Devar Bhabhi Love Story: देहरादून की बारिश का भी अपना ही मिज़ाज है। जब बरसती है, तो पूरे शहर को चीड़ और बांझ के पेड़ों की भीनी-भीनी खुशबू से भर देती है। हवा में एक अजीब सा सुहानापन घुल जाता है, जो इंसान को पुरानी यादों और खूबसूरत एहसासों में डुबो देता है। राजपुर रोड के पास बने एक पुराने, आलीशान विक्टोरियन शैली के घर में भी ऐसी ही एक भीगी हुई रात अपनी ठंडी चादर फैला चुकी थी।
घर में सब सो चुके थे। घड़ी में रात के पौने एक बज रहे थे। चारों तरफ गहरा सन्नाटा था, बस खिड़की के शीशों पर गिरती बारिश की बूंदों की टपटप आवाज़ आ रही थी।
किचन का लकड़ी का भारी दरवाजा हल्का सा सरका और उसमें से एक परछाई अंदर दाखिल हुई। यह मेघा थी। शादी को अभी महज़ तीन महीने ही हुए थे। मेघा की शादी घर के बड़े बेटे समीर से हुई थी, जो मर्चेंट नेवी में था और शादी के तुरंत बाद उसे एक लंबे असाइनमेंट पर जहाज़ पर जाना पड़ा था। बड़े से घर में सास-ससुर का ख्याल रखना, घर की जिम्मेदारियों को समझना- मेघा सब बखूबी कर रही थी, लेकिन अपनी एक पुरानी और जिद्दी आदत से वह मजबूर थी।

Devar Bhabhi Love Story in hindi
उसे आधी रात को क्रेविंग्स होती थीं। खासकर मीठा खाने की।
किचन की लाइट जलाना खतरे से खाली नहीं था, क्योंकि मम्मी जी की नींद बहुत कच्ची थी। इसलिए मेघा ने अपने फोन की फ्लैशलाइट जलाई। वह दबे पाँव, फर्श पर पायल की आवाज़ बचाते हुए फ्रिज की तरफ बढ़ी। जैसे ही उसने फ्रिज का दरवाजा खोला, अंदर की पीली रोशनी में उसका खूबसूरत चेहरा चमक उठा। वह अंदर कुछ ढूँढ ही रही थी कि पीछे से एक भारी, लेकिन बेहद शरारती आवाज आई।
चोरी पकड़ी गई!
“भाभी… रंगे हाथों चोरी पकड़ी गई!”
“अरे बाप रे!” मेघा डर के मारे उछल पड़ी। हड़बड़ाहट में उसके हाथ से फ्रिज का दरवाजा छूटते-छूटते बचा। उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
रसोई के दरवाजे पर टेक लगाए, ग्रे कलर की हुडी पहने और चेहरे पर एक कातिलाना मुस्कान लिए आशीष खड़ा था। आशीष- घर का छोटा बेटा, जो देहरादून के ही एक नामी कॉलेज से एमबीए कर रहा था। जितना दिमाग उसका पढ़ाई में चलता था, उससे कहीं ज़्यादा उसकी नज़र घर के खान-पान और सबकी गतिविधियों पर रहती थी।
“आशीष तुम… तुमने तो डरा ही दिया मुझे,” मेघा ने अपने दिल पर हाथ रखते हुए गहरी सांस ली, जिसकी धड़कनें अभी भी तेज़ थीं। “और मैं कोई चोरी नहीं कर रही थी, ठीक है?”
“अच्छा? तो रात के इस पहर, जब पूरी दुनिया सो रही है, आप फ्रिज में कौन सा खजाना खोज रही थीं?” आशीष धीरे-धीरे किचन के अंदर आया और किचन काउंटर पर चढ़कर बैठ गया, अपनी टांगें हवा में हिलाते हुए। “वैसे भाभी, अगर मम्मी जी को पता चला न कि उनकी सीधी-सादी और सुघड़ बहू रात को चोरों की तरह फ्रिज खंगालती है, तो सोचिए क्या होगा?”
