devar bhabhi romance हरियाणा के सोनीपत जिले का एक गांव। दोपहर ढल रही थी और गांव के मुख्य चौराहे पर बरगद के पेड़ के नीचे बैठे बुज़ुर्ग अपने हुक्के की गुड़गुड़ाहट में मग्न थे। तभी गांव की पक्की सड़क पर एक भारी, गड़गड़ाती हुई आवाज़ गूंज उठी—धक्–धक्–धक्–धक्… devar bhabhi romance
काले रंग की चमचमाती रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 पूरे रोब के साथ चौपाल के सामने से गुज़री। बुलेट के हैंडल पर हाथ जमाए बैठा था रोहित—गांव का तेईस साल का गबरू जवान। चौड़ी छाती, धूप में तपा गंदमी रंग, बाइसेप्स पर उभरती हुई नसें और सिर पर बांधी हुई काली सूती परना। devar bhabhi romance
रोहित की आंखों में एक अजीब सा फख्र और चमक थी, क्योंकि यह बुलेट उसने अपनी पहली नौकरी की बचत और खेत की पहली बंपर फसल के पैसों से खरीदी थी। devar bhabhi romance
बुलेट एक मकान के बड़े से लोहे के दरवाज़े के सामने जाकर रुकी। रोहित ने जैसे ही एक्सीलेटर को थोड़ा सा झटका दिया, बुलेट की आवाज़ से मकान के आंगन में बंधे ढोर-डांगर भी अपनी मुंडी हिलाने लगे।
तभी मकान के भीतर से एक आवाज़ आई—”अरे ओ रोहित! इस लोहे के हाथी को ज़रा होले (धीमे) चला ले, पूरे घर की खिड़कियां हिला दी तने!”
रोहित ने पीछे मुड़कर देखा और उसके हाथ हैंडल पर ही थम गए। devar bhabhi romance
चौखट पर खड़ी थी सुमन—रोहित की सयानी, बेहद सुथरी (सुंदर) भाभी।

सुमन की शादी को अभी महज़ छह महीने ही हुए थे। रोहित के बड़े भाई (सतीश) सेना में हवलदार थे और उनकी ड्यूटी फिलहाल लेह-लद्दाख के बर्फीले इलाकों में थी। घर पर सासू मां, सुमन और रोहित ही रहते थे। सुमन गांव के लिहाज से बहुत पढ़ी-लिखी और सलीकेदार लड़की थी। कंचन जैसा साफ गोरा रंग, हिरणी जैसी बड़ी-बड़ी कजरौती आंखें, भरे हुए होंठ और ढलती ढलान जैसी सुराहीदार गर्दन।
आज सुमन ने गाढ़े मैरून रंग का पटियाला- हरियाणवी सूट पहना हुआ था, जिस पर सुनहरे गोटे की कढ़ाई थी। उसका भारी सुमेर पर्वत उस कसवी कुर्ती में उभरकर सामने आ रहा थे और उसकी मखमली कमर को एक जादुई उभार दे रहा था। सिर पर ली हुई गाढ़ी लाल चुनरी उसके माथे पर लटकी बिंदी को और निखार रही थी। devar bhabhi romance
सड़क की धूप में खड़ी सुमन का हुस्न देखकर रोहित की छाती में दिल अचानक ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उसकी सांसें भारी हो गईं।
“अरे… भाभी जी!” रोहित ने बुलेट का स्टैंड लगाया और उतावली में उतरते हुए बोला, “यो हाथी ना सै… मेरी नई बुलेट सै! पूरे तीन लाख रुपै ढीले किए हैं इसके खातिर।”
सुमन मटकती हुई बुलेट के पास आई। उसके पैरों में पड़ी चांदी की पायलों की छम-छम की आवाज़ ने वातावरण में एक अजीब सी मादकता घोल दी। उसने अपने मखमली, गोरे हाथ को बुलेट के पेट्रोल टैंक की चमचमाती धातु पर रखा।
“घणी सुथरी लागै सै,” सुमन ने रोहित की आंखों में आंखें डालकर कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी नरमी और गर्माहट थी। “पर मनै तो इसमें बैठने का सुख मिलेगा कोन्या। तेरे भैया तो लद्दाख बैठे हैं, और सासू मां कहैं सैं कि बुलेट पे बैठना कुलछन (बेशर्मी) होवै सै।”
रोहित का दिल मचल उठा। उसने अपने लंबे बदन को थोड़ा और सीधा किया और सुमन के और करीब आ गया। सुमन के शरीर से आती ताज़े नहाए हुए साबुन की भीनी-भीनी महक ने रोहित के नथुनों में जाकर उसके दिमाग की नसें सुलगा दीं।
“किसने कही भाभी कि तने बैठने का सुख ना मिलेगा?” रोहित ने अपनी भारी, मदहोश आवाज में कहा। “तने कित जाना सै? तू हुकूम तो कर… यो रोहित तेरा ड्राइवर बनने ने तैयार सै!”
