Rewari Love Story: हरियाणा में रेवाड़ी शहर के एक गांव की संकरी गलियों में सितंबर की शाम धीरे-धीरे अपने पैर पसार रही थी। रेवाड़ी शहर से महज़ कुछ किलोमीटर दूर बसा यह गांव अपनी शांत और पारंपरिक जीवनशैली के लिए जाना जाता था। यहां की हवाओं में खेतों की सोंधी खुशबू के साथ-साथ नहर के पानी की ठंडक मिली होती थी। Rewari Love Story
इसी गांव के एक बड़े दोमंजिला मकान की छत पर खड़ी सुनीता नीचे सड़क की ओर देख रही थी। सुनीता की उम्र चालीस के करीब पहुंच चुकी थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सा ठहराव था—एक ऐसा ठहराव जो अक्सर उन लोगों के चेहरों पर होता है जो अपनी भावनाओं को सालों तक सीने में दबाकर रखते हैं। Rewari Love Story
सुनीता के दो बच्चे थे, एक इक्कीस साल का बेटा और उन्नीस साल की बेटी। दोनों अब अपने-अपने करियर और पढ़ाई में व्यस्त हो चुके थे। उसका पति विक्रम एक सफल कंस्ट्रक्शन ठेकेदार था। Rewari Love Story
विक्रम की जिंदगी गिट्टी, सीमेंट, लोहे की छड़ों और सरकारी ठेकों के इर्द-गिर्द घूमती थी। वह एक मेहनती, सख्त और कम बोलने वाला इंसान था। विक्रम के लिए परिवार का मतलब था—घर में समय पर पैसे पहुंचाना, बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और गांव में अपनी साख बनाए रखना।
लेकिन सुनीता के जीवन में भावनाओं की जो जगह खाली थी, उसे विक्रम की व्यस्तता कभी भर नहीं पाई थी।
Rewari Love Story:ठीक उसी गली के मोड़ पर राजेश का घर था। राजेश और विक्रम की दोस्ती बचपन की थी। दोनों ने गांव की गलियों में साथ में खेलकूद किया था, एक ही स्कूल में पढ़े थे और हर तीज-त्योहार साथ में मनाते थे। लेकिन नियति दोनों को अलग-अलग रास्तों पर ले गई थी। विक्रम जहां गांव में ही ठेकेदारी करने लगा, वहीं राजेश अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते विदेश चला गया। वह लगभग पांच साल तक खाड़ी के देशों में रहा।
दो साल पहले जब राजेश के पिता का अचानक निधन हुआ, तो उसे सब कुछ छोड़कर गांव वापस लौटना पड़ा। विदेश की चकाचौंध से लौटकर उसने गांव में खेती-बाड़ी संभाली और साथ ही एक छोटा सा डेयरी का कारोबार शुरू किया। Rewari Love Story
विदेश से लौटने के बाद राजेश काफी बदल चुका था। वह जीवन की बारीकियों को समझने लगा था। उसके पास कहानियों का खजाना था, और उससे भी ज्यादा, उसके पास दूसरों की बात सुनने का धैर्य था।
जब भी गांव में कोई त्योहार होता, तो विक्रम और राजेश का परिवार एक साथ मिलता। दोनों के घर की औरतें साथ मिलकर तीज-त्योहार मनातीं। इन्हीं मुलाकातों के बीच, जाने कब सुनीता और राजेश की आंखें एक-दूसरे से मिलने लगीं, यह कोई नहीं जानता था।

