे मामलों में होता है, काल्पनिक दुनिया की हकीकत जब असल जिंदगी से टकराती है, तो दरारें आनी शुरू हो जाती हैं।
पूजा अब इस रिश्ते को एक नाम देना चाहती थी। वह जानती थी कि गाँव में छिप-छिपकर या शहर में लिव-इन में रहना लंबे समय तक मुमकिन नहीं है। गाँव के लोग दबी जुबान में बातें करने लगे थे।
एक शाम, जब दोनों कमरे में बैठे थे, पूजा ने सीधे मोफिल की आँखों में देखते हुए कहा, “मोफिल, अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है। गाँव में लोग तरह-तरह की बातें करने लगे हैं। हमें अब आधिकारिक तौर पर शादी कर लेनी चाहिए। मैं अब इस तरह छिप-छिपकर नहीं जीना चाहती।”
मोफिल के चेहरे के भाव अचानक बदल गए। उसने कड़े लहजे में कहा, “पूजा, तुम जानती हो कि मैं पहले से शादीशुदा हूँ। मेरा अपना परिवार है, बच्चे हैं। मैं तुमसे शादी कैसे कर सकता हूँ?”
“तो फिर तुमने मुझसे यह सब वादे क्यों किए थे?” पूजा की आवाज़ में दर्द और गुस्सा दोनों था।
“अगर तुम शादी नहीं कर सकते, तो कम से कम मेरी दोनों बेटियों की पूरी जिम्मेदारी लो। उनकी पढ़ाई-लिखाई, उनका खर्च और उनकी शादी की पूरी ज़िम्मेदारी तुम्हें उठानी होगी। पवन के भरोसे मैं अपनी बेटियों का भविष्य दांव पर नहीं लगा सकती।”
मोफिल खामोश रहा, लेकिन उसके अंदर एक अजीब सी घबराहट और खीझ पैदा होने लगी थी।
उसे लगने लगा कि पूजा उस पर जरूरत से ज्यादा दबाव बना रही है। जो रिश्ता उसके लिए शुरुआत में केवल एक आकर्षण और समय बिताने का साधन था, अब वह उसके लिए एक भारी बोझ और गले की फांस बनता जा रहा था। मोफिल सोचने लगा कि अगर पूजा ने गाँव में यह बात फैला दी या उसके परिवार तक पहुँच गई, तो उसकी सामाजिक साख पूरी तरह से तबाह हो जाएगी।

Bihar Love Affair: मन में उमड़ता हुआ ज़हर
जुलाई और अगस्त के महीने दोनों के बीच लगातार झगड़ों में बीते। पूजा जब भी मिलती, वह शादी और बेटियों के भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए दबाव बनाती। मोफिल बाहर से शांत रहने का नाटक करता, लेकिन अंदर ही अंदर वह इस स्थिति से बाहर निकलने का खतरनाक रास्ता ढूंढने लगा था।
वह सोचने लगा, “अगर मैं शादी करता हूँ, तो मेरी पहली गृहस्थी बर्बाद हो जाएगी। अगर मैं इसकी बेटियों का खर्च उठाता हूँ, तो मैं कंगाल हो जाऊँगा। और अगर मैं मना करता हूँ, तो यह पूरे समाज के सामने मुझे बेनकाब कर देगी।”
नफरत और स्वार्थ ने मोफिल के दिमाग पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया। जिस पूजा को वह कभी सहारा देने का दावा करता था, वही पूजा अब उसे अपनी सबसे बड़ी दुश्मन नज़र आने लगी थी। उसने मन ही मन फैसला कर लिया कि वह इस रास्ते के हर कांटे को हमेशा-हमेशा के लिए हटा देगा।
उसने एक बेहद खौफनाक और चालाकी भरी योजना बनाई, जिसमें उसने प्यार और विश्वास का मुखौटा पहनना जारी रखा ताकि पूजा को ज़रा सा भी शक न हो।

Bihar Love Affair: जन्माष्टमी की रोशनी और झूठी उम्मीदें
सितंबर का महीना आ चुका था। जन्माष्टमी का त्योहार था और पूरे पूर्णिया शहर में मेलों की रौनक थी। चारों तरफ रंग-बिरंगी लाइटें लगी थीं, बच्चे गुब्बारे लेकर घूम रहे थे और लाउडस्पीकरों पर भक्ति गीत बज रहे थे।
4 सितंबर की दोपहर को मोफिल पूजा के घर पहुँचा। उसके चेहरे पर वही पुरानी मीठी मुस्कान थी।
“पूजा, आज जन्माष्टमी है,” मोफिल ने बेहद प्यार से कहा। “शहर में बहुत बड़ा मेला लगा है। चलो, आज सब कुछ भूलकर मेले में घूमते हैं। बच्चियों को भी ले चलो, वे भी खुश हो जाएँगी।”
पूजा को लगा कि शायद मोफिल का दिल पिघल गया है और वह रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहा है। उसकी आँखों में एक नई उम्मीद चमक उठी।
“ठीक है मोफिल, तुम रुको, मैं तैयार होती हूँ,” पूजा ने कहा।
लेकिन ऐन वक्त पर पूजा ने अपनी चार साल की बड़ी बेटी को गाँव के ही अपने एक परिचित के घर यह कहकर छोड़ दिया कि मेला बहुत भीड़भाड़ वाला होगा, छोटी बेटी अनुष्का को संभालना ही काफी होगा। मोफिल ने मन ही मन इस पर थोड़ा संकोच किया, लेकिन उसने बाहर से कोई विरोध नहीं जताया।
पूजा, अपनी दो साल की मासूम बेटी अनुष्का को गोद में लिए मोफिल के साथ मेले के लिए निकल पड़ी।
मेले में मोफिल ने अनुष्का को खिलौने दिलाए, पूजा को मिठाइयां खिलाईं। पूजा को लग रहा था कि उसका भटका हुआ प्रेमी वापस लौट आया है। वह पूरी तरह से निश्चिंत थी और उसे ज़रा सा भी अंदेशा नहीं था कि जिस इंसान के कंधे पर वह सिर रखकर चल रही है, वही इंसान उसकी जिंदगी का आखिरी सफर तय करवा रहा है।

