Karwa Chauth Romance : करवा चौथ की कहानी
रोमांटिक कहानियां

Karwa Chauth Romance: शराबी पति का अत्याचार, करवा चौथ की रात और देवर भाभी का अनोखा मिलन

Karwa Chauth Romance सहारनपुर की पुरानी तंग गलियों में बसी ‘गुप्ता हवेली’ के ऊपर आश्विन मास की गुलाबी ठंड छाने लगी थी। लकड़ी की नक्काशी के लिए पूरे देश में मशहूर इस शहर की आबो-हवा में एक अजीब सी हलचल थी। करवा चौथ का पावन पर्व था, और बाज़ार में लाल साड़ियों, मेहंदी और मोगरे की महक बिखरी हुई थी।

लेकिन हवेली के पहले माले के एक ठंडे कमरे में सन्नाटा पसरा हुआ था।

डोली शीशे के सामने बैठी अपनी आँखें पोंछ रही थी। उसकी आँखें रो-रोकर लाल हो चुकी थीं और गालों पर आँसुओं के निशान साफ़ दिख रहे थे। आज सुबह जब शहर की बाकी औरतें अपने पतियों की दी हुई सरगी खाकर अपने व्रत की शुरुआत कर रही थीं, तब डोली के हिस्से में केवल गालियाँ और नफ़रत आई थी। Karwa Chauth Romance

उसका पति, शराबी सुमित, सुबह के पाँच बजे ही देशी शराब के ढर्रे पर धुत्त होकर घर पहुँचा था। जब डोली ने उससे नर्मी से कहा कि आज करवा चौथ है और उसे घर पर रहना चाहिए, तो शराब के नशे में अंधे सुमित ने बात सुनने के बजाय डोली का हाथ मरोड़ दिया था और उसके गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया था। Karwa Chauth Romance

“बड़ी आई व्रत रखने वाली! मुझे ज्ञान मत सिखा, चुपचाप कोने में पड़ी रह!” सुमित की कड़वी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज उठी थी।

Karwa Chauth Romance : करवा चौथ की कहानी : एआई जनरेटेड इमेज।
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डोली ज़मीन पर गिर पड़ी थी। उसकी आँखों से आँसू छलक आए थे। दो साल पहले जब वह शादी करके इस हवेली में आई थी, तो उसने सुमित के साथ एक हँसते-खेलते संसार के सपने देखे थे। लेकिन सुमित की शराब की लत ने उन सारे सपनों को राख कर दिया था। वह न तो कोई काम करता था और न ही डोली की ज़रा सी इज़्ज़त करता था। Karwa Chauth Romance

तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और शेखर अंदर आया।

शेखर, सुमित का छोटा भाई था। एक शांत, सुसंस्कृत और समझदार युवक, जो सहारनपुर के एक बड़े कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी कर चुका था। जब सुमित सुबह डोली पर हाथ उठा रहा था, तब शेखर ने ही बीच-बचाव करके सुमित को खींचा था और डोली को बचाया था।

“भाभी…” शेखर की आवाज़ में बेहिसाब हमदर्दी और एक भारीपन था। उसके हाथ में जल का एक ताज़ा गिलास और कुछ फल थे।

डोली ने तुरंत अपने आँसू पोंछे और अपनी लाल बनारसी साड़ी का पल्लू सही किया, जो उसने शाम की पूजा के लिए पहनी थी।

“शेखर… तुम? यहाँ क्यों आए?” डोली ने अपनी आवाज़ को सामान्य करने की कोशिश की।

“भाभी, सुबह से आपने एक बूंद पानी नहीं पिया है। आपकी तबीयत बिगड़ रही है,” शेखर ने प्लेट टेबल पर रखते हुए कहा। “सुमित भैया की वजह से आप खुद को क्यों सज़ा दे रही हैं? इस हाल में भी व्रत रखने की क्या ज़रूरत है जब वे आपकी कद्र ही नहीं करते?”

डोली ने एक फीकी मुस्कान के साथ शेखर को देखा, “शेखर, यह सिर्फ एक इंसान के लिए रखा जाने वाला व्रत नहीं है। यह तो मेरी निष्ठा और मेरी आस्था का इम्तिहान है। और फिर… जब इस घर में तुम्हारे जैसा देवर हो, जो हर मुश्किल में ढाल बनकर खड़ा रहता है, तो मुझे हिम्मत मिल ही जाती है।”

शेखर चुपचाप डोली को देखता रह गया। उसकी आँखों में अपनी भाभी की सहनशक्ति के लिए असीम सम्मान था और अपने भाई के नीच व्यवहार के लिए गहरा अफ़सोस।