सुमन ने अपनी पलकें झझकाईं और नीची नजर करके मुस्कुराई। उसकी इस मुस्कान पर तो रोहित अपना सब कुछ लुटाने को तैयार था।
“मनै… मनै अपने पीहर (मायके) जाना सै। मां की तबीयत थोड़ी ढीली सै। बस की सवारी में बहुत खज्जल-ख्वारी (परेशानी) होवै सै। अगर तू ले चले तो…” सुमन ने रुक-रुककर, बहुत लजाते हुए कहा।
“बस इतनी सी बात!” रोहित ने झट से चाबी घुमा दी। “चल भाभी, तू तैयार हो जा! आज तने तेरी इस नई बुलेट पे हवा से बातें कराऊंगा!”
devar bhabhi romance सफर की शुरुआत, चुनरी का उड़ना और पहली छुअन
दोपहर के तीन बज रहे थे। धूप में हल्की गुलाबी ठंडक घुल चुकी थी।
सुमन ने अपने छोटे से पर्स को कंधे पर टांगा और बुलेट के पास आई। रोहित पहले से ही बुलेट चालू करके बैठा था। उसने काले रंग की टाइट जीन्स और नीले रंग की हाफ-स्लीव टी-शर्ट पहनी हुई थी, जिससे उसकी डोले-शोले और गठीली बांहें साफ छलक रही थीं।
“भाभी… ज़रा संभल के बैठना। बुलेट की पाछली सीट थोड़ी ऊंची सै,” रोहित ने शीशे में से पीछे देखा।
सुमन ने अपने मैरून सूट के घेरे को समेटा और एक तरफ पैर करके बुलेट की पिछली सीट पर बैठ गई। लेकिन बुलेट का एक्सीलेटर इतना ताकतवर था कि जैसे ही रोहित ने पहला गियर डालकर क्लच छोड़ा, बुलेट ने एक ज़ोरदार झटका लिया—धड़ाक!
“अरे मैया रे!”
सुमन का संतुलन बिगड़ा और उसने डर के मारे अपने दोनों गोरे, मखमली हाथ सीधे रोहित की चौड़ी, कसरती कमर के इर्द-गिर्द लपेट दिए!