Rewari Love Story: दो दिलों की खामोश गवाही
राजेश का स्वभाव बेहद सौम्य था। वह जब भी विक्रम के घर आता, तो केवल अपने दोस्त से ही नहीं, बल्कि सुनीता से भी बेहद सम्मान से बात करता। विक्रम अक्सर काम के सिलसिले में साइटों पर रहता था। ऐसे में राजेश का विक्रम के घर आना-जाना एक आम बात थी।
शुरुआत में यह महज़ एक पारिवारिक मित्र का आना-जाना था। लेकिन धीरे-धीरे, सुनीता के एकाकीपन और राजेश के जीवन के खालीपन ने दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया।
एक दोपहर, जब विक्रम किसी साइट पर गया हुआ था, राजेश कुछ ताज़ा दूध देने विक्रम के घर आया। सुनीता रसोई में चाय बना रही थी।
“सुनीता, चाय थोड़ी कड़क बनाना,” राजेश ने हंसते हुए बैठक में बैठते हुए कहा।
सुनीता चाय का कप लेकर बाहर आई और टेबल पर रखते हुए बोली, “राजेश, तुम इतने सालों तक विदेश में रहे… वहां की चमक-दमक छोड़कर इस छोटे से गांव में तुम्हारा मन कैसे लग जाता है?” Rewari Love Story
राजेश ने चाय का घूंट लिया, सुनीता की आंखों में देखा और एक गहरी सांस ली। “सुनीता, विदेश में पैसा तो बहुत था, पर वहां कोई अपना नहीं था। इंसान वहां केवल एक मशीन बनकर रह जाता है। जब रात को काम से लौटता था, तो सोचता था कि काश कोई ऐसा हो जो पूछे कि दिन कैसा बीता। पैसे से आराम खरीदा जा सकता है… सुकून नहीं।”
सुनीता ने पहली बार ध्यान दिया कि राजेश ने उसे ‘भाभी’ न कहकर सिर्फ ‘सुनीता’ कहा था। उस शब्द में कोई अशिष्टता नहीं थी, बल्कि एक अजीब सा अपनापन और दर्द था—वही दर्द जो सुनीता भी हर रोज़ महसूस करती थी।
“तुम सही कहते हो राजेश,” सुनीता ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा, उसकी आवाज धीमी हो गई। “कभी-कभी अपनों के बीच रहकर भी इंसान उतना ही अकेला होता है जितना किसी परदेस में।”
उस दिन के बाद से दोनों के बीच एक अनकहा पुल बन गया। वे जब भी मिलते, तो दुनिया भर की बातें करते। धीरे-धीरे, यह बातचीत केवल आमने-सामने तक सीमित नहीं रही, बल्कि फोन कॉल्स और मैसेजेस तक पहुंच गई।
गांव की गलियों में दबी जुबान से फुसफुसाहटें शुरू होने लगी थीं।

Rewari Love Story: संदेह का जाल और कैमरों की नजर
विक्रम भले ही काम में व्यस्त रहने वाला इंसान था, लेकिन वह बेवकूफ नहीं था। गांव के नुक्कड़ पर, चाय की दुकानों पर जब वह जाता, तो उसे अक्सर लोगों की नजरों में एक अजीब सी फुसफुसाहट महसूस होती।
“ठेकेदार साहब, आजकल राजेश भाई आपके घर के चक्कर कुछ ज्यादा ही लगा रहे हैं… कोई नया काम शुरू कर रहे हो क्या साथ में?” गांव के एक बुजुर्ग ने एक दिन विक्रम से पूछ लिया था।
वह बात विक्रम के दिल में तीर की तरह चुभ गई थी। उसने उस समय तो बात टाल दी, लेकिन उसके दिमाग में शक का कीड़ा कुलबुलाने लगा।
विक्रम ने अपने व्यवहार में बदलाव करना शुरू कर दिया। वह अचानक बिना बताए काम से घर लौटने लगा। उसने पाया कि जब भी राजेश का नाम आता, सुनीता के चेहरे के भाव बदल जाते थे।
अपनी आशंका को यकीन में बदलने के लिए विक्रम ने एक कदम उठाया। कंस्ट्रक्शन ठेकेदार होने के नाते उसने अपने घर के मुख्य दरवाजे और आंगन में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए। Rewari Love Story
“इन कैमरों की क्या जरूरत थी?” सुनीता ने कैमरे लगते देख घबराते हुए पूछा था।
“आजकल जमाना खराब है,” विक्रम ने ठंडे स्वर में कहा, उसकी आंखें सुनीता के चेहरे को टटोल रही थीं। “घर में सुरक्षा होनी चाहिए। मुझे अक्सर बाहर रहना पड़ता है, तो कम से कम मुझे पता तो रहे कि मेरी अनुपस्थिति में कौन आ रहा है और कौन जा रहा है।”
इसके बाद राजेश ने विक्रम के घर आना बंद कर दिया, लेकिन दोनों का संपर्क फोन के जरिए जारी रहा।
एक रात, जब सुनीता सो रही थी, विक्रम ने चुपके से उसका फोन उठाया और मैसेजेस व कॉल रिकॉर्ड्स देख लिए। जो सबूत वह ढूंढ रहा था, वह उसके सामने था।
विक्रम का खून खौल उठा। जिस दोस्त को उसने अपना भाई माना, वही उसके घर की नींव हिला रहा था। लेकिन विक्रम ने तुरंत कोई हंगामा नहीं किया। वह कंस्ट्रक्शन का काम करता था, उसे पता था कि किसी ढांचे को गिराने के लिए सही समय और सही मौके की जरूरत होती है। उसने उस गुस्से को अपने अंदर दबाकर रखा और योजना बनाने लगा।