Karwa Chauth Romance : करवा चौथ की कहानी : एआई जनरेटेड इमेज।
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Karwa Chauth Romance : बादलों में छिपा चाँद और टूटता संयम

रात के साढ़े नौ बज चुके थे। सहारनपुर का आसमान दूधिया चाँदनी से नहाया हुआ था। आसपास के छतों से औरतों के गीतों की आवाज़ें आ रही थीं और छलनी की खनक गूँज रही थी।

गुप्ता हवेली की विशाल छत पर दीये जगमगा रहे थे। डोली पीतल की पूजा की थाली सजाए खड़ी थी। उसकी थाली में जलता हुआ दीया, रोली, चावल और जल का तांबे का करवा रखा था।

नीचे कमरे से सुमित की भारी और लडखड़ाती हुई आवाज़ आ रही थी। वह शाम को फिर शराब पीकर धुत हो चुका था। शेखर किसी तरह सुमित को घसीटते हुए और सहारा देते हुए छत पर लेकर आया।

“भैया, चलिए ऊपर… भाभी आपका इंतज़ार कर रही हैं। पूजा पूरी कर लीजिए,” शेखर सुमित को संभालते हुए कह रहा था।

लेकिन सुमित अपने पैरों पर खड़ा होने की स्थिति में भी नहीं था। उसकी आँखें लाल थीं और मुँह से शराब की बदबू आ रही थी। Karwa Chauth Romance

“हटो… छोड़ो मुझे! काहे की पूजा और काहे का करवा चौथ! मुझे सोने दो!” सुमित बड़बड़ाया और उसने पूरे ज़ोर से शेखर को धक्का दे दिया।

शेखर इस अचानक हुए धक्के के लिए तैयार नहीं था। वह अनियंत्रित होकर पीछे की तरफ गिरा और सीधे वहाँ आकर खड़ा हो गया जहाँ डोली हाथ में छलनी और दीया लिए खड़ी थी।

ठीक उसी पल, बादलों का घूंघट हटाकर आसमान में पूरा चाँद चमकने लगा।

डोली ने जैसे ही छलनी अपनी आँखों के सामने की, तो छलनी के पार सुमित नहीं था। सुमित तो फर्श पर एक कोने में गिरा हुआ पड़ा था। छलनी के ठीक पार शेखर खड़ा था—उसकी आँखों में दीये की पीली लौ चमक रही थी, उसके बालों पर चाँदनी बिखरी थी और उसकी आँखों में डोली के लिए बेहिसाब तड़प, फिक्र और आदर तैर रहा था।

Karwa Chauth Romance : करवा चौथ की कहानी : एआई जनरेटेड इमेज।
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डोली की साँसें थम गईं।

दीये की रोशनी में शेखर का सौम्य और रोबदार चेहरा किसी देवदूत जैसा लग रहा था। डोली की नज़रें छलनी से हटी ही नहीं। उसने न चाहते हुए भी छलनी के पार खड़े शेखर को अपनी पूरी आत्मा से देख लिया। वह पल जैसे समय में जम गया। हवा रुक गई, गीतों की आवाज़ें धीमी पड़ गईं और उन दोनों के बीच केवल एक मौन संवाद बहने लगा।

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Karwa Chauth Romance : जब हाथों से छलका जल और बदला रिश्ता

सुमित फर्श पर पड़ा-पड़ा खर्राटे लेने लगा था। उसे इस बात का कोई होश नहीं था कि उसकी पत्नी भूखी-प्यासी उसका इंतज़ार कर रही थी।

डोली की आँखों से आँसू की एक बड़ी बूंद छलक कर उसके लाल गाल पर ढलकी और छलनी पर गिर पड़ी। वह पूरी तरह टूट चुकी थी। उसकी पूजा, उसका समर्पण, उसका व्रत—सब कुछ एक शराबी के कदमों में कुचल चुका था।

शेखर यह सहन नहीं कर सका। वह आगे बढ़ा और उसने डोली के हाथों से वह छलनी ली और उसे मुंडेर पर रख दिया।

“भाभी…” शेखर ने डोली के दोनों कांपते हाथों को अपनी थमी हुई हथेलियों में ले लिया। “बस… और नहीं। अब मैं आपको और रोने नहीं दूंगा।”

“शेखर… मेरी पूजा अधूरी रह गई। मेरा व्रत…” डोली सिसक पड़ी।

“कोई पूजा अधूरी नहीं रही भाभी,” शेखर ने तांबे का करवा उठाया। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव और गहराई थी। उसने जल का पात्र डोली के होठों से लगाया। “जिस ईश्वर ने यह चाँद बनाया है, वह आपकी नीयत देखता है, उस शराबी का नशा नहीं। पीजिए पानी।”