Devar Bhabhi Love Story in hindi
मेघा ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें दिखाईं, “देखो आशीष, मुझे बिल्कुल ब्लैकमेल करने की जरूरत नहीं है। मुझे बस… मुझे बस थोड़ी सी भूख लगी थी।”
“भूख? या फिर मीठे की तलब?” आशीष ने मुस्कुराते हुए अपनी एक आँख दबाई। “मैं आपका देवर हूँ भाभी, आपकी हर छोटी-बड़ी हरकत नोट करता हूँ। शाम को जब मम्मी जी ने लौकी का हलवा बनाया था, तब आपने सिर्फ दो चम्मच खाकर छोड़ दिया था। तभी मैं समझ गया था कि आज रात को ऑपरेशन ‘नाइट क्रंच’ शुरू होने वाला है।”
मेघा अपनी हंसी नहीं रोक पाई। आशीष की यही नटखट शैली उसे इस नए घर में बेगानापन महसूस नहीं होने देती थी। जब से समीर गया था, घर में एक खालीपन सा छा गया था। ऐसे में आशीष ही था जो अपनी बचकानी हरकतों और नटखट स्वभाव से घर में रौनक बनाए रखता था और मेघा का मन बहलाता रहता था।

Devar Bhabhi Love Story:आशीष का किचन में धमाकेदार प्रवेश
“अच्छा बाबा, मान लिया। मुझे मीठा खाना है,” मेघा ने मासूमियत से मुंह बनाकर कहा, जैसे कोई छोटी बच्ची ज़िद कर रही हो। “लेकिन फ्रिज में सिर्फ उबली हुई सब्जियाँ, बचा हुआ साग और आटा पड़ा है। यहाँ तो मेरी पसंद का कुछ भी नहीं है।”
आशीष काउंटर से नीचे उतरा और अपनी हुडी की आस्तीनें कोहनी तक चढ़ाते हुए बोला, “जब आपका पर्सनल मास्टर शेफ देवर यहाँ मौजूद है, तो आपको इस तरह उदास होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हटिए बाजू, आज आपको देहरादून की सबसे सीक्रेट और स्पेशल डिश खिलाते हैं।”
“तुम्हें? और खाना बनाना आता है?” मेघा ने शंका भरी नजरों से उसे ऊपर से नीचे तक देखा। “मुझे तो लगता था तुम सिर्फ खाना खाना जानते हो।”
“क्या भाभी! आपने तो मेरी प्रतिभा पर ही सवाल उठा दिया,” आशीष ने सीने पर हाथ रखकर आहत होने का नाटक किया। “मैं वो इंसान हूँ जो उबलते हुए पानी में भी स्वाद भर दे! बस मेरी एक शर्त है।”
“कैसी शर्त?”
