Jija sali Romance story | Romantic Kahani
रोमांटिक कहानियां

उदयपुर: दीदी के भागने के बाद जीजा से हुआ प्यार: मंडप में खुला वो राज, जिसे जानकर उड़ गए सबके होश!

Jija sali Romance: उदयपुर की शाम जब लेक पिछोला के पानी पर अपनी सुनहरी रंगत बिखेरती है, तो शहर का हर कोना किसी पुरानी ग़ज़ल जैसा महसूस होने लगता है। लेकिन शहर के सबसे मशहूर बुटीक होटल ‘द हेरिटेज विला’ के पिछवाड़े में ऐसा कोई रूमानियत भरा माहौल नहीं था। वहाँ केवल अफ़रा-तफ़री मची हुई थी। Jija sali Romance

वजह थी—समर और राधिका की शादी।

समर, मुंबई का एक बेहद सफल और संजीदा म्यूज़िक कंपोज़र था। शांत स्वभाव, गहरी आँखें और हर काम में अनुशासन पसंद करने वाला इंसान। उसकी मंगेतर राधिका क्लासिकल डांसर थी—उतनी ही शांत और सलीकेदार। दोनों का रिश्ता दो परिवारों की सहमति से तय हुआ था, जिसमें ठहराव तो था, लेकिन वो आग या वो दीवानगी नहीं थी जिसे अक्सर लोग प्यार कहते हैं।

और उस अफ़रा-तफ़री की सबसे बड़ी वजह थी मेहर—राधिका की छोटी बहन।

मेहर अपनी बहन से बिलकुल अलग थी। वह एक वाइल्डलाइफ़ फोटोग्राफर थी, जिसके बालों में हमेशा हवा की बेफिक्री और आँखों में एक अजीब सा बचपन रहता था। शादी की सजावट से लेकर मेहमानों के स्वागत की ज़िम्मेदारी उसी के चंचल कंधों पर थी। Jija sali Romance

समर अपने कमरे की बालकनी में खड़ा पियानो पर एक नई धुन बनाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन नीचे से आ रही तेज़ आवाज़ों ने उसका ध्यान भटका दिया। उसने नीचे झाँका तो देखा कि मेहर पीले रंग का सलवार-समीज़ पहने, नंगे पाँव गेंदे के फूलों की लड़ियाँ ऊपर बाँधने की कोशिश कर रही थी।

“अरे ओ पंडित जी! यह मंडप का पूर्वी कोना है, यहाँ सफ़ेद गुलाब नहीं, लाल चमेली लगेगी!” मेहर ज़ोर से चिल्लाई और खुद ही एक ऊँचे स्टूल पर चढ़ गई।

समर ने गहरी साँस ली, अपना चश्मा उतारा और नीचे आया।

“क्या तुम दो मिनट के लिए थोड़ा कम शोर मचा सकती हो, मेहर?” समर ने गंभीर आवाज़ में कहा। “मुझे एक बहुत ज़रूरी कंपोज़िशन पूरी करनी है।”

मेहर ने स्टूल पर से मुड़कर देखा। उसका संतुलन थोड़ा बिगड़ा, लेकिन उसने खुद को संभाल लिया। उसने अपनी बिखरी हुई लटों को माथे से पीछे हटाया और एक शरारती मुस्कान के साथ कहा, “आदरणीय जीजा जी! यह शादी का घर है, कोई म्यूज़िक स्टूडियो नहीं। यहाँ शहनाई बजेगी, शोर होगा और हाँ… गेंदे के फूल भी गिरेंगे!”