डोली ने शेखर की आँखों में देखा। उन आँखों में एक ऐसा समर्पण था जो उसने कभी सुमित की आँखों में नहीं देखा था। उसने धीरे से अपने होठों को तांबे के पात्र से लगाया। जैसे ही जल की ठंडी बूंदें डोली के गले से नीचे उतरीं, उसे लगा जैसे उसके अंदर का सारा दर्द पिघल कर बह गया हो।

शेखर ने थाली से एक पेड़ा उठाया और अपने हाथों से डोली को खिलाया।

“अब चलिए नीचे,” शेखर ने नर्मी से कहा और सुमित को उठाकर किसी तरह उसके कमरे में बिस्तर पर डाल दिया।

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Karwa Chauth Romance : एकांत का जादू और बढ़ता सम्मोहन

रात के ग्यारह बज चुके थे। सुमित अपने कमरे में बेहोश होकर सो रहा था।

शेखर रसोई में जाकर डोली के लिए खाना गरम कर रहा था। डोली रसोई की चौखट पर आकर खड़ी हो गई। उसने अपनी लाल बनारसी साड़ी को थोड़ा ढीला कर लिया था, जिससे उसके गले और कंधे की गोरी त्वचा पर चाँदनी की रोशनी छनकर आ रही थी। उसके बालों से मोगरे की तेज खुशबू आ रही थी।

“शेखर, तुम भी बैठो। तुमने भी तो सुबह से कुछ नहीं खाया था,” डोली ने धीमी और मादक आवाज़ में कहा।

दोनों रसोई के पास बने छोटे से डाइनिंग टेबल पर आमने-सामने बैठ गए।

खाने के दौरान दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी—ऐसी खामोशी जो किसी आने वाले तूफ़ान से पहले होती है। जब भी शेखर पानी का गिलास उठाने के लिए हाथ बढ़ाता, उसकी उँगलियाँ डोली की उँगलियों से छू जातीं। उस ज़रा से स्पर्श से दोनों के शरीरों में एक सिहरन दौड़ जाती।

डोली की नज़रें बार-बार शेखर के चौड़े कंधों, उसकी सुगठित गर्दन और उसकी गहरी आँखों पर जा टिकतीं। आज रात शेखर केवल उसका देवर नहीं लग रहा था—वह एक ऐसा पुरुष लग रहा था जिसने उसे सम्मान दिया था, जिसने उसका व्रत पूरा कराया था और जिसने उसकी रूह को छुआ था। Karwa Chauth Romance

खाना खत्म होने के बाद, शेखर बर्तन समेटने लगा।

“मैं कर दूँगी शेखर,” डोली ने शेखर की कलाई पकड़ ली।

डोली के हाथों का स्पर्श इतना गर्म और इतना कोमल था कि शेखर की जगह पर ही थम गया। उसने मुड़कर डोली की तरफ देखा।

डोली की आँखें शराबी पति के दिए दर्दों को भूलकर केवल एक बेपनाह चाहत से दमक रही थीं। उसकी साँसों की रफ्तार तेज़ थी और उसके गुलाबी होठ हल्के से खुले हुए थे।

“भाभी… आप… आप क्या कर रही हैं?” शेखर ने अपनी आवाज़ को संभालने की कोशिश की, लेकिन उसका अपना दिल सीने में ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। “यह… यह सही नहीं है। सुमित भैया कमरे में हैं…”

“सुमित?” डोली के होठों पर एक कड़वी लेकिन मदहोश करने वाली मुस्कान आई। उसने शेखर की कलाई को छोड़ा नहीं, बल्कि उसका हाथ खींचकर अपने सीने पर रख लिया।

शेखर को डोली के दिल की तेज़ धड़कन अपनी हथेली के नीचे महसूस हुई।

“सुमित मेरे लिए मर चुका है शेखर,” डोली ने फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा सम्मोहन था। “उसने आज सिर्फ मुझे मारा नहीं, उसने हमारे रिश्ते की आखिरी उम्मीद को भी मार दिया। लेकिन तुमने… तुमने आज वो काम किया है जो एक पति को करना चाहिए था। तुमने मेरी इज़्ज़त बचाई, तुमने मुझे पानी पिलाया, तुमने मेरा करवा चौथ पूरा कराया।”

“भाभी, लेकिन समाज… हमारी मर्यादा…” शेखर ने पीछे हटने की कोशिश की, पर उसके शब्द उसकी अपनी ही भावनाओं के सामने कमज़ोर पड़ रहे थे।

