Karwa Chauth Romance Story
रोमांटिक कहानियां

Karwa Chauth Romance पहला करवाचौथ, अचानक गायब पति और वादे की उड़ान: सरप्राइज की एक रोमांटिक लव स्टोरी

Karwa Chauth Romance Story: शादी के बाद नेहा का यह पहला करवा चौथ था। जिस त्यौहार का सपना उसने बचपन से बुना था—हाथों में पिया के नाम की गहरी रचने वाली मेंहदी, लाल बनारसी साड़ी, काँच की खनकती लाल चूड़ियाँ और माथे पर सजा सिंदूर—आज उसी त्यौहार के दिन उसका पूरा घर एक अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ था।

उसके पति आदित्य को दो दिन पहले ही अचानक सिंगापुर के एक अति-आवश्यक प्रोजेक्ट डील के लिए रवाना होना पड़ा था। नेहा ने हर संभव कोशिश की थी कि आदित्य अपनी यात्रा को दो दिन के लिए टाल दे, लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया की मजबूरियाँ अक्सर दिल के अरमानों पर भारी पड़ जाती हैं। Karwa Chauth Romance Story

सुबह के करीब चार बजे थे। पूरे मोहल्ले में करवा चौथ की सरगी की चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। नेहा ने भी भारी मन से उठकर अपनी सास द्वारा भेजी गई सरगी खाई। उसने काजू, बादाम और नारियल का हर एक निवाला ऐसे खाया जैसे कोई रस्म निभाई जा रही हो।

रसोई की हल्की रोशनी में अपनी उँगलियों पर रची मेंहदी के गहरे रंग को देखते हुए उसकी आँखें भर आईं। मेंहदी का रंग जितना गहरा रचा था, उसके दिल में आदित्य के न होने का खालीपन भी उतना ही गहरा था। Karwa Chauth Romance Story

सुबह छह बजे फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर ‘आदित्य’ नाम चमक रहा था। नेहा ने तुरंत कॉल रिसीव किया, लेकिन उसकी जुबां से शब्द नहीं निकले।

“नेहा… सो रही हो क्या?” दूसरी तरफ से आदित्य की थकान से भरी लेकिन बेहद प्यारी आवाज़ गूँजी।

नेहा ने अपनी सिसकी को दबाते हुए गला साफ किया, “नहीं आदित्य, सरगी खा ली है। तुम कैसे हो? सिंगापुर पहुँच गए?”

“हाँ जान, अभी कुछ देर पहले ही होटल पहुँचा हूँ। आई एम रियली, रियली सो सॉरी नेहा! मैं जानता हूँ कि यह तुम्हारा पहला करवा चौथ है और मुझे तुम्हारे पास होना चाहिए था। मैंने फ्लाइट री-शेड्यूल कराने के लिए हाथ-पैर जोड़े, लेकिन बोर्ड मीटिंग इतनी क्रिटिकल थी कि…” आदित्य की आवाज़ में एक अजीब सा अपराधबोध था।

“कोई बात नहीं आदित्य,” नेहा ने अपने आँसुओं को पोंछते हुए मुस्कुराने की झूठी कोशिश की। “काम भी तो ज़रूरी है ना। तुम बस अपना ख्याल रखना। मैं तो बस… तुम्हारी लंबी उम्र की दुआ माँगने के लिए यह व्रत रख रही हूँ। तुम साथ होते तो बात ही कुछ और होती, लेकिन कोई बात नहीं।”

“तुम बहुत अच्छी हो नेहा। मैं वादा करता हूँ, शाम को जैसे ही तुम छत पर चाँद देखने जाओगी, हम वीडियो कॉल पर जुड़ेंगे। तुम फोन की स्क्रीन पर ही मुझे और चाँद को एक साथ देख लेना, ओके?”