कहते ही उसने फूलों की एक लड़ी समर की तरफ फेंक दी। समर ने उसे जैसे-तैसे कैच किया।

“तुम बहुत इरिटेटिंग हो,” समर ने तौहीन भरे अंदाज़ में कहा।

“और आप बहुत बोरिंग हैं, मिस्टर कंपोज़र!” मेहर ने एक आँख मारकर जवाब दिया।

उन दोनों को अंदाज़ा भी नहीं था कि यह नोक-झोंक किसी आने वाले तूफ़ान की सिर्फ़ एक हल्की सी आहट थी।

Jija sali Romance: गायब पन्ने और अनकही ज़िम्मेदारी

शादी में सिर्फ़ तीन दिन बचे थे। पूरा होटल मेहमानों से खचाखच भरा हुआ था। लेकिन तीसरे दिन की सुबह एक ऐसी खबर लाई जिसने दोनों परिवारों के होश उड़ा दिए।

राधिका अपने कमरे में नहीं थी। उसके ड्रेसिंग टेबल पर एक पत्र रखा था:

“पापा, समर, मुझे माफ कर देना। मैं इस शादी के बंधन में नहीं बँध सकती। मैं न्यूयॉर्क की डांस अकादमिक स्कॉलरशिप स्वीकार करने जा रही हूँ, जिसका सपना मैंने सालों से देखा था। समर एक बहुत अच्छा इंसान है, लेकिन हम दोनों के बीच वो जुड़ाव कभी नहीं था जो दो हमसफ़रों में होना चाहिए। कृपया मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना।“

होटल के सबसे बड़े हॉल में सन्नाटा पसर गया। राधिका के पिता का दिल का दौरा पढ़ते-पढ़ते बचा। समर चुपचाप बैठा रहा। उसके चेहरे पर गुस्से से ज़्यादा एक अजीब सा खालीपन था—शायद इसलिए क्योंकि वो भी जानता था कि राधिका का कहना गलत नहीं था। उन दोनों के बीच सम्मान तो था, लेकिन रूह का कनेक्शन गायब था।

“अब क्या होगा?” मेहर की माँ रोते हुए बोलीं। “खानदान की इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाएँगी! कपूर साहब के सामने हम क्या मुँह दिखाएँगे?”

मेहर अपनी बहन की इस हरकत पर अंदर से हिल गई थी। उसे राधिका पर गुस्सा भी आ रहा था और उसके फैसले की वजह भी समझ आ रही थी। लेकिन इस सब के बीच उसकी नज़र समर पर पड़ी। समर बिना कुछ कहे अपने कमरे की तरफ बढ़ रहा था। उसके कंधे झुके हुए थे।

मेहर चुपचाप उसके पीछे गई।

समर अपने कमरे में बैठकर खिड़की से बाहर झील को देख रहा था। मेहर ने धीरे से दरवाज़ा धकेला और अंदर आई।

“समर…” उसने धीमी आवाज़ में पुकारा।

“तुम्हारी बहन सही कह रही थी, मेहर,” समर ने बिना मुड़े कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खामोशी थी। “हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने ही नहीं थे। लेकिन… इस तरह भाग जाना? क्या मैं इतना बुरा था कि मुझसे बात तक नहीं की जा सकती थी?”

मेहर का दिल समर के इस टूटे हुए रूप को देखकर बैठ गया। वह समर के पास गई और उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने पहली बार समर के हाथों को अपने हाथों में लिया। समर के हाथ ठंडे पड़ चुके थे।

“आप बुरे नहीं हैं, समर,” मेहर ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा। उसकी आवाज़ में एक अनूठी मिठास और दृढता थी। “आप शायद इस दुनिया के सबसे सुलझे हुए इंसान हैं। दी ने जो किया वो गलत था… बहुत गलत था। लेकिन मैं वादा करती हूँ, मैं इस परिवार की इज़्ज़त और आपके स्वाभिमान पर कोई आँच नहीं आने दूँगी।”

“तुम क्या करोगी?” समर ने हताशा में पूछा।

“दी को ढूँढने की एक आखिरी कोशिश,” मेहर ने कहा। “मुझे पता है कि उसका एक दोस्त अहमदाबाद में रहता है। हो सकता है वो ट्रेन पकड़ने से पहले वहाँ रुकी हो। मैं वहाँ जा रही हूँ।”