“मम्मी जी या पापा जी की नींद नहीं खुलनी चाहिए। अगर हम पकड़े गए, तो मास्टर शेफ भाग जाएगा और सारा इल्ज़ाम आपकी इस मीठे की भूख के सिर मढ़ा जाएगा।”
“क्या? यह तो सरेआम नाइंसाफी है!” मेघा ने विरोध में हाथ नचाया।
“डील मंजूर है या मैं जाकर अपने गर्म बिस्तर में सो जाऊँ?” आशीष ने जाने का नाटक करते हुए कदम पीछे बढ़ाए।
“अरे… अरे रुको तो सही! ठीक है, बाबा मंजूर है,” मेघा ने घबराकर झट से आशीष की कलाई पकड़ ली।

Devar Bhabhi Love Story एक अनदेखा स्पर्श और अनकही भावनाएं
जैसे ही मेघा की मखमली, ठंडी उंगलियों ने आशीष की गर्म कलाई को छुआ, दोनों के बीच एक पल के लिए पूरी तरह खामोशी छा गई। बाहर गिरती बारिश की आवाज़ भी जैसे कहीं दूर चली गई। आशीष ने धीरे से अपना सिर घुमाया और मेघा की आँखों में देखा। उन आँखों में एक मासूम सा खिंचाव और गहरी निश्छलता थी।
मेघा को भी अचानक अहसास हुआ कि उसने कितनी मजबूती से आशीष का हाथ थाम रखा है। एक अनजाने से अहसास की लहर दोनों के शरीरों में दौड़ गई। मेघा ने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया और अपने गालों पर आती लालिमा को छिपाने के लिए नजरें झुकाकर दूसरी तरफ देखने लगी।
“तो… क्या बनाने वाले हैं हम?” मेघा ने अपनी धड़कनों को काबू में करते हुए बात संभाली।
“हम बनाएंगे—’द राजपुर रोड स्पेशल शॉक-ब्रेड-डिस्क’!” आशीष ने किसी बड़े रेस्टोरेंट के शेफ की तरह नाटकीय अंदाज में कहा।
“यह कौन सी अजीब डिश है भाई? मैंने तो आज तक इसका नाम नहीं सुना,” मेघा ने अपनी झेंप मिटाते हुए हँसकर पूछा।
“क्योंकि यह डिश अभी-अभी मेरे खुराफआती दिमाग में ईजाद हुई है। अब सवाल पूछना बंद कीजिए और मेरी असिस्टेंट बन जाइए। फ्रिज से ब्रेड का पैकेट निकालिए, थोड़ा सा अमूल बटर, कैडबरी की दो चॉकलेट्स और थोड़ा सा दूध।”
दोनों ने मिलकर काम शुरू किया। रसोई की हल्की सी धुंधली टॉर्च की रोशनी में दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे। आशीष ब्रेड के किनारों को बहुत सलीके से काट रहा था और मेघा चॉकलेट को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ रही थी।
“वैसे भाभी,” आशीष ने ब्रेड पर मक्खन की एक परत लगाते हुए अचानक शांत आवाज़ में कहा, “भाई के जाने के बाद आप काफी गुमसुम रहने लगी हैं। देहरादून का मौसम इतना रोमांटिक है, बाहर इतनी खूबसूरत बारिश हो रही है, और आप खुद को कमरे में बंद रखती हैं।”
Devar Bhabhi Love Story
मेघा ने एक लंबी और गहरी सांस ली, उसकी नजरें प्लेट पर ही टिकी रहीं, “समीर का काम ही ऐसा है आशीष। मर्चेंट नेवी में होने का मतलब ही है महीनों का इंतजार। धीरे-धीरे आदत डालनी पड़ रही है। लेकिन सच कहूँ, तो कभी-कभी इस बड़े से घर में बहुत अकेलापन महसूस होता है।”
