Devar Bhabhi Love Story: हरियाणा के सोनीपत जनपद के अंतर्गत आने वाले गाँव झारागढ़ी की सुबह अमूमन बेहद शांत और सलीके वाली होती थी। सूरज की पहली किरण के साथ ही गाँव के एक सीधे-सादे घर से लकड़ी छीलने, काटने और उस पर रंदा चलाने की हल्की-हल्की आवाजें गूँजने लगती थीं। यह घर शाहनवाज का था।
शाहनवाज पेशे से एक बेहद हुनरमंद, मेहनती और ईमानदार फर्नीचर कारीगर था। दिनभर सागौन और शीशम के तख्तों को तराशना, उन्हें खूबसूरत शक्लों में ढालना और शाम को एक थकी हुई मगर बेहद सुकून भरी मुस्कान के साथ घर लौटना- यही उसकी कुल कायनात थी।
उसकी इस शांत और सीधी जिंदगी में रंग भरने वाली थी महफरीन। उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के कांधला क्षेत्र के गाँव गढ़ी दौलत की रहने वाली महफरीन बेहद खूबसूरत, चुलबुली और कजरारी आँखों वाली महिला थी।

Devar Bhabhi Love Story: साल 2016 में जब दोनों का निकाह हुआ, तो शाहनवाज को लगा जैसे उसे दुनिया की सबसे बड़ी नेमत मिल गई हो। नौ साल का वक्त किसी ख्वाब की तरह गुजर गया। इस दौरान उनके आंगन में दो बच्चों की किलकारियां गूँजीं- बड़ा बेटा करीब आठ साल का हो चुका था और छोटा चार साल का।
शाहनवाज अपनी इस छोटी सी दुनिया में बेहद खुश था। जब वह शाम को दुकान से लौटता, तो महफरीन मुस्कुराकर उसे पानी का गिलास थमाती, उसके कंधे थपथपाती और दिनभर की बातें साझा करती। शाहनवाज को लगता कि एक आम इंसान को जिंदगी से और क्या चाहिए। लेकिन वह इस बात से अनजान था कि वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता, और कभी-कभी सबसे गहरे जख्म अपने ही दे जाते हैं।
रिश्तेदारों का आना-जाना तो हर परिवार में लगा ही रहता था। इसी सिलसिले में शाहनवाज के मामा का लड़का तसव्वुर उर्फ तस्सवर भी अक्सर उनके घर आने-जाने लगा। तसव्वुर वैसे तो शामली के कैराना का रहने वाला था, लेकिन फिलहाल वह बागपत के सरूरपुर में रह रहा था। लंबा-चौड़ा कद, कसी हुई गबरू जवान जैसी देह, आँखों में एक अजीब सी चमक और बात करने में गजब का शायराना मिजाज- तसव्वुर जब भी झारागढ़ी आता, घर का माहौल पूरी तरह बदल जाता था।

Devar Bhabhi Love Story- रसोई की आंच और देवर–भाभी का मिजाज
देवर और भाभी का रिश्ता वैसे भी समाज में हंसी-मजाक और थोड़ी बहुत शरारत का माना जाता है। तसव्वुर जब भी आता, वह शाहनवाज के साथ बैठने के बजाय रसोई के चक्कर ज्यादा काटता। वह महफरीन के काम-काज में हाथ बंटाने के बहाने उसके करीब आने की कोशिश करता।