उसके सुमेरु पर्वत रोहित की सख्त पीठ से पूरी ताकत से जा टकराए।
अहह… रोहित के मुंह से एक ठंडी, गहरी सांस निकल गई। उसकी रीढ़ की हड्डी में जैसे किसी ने नंगी बिजली की तार छुवा दी हो! रोहित का पूरा जिस्म थरथरा उठा। सुमन के दोनों हाथों का कड़ापन उसकी कमर की मांसपेशियों को भींच रहा था, और उसकी सांसों की गर्म भाप सीधे रोहित की गर्दन की नसों पर पड़ रही थी।
“अरे राम! रोहितिया… होले चला ले बावले! गिरावेगा के?” सुमन ने रोहित की पीठ में अपना चेहरा छुपाते हुए कांपती आवाज़ में कहा।
“ना… ना भाभी! गिरन कोन्या दूं,” रोहित की आवाज़ हलक में अटक गई। उसने शीशे में देखा।
शीशे के छोटे से दायरे में सुमन का चेहरा बिल्कुल रोहित के कान के पास था। सुमन की कजरौती आंखें डर और एक अजीब से अहसास से मुंदी हुई थीं। उसके गाढ़े लाल होंठ थरथरा रहे थे।
“भाभी… तू कसके पकड़ ले मनै। डर ना लगेगा,” रोहित ने अपनी आवाज को संभाला, लेकिन उसके बदन में आग सुलग चुकी थी।
बुलेट अब गांव की संकरी गलियों से निकलकर सोनीपत-गन्नौर के मुख्य हाईवे पर सरपट दौड़ रही थी।
सड़क के दोनों तरफ हरे-भरे सरसों और गेहूं के खेत लहलहा रहे थे। 60 की रफ्तार से चलती बुलेट पर ठंडी हवा के झोंके सीधे टकरा रहे थे। अचानक हवा का एक तेज झोंका आया और सुमन के सिर से उसकी गाढ़ी लाल चुनरी उड़कर सीधे रोहित के चेहरे और गले पर आकर लिपट गई।
उस रेशमी चुनरी से सुमन के बालों की महक और उसकी देह की कस्तूरी खुशबू आ रही थी।
रोहित ने एक हाथ से हैंडल संभाला और दूसरे हाथ से चुनरी को हटाया, लेकिन हवा इतनी तेज थी कि चुनरी उड़ती रही और सुमन के बिखरे हुए घने, काले बाल रोहित के चेहरे को छूने लगे। बाल का एक-एक कतरा रोहित के गालों पर किसी रेशमी पंख की तरह सरसरा रहा था।
“अरे रोहित! मेरी चुनरी उड़े से! पकड़ इसे!” सुमन ने चिल्लाकर कहा।
रोहित ने बुलेट की रफ्तार थोड़ी धीमी की और शीशे में सुमन को देखा। “भाभी… चुनरी तो उड़न दे, तू घणी सुथरी लागै सै इस बिखरी ज़ुल्फ़ों में!”
सुमन ने अपनी नजरें उठाईं। शीशे में रोहित की कंचे जैसी साफ, लेकिन प्यार से भरी आंखें सीधे उसकी आंखों में झांक रही थीं। सुमन का दिल ज़ोर से धड़क उठा। उसके चेहरे पर लालिमा दौड़ गई। उसने अपनी चुनरी को पकड़ा और अपने सीने से लगा लिया, लेकिन उसके हाथ अभी भी रोहित की कमर से हटे नहीं थे।
devar bhabhi romance नीम की छांव, सुनसान सड़क और बेकाबू धड़कनें
लगभग 15 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद, बुलेट एक सुनसान कच्चे रास्ते पर मुड़ी जो खेतों के बीच से होकर गुजरता था। दोनों तरफ लंबे-लंबे गन्ने के खेत थे और बीच-बीच में विशाल नीम के पेड़ खड़े थे।
अचानक बुलेट ने दो-तीन ज़ोरदार झटके लिए और बंद हो गई।
“के हो गया रोहित?” सुमन ने घबराकर पूछा।
रोहित ने दो-तीन बार किक मारी, पर बुलेट चालू नहीं हुई। उसने नीचे देखा तो पेट्रोल का पाइप थोड़ा ढीला था और रिजर्व का पेट्रोल भी खत्म हो चुका था।
“भाभी… पेट्रोल खत्म हो गया लागै सै। जरा नीचे उतरना पड़ेगा,” रोहित ने माथे का पसीना पोछते हुए कहा।
दिसंबर की शुरुआत की ढलती दोपहर थी। सूरज खेतों की ओट में छिपने जा रहा था और आसमान में हल्का गुलाबी और नारंगी रंग घुल चुका था। दूर-दूर तक कोई इंसान नजर नहीं आ रहा था। सिर्फ गन्नों के पत्तों की खड़खड़ाहट और पंछियों की चहचहाहट थी।
सुमन बुलेट से नीचे उतरी। लगातार 45 मिनट बुलेट की ऊंची सीट पर बैठने की वजह से उसकी कमर में एक मीठा सा दर्द हो रहा था। उसने अपने दोनों हाथ पीछे करके अपनी पीठ को थोड़ा मोड़ा—अहह!
