Romantic Story in Hindi, चंडीगढ़ की शरद ऋतु की शुरुआत हो चुकी थी। सेक्टर 17 की चौड़ी सड़कों पर गिरे हुए सूखे पत्ते उड़ रहे थे और शाम होते ही हवा में हल्की सिहरन महसूस होने लगती थी।
निहारिका अपने दो-मंजिला मकान की ऊपरी बालकनी में खड़ी बाहर का नज़ारा देख रही थी। 28 साल की निहारिका की शादी तीन साल पहले शरद से हुई थी। शादी के शुरुआती छह महीने ही दोनों साथ रहे थे, जिसके बाद शरद वर्क परमिट पर कनाडा चला गया। Romantic Story in Hindi
शुरुआत में तो वादे और लंबी वीडियो कॉल्स का दौर चला, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, शरद के फोन कम होते गए। अब स्थिति यह थी कि हफ़्तों में एक बार औपचारिकता के लिए बात होती थी। Romantic Story in Hindi

घर में निहारिका के साथ उसकी सास कमलेश जी और उसका देवर यशवंत रहते थे। कमलेश जी बढ़ती उम्र और जोड़ों के दर्द से परेशान रहती थीं, इसलिए घर का ज़्यादातर काम निहारिका ही संभालती थी।
21 साल का यशवंत, पंजाब यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष का छात्र था। वह एक शांत, सुलझा हुआ और सुडौल शरीर वाला युवक था। घर का अकेला पुरुष सदस्य होने के कारण वह अपनी भाभी निहारिका का बहुत सम्मान करता था और घर की ज़िम्मेदारियाँ भी बखूबी उठाता था। Romantic Story in Hindi
नवंबर के दूसरे हफ्ते में निहारिका को अचानक पेट में तेज ऐंठन और दर्द होने लगा। लोकल क्लिनिक के डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि ठंड लगने और इंफेक्शन के कारण पेट की नसों में गंभीर सूजन आ गई है। डॉक्टर ने भारी दवाओं के साथ-साथ दिन में दो से तीन बार पेट के निचले हिस्से की गर्म पानी की थैली (Hot Water Bottle) से सिकाई करने की सख्त सलाह दी।
सास कमलेश जी से अपनी बीमारी की वजह से झुक पाना या देर तक बैठना संभव नहीं था। ऐसे में घर का सारा दारोमदार यशवंत के कंधों पर आ गया।

Romantic Story in Hindi: स्पर्श का अहसास
शुरुआत में यशवंत को थोड़ा संकोच हुआ, लेकिन भाभी की तकलीफ देखकर उसने अपनी हिचकिचाहट को किनारे कर दिया।
शाम के समय जब कमरे में हल्की मद्धम रोशनी फैली हुई थी, यशवंत गर्म पानी की बोतल लेकर निहारिका के कमरे में आया। निहारिका बेड पर लेटी हुई थी, दर्द के कारण उसके चेहरे पर पसीने की बारीक बूँदें थीं।
“भाभी, डॉक्टर ने कहा है कि सिकाई बहुत जरूरी है,” यशवंत ने धीमी आवाज़ में कहा।
निहारिका ने धीरे से सिर हिलाया। उसने अपनी नाइटी को पेट के निचले हिस्से से थोड़ा सा ऊपर किया। निहारिका की गोरी और सुडौल कमर का हिस्सा रोशनी में चमक रहा था।
यशवंत ने रबड़ की थैली पर तौलिया लपेटा और उसे निहारिका के पेट पर रखा। पहली बार जब यशवंत की गर्म उँगलियाँ सिकाई करते हुए निहारिका की त्वचा से टकराईं, तो निहारिका के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। यशवंत की हथेलियों में युवावस्था की एक अजीब सी ताज़गी और गरमाहट थी।
“ज़्यादा गरम तो नहीं लग रहा, भाभी?” यशवंत ने निहारिका की आँखों में देखते हुए पूछा।
“नहीं… सही है,” निहारिका ने अपनी कांपती हुई आवाज़ में कहा।
दिन में दो बार सिकाई का यह सिलसिला अगले दस दिनों तक चला। हर रोज़, जब यशवंत के मजबूत और गर्म हाथ निहारिका के पेट की नसों को सहलाते और सिकाई करते, तो निहारिका का दर्द तो कम होता ही, साथ ही उसके भीतर एक सोई हुई वासना जागने लगती।
कनाडा में बैठा पति शरद जो शारीरिक और मानसिक दूरी बना चुका था, उसकी भरपाई यशवंत के इस निस्वार्थ और संवेदनशील स्पर्श से होने लगी थी। निहारिका जब भी आँखें मूँदती, उसे यशवंत के हाथों का स्पर्श और उसकी साँसों की गरमाहट अपनी नाभि के पास महसूस होती।