एक दोपहर बाहर चिलचिलाती धूप थी और लू चल रही थी। रसोई में महफरीन पसीने से तर-बतर होकर चूल्हे के सामने रोटियां सेंक रही थी। उसका पल्लू बार-बार सरक जाता, जिसे वह अपनी कोहनी से संभालती। तसव्वुर दबे पांव रसोई की चौखट पर आकर टिक गया। उसने हाथ में एक छोटा सा पंखा लिया और महफरीन की तरफ हवा करने लगा।
“अरे तसव्वुर! तुम यहाँ रसोई में क्या कर रहे हो? जाओ बाहर जाकर बैठो, भाई के पास। यहाँ बहुत गर्मी है, तुम्हारा दम घुट जाएगा,” महफरीन ने तवे पर रोटी पलटते हुए मुस्कुराकर कहा।
तसव्वुर ने मखमली नजरों से महफरीन के गोरे चेहरे को देखा, जिस पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें मोतियों की तरह चमक रही थीं। उसने अपनी आवाज को थोड़ा धीमा और गहरा करते हुए कहा, “भाभी, जहाँ चांद खुद तवे के सामने बैठकर रोटियां सेंक रहा हो, वहाँ इस अदने से सूरज की गर्मी का क्या अहसास? वैसे, सच बताएं तो सोनीपत की इस तपती दोपहर में अगर कोई राहत है, तो बस आपके हाथ की बनी चाय और ये कजरारी आँखें।”
महफरीन का दिल अंदर तक सिहर गया। ऐसा नहीं था कि शाहनवाज उसकी तारीफ नहीं करता था, लेकिन शाहनवाज की बातें सीधी और घरेलू होती थीं। तसव्वुर के शब्दों में जो नशा था, जो लहर थी,
उसने महफरीन के भीतर सोई हुई एक अजनबी औरत को जगा दिया था। उसने झूठी नाराजगी दिखाते हुए चिमटा हवा में लहराया, “चल हट बदमाश! ज्यादा मक्खन मत लगा। अपनी होने वाली बीवी के लिए बचा के रख ये अपनी शायरियां। मेरी उम्र तो अब बच्चों को संभालने की है।”
“बीवी तो जब आएगी तब आएगी भाभी, पर खुदा ने हुस्न की जो कशिश और जो सलीका आपको दिया है, उसके आगे तो दुनिया की सारी हूरें पानी भरें,” तसव्वुर ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए महफरीन की आँखों में सीधे झांका।
महफरीन ने हड़बड़ाकर नजरें झुका लीं, पर उसके गालों पर आई लाली और होंठों पर तैरती हल्की सी मुस्कान तसव्वुर की तारीफ का पूरा असर बयां कर रही थी। शाहनवाज अक्सर कमरे के बाहर हुक्का गुड़गुड़ाते हुए या अपनी लकड़ी के काम में मग्न रहते हुए इन दोनों की हंसी-मजाक की आवाजें सुन लेता था। वह मुस्कुरा देता।
उसके मन में कोई मैल नहीं था। वह सोचता था कि तसव्वुर उसका छोटा भाई है और महफरीन उसकी भाभी, देवर-भाभी में इस तरह की नोक-झोंक तो आम बात है। अपनों के बीच अगर थोड़ी हंसी-मजाक न हो, तो फिर रिश्तों का सूनापन कैसे दूर होगा?