Rewari Love Story: कबूलनामा और सफर
कुछ हफ्ते बीत गए। एक दिन विक्रम ने सुबह-सुबह सुनीता से कहा, “आज तुम्हें तुम्हारे मायके छोड़ आता हूँ। तुम्हारे माता-पिता से भी मिले काफी समय हो गया है।”
सुनीता को लगा कि शायद विक्रम का शक अब खत्म हो गया है। वह तैयार हो गई। दोनों विक्रम की गाड़ी में बैठे और निकल पड़े।
गाड़ी जैसे ही गांव से बाहर निकलकर मुख्य मार्ग पर आई, विक्रम ने गाड़ी की रफ्तार धीमी कर दी।
“सुनीता,” विक्रम ने स्टीयरिंग व्हील को कसकर पकड़ते हुए कहा, उसकी आवाज में रूखापन था। “हमारी शादी को बीस साल से ज्यादा हो चुके हैं। हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं। समाज में हमारी एक इज्जत है।”
सुनीता का दिल जोर से धड़कने लगा, “तुम यह सब अचानक क्यों कह रहे हो?”
“क्योंकि मुझे सब पता है,” विक्रम ने गाड़ी रोक दी और उसकी तरफ मुड़ा। “राजेश के साथ तुम्हारा क्या रिश्ता है? आज अगर तुमने सच नहीं बताया, तो मैं गाड़ी सीधे तुम्हारे मायके ले जाऊंगा और तुम्हारे मां-बाप के सामने पूरी बात रख दूंगा। सोचो तुम्हारे बच्चों की क्या इज्जत रह जाएगी?”
माता-पिता का नाम और बच्चों के भविष्य की बात सुनते ही सुनीता टूट गई। वह जानती थी कि अगर यह बात सार्वजनिक हुई तो परिवार तबाह हो जाएगा। वह रोने लगी।
“हां… विक्रम!” सुनीता ने चेहरा ढकते हुए कहा। “हम एक-दूसरे को पसंद करते हैं। लेकिन भगवान के लिए इसे यहीं खत्म कर दो। बच्चों को बीच में मत लाओ। मैं अब कभी उससे बात नहीं करूंगी…”
विक्रम ने सुनीता की बात सुनी। उसने सिर्फ इतना कहा, “ठीक है।” उसने उसे मायके छोड़ा और वापस लौट आया। सुनीता को लगा कि बात संभाल ली गई है, लेकिन वह नहीं जानती थी कि अंजाम अभी बाकी था।