Romantic Story in Hindi: दोनों में आपसी खिंचाव और बंद कमरा
दो हफ़्तों के भीतर निहारिका पूरी तरह ठीक हो गई। लेकिन अब वह बीमारी से नहीं, बल्कि यशवंत के प्रति अपने बढ़ते आकर्षण से बेचैन थी। अब जब सिकाई बंद हो गई थी, तो उसे यशवंत का वह स्पर्श याद आने लगा।
एक शनिवार की रात, पूरे चंडीगढ़ में झमाझम बारिश हो रही थी। ठंड अचानक बहुत बढ़ गई थी। सास कमलेश जी अपनी दवाइयाँ लेकर रात नौ बजे ही नीचे अपने कमरे में सो चुकी थीं।
निहारिका अपने कमरे में बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसने काले रंग की सिल्क की साटन नाइटी पहनी हुई थी। कमरे में सिर्फ़ नाइट लैंप की हल्की गुलाबी रोशनी थी। वह सो नहीं पा रही थी; उसका मन और शरीर यशवंत के सानिध्य के लिए तड़प रहा था।
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तभी कमरे के दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। यशवंत अंदर आया।
“भाभी, बाहर बहुत ठंड है… मैंने सोचा पूछ लूँ कि आपके पेट में फिर से दर्द तो नहीं हो रहा?” यशवंत ने दरवाजे के पास खड़े होकर कहा।
निहारिका बिस्तर पर उठकर बैठ गई। नाइटी का गला थोड़ा ढीला था, जिससे उसकी सुडौल देह की झलक साफ मिल रही थी। “दर्द तो नहीं है यशवंत… लेकिन मन बहुत भारी है।”
यशवंत थोड़ा आगे बढ़ा। “क्या हुआ भाभी? आप शरद भाई को याद कर रही हैं?”
निहारिका ने एक लंबी साँस ली और यशवंत की ओर देखा। “नहीं यशवंत। मैं उस इंसान को याद कर रही हूँ जिसने बिना किसी शर्त के मेरी देखभाल की… जिसने मुझे अपनी गरमाहट दी।”
यशवंत हैरान रह गया। निहारिका ने यशवंत का हाथ पकड़ा और उसे अपने बिस्तर पर बैठा लिया। जब निहारिका के रेशमी हाथों ने यशवंत की हथेली को छुआ, तो यशवंत की धड़कनें तेज़ हो गईं।
“भाभी… यह…” यशवंत की आवाज़ लड़खड़ा गई।
“मुझे ‘भाभी’ मत कहो आज यशवंत,” निहारिका ने उसकी आँखों में झांकते हुए कहा। “जब तुम मेरे पेट की सिकाई करते थे, तो मुझे लगता था कि मेरी बंजर ज़िंदगी में कोई सांसें भर रहा है। मुझे उस स्पर्श की ज़रूरत है यशवंत।”
यशवंत के भीतर छुपा हुआ युवा मर्द अब जाग चुका था। वह भी इतने दिनों से निहारिका की खूबसूरती और उसकी काया के प्रति आकर्षित हो रहा था, लेकिन अपनी मर्यादा में बंधा था। निहारिका के इन शब्दों ने उसकी बची-कुची हिचकिचाहट को पूरी तरह से मिटा दिया।
यशवंत ने आगे बढ़कर निहारिका के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भर लिया। उसने धीरे-धीरे अपने होंठ निहारिका के कांपते हुए गुलाबी होंठों पर रख दिए।
यह चुंबन सिर्फ़ एक शुरुआत नहीं थी, यह प्यास का बुझना था। दोनों के होंठ आपस में इस तरह मिले जैसे बरसों से एक-दूसरे की तलाश में हों। निहारिका ने अपनी बांहें यशवंत की चौड़ी गर्दन के गिर्द कस लीं। यशवंत की जीभ जब निहारिका के मुँह में दाखिल हुई, तो निहारिका के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली सीटी जैसी आवाज़ निकली।
यशवंत के होंठ अब निहारिका के होंठों से खिसककर उसकी गर्दन, उसकी ठुड्डी और फिर उसके कानों की लोलक तक पहुँच गए। निहारिका ने अपना सिर पीछे फेंक दिया। उसकी साटन की नाइटी की स्ट्रैप्स उसके कंधों से नीचे खिसक गईं। Romantic Story in Hindi
यशवंत ने अपने गर्म होंठ निहारिका के कंधों पर रखे। उसकी उँगलियाँ निहारिका की पीठ पर रेंगने लगीं। सिल्क का कपड़ा सरकता हुआ कमर तक आ गया। निहारिका के सुडौल और कसे हुए वक्षस्थल अब यशवंत के सामने थे।
यशवंत ने बिना किसी देरी के अपने चेहरे को उसके वक्ष में छिपा लिया। उसकी गर्म साँसें और होंठ जब निहारिका के संवेदनशील हिस्सों से टकराए, तो निहारिका की पीठ हवा में उठ गई। उसने यशवंत के बालों को अपनी उँगलियों से कसकर जकड़ लिया।
“यशवंत… और… मुझे पूरी तरह से अपना बना लो…” निहारिका फुसफुसाई।