Devar Bhabhi Love Story: पनपता हुआ अंधा इश्क
वक्त बदला और तसव्वुर के आने-जाने के सिलसिले के साथ-साथ उनके बात करने का ढंग भी पूरी तरह बदलने लगा। पिछले करीब छह महीनों से महफरीन और तसव्वुर के बीच नजदीकियां कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थीं।
अब तसव्वुर सिर्फ शाहनवाज की मौजूदगी में ही बात नहीं करता था। एक दिन जब शाहनवाज दुकान के लिए लकड़ी खरीदने शहर गया था, तसव्वुर ने मौका पाकर महफरीन का मोबाइल नंबर अपने फोन में सेव कर लिया।
शुरुआत में तो बातें बहुत साधारण थीं- “भाभी, भाई दुकान पर चले गए क्या?”, “भाभी, बच्चों ने खाना खाया या नहीं?” लेकिन धीरे-धीरे इन सामान्य सवालों की जगह गहरी और व्यक्तिगत बातों ने ले ली।
अब शाहनवाज जैसे ही सुबह 9 बजे अपनी दुकान के लिए निकलता, महफरीन घर के सारे काम फटाफट निपटाती, बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेजती और अंदर से दरवाजा बंद करके सीधे तसव्वुर का नंबर डायल कर देती।
एक सुहानी दोपहर, जब खिड़की से ठंडी हवा आ रही थी, महफरीन बिस्तर पर तकिये को बांहों में भींचे लेटी थी। फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर तसव्वुर का नाम चमक रहा था। महफरीन ने धड़कते दिल से फोन कान से लगाया।
“हाँ तसव्वुर, इस वक्त फोन किया? सब खैरियत तो है ना?” महफरीन ने अपनी आवाज को जितना हो सके धीमा रखते हुए पूछा।
“खैरियत तो सब है मेरी जान, बस इस दिल को चैन नहीं था। आज सुबह से तुम्हारी बहुत याद आ रही थी। ऐसा लग रहा था कि अगर तुम्हारी आवाज नहीं सुनी, तो सांसें रुक जाएंगी,” दूसरी तरफ से तसव्वुर की आवाज में रोमांस का एक ऐसा तूफान था जो महफरीन को बहा ले जाने के लिए काफी था।
महफरीन का बदन सिहर उठा, उसने शरमाते हुए कहा, “क्या कुछ भी बोलते रहते हो तसव्वुर! कोई सुन लेगा तो क्या कहेगा? और ये ‘जान’ क्या होता है? मैं तुम्हारी भाभी हूँ।”
“रिश्ते तो दुनिया बनाती है महफरीन, पर दिल के रिश्ते खुदा तय करता है,” तसव्वुर ने पूरी हिम्मत जुटाई, “मैं यह सब किसी मजाक में नहीं कह रहा, दिल की गहराइयों से कह रहा हूँ। रब करे आपको किसी की नजर ना लगे। मैं तुम्हारे बगैर अब एक पल भी नहीं रह सकता। भाभी… मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ। तुम्हारी ये खामोशी, तुम्हारा यह शर्माना मुझे पागल कर देता है।”
Devar Bhabhi Love Story: तसव्वुर के मुंह से सीधे ‘प्यार’ का इजहार सुनकर महफरीन का दिमाग एक पल के लिए सुन्न हो गया। उसने तुरंत फोन काट दिया। उसका दिल इतनी जोर से धड़क रहा था मानो छाती से बाहर आ जाएगा।
उसे थोड़ा अजीब लगा, मन में समाज का एक डर भी था और शाहनवाज का ख्याल भी, लेकिन साथ ही एक ऐसी उत्तेजना भी थी जिसे उसने अपनी जिंदगी में पहले कभी महसूस नहीं किया था। वह शीशे के सामने खड़ी हुई और खुद को देखने लगी। तसव्वुर की बातों ने उसके भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया था।
