Devar Bhabhi Story दिल्ली के वसंत कुंज स्थित फ्लैट में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक की आवाज़ भी दिल को चुभती थी। शाइना लिविंग रूम में सोफे पर बैठी थी। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे थे और चेहरे का नूर कहीं गायब हो चुका था।
पिछले दो महीने शाइना की जिंदगी में किसी तूफान की तरह आए थे। जब उसे पता चला कि रोहन का किसी दूसरी औरत के साथ संबंध चल रहा है और वह इस रिश्ते को बचाने की कोई कोशिश भी नहीं करना चाहता, तो शाइना का आत्मसम्मान पूरी तरह बिखर गया। Devar Bhabhi Story
वह खाना-पीना भूल चुकी थी, उसकी रातों की नींद गायब हो चुकी थी। वह एक ऐसे डिप्रेशन में जा रही थी जहाँ से बाहर निकलना मुश्किल लग रहा था।
तभी घर का दरवाजा खुला और विकी अंदर आया। पीठ पर बड़ा सा बैकपैक, हाथ में गाड़ी की चाबी और आँखों में चिंता।

विकी ने शाइना की यह हालत देखी। उसका खून खौल उठा कि उसके अपने बड़े भाई ने एक इतनी अच्छी और निस्वार्थ महिला के साथ ऐसा व्यवहार किया। विकी ने रोहन से साफ कह दिया था कि वह उसके इस गलत कदम का समर्थन कभी नहीं करेगा।
“भाभी…” विकी ने बहुत ही कोमल आवाज़ में कहा। वह शाइना के पास फर्श पर बैठ गया।
शाइना ने खाली नज़रों से विकी की तरफ देखा। “तुम आ गए विकी? तुमने खाना खाया?”
इस हालत में भी शाइना का उसकी चिंता करना… विकी की आँखें भर आईं। उसने शाइना के हाथों को अपने दोनों हाथों में लिया- उस स्पर्श में केवल एक छोटे भाई और देवर का आदर और सुरक्षा का भाव था।
“भाभी, आप अपने कपड़े पैक कीजिए। हम कहीं बाहर जा रहे हैं,” विकी ने कहा।
“नहीं विकी, मेरा कहीं जाने का मन नहीं है। मुझे यही रहने दो,” शाइना ने थकी हुई आवाज़ में मना किया।
“मैं आपसे पूछ नहीं रहा हूँ भाभी, मैं जिद कर रहा हूँ। अगर आप मुझे अपना छोटा भाई मानती हैं, तो बिना कोई सवाल किए बस 15 मिनट में अपना एक बैग तैयार कर लीजिए,” विकी की आवाज़ में ऐसा अधिकार और अपनापन था कि शाइना इंकार नहीं कर सकी।
Devar Bhabhi Story हाईवे की ठंडी हवा और कंक्रीट का जंगल पीछे
विकी की काले रंग की थार जीप दिल्ली की सीमा लांघकर चंडीगढ़-मनाली हाईवे पर दौड़ रही थी।
शाइना पैसेंजर सीट पर बैठी बाहर खिड़की से दिखते खेतों और पेड़ों को देख रही थी। पिछले कई हफ़्तों बाद उसने ताजी हवा में सांस ली थी। विकी गाड़ी चला रहा था और उसने म्यूजिक सिस्टम पर 90 के दशक के कुछ पुराने, सुरीले और शांत नगमे बजा रखे थे।
“हम कहाँ जा रहे हैं विकी?” शाइना ने धीमी आवाज़ में पूछा।
“हिमाचल… कासौल। पहाड़ों की गोद में, जहाँ कंक्रीट की दीवारें नहीं हैं, जहाँ कोई झूठे रिश्ते नहीं हैं और जहाँ आपको रोहन भैया की याद दिलाने वाला कोई सामान नहीं है,” विकी ने बिना शाइना की तरफ देखे, बहुत ही संजीदगी से कहा।
“लेकिन समस्याओं से भागने से क्या वो खत्म हो जाएंगी?” शाइना ने उदास होकर पूछा।
“समस्याओं से भागना नहीं है भाभी, खुद को इतना मजबूत बनाना है कि जब आप वापस आएं, तो उन समस्याओं के सामने रोएं नहीं, बल्कि उनका सामना अपनी शर्तों पर करें,” विकी ने गाड़ी की स्पीड थोड़ी कम करते हुए कहा। Devar Bhabhi Story
“रोहन भैया ने आपकी कद्र नहीं की, यह उनका नुकसान है। लेकिन उनकी वजह से आप अपनी जिंदगी खत्म कर लें, यह मैं कभी नहीं होने दूंगा। आप इस परिवार की सबसे मजबूत महिला हैं, और मुझे मेरी पुरानी मुस्कुराती हुई भाभी वापस चाहिए।”

