True Love Story: अगर आप, यूपी के मेरठ के अहमदनगर की गली नंबर-2 में खड़े होकर किसी से ‘एंपायर टेलर्स’ का पता पूछेंगे, तो सामने वाला अपनी साइकिल रोककर आपको पूरा इतिहास समझा देगा।
हाजी जाहिद साहब पिछले चालीस साल से कैंची चला रहे हैं। उनके दोनों बेटे, शाहवेज और शाजेब, और उनकी बेटी रिम्शा- सब इसी सिलाई-कढ़ाई और कपड़ों के ताने-बाने के बीच बड़े हुए।
शाहवेज संभालता था अहमदनगर वाली ब्रांच। काम बढ़िया था, जिंदगी सेट थी। छह साल पहले शाहवेज का निकाह किदवईनगर की निदा उर्फ सोनी (28) से हुआ था। निदा खूबसूरत थी, चुलबुली थी, और उसे अपनी खूबसूरती का पूरा अहसास था।
दो बच्चे भी हो गए, लेकिन निदा की रूह में एक अजीब सी बेकरारी थी, जो सिलाई मशीनों की खट-खट और मेरठ की इस संकरी गली में कहीं गुम होकर रह गई थी।
तभी इस True Love Story में एंट्री होती है ओवेश की।
ओवेश ऑनलाइन कपड़ों का बिजनेस करता था। अब देखिए, ‘प्यार का पंचनामा’ का पहला नियम यहाँ लागू होता है: “जब कोई लड़का बहुत ज्यादा स्मार्ट बनकर आपके घर बार-बार आने लगे, तो समझ लो कि वह सिर्फ कपड़ों का ऑर्डर लेने नहीं आ रहा है।”
ओवेश का शाहवेज के घर आना-जाना बढ़ा। वह शाहवेज का साला बनने की लाइन में था, लेकिन असल में उसका निशाना कहीं और था। वह शाहवेज की बहन रिम्शा (25) से शादी करना चाहता था, लेकिन उसका दिल शाहवेज की बीवी यानी अपनी होने वाली भाभी निदा पर आ चुका था। चार साल तक यह लुका-छिपी का खेल चलता रहा। शाहवेज बेचारा दुकान पर ग्राहकों के नाप लेता रहा, और इधर ओवेश उसकी जिंदगी का नाप ले रहा था।
आठ महीने पहले, बड़े धूमधाम से रिम्शा का निकाह ओवेश से करा दिया गया। हाजी जाहिद साहब को लगा, “वाह! दामाद भी मिल गया और बिजनेस पार्टनर भी।” उन्हें क्या पता था कि उन्होंने अपने घर में एक ऐसा ‘कबाड़ा’ कर लिया है जिसकी मरम्मत कोई टेलर नहीं कर सकता।

True Love Story द ग्रेट इंडियन वेडिंग और उसके साइड इफेक्ट्स
शादी के बाद रिम्शा करीमनगर चली गई, जो अहमदनगर से महज तीन किलोमीटर दूर था। तीन किलोमीटर की दूरी कुछ भी नहीं होती, खासकर तब जब आपका पति आपकी ही भाभी के ख्यालों में खोया रहता हो।
रिम्शा कोई बेवकूफ लड़की नहीं थी। उसे शादी के पहले हफ्ते में ही समझ आ गया था कि ओवेश का फोन साइलेंट पर क्यों रहता है, वह देर रात तक व्हाट्सएप पर किससे चैट करता है, और जब भी वह मायके जाने की बात करती है, तो ओवेश का चेहरा ईद के चांद की तरह क्यों खिल उठता है।
एक दिन रिम्शा ने ओवेश का फोन चेक कर लिया। चैट देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
वहाँ लिखा था: “आज शाहवेज दुकान पर देर तक रहेगा, तुम आ रहे हो ना?” भेजने वाली कोई और नहीं, उसकी अपनी प्यारी भाभी निदा थी।
रिम्शा का माथा ठनका। उसने ओवेश के सामने यह मुद्दा उठाया। ओवेश ने वही क्लासिक मर्द वाला बहाना बनाया:
“अरे यार रिम्शा! तुम शक की दुकान हो। वह तुम्हारी भाभी हैं, मेरी साली साहिबा हैं। हम बस बिजनेस की बातें कर रहे थे। अब ऑनलाइन कपड़ों के काम में डिजाइन तो डिस्कस करने ही पड़ते हैं ना? तुम लड़कियों की यही दिक्कत है, हर बात में अफेयर ढूंढ लेती हो!”