यशवंत ने निहारिका को बिस्तर पर लेटा दिया। उसने अपनी टी-शर्ट उतारकर फेंक दी। उसका गठीला और सुडौल सीना निहारिका के कोमल शरीर से टकराया। दोनों की त्वचा का संपर्क होते ही कमरे की हवा में एक अजीब सा कामुक तनाव फैल गया।
यशवंत के हाथ अब निहारिका के पेट की ओर बढ़े—वही पेट जहाँ वह कुछ दिन पहले सिकाई किया करता था। लेकिन आज सिकाई पानी की बोतल से नहीं, बल्कि यशवंत के पैशनेट चुंबनों से हो रही थी। यशवंत ने नाभि के पास निहारिका की त्वचा को अपने दांतों से हल्का सा काटा, जिससे निहारिका सिसक उठी। Romantic Story in Hindi
“आह… यशवंत!” निहारिका ने अपनी आँखें मूँद लीं। उसकी जाँघें स्वतः ही यशवंत की कमर के चारों ओर कस गईं।
दोनों के शरीर एक-दूसरे की गर्मी में पूरी तरह पिघल चुके थे। बाहर चंडीगढ़ की बारिश तेज़ हो रही थी, खिड़कियों पर पानी की बूँदें टकरा रही थीं, लेकिन कमरे के भीतर प्रेम और शारीरिक सुख का एक ऐसा तूफ़ान चल रहा था जिसने दोनों को सामाजिक बंधनों से बहुत दूर फेंक दिया था।
जब दोनों का मिलन अपने चरम पर पहुँचा, तो कमरे में सिर्फ़ उनकी तेज़ साँसें, पसीने की महक और चरम सुख की आहें गूँज रही थीं। निहारिका ने यशवंत को अपने भीतर इतनी गहराई से महसूस किया कि उसे लगा जैसे वह बरसों बाद पूरी तरह से जीवित हुई है।

Romantic Story in Hindi: एक अनकहा रिश्ता
तड़के चार बजे, जब बारिश थम चुकी थी और खिड़की के बाहर हल्का सा उजाला छाने लगा था, यशवंत निहारिका की बाहों में सिर रखे सो रहा था।
निहारिका जाग रही थी। वह शांति से यशवंत के सीने पर अपने हाथ फेर रही थी। उसके चेहरे पर अब किसी तरह की ग्लानि या पछतावा नहीं था। उसने समझ लिया था कि जो रिश्ता नाम का था (शरद के साथ), वह खोखला हो चुका था; और जो रिश्ता बिना नाम का था (यशवंत के साथ), उसने उसे एक नई ज़िंदगी दी थी।
यशवंत ने अपनी आँखें खोलीं और निहारिका को देखकर मुस्कुराया। उसने निहारिका के माथे को चूमा।
“क्या सोच रही हो?” यशवंत ने धीमी आवाज़ में पूछा।
“यही कि जब तुमने पहली बार मेरे पेट को छुआ था, तो मुझे नहीं पता था कि यह स्पर्श मेरी पूरी दुनिया बदल देगा,” निहारिका ने यशवंत के सीने पर अपना कान टिकाते हुए कहा।
यशवंत ने उसे चादर में और कसकर लपेट लिया। चंडीगढ़ का वह कोहरे से ढका घर अब उन दोनों के लिए सिर्फ़ एक इमारत नहीं था, बल्कि एक ऐसा आसरा बन चुका था जहाँ वे दोनों एक-दूसरे की तन्हाई का मरहम बन चुके थे। Romantic Story in Hindi
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