“तुम अकेली नहीं जाओगी,” समर अचानक खड़ा हो गया। “यह मेरी ज़िंदगी का भी सवाल है। मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।”

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Jija sali Romance: सफर, बारिश और बदलती धुनेँ

दोपहर के 2 बजे थे। समर की विंटेज मर्सिडीज उदयपुर-अहमदाबाद हाइवे पर दौड़ रही थी। बाहर मौसम अचानक बदल गया था। काले बादलों ने आसमान को घेर लिया था और मूसलाधार बारिश होने लगी थी।

कार के अंदर का माहौल बहुत भारी था। समर स्टीयरिंग व्हील को कसकर पकड़े हुए था, जबकि मेहर लगातार राधिका का फोन ट्राई कर रही थी, जो लगातार ‘स्विच ऑफ’ आ रहा था।

“फोन नहीं लग रहा,” मेहर ने उदास होकर कहा और अपना सिर सीट की बैक पर टिका दिया।

“मुझे लगता है हमें यह उम्मीद छोड़ देनी चाहिए, मेहर,” समर ने कहा। “जो इंसान जाना चाहता है, उसे रास्ते नहीं, सिर्फ़ बहाने चाहिए होते हैं।”

मेहर ने समर की तरफ देखा। बारिश की बूँदें कार के शीशे पर टकरा रही थीं, और उनकी परछाई समर के चेहरे पर ढल रही थी। मेहर को पहली बार अहसास हुआ कि समर का गंभीर चेहरा कितना आकर्षक था। उसकी तीखी नाक, घनी दाढ़ी और वे आँखें—जिनमें एक पूरा समंदर छुपा हुआ था।

अचानक कार ने एक झटका खाया और इंजन से धुआँ निकलने लगा। समर ने बड़ी मुश्किल से कार को सड़क के किनारे एक पुराने नीम के पेड़ के नीचे रोका।

“अब क्या हुआ?” मेहर ने घबराकर पूछा।

समर बाहर निकला और बोनट उठाकर देखने लगा। “रेडिएटर लीक हो गया है। इस तूफ़ान में कोई मैकेनिक नहीं मिलेगा।”

शाम के 7 बज चुके थे। जंगल के बीच बने इस हाइवे पर दूर-दूर तक कोई गाड़ियाँ नहीं दिख रही थीं। बारिश इतनी तेज़ थी कि कार के अंदर रहना भी मुश्किल हो रहा था।

“आगे एक छोटा सा गाँव है,” मेहर ने अपने फोन के नक़्शे को देखते हुए कहा, जिसमें नेटवर्क बड़ी मुश्किल से आ-जा रहा था। “वहाँ एक पुरानी ‘डाक बंगला’ या होमस्टे जैसी जगह दिख रही है। हमें चलकर जाना होगा।”

दोनों अपनी जैकेट से खुद को ढकते हुए बारिश में भीगते हुए पैदल ही चल पड़े।

जब वे उस छोटे से लकड़ी के होमस्टे पहुँचे, तो वे पूरी तरह भीग चुके थे। होमस्टे का केयरटेकर एक बूढ़ा आदमी था, जिसने उन्हें बताया कि तूफ़ान की वजह से पूरे इलाके की बिजली कट गई है और केवल एक ही कमरा रहने लायक हालत में है।

“कोई बात नहीं, दादा,” मेहर ने कहा। “हम एक ही कमरे में एडजस्ट कर लेंगे।”

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Jija sali Romance: मोमबत्ती की लौ और अहसास की आँच

कमरा छोटा लेकिन बेहद गर्म और आरामदायक था। कमरे के कोने में एक पुरानी अंगीठी जल रही थी, और कमरे को रोशन करने के लिए केयरटेकर ने दो बड़ी मोमबत्तियाँ जला दी थीं।