रिम्शा चुप हो गई, लेकिन उसका अंदरूनी ‘पंचनामा’ चालू था। वह जानती थी कि जहाँ धुआँ है, वहाँ आग जरूर लगी है। और यह आग उसके अपने ही मायके और ससुराल के बीच दहक रही थी।

True Love Story ब्लैक संडे: 12 जुलाई, दोपहर 3:30 बजे
12 जुलाई का दिन था, रविवार। मेरठ में उमस भरी गर्मी थी। हाजी जाहिद साहब और शाहवेज अपनी दुकानों पर थे। रिम्शा अपने मायके आई हुई थी। घर में एक अजीब सा सन्नाटा था।
रिम्शा पानी पीने के लिए रसोई की तरफ बढ़ी। तभी उसने देखा कि निदा कोने में खड़ी होकर दबी आवाज में फोन पर बात कर रही है। रिम्शा के कान खड़े हो गए। आवाज ओवेश की थी। निदा कह रही थी, “हाँ, वो आज घर आई हुई है… चिढ़ती रहती है… तुम फिक्र मत करो…”
रिम्शा के दिमाग का फ्यूज उड़ गया। चार साल का गुस्सा, आठ महीने की घुटन और एक पत्नी का अपमान- सब मिलकर उसके सिर पर सवार हो गए। वह सीधे रसोई में घुसी और निदा के सामने खड़ी हो गई।
“भाभी! ये क्या बकवास है?” रिम्शा की आवाज कांप रही थी।
निदा ने हड़बड़ाकर फोन काटा, लेकिन तुरंत खुद को संभाल लिया। उसने अपने चेहरे पर वही चिरपरिचित ‘भाभी’ वाला दबदबा वापस लाया। “क्या बकवास है रिम्शा? फोन पर बात करना भी गुनाह है क्या?”
“मुझे सब पता है भाभी। आप और ओवेश… चार साल से चल रहा है यह सब। मैं अब तक चुप थी क्योंकि मैं तमाशा नहीं चाहती थी। लेकिन अब हद हो गई है। मेरी शादीशुदा जिंदगी बर्बाद मत करो। मेरे पति का पीछा छोड़ दो!” रिम्शा ने चिल्लाते हुए कहा।
अब यहाँ निदा ने वो गलती कर दी जो इस पूरी कहानी का ‘टर्निंग पॉइंट’ बन गई। अगर वह रो पड़ती या माफी मांग लेती, तो शायद आज वह जिंदा होती। लेकिन उसने वो डायलॉग मार दिया जो किसी भी औरत के आत्मसम्मान को तार-तार कर दे।
निदा ने मुस्कुराते हुए, बेहद ठंडे लहजे में कहा:
“पीछा छोड़ दूँ? अरे रिम्शा, पहले अपने पति को संभालना सीखो! वह खुद मेरे पीछे भागता है। जब मर्द अपनी बीवी से संतुष्ट नहीं होता, तभी बाहर मुंह मारता है। दूसरों पर आरोप बाद में लगाना, पहले खुद को आइने में देखो।”
यह सुनना था कि रिम्शा के अंदर की सारी सहनशीलता खत्म हो गई। ‘अपने पति को संभालो’—यह वाक्य उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह गूंजने लगा।
रसोई के प्लेटफॉर्म पर सब्जी काटने वाला तेज चाकू रखा था। रिम्शा ने आव देखा न ताव, चाकू उठाया और सीधे निदा के सीने पर दे मारा।
“आह!” निदा के मुंह से सिर्फ इतनी ही चीख निकली। लेकिन रिम्शा पर खून सवार था। उसने एक, दो, तीन… सीने, हाथ और गले पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए। निदा फर्श पर गिर पड़ी। खून का फव्वारा छूटा और रसोई का सफेद फर्श लाल रंग से रंग गया। दोपहर के ठीक 3:30 बजे, कुछ ही मिनटों में निदा की सांसें थम गईं।

True Love Story द ग्रेट एस्केप
चीख-पुकार और हड़बड़ाहट की आवाज सुनकर घर के बाकी लोग दौड़कर रसोई में पहुंचे। दृश्य देखकर सबके होश उड़ गए। निदा खून से लथपथ पड़ी थी, और रिम्शा हाथ में खून से सना चाकू लिए बुत बनी खड़ी थी।
इस True Love Story मेंअब शुरू हुआ असली पारिवारिक ड्रामा।
भारतीय परिवारों में इज्जत का सवाल सबसे बड़ा होता है। अगर पुलिस आई, तो बेटी जेल जाएगी, दामाद का नाम उछलेगा, और खानदान की चालीस साल पुरानी इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी।