उस मोड़ के साथ ही सुमन का उभरा हुआ सीना और उसकी पतली कमर का ढलान रोहित की आंखों के सामने पूरी तरह उजागर हो गया।
रोहित बुलेट को स्टैंड पर खड़ा करके वहीं रुक गया। उसकी नजरें सुमन के शरीर के उस मोड़ से हट ही नहीं रही थीं। उसका सांस लेना भारी हो गया। उसकी आंखों में भूखे शेर जैसी एक आक्रमकता और तड़प उतर आई थी।
सुमन ने जब रोहित की तरफ देखा, तो उसकी आंखें देखकर समझ गई कि रोहित का संयम अब जवाब दे रहा है।

“के देखै सै ऐसे बेशरमों की ढाल?” सुमन ने लजाते हुए अपनी चुनरी को ठीक करने का नाटक किया, लेकिन उसकी आवाज में कोई मनाही नहीं थी, बल्कि एक आमंत्रण था।
रोहित बिना कुछ बोले धीरे-धीरे सुमन की तरफ बढ़ा। उसके कदम भारी थे। उसके शरीर का हर एक कतरा गर्म खून के उबलने से तप रहा था।
“भाभी…” रोहित उसके इतने करीब आ गया कि दोनों के जूते आपस में टकरा गए।
“हम्म?” सुमन का दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि उसकी मैरून कुर्ती की छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
“जब तू बुलेट पे पीछे बैठी थी ना… और तेरे हाथ मेरी कमर पे थे,” रोहित ने अपना बड़ा, सख्त हाथ उठाकर सुमन की ठुड्डी को धीरे से छुआ, “तो मेरा दिल कर रहा था कि इस बुलेट को कभी रोकूं ही ना। पूरी जिंदगी तने पीछे बिठाके यूं ही चलाता रहूं।”
सुमन की सांसें अटक गईं। रोहित की चौड़ी छाती, उसके बाइसेप्स का कड़ापन और उसकी आंखों की वो तड़प सुमन के भीतर सोई हुई भावनाओं को जगा रही थी। उसका पति महीनों से दूर था, और यहां सामने खड़ा था उसका युवा, खूबसूरत और ताकतवर देवर—जो उसकी सुंदरता पर पूरी तरह फ़िदा था।
“रोहितिया… तू बेशरम हो गया सै,” सुमन की आवाज थरथरा रही थी।
“तेरी इस सुथराई ने कर दिया भाभी,” रोहित ने अपनी दूसरी बांह सुमन की कमर के गिर्द लपेट ली और उसे अपनी तरफ खींच लिया।
devar bhabhi romance गन्ने के खेत की ओट और सुलगती रात
अहह!