“आज रात कोई मर्यादा नहीं है शेखर,” डोली ने आगे बढ़कर अपने दोनों हाथ शेखर के गले में डाल दिए। उसके चेहरे और शेखर के चेहरे के बीच महज़ एक इंच की दूरी बची थी। “आज रात केवल दो तड़पते हुए दिल हैं। मुझे उस शराबी के दिए ज़ख्मों से आज़ादी चाहिए… और वह आज़ादी मुझे सिर्फ तुम्हारा स्पर्श दे सकता है।”

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Karwa Chauth Romance : आधी रात का रोमांस

शेखर का संयम पूरी तरह टूट गया। उसके अंदर दबा हुआ बरसों का प्यार और भाभी के प्रति छुपा हुआ आकर्षण एक ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा। उसने अब पीछे हटने का कोई प्रयास नहीं किया।

उसने अपनी बाहों को डोली की कमर के चारों ओर कस लिया और उसे अपनी तरफ खींच लिया।

डोली के मुँह से एक धीमी सी सिसकी निकली। शेखर ने अपनी नज़रें डोली के होठों पर जमा दीं। वह धीरे से झुका और उसने डोली के निचले गुलाबी होठ को अपने होठों की गिरफ़्त में ले लिया। वह चुंबन धीमा था, लेकिन उसमें एक बेपनाह गहराई और जुनून था। डोली ने अपनी आँखें मूँद लीं और अपने हाथों से शेखर के बालों को कसकर जकड़ लिया।

कमरे की हल्की पीली रोशनी में उन दोनों की परछाइयाँ दीवार पर एक होती दिख रही थीं।

शेखर ने धीरे-धीरे चुंबन को गहरा किया। उसके होठ डोली के होठों से फिसलते हुए उसकी ठुड्डी, उसकी गर्दन और फिर उसकी कॉलरबोन पर उतर आए।

“शेखर… ओह, शेखर…” डोली ने आह भरते हुए उसका नाम पुकारा।

शेखर ने अपनी उँगलियों से डोली के बालों में लगे मोगरे के गजरे को खोल दिया। सफेद फूल ज़मीन पर बिखर गए और उनकी महक पूरे कमरे में फैल गई।

शेखर ने डोली को अपनी बाहों में उठाया और धीरे से उसे कमरे में बिछे बिस्तर पर लिटा दिया।

डोली ने लेटे-लेटे शेखर को ऊपर से देखा। उसने अपनी बाहें फैला दीं और शेखर को अपने ऊपर खींच लिया।

“तुम सिर्फ मेरे हो आज रात…” डोली ने शेखर के कानों के पास फुसफुसाया और उसके कान की लती को अपने दाँतों से हल्का सा काट लिया।

सहारनपुर की उस ठंडी रात में, गुप्ता हवेली के उस बंद कमरे में एक ऐसी आग जली, जिसने अतीत के सारे दर्दों को भस्म कर दिया।

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Karwa Chauth Romance : एक नया सवेरा

सुबह की पहली किरण सहारनपुर की हवेली की खिड़की से छनकर अंदर आ रही थी।

बिस्तर पर बिखरी हुई लाल बनारसी साड़ी, टूट कर गिरे हुए मोगरे के फूल और बिखरी हुई चूड़ियाँ रात के उस तूफ़ानी जुनून की गवाही दे रहे थे।

डोली शेखर के सीने पर अपना सिर रखे गहरी नींद में सो रही थी। उसके चेहरे पर एक ऐसा सुकून और शांति थी जो उसने पिछले दो सालों में कभी नहीं देखी थी। उसके गालों पर एक नया नूर था।

शेखर की आँखें खुलीं। उसने अपने बाहों में लिपटी डोली को देखा। उसने नर्मी से डोली के माथे पर बिखरी लटों को हटाया और उसके माथे को चूम लिया।

डोली ने आँखें खोलीं और शेखर को देखकर मुस्कुराई। इस बार उसकी आँखों में कोई शर्म या हिचकिचाहट नहीं थी, केवल एक अटूट विश्वास था।

“शुभ प्रभात, मेरे पति…” डोली ने बेहद धीमी और प्यार भरी आवाज़ में कहा।

शेखर ने उसकी कलाई को चूमा, जहाँ सोने की चूड़ी चमक रही थी, “शुभ प्रभात, मेरी डोली।”

कमरे से बाहर, शराबी सुमित अभी भी अपने नशे की बेहोशी में पड़ा हुआ था, बेखबर इस बात से कि उसकी लापरवाही ने उसकी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया था। लेकिन इस कमरे के अंदर, करवा चौथ की उस ऐतिहासिक रात ने दो दिलों को एक ऐसे अटूट और अमर बंधन में बाँध दिया था, जिसे अब दुनिया का कोई नियम या समाज कभी तोड़ नहीं सकता था। Karwa Chauth Romance

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Mahesh kant Shiva
महेश कांत शिवा (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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