आशीष ने ब्रेड का पीस वहीं रखा और पूरी तरह से मेघा की तरफ घूम गया। उसने मेघा के चेहरे पर आई एक आवारा लट को बड़े सलीके और नजाकत से उठाकर उसके कान के पीछे कर दिया। इस अचानक और आत्मीय स्पर्श से मेघा की सांसें थम सी गईं। उसकी धड़कनें बेकाबू होकर तेज़ चलने लगीं। वह आशीष की आँखों में देखती रह गई।
“जब तक मैं आपके पास हूँ, आपको खुद को अकेला महसूस करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है,” आशीष की आवाज में इस बार कोई चुलबुलापन या मजाक नहीं था। उसकी आवाज़ में एक अनकही गहराई थी, एक ऐसी गर्माहट जो मेघा के सीधे उदास दिल तक पहुँची।
“आशीष…” मेघा के लबों से बस उसका नाम ही निकल सका।
“हम्म?” आशीष ने अपनी नजरें उसकी आँखों से एक पल के लिए भी नहीं हटाईं।
“वो… तवा जल जाएगा,” मेघा ने घबराकर और शरमाकर गैस की तरफ इशारा किया।
“ओह तेरी! मेरी मास्टर डिश!” आशीष तुरंत पलटा और उसने तवे पर थोड़ा सा और बटर डाला, जिससे एक छन्न की आवाज़ आई।
दोनों एक-दूसरे को देखकर दबी ज़ुबान में हँस पड़े। उस रात के अंधेरे और सन्नाटे में उनकी यह दबी हुई हंसी किसी मधुर संगीत जैसी घुल रही थी।

Devar Bhabhi Love Story स्टोर-रूम की खामोशी और दिल की धड़कनें
आशीष ने ब्रेड के बीच में चॉकलेट के टुकड़े और हल्का सा दालचीनी पाउडर भरकर उसे तवे पर धीमी आँच पर सेकना शुरू किया। मक्खन के पिघलने और सिकती हुई चॉकलेट की मीठी खुशबू से पूरी रसोई महक उठी।
“महक तो बहुत जबरदस्त आ रही है, शेफ आशीष,” मेघा ने मुस्कुराते हुए तारीफ की।
“स्वाद उससे भी बेहतरीन होगा भाभी। बस दो मिनट का धैर्य और रखिए।”
लेकिन तभी, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक बाहर हॉल में किसी के भारी कदमों की आहट हुई। साथ ही ससुर जी के खांसने की परिचित आवाज गूंजी।
मेघा के तो जैसे हाथ-पांव ही फूल गए। चेहरे से रंग उड़ गया। “आशीष! पापा जी उठ गए! अब क्या होगा? अगर उन्होंने हमें इस वक्त रसोई में देख लिया तो हम क्या जवाब देंगे?”
आशीष ने बिना एक सेकंड गंवाए फुर्ती से गैस बंद की। उसने मेघा का नाजुक हाथ अपनी उंगलियों में भींचा और उसे किचन के एक कोने में बने छोटे से स्टोर-रूम की तरफ खींच लिया। दोनों तेजी से स्टोर-रूम के अंदर घुसे और आशीष ने बिना कोई आवाज किए धीरे से दरवाजा पूरी तरह बंद कर दिया।
वह स्टोर-रूम बहुत छोटा था। चारों तरफ राशन के डिब्बे, अचार की बर्नियाँ और पुराना सामान ठसाठस भरा था। खड़े होने तक की जगह नहीं थी। जगह इतनी कम थी कि मेघा सीधे आशीष के चौड़े सीने से जाकर सट गई। आशीष की तेज़ होती धड़कनें मेघा अपनी पीठ और छाती पर साफ महसूस कर सकती थी। आशीष ने अपनी एक बांह से मेघा की पतली कमर को थाम रखा था ताकि वह संतुलन न खोए या किसी डिब्बे से टकराकर आवाज न कर दे, और दूसरे हाथ की उंगली उसने अपने होठों पर रखी हुई थी-‘शह!’