समर ने अपनी गीली जैकेट उतारकर एक कुर्सी पर टांग दी। वह सिर्फ अपनी सफ़ेद शर्ट में था, जो पानी से भीगकर उसके जिस्म से चिपक गई थी। मेहर ने अपने भीगे बालों को तौलिए से सुखाना शुरू किया।

अंगीठी की लाल रोशनी और मोमबत्ती की पीली लौ के बीच, दोनों के साये कमरे की लकड़ी की दीवारों पर लहरा रहे थे।

“तुम काँप रही हो,” समर ने कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी नरमी थी, जो मेहर ने पहले कभी नहीं सुनी थी।

समर कमरे के कोने में रखी एक पुरानी केतली से गरम चाय के दो कुल्हड़ लेकर आया और एक कुल्हड़ मेहर की तरफ बढ़ा दिया।

मेहर ने चाय ली। उनके हाथों की उँगलियाँ एक-दूसरे से छुईं। एक हल्का सा इलेक्ट्रिक करंट दोनों के जिस्म में दौड़ गया। मेहर ने तुरंत अपनी नज़रें झुका लीं।

“शुक्रिया,” मेहर ने फुसफुसाते हुए कहा।

समर उसके पास ही ज़मीन पर कालीन पर बैठ गया। “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी शादी का हफ़्ता ऐसा बीतेगा। एक सुनसान गाँव में, बारिश के बीच… अपनी होने वाली साली के साथ।”

मेहर हल्का सा हंसी। “ज़िंदगी कभी भी हमारे प्लान्स के हिसाब से नहीं चलती, समर। आप तो म्यूज़िक कंपोज़र हैं, आपको तो पता होना चाहिए कि सबसे खूबसूरत धुनें अक्सर अचानक ही बन जाती हैं।”

समर ने मेहर की तरफ देखा। मेहर की गीली लटें उसके चेहरे पर चिपकी हुई थीं। उसकी आँखों में एक अजीब सी मासूमियत और कशिश थी।

“तुम हमेशा इतनी पॉज़िटिव कैसे रहती हो, मेहर?” समर ने पूछा। उसका चेहरा मेहर के चेहरे के और करीब आ गया।

“क्योंकि मैं हर पल को जीती हूँ,” मेहर ने कहा। उसकी साँसें तेज़ होने लगी थीं। समर की मौजूदगी उसे एक अजीब से अहसास से भर रही थी। “मैं आपकी तरह हर चीज़ का नक्शा नहीं बनाती। कभी-कभी बहते पानी के साथ बहना भी अच्छा होता है।”

“जैसे अभी?” समर ने पूछा। उसकी आवाज़ एकदम गहरी और भारी हो चुकी थी।

समर ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेहर के चेहरे से भीगी हुई लट को पीछे हटाया। उसकी उँगलियों का स्पर्श मेहर के गाल पर ठहरा। मेहर की आँखें खुद-ब-खुद बंद हो गईं। उसने एक ठंडी साँस भरी।

“समर…” उसने काँपती आवाज़ में पुकारा।

“हूँ?”

“यह… यह सही नहीं है। हम यहाँ दी को ढूँढने आए हैं।”

“मुझे पता है,” समर ने कहा। लेकिन उसका हाथ मेहर के गाल से खिसककर उसकी गर्दन तक पहुँच गया। “लेकिन पिछले तीन दिनों में, मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी से ज़्यादा महसूस किया है, मेहर। राधिका के साथ मैं सिर्फ़ एक ज़िम्मेदारी निभा रहा था… लेकिन तुम्हारे साथ, मुझे लग रहा है कि मैं साँस ले रहा हूँ।”

समर ने मेहर के चेहरे को दोनों हाथों में थामा और अपनी पेशानी उसकी पेशानी से टिका दी। दोनों की साँसें एक-दूसरे में घुलने लगीं।

“क्या तुम भी वही महसूस कर रही हो जो मैं कर रहा हूँ?” समर ने फुसफुसाते हुए पूछा।

मेहर ने अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखों में आँसू थे—डर के नहीं, बल्कि उस अहसास के जो दबाया नहीं जा सकता था। उसने बिना कुछ कहे अपनी बाहें समर की गर्दन के गिर्द लपेट दीं।