यह पाबंदी ज्यादा देर नहीं टिकी। शाम को तसव्वुर का फिर व्हाट्सएप पर मैसेज आया, “नाराज हो क्या मुझसे?” महफरीन ने बहुत सोच-समझकर टाइप किया, “नहीं।” और बस, इसी एक ‘नहीं’ ने उनके बीच के सारे बांध तोड़ दिए। अब दोनों के बीच घंटों बातें होने लगीं।

Devar Bhabhi Love Story: रात के अंधेरे और बंद कमरों की हकीकत
जल्द ही यह इश्क सिर्फ फोन की स्क्रीन और व्हाट्सएप मैसेजेस तक सीमित नहीं रहा। जब भी शाहनवाज किसी बड़े फर्नीचर ऑर्डर के सिलसिले में दो-तीन दिनों के लिए पानीपत या दिल्ली जाने की बात कहता, महफरीन के चेहरे पर एक छुपने वाली खुशी तैर जाती। वह शाहनवाज को बड़े प्यार से विदा करती और उसके जाते ही तुरंत तसव्वुर को संदेश भेज देती, “वह चले गए हैं।”
तसव्वुर भी जैसे इसी मौके के इंतजार में रहता था। वह अपनी बाइक दौड़ाकर रात के अंधेरे में सोनीपत के झारागढ़ी गाँव पहुंच जाता। गाँव की गलियां जब सो जाती थीं, तब शाहनवाज के घर का पिछला दरवाजा धीरे से खुलता था और तसव्वुर अंदर दाखिल हो जाता था।
ऐसी ही एक सावन की रिमझिम बरसात वाली रात थी। शाहनवाज एक ठेकेदार से मिलने पानीपत रुका हुआ था। तसव्वुर जब पूरी तरह भीगा हुआ महफरीन के कमरे में पहुंचा, तो महफरीन ने तौलिया लेकर उसके बाल पोंछने शुरू किए। तसव्वुर ने बिना एक पल गंवाए महफरीन को पीछे से अपनी मजबूत बांहों के घेरे में ले लिया।
“तुम्हें डर नहीं लगता तसव्वुर? अगर गाँव में किसी को भनक लग गई, या भाई अचानक वापस आ गए, तो हमारा क्या होगा?” महफरीन ने उसकी छाती पर अपना सिर टिकाते हुए बेहद धीमी आवाज में पूछा।
तसव्वुर ने महफरीन के चेहरे को अपनी उंगलियों से ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “इश्क में जो डर जाए महफरीन, वह आशिक कैसा? तुम्हारी इन जुल्फों के साये में अगर मुझे मौत भी आ जाए, तो मैं हंसकर गले लगा लूँगा। मुझे अब शाहनवाज की कोई परवाह नहीं है। तुम सिर्फ मेरी हो, और हमेशा मेरी ही रहोगी।”
उस रात बंद कमरे में, खिड़की पर गिरती बारिश की बूंदों के बीच, समाज, लोकलाज, नौ साल के वैवाहिक रिश्ते और दो मासूम बच्चों की मर्यादा को ताक पर रखकर दोनों ने प्यार की तमाम हदें पार कर दीं।
महफरीन अब पूरी तरह से तसव्वुर के हुस्न और उसके रोमांटिक वादों के जाल में अंधी हो चुकी थी। उसे शाहनवाज की मेहनत से कमाई गई सीधी-सादी जिंदगी अब एक जेल जैसी लगने लगी थी, और तसव्वुर उसे उस जेल से आजाद कराने वाला कोई फरिश्ता नजर आता था।

Devar Bhabhi Love Story: शक का बीज और नफरत की चिंगारी
कहते हैं कि इश्क, मुश्क और कत्ल कभी छुपाए नहीं छुपते। महफरीन का हर वक्त फोन में डूबे रहना, शाहनवाज के कमरे में आते ही हड़बड़ाकर फोन काट देना या उसे तकिये के नीचे छुपा लेना- ये सब बातें अब शाहनवाज की पारखी नजरों से बच नहीं पा रही थीं।
शाहनवाज भले ही सीधा था, लेकिन बेवकूफ नहीं था। उसने गौर किया कि महफरीन का ध्यान अब बच्चों पर भी कम रहता था, रसोई में खाना अक्सर जल जाता था और उसकी आँखों में वह पहले जैसा अपनापन नहीं था।