दोनों एकदम सांस रोककर, एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे।
बाहर ससुर जी किचन में आए। उन्होंने फ्रिज खोला, पानी का जग उठाया, एक गिलास पानी पिया और फिर धीमी चाल से वापस अपने कमरे की तरफ चले गए। जब उनके कमरे का दरवाजा बंद होने की हल्की सी आवाज आई, तब जाकर दोनों के फेफड़ों में हवा वापस आई।
लेकिन, वे अभी भी उस घने अंधेरे और छोटे से स्टोर-रूम में बंद थे।
मेघा ने धीरे से अपना सिर ऊपर उठाया। अंधेरे में भी आशीष की काली आँखें जुगनू की तरह चमक रही थीं। दोनों के चेहरों के बीच सिर्फ कुछ ही इंच का फासला था। आशीष की गर्म और तेज़ सांसें मेघा के माथे और होंठों से टकरा रही थीं।
उस छोटे से स्टोर-रूम के सन्नाटे में एक अजीब सा मीठा खिंचाव आ गया था। Devar Bhabhi Romance का यह एक ऐसा अनकहा, मासूम और रूहानी पल था, जहाँ बिना किसी सीमा को लांघे, सिर्फ दो शरीरों की गर्माहट और आँखों की खामोशी एक-दूसरे से बातें कर रही थी। समीर के जाने के बाद मेघा ने जो अकेलापन महसूस किया था, वह आशीष के इस निष्पाप स्पर्श और नजदीकी में पिघलता हुआ सा महसूस हो रहा था।
“पापा जी… चले गए,” मेघा ने बहुत ही धीमी, कांपती हुई फुसफुसाहट में कहा।
“हम्म… चले गए,” आशीष ने कहा, लेकिन उसका ध्यान बाहर जाने पर बिल्कुल नहीं था। उसकी नजरें मेघा के गुलाबी होठों पर टिकी थीं, जो हल्की घबराहट और डर से कांप रहे थे।
“तो… फिर बाहर चलें?” मेघा ने महसूस किया कि उसका दिल सीने को चीरकर बाहर आने को बेताब था। यह धड़कन सिर्फ पकड़े जाने के डर की वजह से नहीं थी; इसमें एक अजीब सा आकर्षण था, एक ऐसा मीठा नशा जो उसने अपनी जिंदगी में पहले कभी महसूस नहीं किया था।
“अगर हम अभी बाहर गए… तो शायद यह खूबसूरत जादू टूट जाएगा,” आशीष ने बेहद मखमली और भारी आवाज में कहा। उसने अपने दूसरे हाथ से मेघा के नरम गाल को छुआ और अपनी उंगलियों को धीरे से फेरा। मेघा ने एक मीठी सिहरन के साथ अपनी आँखें मूँद लीं। उस छुअन में एक तरह का अद्भुत सुकून था, एक ऐसा अपनापन जो इस नए शहर और नए परिवार में मेघा के लिए सबसे बड़ा सहारा बन रहा था।
“आशीष… यह गलत है,” मेघा ने बहुत धीमी आवाज में कहा, हालांकि उसने आशीष को खुद से दूर धकेलने की कोई कोशिश नहीं की।
“प्यार, परवाह और किसी का साथ देना कभी गलत नहीं होता, भाभी,” आशीष ने झुककर उसके माथे पर अपने होंठ रख दिए। वह एक बहुत ही पावन, कोमल और सच्चा चुंबन था—जिसमें कोई मलिनता या वासना नहीं थी, बल्कि एक-दूसरे के प्रति अटूट लगाव, सुरक्षा की भावना और गहरी इज़्ज़त थी।
मेघा ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और आशीष के सीने पर अपनी हथेली रखकर उसे हल्का सा पीछे धकेला। “हमारी ‘सीक्रेट रेसिपी’ ठंडी हो रही है… और जल भी सकती है।”
आशीष के चेहरे पर फिर से वही पुरानी, दिलकश और नटखट मुस्कान वापस आ गई। “जो हुज़ूर! आपकी डिश से बढ़कर मेरे लिए कुछ नहीं।”
Devar Bhabhi Love Story खट्टी-मीठी नोक-झोंक और पहला निवाला
दोनों दबे पाँव स्टोर-रूम से बाहर आए। माहौल में जो एक अजीब सा भारीपन और खिंचाव आ गया था, उसे आशीष ने अपनी नटखट बातों से तुरंत हल्का कर दिया। उसने पैन से गरमा-गरम, सुनहरी सेकी हुई चॉकलेट-ब्रेड डिस्क निकाली और एक चीनी मिट्टी की प्लेट में करीने से सजाकर मेघा के आगे रख दी।
“लीजिए महारानी जी! पेश है शेफ आशीष की विश्व प्रसिद्ध ‘द सीक्रेट रेसिपी’। अब इसे खाकर बताइए कि आपके इस नाचीज़ देवर को दुनिया के सबसे बेहतरीन शेफ का खिताब मिलना चाहिए या नहीं?”