सुमन का पूरा शरीर रोहित के गठीले बदन से चिपका। रोहित के गर्म हाथों की उंगलियां सुमन की मखमली कमर में धंस गईं। सुमन ने कोई विरोध नहीं किया। उसने अपनी दोनों गोरी बांहें रोहित की गर्दन में डाल दीं और अपना सिर उसकी चौड़ी छाती पर टिका दिया।
“रोहित… कोई आ जाएगा खेत में… छोड़ दे मनै,” सुमन ने झूठी मिन्नत की, लेकिन उसकी उंगलियां रोहित के बालों को कसकर भींच रही थीं।
“कोई कोन्या आता भाभी… आज इस सुनसान रास्ते पे बस तू सै अर मैं हूं,” रोहित की आवाज में एक अजीब सा जादू था।
रोहित ने सुमन को अपनी बांहों में उठाया और सड़क किनारे लगे गन्ने के खेत के घने हिस्से में ले गया। गन्ने के लंबे-लंबे पत्तों ने उन दोनों के लिए एक प्राकृतिक पर्दा बना दिया था। जमीन पर सूखी घास और गन्ने की पत्तियां बिछी हुई थी।
रोहित ने सुमन को नीचे लिटाया। सुमन का मैरून सूट उस हरे-भरे माहौल में एक जख्मी गुलाब जैसा लग रहा था। उसकी लाल चुनरी जमीन पर बिछ गई।
रोहित उसके ऊपर आ गया। उसकी भारी छाती सुमन के नरम सुमेरु पर्वत पर दब गई। दोनों की सांसें इतनी तेज थी कि खेत की खामोशी में सिर्फ उनकी धड़कनों और सांसों की आवाज गूंज रही थी।
“भाभी… एक बार देखने दे मनै तेरा यो कंचन जैसा रूप,” रोहित ने कांपते हाथों से सुमन के सूट के गले का डोरी वाला हिस्सा ढीला किया।
सुमन ने अपनी आंखें मूंद लीं। उसकी गर्दन और उसकी उफनती हुए सुमेरु पर्वत का ऊपरी हिस्सा ढलती धूप में चमक रहा था।
रोहित अपनी प्यास रोक नहीं पाया। उसने अपनी गर्दन झुकाई और अपने गर्म, भरे हुए होंठ सुमन की गर्दन पर रख दिए।

ओहहह… रोहितिया!
सुमन के मुंह से एक सुसकारी निकली। उसकी कमर झटके से ऊपर उठी और वह रोहित के बदन से और कसकर चिपक गई। रोहित के होंठ उसकी गर्दन से फिसलते हुए उसके उस गहरे, मखमली ढलान पर रेंगने लगे जहाँ से उसकी देह की कस्तूरी महक आ रही थी।
रोहित का हर एक चुंबन इतना गहरा, इतना गर्म और इतना मादक था कि सुमन का पूरा बदन कांप रहा था। उसकी उंगलियां रोहित की टी-शर्ट के अंदर दाखिल हो गईं और उसकी पीठ की सख्त मांसपेशियों को खरोंचने लगीं।
“रोहित… ओ मेरे गबरू… मार डालेगा के?” सुमन फुसफुसा रही थी। उसके होंठ खुले हुए थे और उसकी सांसें आग बरसा रही थीं।
रोहित ने अपना चेहरा उठाया और सीधे सुमन के गाढ़े लाल होंठों को अपने होंठों के घेरे में ले लिया।
यह एक जंगली, बेकाबू और रसीला चुंबन था। रोहित ने सुमन के नीचे वाले होंठ को अपनी बत्तीसी में धीरे से दबाया और उसके रस को पीने लगा। सुमन ने अपनी ज़ुबान रोहित के मुंह में डाल दी। दोनों की ज़ुबानें आपस में उलझ गईं, जैसे दो प्यासी नदियां एक-दूसरे में समा जाना चाहती हों।
रोहित का एक हाथ सुमन के सूट के अंदर दाखिल हुआ और उसकी कमर को सहलाते हुए ऊपर की तरफ बढ़ा। यह अहसास रोहित के हाथ में आते ही रोहित का संयम पूरी तरह टूट गया। उसने सुमन को अपनी बांहों में कस लिया और उसके हर एक अंग को तृप्त करने लगा।