Bihar Love Affair: अँधेरी राह और साज़िश का खौफनाक अंत
रात के करीब आठ बज चुके थे। मेले की भीड़ और चकाचौंध से दूर, वापस लौटते समय वातावरण में सन्नाटा छाने लगा था।
मोफिल उन्हें शहर के मुख्य रास्ते से न ले जाकर बैजनाथपुर नहर के पास वाले सुनसान रास्ते की ओर ले गया। उस समय नहर का जलस्तर बढ़ा हुआ था और आसपास घनी झाड़ियां फैली हुई थीं। दूर-दूर तक किसी इंसान या गाड़ी की आवाजाही नहीं थी।
“मोफिल, हम इस तरफ कहाँ जा रहे हैं? यह रास्ता तो बहुत अँधेरा और सुनसान है,” पूजा ने थोड़ा सहमते हुए पूछा।
“कुछ नहीं पूजा, इस रास्ते से गाँव जल्दी पहुँच जाएँगे,” मोफिल ने ठंडे स्वर में जवाब दिया।
झाड़ियों के पास पहुँचकर मोफिल ने गाड़ी रोक दी।
“यहाँ थोड़ा रुकते हैं,” उसने कहा।
जैसे ही पूजा ने पीछे मुड़कर अपनी बेटी का आंचल सही किया, मोफिल ने अपने पास छिपाकर रखा हुआ तेजधार हथियार निकाला। पूजा को संभलने का एक मौका भी नहीं मिला। उस अँधेरी रात में, जहाँ कुछ घंटे पहले प्यार और उम्मीदों की बातें हो रही थीं, वहाँ केवल एक चीख गूंजकर रह गई। मोफिल ने पहचान मिटाने की नीयत से उस पर वार किया और धड़ को झाड़ियों में फेंक दिया।
इसके बाद, उसने उस दो साल की अबोध बच्ची अनुष्का को भी, जो अपनी मां को पुकार रही थी, थोड़ी दूरी पर ले जाकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया। उसने सबूत मिटाने के लिए हथियार को उफनती नहर में फेंक दिया और खुद अंधेरे में गायब हो गया।

Bihar Love Affair: कानून का शिकंजा और न्याय की पहल
घटना के कई दिनों बाद, 9 सितंबर को जब कुछ ग्रामीण झाड़ियों की तरफ गए, तो उन्हें वहाँ से उठती दुर्गंध का अहसास हुआ। पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मामले की जाँच शुरू की।
अगले दिन, घटना स्थल से कुछ दूरी पर सिर भी बरामद हो गया, जिससे मृतका की पहचान पूजा देवी के रूप में हुई।
मरंगा थाना पुलिस और सदर SDPO के नेतृत्व में जांच टीम ने तुरंत अपनी कार्रवाई शुरू की। जब पुलिस पूजा के घर पहुँची, तो उन्हें पता चला कि उसकी बड़ी बेटी गाँव में ही एक पड़ोसी के पास सुरक्षित है।
पुलिस ने जब उस नन्हीं बच्ची से बड़े प्यार से पूछा, “बेटा, मम्मी कहाँ गई थीं?”
तो मासूम बच्ची ने अपनी तोतली भाषा में बताया, “मम्मी और छोटी बहन 4 तारीख को मोफिल अंकल के साथ मेला देखने गए थे।”
बस यही एक सुराग पुलिस के लिए काफी था। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया और 10 सितंबर को आरोपी मोफिल को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस कस्टडी में जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो मोफिल का सारा घमंड और चालाकी हवा हो गई। उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी कहानी बयान कर दी। उसने बताया कि कैसे विवाह का दबाव और बच्चों की जिम्मेदारी से बचने के लिए उसने इस पूरी घटना को अंजाम दिया।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार: आरोपी ने कबूल किया कि उसकी योजना तीनों को खत्म करने की थी, लेकिन बड़ी बेटी के गाँव में छूट जाने के कारण उसका राज खुल गया।
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर बच्ची का शव बरामद किया और उसे जेल भेज दिया।
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Bihar Love Affair प्यार का पंचनामा
पूर्णिया के उस शांत गाँव में आज भी सन्नाटा पसरा हुआ है। एक तरफ पवन शर्मा का बिखरा हुआ परिवार है, जिसकी पत्नी और छोटी बेटी अब इस दुनिया में नहीं हैं। दूसरी तरफ वह चार साल की मासूम बच्ची है, जो आज भी अपनी मां और बहन के लौटने का इंतजार करती है।
यह घटना इस बात का कड़वा सच बयां करती है कि जब रिश्तों की बुनियाद स्वार्थ, झूठ और धोखे पर टिकी होती है, तो उसका अंत केवल तबाही और अंधेरे में ही होता है। विश्वास का जो ढोंग मोफिल ने रचाया था, उसने न केवल दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया, बल्कि इंसानियत के नाम पर भी एक कभी न मिटने वाला दाग लगा दिया। Bihar Love Affair
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