हाजी जाहिद और शाहवेज ने तुरंत एक प्लान बनाया। वे निदा को अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से लौटकर उन्होंने पुलिस को एक मनगढ़ंत कहानी सुनाई:
“साहब, निदा रसोई में काम कर रही थी। अचानक पैर फिसलने से वह फर्श पर गिर गई और किसी नुकीली चीज से उसे गहरी चोट आ गई। बस, इसी वजह से उसकी जान चली गई।”
घर साफ कर दिया गया। खून के धब्बे धो दिए गए। लेकिन हत्या के सबूत इतनी आसानी से नहीं मिटते।
उधर, पड़ोसियों को दाल में कुछ काला लगा। दोपहर के वक्त चीखने की आवाजें और फिर अचानक एम्बुलेंस का आना—कुछ तो गड़बड़ था। किसी पड़ोसी ने चुपके से किदवईनगर में निदा के मायके वालों को फोन कर दिया: “भैया, तुम्हारी बेटी के साथ ससुराल में कुछ बहुत गलत हो गया है। जल्दी आओ।”
जब निदा की मां और भाई अहमदनगर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए। निदा का शव फर्श पर पड़ा था। गिरने से मौत की कहानी बताने वालों के झूठ को निदा का शरीर खुद झुठला रहा था। उसके गले पर गहरे घाव थे, हाथ-पैर पर हाथापाई के निशान थे।周围 काफी खून फैला था।
“यह हादसा नहीं है! मेरी बेटी का कत्ल हुआ है!” निदा की मां दहाड़ मारकर रो पड़ीं। तुरंत पुलिस को फोन किया गया। सीओ कोतवाली संग्राम सिंह और लिसाड़ी गेट थाने की पुलिस बल मौके पर पहुंच गई।

True Love Story पुलिस पूछताछ और वो दो काली रातें
शुरुआत में रिम्शा ने भी पुलिस को वही रटी-रटाई कहानी दोहराई: “भाभी फर्श पर गिर गई थीं।” पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन रिम्शा के अंदर एक और जंग चल रही थी। कहा जाता है कि कत्ल करना आसान हो सकता है, लेकिन उसके बाद की रातों को काटना सबसे मुश्किल काम है।
मंगलवार (14 जुलाई) को रिम्शा से और बर्दाश्त नहीं हुआ। वह खुद चलकर लिसाड़ी गेट थाने पहुंची। थाने के उस छोटे से, सीलन भरे कमरे में जब सीओ संग्राम सिंह ने रिम्शा के सामने पानी का गिलास रखा, तो उसके हाथ कांप रहे थे। दो दिनों से उसने एक निवाला भी गले से नीचे नहीं उतारा था। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे साफ बता रहे थे कि इन 48 घंटों में वह जीती जागती लाश बन चुकी थी।
सीओ संग्राम सिंह ने डायरी खोली, “रिम्शा, तुमने कत्ल तो कर दिया, लेकिन दो दिन तक इस राज को दबाकर क्यों बैठी रहीं? और अचानक आज ऐसा क्या हुआ कि खुद यहाँ चली आईं?”
रिम्शा ने सूखी हुई जीभ से अपने होठों को छुआ और एक ठंडी सांस ली। उसका ‘पंचनामा’ अब पुलिस के सामने था:
“सर, कत्ल तो सिर्फ एक सेकंड का गुस्सा था… असली सजा तो उसके बाद शुरू हुई। मुझे रातभर नींद नहीं आई। रविवार की रात जब घरवाले सब कुछ साफ करके पुलिस को दुर्घटना की झूठी कहानी सुना रहे थे, तब मुझे लग रहा था कि मैं बच गई। लेकिन जैसे ही रात के बारह बजे, घर में सन्नाटा पसरा, असली नर्क शुरू हुआ।
मैं जिस कमरे में सो रही थी, वहां हर कोने से मुझे निदा भाभी के हंसने की आवाज आ रही थी। वो आवाजें मुझसे कह रही थीं—’देख लिया रिम्शा? तुमने मुझे तो मार दिया, लेकिन क्या अपने पति का दिल जीत पाई? क्या अब ओवेश तुम्हारा हो गया?’