शाहनवाज ने एक-दो बार बेहद शांत रहकर महफरीन को समझाने की कोशिश की। “महफरीन, मैं देख रहा हूँ तुम आजकल फोन पर बहुत व्यस्त रहती हो। घर-परिवार और बच्चों पर ध्यान दो। आखिर क्या बात है जो तुम मुझसे छुपा रही हो?” लेकिन महफरीन हर बार बात को हँसकर टाल देती, “आप तो खामख्वाह शक की बीमारी का शिकार होते जा रहे हैं। मायके में सहेलियों से बात करती हूँ, गाँव के हाल-चाल लेती हूँ।”
पर सच का घड़ा एक दिन फूटना ही था। 3 अगस्त 2025 की रात को वह वाकया हुआ जिसने इस रोमांटिक दास्तान को एक खूनी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। रात के करीब ग्यारह बज रहे थे। शाहनवाज को प्यास लगी तो वह पानी पीने के लिए उठा।
उसने देखा कि महफरीन बिस्तर पर नहीं थी। वह दबे पांव गैलरी की तरफ गया, तो देखा कि महफरीन कोने में खड़ी होकर बेहद धीमी और मदहोश आवाज में फोन पर कह रही थी, “हाँ जान, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ… बस कुछ दिन और…”
शाहनवाज के कानों में जैसे पिघला हुआ सीसा गिर गया। उसने पीछे से जाकर झटके से महफरीन का हाथ मरोड़ दिया। महफरीन के हाथ से फोन छूटकर जमीन पर गिर गया।
“किससे बात कर रही थी इस वक्त? क्या चल रहा है यह सब मेरे घर में?” शाहनवाज का स्वर गुस्से और धोखे के दर्द से कांप रहा था।
महफरीन बुरी तरह सकपका गई, उसका चेहरा सफेद पड़ गया। वह हकलाने लगी, “कुछ नहीं… मैं बस… वह अम्मी का फोन था…”
“झूठ मत बोलो!” शाहनवाज ने गुस्से में जमीन से फोन उठाया। स्क्रीन ऑन थी और कॉल लॉग में तसव्वुर का नंबर साफ दिख रहा था। शाहनवाज ने जब तसव्वुर को खरी-खोटी सुनाने के लिए फोन कान पर लगाया, तो उधर से आवाज आई, “क्या हुआ जान, कट क्यों गया फोन?” वह आवाज तसव्वुर की ही थी।
शाहनवाज के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस भाई जैसे देवर पर उसने भरोसा किया, जिसे अपने घर में इज्जत दी, उसने उसकी पीठ में छुरा घोंपा था। गुस्से और धोखे के अहसास से पागल हुए शाहनवाज ने आपा खो दिया। उसने पहली बार महफरीन पर हाथ उठा दिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। उसने साफ लफ्जों में चेतावनी दी कि अगर आगे से तसव्वुर से कोई वास्ता रखा, तो वह उसे जान से मार देगा या घर से निकाल देगा।
उस रात महफरीन कमरे के कोने में बैठकर सुबकती रही। लेकिन उसकी आँखों से जो आंसू बह रहे थे, वे अपनी गलती के या पछतावे के नहीं थे। उन आंसुओं में अब खौफनाक नफरत और बदले की आग सुलग रही थी। उसे शाहनवाज का हाथ उठाना बर्दाश्त नहीं हुआ था। उसके दिल में शाहनवाज के लिए बचा-कुचा सम्मान भी खत्म हो चुका था। अब वहाँ सिर्फ तसव्वुर के साथ रहने की एक जुनूनी सनक बाकी थी।
Devar Bhabhi Love Story
उसी रात, जब शाहनवाज थककर और टूटकर सो गया, महफरीन ने दबे पांव अपना फोन उठाया और घर के पिछले हिस्से में जाकर तसव्वुर को कॉल मिलाया। उसकी आवाज में जरा भी कपकपाहट नहीं थी, सिर्फ एक सर्द खामोशी थी, “तसव्वुर, अब बहुत हो गया। उसने आज मुझ पर हाथ उठाया है। मैं अब इस इंसान के साथ एक पल भी नहीं रह सकती। अगर हमें हमेशा के लिए एक होना है, तो इसे रास्ते से हटाना ही होगा।”