“हूँ… ठीक है। तुम भी आराम कर लो,” नेहा ने कहा और फोन कटते ही तकिये में मुँह छुपाकर रो पड़ी।

Karwa Chauth Romance Story : एआई जनरेटेड इमेज
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Karwa Chauth Romance Story: ढलती शाम और तन्हाइयों का सिलसिला

दिन चढ़ने के साथ-साथ धूप तेज़ होती गई और नेहा के पेट में प्यास की तड़प बढ़ने लगी। लेकिन शरीर की प्यास से कहीं ज़्यादा बड़ी तड़प उसके दिल की थी। दोपहर के समय मोहल्ले की बाकी औरतें तैयार होकर एक जगह इकट्ठा हुईं और करवा चौथ की पारंपरिक कथा सुनने लगीं।

नेहा ने भी लाल साड़ी पहनी, थोड़ा शृंगार किया और कथा में शामिल हुई। औरतों के बीच हँसी-मज़ाक चल रहा था, सब अपने-अपने पतियों के नखरों और तोहफों की बातें कर रही थीं।

“नेहा बेटी, तुम्हारे पतिदेव का क्या फोन आया? पहली बार का करवा चौथ है, कुछ खास सरप्राइज भेजा है क्या सिंगापुर से?” पड़ोस की एक आंटी ने प्यार से पूछा।

नेहा ने अपनी नज़रें नीची कर लीं और धीमी आवाज़ में कहा, “जी आंटी, वो बहुत बिज़ी हैं… लेकिन शाम को वीडियो कॉल करेंगे।”

सबने हमदर्दी से उसकी तरफ देखा, लेकिन वह हमदर्दी नेहा को और ज़्यादा चुभने लगी। वह कथा खत्म होते ही तुरंत अपने कमरे में लौट आई।

शाम के सात बज चुके थे। सूरज ढल चुका था और आसमान पर धीरे-धीरे काले बादलों के साथ-साथ लालिमा बिखरने लगी थी। घर की छत पर मोहल्ले के बाकी जोड़ों की आहटें सुनाई देने लगी थीं। कोई अपनी पत्नी की तस्वीरें खींच रहा था, तो कोई हाथों में हाथ डाले चाँद के निकलने का इंतज़ार कर रहा था।

नेहा ने अपने कमरे के शीशे के सामने खड़े होकर आखिरी बार अपना रूप देखा। काँच की चूड़ियाँ उसकी कलाई में खनक रही थीं, गले में मंगलसूत्र चमक रहा था, लेकिन उसकी आँखों का उजाला गायब था। उसने हाथ में पूजा की थाली उठाई—जिसमें पीतल का दीया, अक्षत, मिठाई, जल का करवा और वह नन्हीं सी छलनी रखी थी, जिससे वह अपने सुहाग का चेहरा देखने का सपना संजोए थी।

Karwa Chauth Romance Story: बादलों के बीच चाँद और छलनी का इंतज़ार

रात के 8:15 बज चुके थे। नेहा भारी कदमों से अपनी छत के एक सुनसान कोने में आकर खड़ी हो गई। आसमान में दूधिया चाँद बादलों की ओट से बाहर निकल रहा था।

नेहा ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और आदित्य के नंबर पर वीडियो कॉल मिलाया।

कॉलिंग… कॉलिंग…

तीन बार घंटी जाने के बाद भी कॉल पिक नहीं हुआ। चौथी बार कोशिश करने पर स्क्रीन पर लिख कर आ गया—’नेटवर्क अनअवेलेबल’।

नेहा का धैर्य अब जवाब दे चुका था। ठंडी हवा के झोंके के साथ उसकी आँखों से आँसुओं की पहली बूंद छलक कर उसकी गोटेदार लाल चुनरी पर जा गिरी।

“तुमने तो कहा था कि तुम कॉल पर रहोगे आदित्य… कम से कम आज के दिन तो मुझे अकेला मत छोड़ते,” नेहा ने रोते हुए आसमान की तरफ देखकर कहा।

आसमान में चाँद अब पूरी तरह चमक रहा था। बाकी औरतों के पतियों ने उनके सिर पर हाथ रखकर पूजा शुरू कर दी थी। छतों से पूजा की थालियों की घंटी और ‘जय करवा माता’ के सुर गूँज रहे थे।

नेहा ने अपनी सिसकियों को पोंछा। उसने जल का करवा उठाया और बहते आँसुओं के साथ चाँद को अर्घ्य दिया। फिर उसने कांपते हाथों से दीया जलाया और छलनी को अपनी आँखों के सामने किया। छलनी के उस पार केवल आसमान का चमकता हुआ गोल चाँद था—अकेला, शीतल और दूर।

