विशाल लिविंग रूम में एक तरफ अनन्या का डिज़ाइनिंग स्टेशन था- जहाँ एक बड़ा एप्पल मॉनिटर, वाकोम (Wacom) स्केचिंग पैड, रंग-बिरंगे पेंसिलों के डिब्बे और कई तरह के विजुअल आर्ट बुक्स बिखरी रहती थीं।
दूसरी तरफ सिद्धार्थ का टेक-ज़ोन था- जहाँ दो-दो मॉनिटर्स पर हरी-सफेद कोडिंग की लाइनें चलती रहती थीं, एक बड़ा सा व्हाइटबोर्ड था जिस पर स्टार्ट-अप के फ्लोचार्ट बने थे, और टेबल पर खाली कॉफी मग का ढेर रहता था। Devar Bhabhi story
अंकित के बैंगलोर शिफ्ट होने के बाद, अनन्या चाहती तो अपने मायके दिल्ली जा सकती थी, लेकिन उसके बड़े प्रोजेक्ट्स और ऑफिस के वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर के कारण उसने इसी फ्लैट में रहने का फैसला किया। सिद्धार्थ अपने स्टार्ट-अप ‘न्यूरो-टेक’ की शुरुआती फंडिंग और प्रोडक्ट लॉन्च में दिन-रात एक कर रहा था। Devar Bhabhi story
दोनों के बीच देवर-भाभी वाला वो रूढ़िवादी पर्दा कभी नहीं रहा, जो अक्सर भारतीय समाज में देखा जाता है। वे एक-दूसरे को नाम से बुलाते थे, एक-दूसरे के काम में दखल नहीं देते थे, स्विगी-ज़ोमैटो से खाना ऑर्डर करने के लिए बिल स्प्लिट करते थे और वीकेंड पर घर के बालकनी में बीयर के कैन खोलकर दुनिया भर की फ़िजूल बातों पर बहस करते थे। वे एकदम परफेक्ट ‘रूममेट्स’ और ‘बेस्ट फ्रेंड्स’ थे।

Devar Bhabhi story ‘सिड’ और ‘अनन्या’- दो अलग ध्रुव, एक ही छत
“अरे सिड! मेरा स्टाइलस पेन कहीं देखा है क्या?” अनन्या ने झल्लाते हुए अपने बिखरे बालों को मेस-बन (mess-bun) में बांधते हुए पूछा। वह एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय फैशन ब्रांड के लिए इलस्ट्रेशन बना रही थी और उसकी समय-सीमा (deadline) सुबह 8 बजे की थी।
सिद्धार्थ ने बिना अपनी नज़रें कोडिंग स्क्रीन से हटाए, बड़ी सहजता से कहा, “तुम्हारे बाईं तरफ रखे उस खाली कोल्ड-कॉफी वाले मग के पीछे है, मेरी डिज़ाइनर क्वीन! और अगर तुम किचन की तरफ जा रही हो, तो मेरे लिए भी एक कप डबल-शॉट ब्लैक कॉफी बना दो। आज रात मेरी पिच-डेक (pitch deck) का फाइनल रिव्यू है।”
“शर्त यह है कि कल सुबह के सारे गंदे बर्तन तुम डिशवॉशर में डालोगे,” अनन्या ने किचन की तरफ बढ़ते हुए चिढ़ाने वाले अंदाज़ में कहा।
“मंजूर है! डील!” सिद्धार्थ हंसा।
अनन्या जब किचन में कॉफी बीन्स पीस रही थी, तब उसने मुड़कर लिविंग रूम में बैठे सिद्धार्थ को देखा। 24 साल का सिद्धार्थ… इस उम्र में जहाँ ज़्यादातर लड़के क्लबिंग, डेटिंग ऐप्स और दोस्तों के साथ ट्रिप्स में व्यस्त रहते हैं, वहीं सिद्धार्थ के सिर पर अपने सपने को सच करने का भूत सवार था। उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे थे, लेकिन उसकी लगन में कोई कमी नहीं थी। Devar Bhabhi story
अनन्या के मन में सिद्धार्थ के लिए हमेशा से एक गहरा सम्मान था। उसका पति अंकित बेहद सीधा, शांत और रिस्क न लेने वाला इंसान था, जबकि सिद्धार्थ तूफानों से टकराने वाला लड़का था। दोनों भाइयों में ज़मीन-आसमान का फर्क था।
अनन्या दो मग लेकर बाहर आई और एक मग सिद्धार्थ की कोडिंग टेबल पर रख दिया।
“थैंक्स, अनू,” सिद्धार्थ ने मुस्कुराकर कहा। वह अक्सर अनजाने में ही उसे ‘अनन्या’ की जगह ‘अनू’ कह देता था, और अनन्या को भी इस नाम से कभी कोई एतराज नहीं हुआ था।