तसव्वुर भी महफरीन के प्यार में अंधा था। उसने कहा, “तुम फिक्र मत करो महफरीन। जो तुम्हारे इस खूबसूरत जिस्म और दिल को तकलीफ दे, उसे जीने का कोई हक नहीं। बस तुम मेरा साथ देना, मैं उसे हमेशा के लिए सुला दूंगा।” उसी काली रात को, फोन की तरंगों पर एक ऐसी खौफनाक साजिश की पटकथा लिखी गई, जिसका अंदाजा झारागढ़ी के उस घर की दीवारों को भी नहीं था।
Devar Bhabhi Love Story: साजिश की मीठी मुस्कान और आखिरी सफर
अगली सुबह जब सूरज उगा, तो महफरीन का बर्ताव बिल्कुल बदला हुआ था। उसने शाहनवाज के सामने ऐसे नाटक किया जैसे वह अपनी गलती पर शर्मिंदा हो और पिटाई के बाद पूरी तरह सुधर गई हो। उसने रो-रोकर शाहनवाज के पैर पकड़ लिए, “मुझे माफ कर दीजिए, मुझसे बड़ी भूल हो गई थी। अब मैं कभी ऐसा नहीं करूंगी।” शाहनवाज का दिल पिघल गया। उसे लगा कि शायद डर की वजह से महफरीन सही रास्ते पर आ गई है। वह धीरे-धीरे इस बात को भूलकर अपनी सामान्य जिंदगी में लौटने लगा।
तभी मौका आया। 7 अगस्त 2025 को शामली जनपद के गाँव खुरगान निवासी इमलाक की शादी तय थी। इमलाक महफरीन का ममेरा भाई था।
महफरीन ने इस मौके को अपनी खूनी साजिश का जरिया बनाने का फैसला किया। उसने बेहद प्यार से, शाहनवाज की छाती पर अपना सिर टिकाते हुए कहा, “सुनो जी, इमलाक की शादी में जाना है। इस बार हम बस से नहीं जाएंगे। हरियाणा की बसों में आजकल बहुत भीड़ चल रही है।
फिर वहां से गाँव तक पहुँचने के लिए कोई साधन भी नहीं मिलता। बस अड्डे पर खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। इतनी गर्मी में बच्चे और हम परेशान हो जाएंगे। अपनी बाइक से चलेंगे, तो आसानी से और जल्दी पहुँच जाएंगे। रास्ते में हम दोनों अकेले वक्त भी बिता लेंगे।”
Devar Bhabhi Love Story: कैसे गिरी मर्यादा की दीवार: मेरठ के देवर-भाभी की अनकही दास्तान

शाहनवाज उसकी इस मीठी बातों के जाल में आ गया। उसने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हाँ, यह बात तो तुम सही कह रही हो। गर्मी बहुत ज्यादा है और अपना साधन होगा तो सहूलियत रहेगी। एक काम करते हैं, हम एक दिन पहले ही चलेंगे।
काफी दिन हो गए, तुम्हारे परिवार वालों से भी नहीं मिला हूँ। रात को तुम्हारे मायके (गाँव गढ़ी दौलत) चलेंगे, वहाँ रात गुजारेंगे और अगले दिन वहीं से खुरगान के लिए निकल जाएंगे।”
महफरीन के दिल में एक कुटिल मुस्कान दौड़ गई। शाहनवाज अनजाने में खुद ही उस मौत के जाल की तरफ बढ़ रहा था जो उसके लिए बुना गया था। महफरीन ने तुरंत तसव्वुर को इस पूरे प्लान की जानकारी दे दी।
योजना के अनुसार, 6 अगस्त 2025 को शाहनवाज अपनी आन-बान और शान के साथ जमकर खरीदारी करने के बाद, महफरीन को बाइक पर बैठाकर गढ़ी दौलत पहुंच गया। दामाद को आया देख मायके वाले बेहद खुश हुए। शाहनवाज की खूब खातिरदारी हुई। शाहनवाज बेहद खुश था, उसे लग रहा था कि उसकी जिंदगी का संकट टल चुका है।
7 अगस्त की सुबह आई। शाहनवाज ने अपनी बाइक साफ की। उसे दूल्हे के लिए ले जाई जा रही डेढ़ लाख रुपये की नोटों की माला भी संभालनी थी। वह अपनी बीवी महफरीन को बाइक पर बैठाकर गढ़ी दौलत से खुरगान के लिए रवाना हुआ।