“हे करवा माता, मेरे आदित्य जहाँ भी हैं, उन्हें सलामत रखना। उनकी हर बला मुझे दे देना,” नेहा ने अपनी आँखें मूँदकर दिल से प्रार्थना की।

Karwa Chauth Romance Story : एआई जनरेटेड इमेज
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Karwa Chauth Romance Story: अनहोनी आहट और छलनी के पार का चमत्कार

प्रार्थना पूरी करने के बाद, जैसे ही नेहा ने अपनी आँखें खोलीं और छलनी को थोड़ा सा नीचे झुकाया, उसकी नज़र छत के दरवाज़े पर पड़ी।

छायादार कोने में, जहाँ दीये की हल्की पीली रोशनी पहुँच रही थी, एक लंबा साया खड़ा था।

ब्लैक कोट हाथों में टाँगे, सफेद शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए, बिखरे हुए बाल और थकावट से भरी लेकिन बेहिसाब प्यार से चमकती आँखों के साथ—वहाँ आदित्य खड़ा था! उसके एक हाथ में एक छोटा सा लाल गुलाब था और दूसरे हाथ में पानी की एक छोटी सी बोतल।

नेहा की साँसें वहीं थम गईं। हाथ में पकड़ी छलनी थोड़े से कंपन के साथ नीचे होने लगी। उसे लगा कि दिन भर भूखे-प्यासे रहने की वजह से उसे कोई भ्रम (hallucination) हो रहा है।

उसने अपनी आँखें कसकर मूँदीं, फिर दोबारा खोलीं।

वह साया वहीं था। उसने एक कदम आगे बढ़ाया। जूते की आहट छत की फ़र्श पर गूँजी।

“क्या ऐसे ही देखती रहोगी या प्यास से बेहोश होने का इरादा है?” आदित्य ने अपनी वही चिर-परिचित, गहरी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में मुस्कुराते हुए कहा।

नेहा के हाथ से पूजा की थाली छूटते-छूटते बची। उसने थाली को तुरंत मुंडेर पर रखा। उसका दिमाग सोच ही नहीं पा रहा था कि जो इंसान तीन घंटे पहले सिंगापुर में होने की बात कर रहा था, वह इस वक्त उसकी छत पर कैसे खड़ा हो सकता है!

“आदित्य…?” उसकी आवाज़ गले में ही अटक गई।

“हाँ मेरी जान, तुम्हारा आदित्य,” उसने अपनी बाँहें फैला दीं।

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Karwa Chauth Romance Story: बाहों का घेरा और तूफानी सफर का सच

नेहा सब कुछ भूल गई। समाज, औपचारिकताएँ, और छत पर मौजूद बाकी लोग—वह पूरी ताकत से भागकर सीधे आदित्य के सीने से जा लिपटी।

आदित्य ने उसे ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठाते हुए अपनी बाहों में भींच लिया। नेहा ने अपना मुँह उसकी गर्दन में छिपा लिया और फूट-फूट कर रोने लगी। उसके आँसू आदित्य की सफेद शर्ट को भिगो रहे थे।

“तुम… तुम तो सिंगापुर में थे न? तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला? तुम यहाँ कैसे?” नेहा रोते-रोते उसकी छाती पर हल्के-हल्के घूँसे मारते हुए पूछ रही थी।

आदित्य ने नर्मी से उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में थामा। उसने अपनी उँगलियों से नेहा के भीगे हुए गालों को पोंछा और उसके माथे पर एक बेहद लंबा, नम और आत्मीय चुंबन जड़ा।

“तुम्हें क्या लगा था? कि मैं अपनी पत्नी को उसके पहले करवा चौथ पर अकेले रोने दूँगा?” आदित्य ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा। “मैंने सिंगापुर की मीटिंग कल रात ही लगातार 14 घंटे बैठकर खत्म कर दी थी। मुझे किसी भी कीमत पर आज शाम को तुम्हारे पास पहुँचना था।”

“लेकिन तुम्हारा फोन बंद क्यों आ रहा था?”