मेघा ने चम्मच उठाया और उस गर्म डिस्क का एक छोटा सा टुकड़ा तोड़ा। ब्रेड के कटते ही अंदर से पिघली हुई गाढ़ी चॉकलेट बहकर बाहर आ गई। जैसे ही मेघा ने वह पहला निवाला अपने मुंह में रखा, स्वाद का एक अद्भुत विस्फोट सा हुआ। मक्खन का हल्का नमकीन स्वाद, बाहर से क्रिस्पी ब्रेड, दालचीनी की भीनी खुशबू और अंदर से बहती हुई गर्म, मीठी चॉकलेट!
“ओह माय गॉड! आशीष… यह तो वाकई में कमाल है! अद्भुत!” मेघा की आँखें खुशी और स्वाद के मारे चमक उठीं।
“कहा था न मैंने? मेरा मुकाबला इस पूरे देहरादून शहर में कोई नहीं कर सकता,” आशीष ने गर्व से अपनी कॉलर ऊपर करने का नाटक किया।
“अच्छा-अच्छा, ज्यादा हवा में उड़ने की जरूरत नहीं है,” मेघा ने हँसते हुए एक और टुकड़ा तोड़ा और आशीष के मुंह की तरफ बढ़ाया। “लो, तुम भी चखकर देखो कि तुमने क्या कलाकारी की है।”
आशीष ने खुद हाथ लगाने के बजाय अपना मुंह और आगे कर दिया, “जब शेफ इतना महान हो, तो उसे अपने हाथों से नहीं खाना चाहिए। असिस्टेंट का फर्ज़ है कि वह शेफ को अपने हाथों से खिलाए!”
“तुम सच में बहुत बड़े बदमाश हो,” मेघा ने अपना सिर हिलाया और मुस्कराते हुए वह टुकड़ा आशीष के मुंह में डाल दिया।
आशीष ने निवाला खाते-खाते जानबूझकर मेघा की उंगलियों को हल्का सा अपने दांतों के बीच दबा लिया। मेघा ने झटके से अपना हाथ पीछे खींचा और उसकी आँखें हैरानी से फैल गईं।
“आशीष”
“अरे-अरे! गलती से हो गया भाभी, मेरा पूरा ध्यान सिर्फ डिश के स्वाद पर था!” आशीष ने मासूमियत का झूठा नाटक करते हुए कहा और ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगा, अपनी हथेली से मुंह ढँककर।
मेघा भी अपने इस नकली गुस्से को ज्यादा देर तक नहीं बनाए रख सकी। उसने बदला लेने के लिए किचन के काउंटर पर रखा थोड़ा सा चॉकलेट सिरप अपनी उंगली पर लगाया और सीधे आशीष की नाक की नोक पर लगा दिया।
“ये लो! तुम्हारे इतना बड़ा मास्टर शेफ होने का असली इनाम!” मेघा खिलखिलाकर हँस पड़ी।
“अच्छा! तो अब जंग का ऐलान हो ही गया है?” आशीष ने भी तुरंत थोड़ा सा बटर अपनी उंगली पर लिया और मेघा के बाएँ गाल पर एक छोटा सा टीका लगा दिया।
“आशीष, नहीं! मेरी स्किन खराब हो जाएगी, पागल!”
“अब तो जो होना था हो गया!”