समर ने इंतज़ार नहीं किया। उसने अपने होंठ मेहर के नम होठों पर रख दिए।

वह चुंबन किसी तूफ़ान की तरह था। उसमें इतने दिनों से दबा हुआ आकर्षण, वो नोक-झोंक और इस रात की तन्हाई सब कुछ समा गई थी। समर ने मेहर को कसकर अपनी बाहों में भींच लिया, जैसे अगर उसने ढील दी तो मेहर गायब हो जाएगी।

मेहर ने खुद को पूरी तरह समर के सुपुर्द कर दिया। उस मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में, अंगीठी की गर्माहट के बीच, दो रूहें एक-दूसरे में लीन हो गईं। रात भर बाहर बारिश का शोर होता रहा, और अंदर दो दिलों की धड़कनें एक नई धुन रचती रहीं।

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Jija sali Romance: सवेरा और कड़वा सच

सुबह की पहली किरण जब खिड़की के शीशे से छनकर अंदर आई, तो पूरा कमरा एक सुनहरी रोशनी से नहा गया।

समर की आँख खुली। मेहर उसके सीने पर अपना सिर रखे सो रही थी। उसके चेहरे पर एक सुकून भरा अहसास था। समर ने बेहद प्यार से उसके माथे पर अपने होंठ रखे।

अचानक मेहर के फोन की रिंगटोन बज उठी।

मेहर हड़बड़ाकर उठी। उसने देखा—स्क्रीन पर राधिका का नाम चमक रहा था।

मेहर ने काँपते हाथों से फोन उठाया और स्पीकर ऑन किया।

“मेहर! मेहर, तुम कहाँ हो?” राधिका की रोती हुई आवाज़ आई।

“दी! तुम कहाँ हो? तुम्हें अंदाज़ा भी है कि घर पर सब कितने परेशान हैं?” मेहर ने कहा, उसकी नज़रें समर पर थीं जो अब चुपचाप बैठ गया था।

“मुझे माफ़ कर दो, मेहर! मैं बहुत बड़ी बेवकूफ़ हूँ,” राधिका ने हताशा में कहा। “मैं स्टेशन पहुँची थी, लेकिन मेरा ज़मीर मुझे इजाज़त नहीं दे रहा था। मुझे अहसास हुआ कि अपनी महत्वाकांक्षा के लिए अपने परिवार और समर की इज़्ज़त की बलि देना गलत है। मैं वापस उदयपुर आ गई हूँ। मैं समर से शादी करने के लिए तैयार हूँ। प्लीज तुम दोनों घर वापस आ जाओ!”

फोन कट गया।

कमरे में एक भयानक सन्नाटा छा गया। कल रात का सारा जादू, वो गर्माहट, वो जुंबिश… सब कुछ एक झटके में कांच की तरह टूट गया।

मेहर ने समर की तरफ देखा। उसकी आँखों से आँसू छलक पड़े।

“दी… दी वापस आ गई है, समर,” मेहर की आवाज़ गले में ही अटक गई। “वो आपसे शादी करना चाहती है।”

समर का चेहरा एक पल में पथरा गया। उसने मेहर का हाथ पकड़ा। “लेकिन मैं अब उससे शादी नहीं कर सकता, मेहर! जो कल रात हमारे बीच हुआ… जो मैं तुम्हारे लिए महसूस करता हूँ…”

“नहीं समर!” मेहर ने अपना हाथ छुड़ा लिया। वह पीछे हटी। “कल रात जो हुआ… वो एक गलती थी। एक बहकावा! हम दोनों भावुक थे।”

“तुम झूठ बोल रही हो!” समर चिल्लाया। “तुम्हारी आँखें बता रही हैं कि तुम मुझसे प्यार करती हो!”