“क्योंकि मेरी कनेक्टिंग फ्लाइट डिले हो गई थी। दिल्ली लैंड करने के बाद कैब वाले को मैंने दोगुना किराया दिया ताकि वह मुझे समय पर यहाँ पहुँचा सके। रास्ते में नेटवर्क चला गया था और मेरी धड़कनें अटकी हुई थीं कि कहीं चाँद निकल न जाए और तुम पूजा न कर लो।”

नेहा ने आदित्य के हाथों को कसकर पकड़ लिया, “तुम पागल हो आदित्य! 24 घंटे में दो देश बदलना, बिना सोए इतनी लंबी यात्रा करना… अगर तुम्हारी तबीयत खराब हो जाती तो?”

“तुम्हारी इस मेंहदी के रंग से ज़्यादा कीमती मेरे लिए कुछ नहीं है नेहा,” आदित्य ने फुसफुसाते हुए उसके कानों के पास कहा। “तुम्हारे बिना मेरा कोई त्यौहार मुकम्मल नहीं हो सकता।”

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Karwa Chauth Romance Story: पहला घूँट और अमर मोहब्बत का वादा

आदित्य ने मुंडेर पर रखी पूजा की थाली उठाई। उसने छलनी नेहा के हाथ में थमाई।

 “चलो, अब अपनी रस्म पूरी करो। मुझे भी देखना है कि इस छलनी से मैं कैसा दिखता हूँ,” उसने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा।

नेहा ने कांपते हाथों से छलनी उठाई। दीये की लौ की हल्की गर्माहट के बीच उसने पहले आसमान के चाँद को देखा और फिर अपने सामने खड़े अपने ‘चाँद’ को। इस बार छलनी के पार का दृश्य किसी परीकथा जैसा लग रहा था। आदित्य का चेहरा दीये की रोशनी में और भी ज़्यादा आकर्षक और रोबदार दिख रहा था।

नेहा ने झुककर आदित्य के पैर छुए। आदित्य ने तुरंत उसे कंधों से पकड़कर ऊपर उठाया और अपनी छाती से लगा लिया।

“पैर मत छुओ नेहा, तुम मेरी बराबरी की हकदार हो,” आदित्य ने बेहद संजीदगी से कहा।

उसने थाली से मिठाई का एक छोटा सा टुकड़ा उठाया और नेहा के गुलाबी होठों से लगा दिया। नेहा ने उसकी आँखों में देखते हुए मिठाई का स्वाद लिया। फिर आदित्य ने पानी की बोतल से जल का अर्घ्य दिया और थोड़ा सा पानी अपने हाथों में लेकर नेहा के होठों से लगा दिया।

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पानी की वह पहली बूंद नेहा के गले से उतरकर सीधे उसके दिल को तृप्त कर गई। दिन भर की पूरी थकावट, सिरदर्द और अकेलापन एक सेकंड में गायब हो गया था।

“अब मेरी बारी,” आदित्य ने मुस्कुराते हुए पानी की बोतल उठाई और खुद भी दो घूँट पानी पी लिया।

नेहा ने हैरान होकर देखा, “तुमने भी कुछ नहीं खाया था?”

“जब मेरी बीवी मेरे लिए निर्जला व्रत रख सकती है, तो क्या मैं रास्ते में बर्गर खा रहा होता?” आदित्य ने आँख मारते हुए कहा।

नेहा की आँखों में फिर से खुशी के आँसू आ गए। उसने आदित्य के गले में अपनी बाएँ डाल दीं।

चाँदनी रात का सन्नाटा गहरा हो चुका था। छत पर हवा हल्की और रूमानी हो चली थी। आदित्य ने नेहा की कमर में हाथ डालकर उसे अपने और करीब खींचा और उसके होठों पर एक नन्हा, मीठा और आत्मीय स्पर्श दिया।

“हैप्पी करवा चौथ, मेरी जान,” आदित्य ने फुसफुसाया।

“हैप्पी करवा चौथ, मेरे हमसफ़र,” नेहा ने उसकी छाती पर अपना सिर टिकाते हुए कहा।

उस रात आसमान का चाँद गवाह था कि जब प्यार में सच्चा समर्पण और जुनून हो, तो मीलों की दूरियाँ भी महज़ एक सरप्राइज बनकर रह जाती हैं। Karwa Chauth Romance Story

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Mahesh kant Shiva
महेश कांत शिवा (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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