विकी के शब्दों में कोई बनावट नहीं थी। उसकी हर बात में अपनी भाभी के प्रति एक सच्चा आदर और उनके टूटते वजूद को संभालने की एक पवित्र तड़प थी। शाइना ने अपनी आँखें बंद कर लीं और पहली बार उसके दिल को एक अजीब सा सुकून महसूस हुआ।
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Devar Bhabhi Story पार्वती नदी का किनारा और अलाव की आंच
रात के 10 बज चुके थे। वे कासौल के पास पार्वती नदी के किनारे एक बहुत ही शांत और सुरक्षित कॉटेज में रुक चुके थे। बाहर कड़ाके की ठंड थी, चीड़ और देवदार के घने पेड़ हवा में सरसरा रहे थे और पास ही नदी का पानी पत्थरों से टकराकर बह रहा था।
कॉटेज के बाहर बने ओपन सिटिंग एरिया में विकी ने सूखी लकड़ियों से एक छोटा सा अलाव (बॉनफायर) जलाया था।
शाइना एक गर्म शॉल ओढ़े आग के पास बैठी थी। आग की नारंगी रोशनी उसके शांत चेहरे पर पड़ रही थी। विकी दो कपों में गरमा-गरम अदरक वाली चाय लेकर आया और एक कप शाइना की तरफ बढ़ा दिया।
“थैंक यू, विकी…” शाइना ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा।
“भाभी, आज खुलकर कह दीजिए। जो भी दर्द आपके सीने में अटका है, उसे इस आग में जला दीजिए,” विकी ने उसके पास थोड़ी दूरी पर बैठते हुए कहा।
शाइना की आँखों से धीरे-धीरे आंसू बहने लगे। इस बार ये आंसू डिप्रेशन के नहीं, बल्कि हलके होने के थे।
“मुझे बस इस बात का दुख है विकी कि मैंने अपनी जिंदगी के 6 साल एक ऐसे इंसान को दे दिए जिसने मुझे कभी समझा ही नहीं। क्या एक सच बोलने वाली, सीधे दिल की औरत होना पाप है?” शाइना की आवाज़ कांप रही थी। Devar Bhabhi Story
विकी ने आगे बढ़कर शाइना के कंधे पर अपना हाथ रखा। वह स्पर्श किसी प्रेमी का नहीं, बल्कि एक सच्चे रक्षक और छोटे भाई का था, जो अपनी बड़ी बहन जैसे रिश्ते को टूटने से बचाना चाहता था।
“पाप आपका नहीं है भाभी। इंसान को पहचान न पाना रोहन भैया की भूल थी। उन्होंने एक ऐसे इंसान को खो दिया जो उनके घर को मंदिर बना सकता था,” विकी ने बहुत ही आदरपूर्वक शाइना के माथे को छुआ। “आप अकेली नहीं हैं। यह दुनिया बहुत बड़ी है। आपकी अपनी पहचान है, आपका अपना करियर है। अब आप किसी के नाम से नहीं, अपने नाम से जानी जाएंगी।”

Devar Bhabhi Story एक पवित्र वादा और आत्म-सम्मान की वापसी
उस रात पहाड़ों की ठंड में, उस अलाव की आंच के सामने, दो इंसान बैठे थे जिनके बीच कोई वासना या गलत भावना नहीं थी। वहाँ एक ऐसा रिश्ता था जो मर्यादा की सबसे ऊँची मिसाल था।
विकी ने शाइना को यह अहसास कराया कि जीवन किसी एक इंसान के आने या जाने से खत्म नहीं होता। उसने शाइना को उसके पुराने शौक याद दिलाए- उसकी पेंटिंग्स, उसका इवेंट मैनेजमेंट का काम, और उसका बेबाक ठहाका।
“भाभी, मैं आपसे एक वादा चाहता हूँ,” विकी ने अपने हाथ आगे बढ़ाए।
शाइना ने अपने कांपते हाथ उसके हाथों में रखे।
“आप दिल्ली वापस चलकर अपने पैरों पर खड़ी होंगी। आप उस घर से अपना हक और अपना सामान सम्मान के साथ लेकर बाहर निकलेंगी। और मैं, आपका यह छोटा भाई, हमेशा एक ढाल बनकर आपके साथ खड़ा रहूँगा। चाहे दुनिया कुछ भी कहे,” विकी ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा।
शाइना ने विकी के निस्वार्थ प्यार और इस पवित्र समर्थन को देखा। उसे समझ आया कि रिश्ते खून के या शादी के मोहताज नहीं होते, रिश्ते तो नीयत और सम्मान के होते हैं।
शाइना की आँखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन इस बार उसके होठों पर एक बहुत ही खूबसूरत और आत्मविश्वास से भरी मुस्कान थी।
“मैं वादा करती हूँ, विकी। अब मैं कभी नहीं रोऊंगी,” शाइना ने मुस्कुराते हुए कहा।
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Devar Bhabhi Story नई सुबह, नया जीवन
अगली सुबह कासौल की पहाड़ियों पर सूरज की सुनहरी किरणें खिलीं। धुंध छंट चुकी थी और पार्वती नदी का पानी चांदी की तरह चमक रहा था।
शाइना कॉटेज की बालकोनी में खड़ी थी। उसने लाल रंग का ओवरकोट पहन रखा था। उसकी आँखों में अब कोई डर नहीं था, कोई डिप्रेशन नहीं था। वहाँ केवल एक नई शुरुआत की चमक थी।
विकी चाय के दो मग लेकर बालकोनी में आया। उसने देखा कि शाइना का चेहरा ताजी हवा और नए आत्मविश्वास से खिल उठा था।
“तैयार हैं आप, कैप्टन?” विकी ने मुस्कुराकर पूछा।
“बिल्कुल तैयार हूँ, विकी,” शाइना ने चाय का कप लेते हुए कहा। “दिल्ली वापस चलने के लिए और अपनी जिंदगी का नया चैप्टर लिखने के लिए।”
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखकर चाय का कप टकराया (Cheered)।
कासौल की उस रोड ट्रिप ने शाइना को उसका खोया हुआ आत्म-सम्मान और जीने की वजह वापस लौटा दी थी। देवर और भाभी का यह रिश्ता किसी भी सामाजिक बंदिश या गलतफहमी से परे, पवित्रता, मर्यादा और एक-दूसरे के प्रति अटूट सम्मान की एक ऐसी अनूठी मिसाल बन गया, जो जीवन भर उनका मार्गदर्शक रहने वाला था। Devar Bhabhi Story
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