“हाँ! करती हूँ प्यार आपसे!” मेहर चीखी, उसके आँसू उसके गालों पर बह निकले। “लेकिन मैं अपनी बहन की खुशियों की बलि देकर, अपने परिवार को तमाशा बनाकर अपना प्यार हासिल नहीं कर सकती। दी को अपनी गलती का अहसास हो गया है। अगर अब हमने कुछ कहा, तो दो परिवार टूट जाएँगे।”

समर स्तब्ध खड़ा रहा। मेहर ने अपने कपड़े ठीक किए, अपना बैग उठाया और दरवाज़े की तरफ बढ़ गई।

दरवाज़े पर रुककर उसने मुड़कर देखा। “आपको उदयपुर वापस चलना होगा, समर। एक आदर्श दामाद बनकर।”

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Jija sali Romance: मंडप, सत्य और अंतिम फैसला

उदयपुर का हेरितिज रिसॉर्ट फिर से सज चुका था। राधिका वापस आ चुकी थी और उसने अपने माता-पिता के पैरों में गिरकर माफ़ी माँग ली थी। परिवार ने राहत की साँस ली और शादी की रस्में फिर से शुरू हो गईं।

लेकिन उस पूरे माहौल में दो लोग ज़िंदा लाश बने घूम रहे थे।

एक समर—जो दूल्हे के लिबास में तैयार था, लेकिन उसका दिल पूरी तरह मर चुका था। और दूसरी मेहर—जो मुस्कुराने का नाटक कर रही थी, लेकिन हर पल अंदर ही अंदर टूट रही थी।

शाम का वक्त आया। मंडप में पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे।

समर मंडप में बैठा था। राधिका उसके बगल में बैठी थी। मेहर मंडप के एक कोने में खड़ी, हाथों में पूजा की थाली लिए चुपचाप यह सब देख रही थी।

पंडित जी ने कहा, “कन्यादान के लिए वधू के माता-पिता आगे आएँ और गँठजोड़ा करें।”

मेहर की माँ आगे बढ़ीं। उन्होंने राधिका के दुपट्टे का छोर समर के शेड से बाँधने के लिए उठाया।

“रुकिए!”

समर की कड़क आवाज़ ने पूरे मंडप को हिलाकर रख दिया।

समर मंडप में खड़ा हो गया। उसने अपने गले से सेहरा उतारकर फेंक दिया।

“समर! यह क्या कर रहे हो बेटा?” उसके पिता ने घबराकर पूछा।

समर ने राधिका की तरफ देखा। “राधिका, तुम एक बहुत अच्छी लड़की हो। लेकिन तुम सिर्फ़ इसलिए मुझसे शादी कर रही हो क्योंकि तुम्हें अपनी गलती का अपराधबोध (guilt) है। प्यार का रिश्ता अपराधबोध पर नहीं टिक सकता।”

फिर समर घूमकर मेहर की तरफ बढ़ा। पूरा हॉल हैरान होकर देख रहा था।

समर मेहर के सामने आकर रुका। उसने मेहर के हाथ से पूजा की थाली ली और उसे एक तरफ रख दिया। फिर उसने मेहर के दोनों हाथ अपने हाथों में थाम लिए।

“समर, यह क्या पागलपन है? पीछे हटो!” मेहर ने घबराकर फुसफुसाया।

“मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी नियमों और कायदों के हिसाब से जी है, मेहर,” समर ने सबकी परवाह किए बिना तेज़ आवाज़ में कहा। उसकी आँखों में आँसू थे। “लेकिन उस तूफ़ानी रात को तुमने मुझे सिखाया कि ज़िंदगी नियमों से नहीं, अहसासों से जी जाती है। मैं किसी और के साथ शादी का नाटक करके तीन जिंदगियों को तबाह नहीं कर सकता।”