दोनों किचन के छोटे से दायरे में ही एक-दूसरे के पीछे धीरे-धीरे, बिना आवाज़ किए भागने लगे। हंसी, नोक-झोंक, एक-दूसरे को तंग करने की होड़ और दबी हुई सिसकियों से वो रात पूरी तरह गुलज़ार हो चुकी थी। जो किचन कुछ देर पहले बिल्कुल सुनसान, ठंडा और बेजान था, अब वहाँ दो मासूम दिलों की गर्माहट, हंसी और एक बेहद मीठे रिश्ते की महक तैर रही थी।
बारिश, अलविदा और एक नया अहसास
प्लेट पूरी तरह खाली हो चुकी थी। घड़ी में अब रात के ढाई बज रहे थे।
“अब हमें सच में अपने-अपने कमरों में चलना चाहिए, वरना सुबह मम्मी जी जब जगेंगी तो हमें इसी हाल में पकड़ लेंगी,” मेघा ने टिशू पेपर से आशीष की नाक पर लगी चॉकलेट पोंछते हुए कहा।
“बात तो आपकी बिल्कुल सही है। वैसे, कैसी लगी आपको आज की यह एडवेंचरस रात?” आशीष ने मेघा की आँखों में गहराई से झांकते हुए पूछा।
मेघा ने थोड़ी देर रुककर आशीष को देखा। उसके दिल में आशीष के लिए एक बहुत ही खास और पावन जगह बन चुकी थी। वह अच्छी तरह जानती थी कि यह रिश्ता मर्यादा, इज्जत और समाज की सीमाओं की डोर से बँधा है, लेकिन इस डोर में जो मिठास और अपनापन था, वह किसी भी रिश्ते से कम नहीं था।
आशीष उसके लिए सिर्फ एक देवर नहीं था, वह उसका सबसे अच्छा दोस्त था, उसका हमराज था, और इस अजनबी शहर में उसका सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम था।
“आज की रात… मेरी जिंदगी की सबसे हसीन और यादगार रातों में से एक थी,” मेघा ने पूरे दिल से कहा। “थैंक यू सो मच, आशीष।”
“थैंक यू की कोई जरूरत नहीं है भाभी। बस एक बात याद रखिएगा… जब भी आपका दिल उदास हो, समीर भाई की याद सताए, या आधी रात को मीठा खाने की तीखी तलब हो… तो याद रखिएगा, आपका यह पर्सनल शेफ देवर सिर्फ एक आवाज की दूरी पर है।”
दोनों ने किचन का सामान वापस जगह पर रखा, साफ-सफाई की और टॉर्च बंद करके बाहर निकले। अपने-अपने कमरे के दरवाजे पर पहुँचकर दोनों एक पल के लिए रुके। एक-दूसरे की तरफ देखा।
“गुड नाइट, आशीष,” मेघा ने बहुत ही मीठी आवाज़ में कहा।
“गुड नाइट, मेरी सीक्रेट शेफ भाभी,” आशीष ने मुस्कुराकर कहा और अपने कमरे में चला गया।
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Devar Bhabhi Love Story
मेघा अपने कमरे में आई और सीधे खिड़की के पास जाकर खड़ी हो गई। बाहर देहरादून की मूसलाधार बारिश अब हल्की, भीनी-भीनी फुहारों में बदल चुकी थी। ठंडी हवा के झोंके खिड़की से अंदर आकर उसके चेहरे को सहला रहे थे, लेकिन उसके दिल के अंदर एक नई, अनोखी और बेहद खूबसूरत गर्माहट थी।
उसने अपने गाल को छुआ, जहाँ कुछ देर पहले आशीष की उंगलियों का स्पर्श हुआ था। उसके होठों पर एक ऐसी दिलकश मुस्कान तैर गई, जो शायद उसने समीर के जाने के बाद से कभी नहीं मुस्कुराई थी।
उसे अहसास हो गया था कि इस बड़े से घर में, पहाड़ों और बारिश से घिरे इस खूबसूरत देहरादून में, वह अब खुद को कभी अकेली नहीं पाएगी। उसके पास अपनी जिंदगी की एक ‘सीक्रेट रेसिपी’ थी- आधी रात की वो चॉकलेट ब्रेड, और एक ऐसा देवर जो बिना कहे उसकी हर खामोशी को पढ़ना जानता था। Devar Bhabhi Love Story
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