True Love Story
मुझे लगा मैं पागल हो जाऊँगी। मैंने कान बंद कर लिए, तकिया मुंह पर रख लिया, लेकिन भाभी के वो आखिरी शब्द मेरे कानों में हथौड़े की तरह बज रहे थे—’पहले अपने पति को संभालो!’ सर, यह सिर्फ एक ताना नहीं था, यह मेरी जिंदगी की सबसे कड़वी सच्चाई थी जिसे उन्होंने मेरे मुंह पर दे मारा था। मैं उस औरत के कत्ल के बाद भी उससे हार गई थी।”
रिम्शा ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि कैसे सोमवार की पूरी रात उसने बिना पलक झपकाए दीवार को घूरते हुए काटी थी। जब भी वह आँखें बंद करती, उसे फर्श पर बहता हुआ खून किसी लाल नदी की तरह अपनी तरफ खींचता हुआ महसूस होता।
उसे लगने लगा था कि अगर वह जेल नहीं गई, तो वह अपने ही घर में खुदकुशी कर लेगी। उसने पुलिस को बताया:
“सर, मुझे ओवेश से नफरत हो गई है। जिस मर्द के लिए मैंने अपने हाथों को खून से रंगा, वह सोमवार सुबह मुझसे नजरें चुरा रहा था। उसके चेहरे पर अपनी प्रेमिका को खोने का दुख था, अपनी पत्नी के लिए हमदर्दी नहीं। वह मुझसे ऐसे डर रहा था जैसे मैं कोई चुड़ैल हूँ।
तब मुझे समझ आया कि इस पूरे खेल में मोहरा सिर्फ मैं और भाभी बने, ओवेश तो अपनी टी-शर्ट का कॉलर सीधा करके आज भी साफ बच निकला। मुझे पुलिस की लाठी मंजूर थी सर, लेकिन उस घर की खामोशी और ओवेश का वो डरपोक चेहरा मंजूर नहीं था। इसलिए मैं खुद यहाँ आ गई।”

True Love Story : पुलिस का हंटर और आधिकारिक वर्जन
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रिम्शा को गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर रसोई का वो खून से सना चाकू भी बरामद कर लिया गया, जिसे घर के मसालों के पीछे छिपाकर रखने की नाकाम कोशिश की गई थी।
जैसे ही यह खबर फैली, अहमदनगर और करीमनगर में हड़कंप मच गया। जिस इज्जत को बचाने के लिए पूरे परिवार ने झूठ का ताना-बाना बुना था, वह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस खुलासे के बाद किदवईनगर वाले मायके वाले गुस्से से उबल रहे थे, वहीं कानून के डर से मृतका का पति शाहवेज, ससुर हाजी जाहिद और बाकी ससुरालवाले घर पर ताला लगाकर फरार हो गए।
सीओ संग्राम सिंह ने बताया कि-
जांच और तकनीकी साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि मृतका की अपने ननदोई से बढ़ती नजदीकियों को लेकर रिम्शा नाराज थी। घटना वाले दिन इसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद रिम्शा ने रसोई से चाकू उठाकर निदा पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
True Love Story इस पूरी कहानी का सार क्या निकला?
लड़कियां कहती हैं कि मर्द धोखेबाज होते हैं। मर्द कहते हैं कि लड़कियां पैसों के पीछे भागती हैं। लेकिन इस मेरठ की कहानी ने एक नया ही एंगल दे दिया। यहाँ ‘पति’ महोदय अपनी पत्नी को छोड़कर अपनी ही भाभी के साथ ‘ऑनलाइन बिजनेस’ के बहाने प्यार का ताना-बाना बुन रहे थे। भाभी साहिबा ‘अपने पति को संभालो’ का ज्ञान दे रही थीं। और ननद साहिबा ने सीधे किचन का चाकू निकालकर ‘इंसाफ’ कर दिया।
नतीजा?
भाभी कब्र में। ननद जेल में। ससुर और पति पुलिस से भागते फिर रहे हैं। और ओवेश? ओवेश भी बचता फिर रहा है एक ना एक दिन तो पकड़ा ही जाएगा। लहूलुहान इश्क की इस कहानी का मेरठ चैप्टर यहीं बंद होता है। सबक यही है: जब किचन में चाकू उठाने का मन करे, तो सब्जी काटो भाई… रिश्ते नहीं।
(पूरी कहानी, पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर) True Love Story
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