समर ने राधिका और परिवार की तरफ देखा।

“मैं आप सबसे माफ़ी माँगता हूँ,” समर ने कहा। “राधिका मुझे छोड़कर गई थी, यह उसकी गलती थी। लेकिन अगर मैं मेहर से प्यार करते हुए राधिका से शादी कर लूँ, तो यह मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा पाप होगा। मैं मेहर से प्यार करता हूँ। बेइंतहा प्यार।”

पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। राधिका ने मेहर की तरफ देखा, फिर समर की तरफ।

राधिका आगे आई। उसने मेहर का चेहरा देखा, जिसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। राधिका ने मेहर के हाथों को देखा, जो समर के हाथों में काँप रहे थे।

राधिका ने एक गहरी साँस ली और मुस्कुरा दी।

“मैं जानती थी,” राधिका ने कहा। उसकी आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था। “जब तुम दोनों सुबह वापस आए थे, मैंने तुम दोनों की आँखों में वो देखा था जो समर और मेरे बीच कभी नहीं था। मेहर… तुमने मेरी खुशी के लिए अपने प्यार की कुर्बानी देने की कोशिश की ना?”

मेहर ने सिर्फ अपना सिर झुका लिया।

राधिका ने समर और मेहर के जुड़े हाथों पर अपना हाथ रखा। “पापा, यह शादी रद्द नहीं होगी। बस दुल्हन बदलेगी। क्योंकि समर की असली धुन राधिका नहीं, मेहर है।”

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Jija sali Romance: अधूरी धुन का पूरा होना

एक महीने बाद।

वही उदयपुर का लेक पिछोला, वही सुनहरी शाम। लेकिन इस बार माहौल में कोई अफ़रा-तफ़री नहीं थी।

होटल के लॉन में एक छोटा सा, खूबसूरत मंडप सजाया गया था। इस बार सिर्फ़ करीबी दोस्त और रिश्तेदार मौजूद थे।

समर पियानो पर बैठा हुआ था। उसकी उँगलियाँ पियानो के कीबोर्ड पर बड़ी नज़ाकत से तैर रही थीं। वह एक ऐसी धुन बजा रहा था जिसमें उदयपुर की बारिश, जंगल की वो रात, मोमबत्ती की लौ और दो दिलों का समर्पण सब कुछ सुना जा सकता था।

तभी लाल बनारसी साड़ी में सजी मेहर सीढ़ियों से नीचे उतरी।

समर ने बजाना बंद किया और खड़ा हो गया। उसकी नज़रें मेहर से हट ही नहीं रही थीं।

मेहर जब मंडप में पहुँची, तो समर ने उसका हाथ थामा।

“आज कोई डायलॉग नहीं मारोगे, मिस्टर कंपोज़र?” मेहर ने अपनी पुरानी शरारती मुस्कान के साथ फुसफुसाकर कहा।

समर ने मुस्कुराते हुए उसके कान के पास झुककर कहा, “तुम्हारे आने से पहले मेरी ज़िंदगी सिर्फ़ कुछ लिखे हुए सुरों का पुलिंदा थी, मेहर। तुमने आकर उसमें संगीत भर दिया। अब मुझे किसी डायलॉग की ज़रूरत नहीं है… मेरी पूरी ज़िंदगी ही तुम्हारी धुन पर चलेगी।”

पंडित जी ने फेरों का मंत्र शुरू किया।

अग्नि के समक्ष, जब समर ने मेहर की माँग में सिंदूर भरा और उसके गले में मंगलसूत्र पहनाया, तो बाहर लेक पिछोला पर हल्की-हल्की बारिश की बूँदें गिरने लगीं।

यह किसी ग़लतफ़हमी या मजबूरी का रिश्ता नहीं था। यह उस प्यार की जीत थी जो सही और गलत के दायरों से परे, दो रूहों के सच्चे समर्पण से जन्म लेता है। समर और मेहर की कहानी अब एक मुकम्मल धुन बन चुकी थी, जो ताउम्र बजने वाली थी। Jija sali Romance story

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Mahesh kant Shiva
महेश कांत शिवा (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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