रास्ते में कस्बा कैराना में उसने कुछ और जरूरी सामान खरीदा। वह बड़ा खुश नजर आ रहा था, लेकिन बाइक पर उसके पीछे बैठी महफरीन के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।
बाइक जब हाईवे पर तेज रफ्तार से दौड़ रही थी, तो महफरीन ने अपनी बांहें शाहनवाज के पेट के गिर्द कसकर लपेट रखी थीं, जैसे वह उससे बहुत प्यार करती हो। लेकिन असल में वह अपने दुपट्टे के नीचे छुपे फोन से तसव्वुर को पल-पल की लोकेशन कोडवर्ड में दे रही थी। हवा के शोर और बाइक की तेज स्पीड के कारण शाहनवाज कुछ समझ नहीं पा रहा था।

Devar Bhabhi Love Story: मंजिल आने वाली है…
जैसे ही बाइक हाईवे पर एक तय सुनसान जगह के पास पहुंची, महफरीन ने फोन पर धीरे से कहा, ‘मंजिल आने वाली है’। इस कोडवर्ड का मतलब था कि खुरगान रोड बेहद पास है। थोड़ा आगे बढ़ने पर जब एक पुलिया आई, तो उसने फिर से फोन पर फुसफुसाया, ‘पुल पार करो’। इसका मतलब था कि शाहनवाज की बाइक ने पुल पार कर लिया है, अब शूटर पीछे लग जाएं। और ठीक वारदात वाली जगह के पास उसने आखिरी कोडवर्ड कहा, ‘बस थोड़ा इंतजार करो’। यानी अब वह सही समय आ चुका है।
सुबह के करीब दस बज रहे थे। पानीपत-हरिдоступ हाईवे पर जैसे ही वे बेरी के बाग के निकट पहुंचे, पीछे से दो बाइकों पर सवार चार युवकों ने उन्हें ओवरटेक किया। बदमाशों ने शाहनवाज की बाइक में टक्कर मारी और उसे डंडा मारकर गिरा दिया। इससे पहले कि शाहनवाज कुछ समझ पाता, तसव्वुर के भेजे शूटरों ने उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ कई वार किए और एक युवक ने तमंचे से गोली चला दी।
शाहनवाज गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर नीचे गिर गया और तड़पने लगा। इस पूरी वारदात के दौरान, महफरीन एक तरफ चुपचाप खड़ी रही। शाहनवाज ने अपनी आँखों में असहनीय दर्द और गहरे धोखे की झलक लिए, आखिरी बार महफरीन को देखा। शायद उस आखिरी पल में वह सब कुछ समझ गया था। हमलावर शाहनवाज की नोटों की माला और बाइक लूटने का नाटक रचकर फरार हो गए।

Devar Bhabhi Love Story. जेल में खत्म हुई लव स्टोरी
शाहनवाज को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में महफरीन ने खूब रोने और बार-बार बेहोश होने का नाटक किया और अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज कराया। लेकिन कैराना पुलिस को उसकी बातों पर शक हुआ। जब पुलिस ने महफरीन की कॉल डिटेल (CDR) खंगाली, तो वारदात के वक्त तसव्वुर के साथ उसकी लगातार बातचीत और कोडवर्ड्स का भंडाफोड़ हो गया।
पुलिस की कड़ी पूछताछ के आगे महफरीन टूट गई और उसने रोते हुए कुबूल किया, “हाँ, मैंने ही तसव्वुर के प्यार में अंधी होकर शाहनवाज को रास्ते से हटाया। मैं तसव्वुर के बिना नहीं रह सकती थी।“ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महफरीन के प्रेमी तसव्वुर और उसके साथी शोएब को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया। जिस घर में शादी की शहनाइयां बजनी थीं, वहाँ मातम पसर गया और देवर-भाभी की इस प्रेम कहानी का अंत जेल की कालकोठरी में हुआ। Devar Bhabhi Love Story
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