गन्ने के खेत की उस छांव में, पक्षियों की चहचहाहट और शाम की ठंडी हवा के बीच, दोनों प्रेम के उस अनपेक्षित और मादक समंदर में डूब गए। मर्यादा के सारे बांध टूट चुके थे। रोहित की युवा ताक़त और सुमन की दबी हुई भावना ने मिलकर एक ऐसी आग जलाई जिसमें दोनों खुशी-खुशी जल रहे थे।
devar bhabhi romance ढलती शाम, पेट्रोल की बोतल और एक नया इकरार
लगभग एक घंटे बाद, जब आसमान में तारे टिमटिमाने लगे थे, खेत में खामोशी छा गई थी।
सुमन रोहित की छाती पर अपना सिर रखे लेटी हुई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे, और उसका मैरून सूट थोड़ा अस्त-व्यस्त था, लेकिन उसके चेहरे पर एक अपार संतुष्टि और एक नशीली मुस्कान थी।
रोहित उसके लंबे, घने बालों में अपनी उंगलियां फिरा रहा था। उसके चेहरे पर एक मर्दानी चमक और एक भारी सुकून था।
“भाभी…” रोहित ने उसकी जुल्फों को चूमते हुए कहा।
“हम्म?” सुमन ने अपनी आंखें खोलीं। उसकी आंखें अभी भी खुमार से भारी थीं।
“अब तो बुलेट का पेट्रोल खत्म होना भी अच्छा लगा,” रोहित ने मुस्कुराते हुए कहा।
सुमन ने अपने हाथ से रोहित के गाल पर एक हल्का सा थप्पड़ मारा, “बेशरम! तने तो मेरी चुनरी भी फाड़ दी और पूरा सूट खराब कर दिया! अब पीहर जाके मां से क्या कहूंगी कि बुलेट पे आई थी या तूफान में?”

रोहित खिलखिलाकर हंस पड़ा। उसकी हंसी गन्ने के खेत में गूंज उठी।
उसने सुमन को बिठाया, उसकी चुनरी को करीने से उसके सिर पर रखा और उसके सूट के बटन बंद किए। सुमन ने रोहित के बिखरे बालों को अपने हाथों से संवारा।
“चल अब… किसी तरह पेट्रोल का जुगाड़ कर, वरना रात यहीं हो जाएगी,” सुमन ने उठते हुए कहा। उसकी चाल में अब एक अलग ही लचक थी।
रोहित रास्ते पर आया। संयोग से थोड़ी ही देर में गांव का एक जान-पहचान वाला लड़का अपनी बाइक पर उधर से गुज़रा। उसने रोहित को अपनी बाइक से थोड़ा सा पेट्रोल निकालकर एक बोतल में दे दिया।
रोहित ने पेट्रोल बुलेट में डाला। बुलेट एक ही किक में गड़गड़ाकर चालू हो गई—धक्–धक्–धक्–धक्…
सुमन बुलेट के पास आई। इस बार उसे कोई हिचकिचाहट नहीं थी। वह चुपचाप बुलेट की पिछली सीट पर बैठी और उसने बिना किसी डर के अपने दोनों हाथ रोहित के पेट पर लपेट दिए और अपना चेहरा उसकी पीठ से सटा लिया।
रोहित ने शीशे में देखा। सुमन की आंखें मुंदी हुई थीं और उसके होंठों पर एक मीठी सी मुस्कान थी।
रोहित ने बुलेट का एक्सीलेटर घुमाया। बुलेट हवा से बातें करती हुई समता गांव की तरफ दौड़ पड़ी।
रात की ठंडी हवा में सुमन की लाल चुनरी एक बार फिर उड़ रही थी, लेकिन इस बार वह चुनरी रोहित के गले से ऐसे लिपटी हुई थी जैसे दो रूहों का एक अनकहा, अटूट और बेहद गर्म इकरार हो।
बुलेट की गड़गड़ाहट में दो दिलों की एक नई, मादक दास्तान लिखी जा चुकी थी—एक ऐसी दास्तान जो हरियाणवी सूट, बुलेट की पिछली सीट और उस गन्ने के खेत की ओट में हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गई थी। devar bhabhi romance
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