Rewari Love Story: सड़क पर पसरा वो सन्नाटा
सुनीता को छोड़कर लौटते समय विक्रम का दिमाग पूरी तरह से सुन्न हो चुका था। उसने अपने फोन से राजेश को कॉल किया।
“हां राजेश, कहां हो भाई?” विक्रम ने आवाज को सामान्य रखते हुए कहा।
“घर पर ही हूँ विक्रम, क्या हुआ?”
“कुछ नहीं, आज काम से फु फुर्सत मिली है। थोड़ा मन हल्का करना था, आओ साथ बैठकर चाय-पानी पीते हैं।”
राजेश, जो विक्रम को अपना जिगरी दोस्त मानता था, बिना किसी शक के राजी हो गया।
विक्रम ने अपने साथ अपने युवा भतीजे अमित को भी बुला लिया था। अमित को उसने पूरी बात बता दी थी और वह अपने चाचा के पक्ष में खड़ा था।
रात के लगभग आठ बज चुके थे। भाड़ावास रोड पर उस समय दूर-दूर तक कोई आवाजाही नहीं थी। सड़क के दोनों ओर घनी झाड़ियां थीं।
गाड़ी से तीनों बाहर निकले। राजेश को जरा भी अंदाजा नहीं था कि क्या होने वाला है। गाड़ी की डिक्की में विक्रम की कंस्ट्रक्शन साइट पर इस्तेमाल होने वाली लोहे की छड़ें रखी हुई थीं।
जब राजेश सड़क के किनारे झाड़ियों की तरफ मुंह करके खड़ा हुआ, तभी विक्रम ने अमित को इशारा किया। अमित ने डिक्की से लोहे की रॉड निकाली और विक्रम को दी।
विक्रम के दिमाग में सिर्फ धोखा और समाज की बातें गूंज रही थीं। उसने पूरी ताकत से लोहे की रॉड से हमला कर दिया।
राजेश जमीन पर गिर पड़ा। “विक्रम… यह…” उसके मुंह से सिर्फ इतना ही निकल पाया। अविश्वास और दर्द के बीच कुछ ही क्षणों में वहां सन्नाटा छा गया।

Rewari Love Story: कानून और बिखरते परिवार
वारदात को अंजाम देने के बाद विक्रम और अमित वहां से भाग निकले।
अगली सुबह जब शव मिला, तो इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू हुई। पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मामला पैसों के लेन-देन या रंजिश से हटकर व्यक्तिगत संबंधों की ओर मुड़ गया।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले। 24 घंटे के भीतर पुलिस ने विक्रम और अमित को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस हिरासत में विक्रम ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा, “उसने मेरा घर तोड़ दिया था। जिस दोस्त पर मैंने भरोसा किया, उसी ने मुझे धोखा दिया।”
पुलिस ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया और घटना स्थल पर ले जाकर कानूनी कार्रवाई पूरी की।
यह भी पढ़ें-

Rewari Love Story
गांव में अब एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी।
दो परिवार पूरी तरह तबाह हो चुके थे। राजेश का परिवार अपने बेटे को खो चुका था, जिसकी विदेश से लौटकर एक नई जिंदगी शुरू करने की उम्मीदें अधूरी रह गईं।
दूसरी तरफ विक्रम जेल की सलाखों के पीछे था, और उसका भतीजा अमित अपने करियर की शुरुआत में ही कानून की चपेट में आ चुका था। विक्रम के बच्चे समाज में सिर उठाने लायक नहीं रहे थे।
और सुनीता… वह अपने मायके के एक कमरे में बैठी खिड़की से बाहर देख रही थी। उसकी आंखों के आंसू सूख चुके थे। एक क्षणिक भावनात्मक जुड़ाव ने दो परिवारों के बने-बनाए आशियाने को जलाकर राख कर दिया था। (यह कहानी रेवाड़ी की सत्य घटना पर आधारित है, पात्रों और जगह के नाम बदल दिए गए हैं।)
यह भी पढ़ें-

रोजाना लेटेस्ट रोमांटिक कहानी, रियल लव स्टोरी और प्यार का पंचनामा पढ़ने के लिए हमारे फेसबुक पेज को फॉलो/लाइक करें।
यदि आप अपने मोबाइल पर रोजाना लेटेस्ट रोमांटिक कहानी, सच्ची प्रेम कहानी चाहते हैं तो हमारे व्हाटसएप चैनल को फॉलो करें।
💖 Love Calculator 💖
अपने और अपने पार्टनर के नाम से लव परसेंटेज चेक करें!