Devar Bhabhi story. जब ताश के पत्तों की तरह बिखरे सपने
रात के 2:30 बज चुके थे। अचानक फ्लैट में छाए सन्नाटे को सिद्धार्थ के फोन की तेज़ रिंगटोन ने तोड़ दिया।
सिद्धार्थ ने तुरंत फोन उठाया। स्क्रीन पर उसके मुख्य निवेशक (Lead Investor) का नाम चमक रहा था।
“हेलो, मिस्टर कपूर! यस, आई एम अवेक…” सिद्धार्थ की आवाज़ में एक उत्साह था।
लेकिन जैसे-जैसे कॉल आगे बढ़ा, सिद्धार्थ के चेहरे का रंग उड़ने लगा। उसकी चमकती आँखें धीरे-धीरे एकदम सुन्न हो गईं। उसकी सांसों की गति तेज़ हो गई।
“बट मिस्टर कपूर… हमने सारे बीॉ-टेस्टिंग पास कर लिए हैं… लीगल क्लीयरेंस भी हो चुका है… आप इस स्टेज पर बैकआउट कैसे कर सकते हैं?” सिद्धार्थ की आवाज़ में एक गिड़गिड़ाहट आ गई थी, जो अनन्या ने कभी नहीं सुनी थी।
फोन कट गया।
सिद्धार्थ ने धीरे से फोन टेबल पर रखा। उसकी उंगलियां कांप रही थीं। उसने अपने दोनों हाथों से अपना सिर ढँक लिया और बिल्कुल खामोश हो गया। Devar Bhabhi story
अनन्या, जो अपने टेबल पर काम कर रही थी, तुरंत उठी और सिद्धार्थ की तरफ भागी।
“सिड? क्या हुआ? सब ठीक तो है न?” उसने सिद्धार्थ के कंधे पर हाथ रखा।
सिद्धार्थ ने कोई जवाब नहीं दिया। उसकी आँखों से दो आंसू टपक कर उसकी कोडिंग वाली कीबोर्ड पर गिर पड़े।
“सिड, बोलो ना! क्या कहा कपूर ने?” अनन्या का दिल घबराहट से बैठने लगा।
सिद्धार्थ ने अपना सिर उठाया। उसकी आँखें लाल थीं और चेहरे पर एक अजीब सा खालीपन था। “फंडिंग कैंसिल हो गई, अनू। कपूर की कंपनी ने एआई सेक्टर के किसी दूसरे स्टार्ट-अप में इन्वेस्ट कर दिया। छह महीने की मेरी मेहनत… मेरी पूरी टीम की दिन-रात की कोडिंग… सब खत्म हो गया। कल सुबह मुझे अपनी 8 लोगों की टीम को बताना होगा कि हमारे पास अगले महीने का वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं हैं।”
“ओह गॉड…” अनन्या के मुंह से निकला।
“मैं एक फेलियर हूँ, अनू,” सिद्धार्थ ने भर्राई हुई आवाज़ में कहा। “भैया सही कहते थे कि मुझे किसी कंपनी में 9-टू-5 जॉब कर लेनी चाहिए थी। मैंने अपनी ज़िंदगी के दो साल बर्बाद कर दिए।”

Devar Bhabhi story सांत्वना, स्पर्श और पिघलती दीवारें
अनन्या से सिद्धार्थ की यह हालत देखी नहीं गई। उसने सिद्धार्थ का हाथ पकड़ा और उसे ज़बरदस्ती चेयर से उठाकर अपने सामने खड़ा किया।
“शट अप, सिद्धार्थ! ज़रा अपनी बकवास बंद करो!” अनन्या ने लगभग डांटते हुए कहा। उसने सिद्धार्थ के दोनों गालों को अपने हाथों में थाम लिया। उसकी उंगलियों की गरमाहट सिद्धार्थ के ठंडे पड़े चेहरे को महसूस होने लगी। Devar Bhabhi story
“मेरी तरफ देखो, सिड!” अनन्या ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा। “तुम कोई फेलियर नहीं हो। तुमने 24 साल की उम्र में वो कर दिखाया है जो लोग 40 की उम्र में सोचने की हिम्मत भी नहीं करते। एक इन्वेस्टर के बैकआउट करने से तुम्हारी काबिलियत कम नहीं हो जाती। समझे तुम?”
“लेकिन अनू… मेरे पास अब कोई रास्ता नहीं बचा है,” सिद्धार्थ की आवाज़ फिर कांपी।
“रास्ता हम बनाएंगे!” अनन्या ने बहुत प्यार से उसके माथे से बिखरे हुए बालों को पीछे हटाया। “मैं अपनी सेविंग्स तुम्हें दूंगी। हम नए इन्वेस्टर्स ढूंढेंगे। मैं तुम्हारे प्रोडक्ट की नई ब्रांडिंग और डिज़ाइनिंग खुद करूंगी, वो भी मुफ्त में। लेकिन तुम हार नहीं मानोगे!”
सिद्धार्थ ने अनन्या की आँखों में देखा। वहाँ कोई दया नहीं थी, केवल एक अटूट विश्वास, एक बेपनाह अपनापन और एक ऐसी ताकत थी जिसकी इस वक्त सिद्धार्थ को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
एक स्टार्ट-अप फाउंडर के तौर पर सिद्धार्थ हमेशा दुनिया के सामने एक मजबूत, निडर इंसान बनने का नाटक करता था। लेकिन आज, इस बंद कमरे में, 22वीं मंज़िल के इस सन्नाटे में, उसका वो सारा मुकुट गिर गया। वह एक छोटे बच्चे की तरह पूरी तरह टूट गया। Devar Bhabhi story
अचानक सिद्धार्थ ने आगे बढ़कर अनन्या को अपनी बाहों में भर लिया। उसने अपना सिर अनन्या की गर्दन और कंधे के बीच छिपा लिया और रोने लगा।
अनन्या एक पल के लिए चौंक गई। उसके हाथ हवा में जम गए। लेकिन अगले ही पल उसने अपनी बांहें सिद्धार्थ की पीठ के चारों ओर लपेट लीं। उसने सिद्धार्थ को कसकर पकड़ लिया और उसके सिर को सहलाने लगी।
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“इट्स ओके, सिड… सब ठीक हो जाएगा। मैं हूँ न तुम्हारे साथ,” अनन्या फुसफुसाती रही।
सिद्धार्थ की चौड़ी छाती अनन्या के सीने से सटी हुई थी। उसकी गर्म सांसें अनन्या की गर्दन की संवेदनशील त्वचा पर पड़ रही थीं। धीरे-धीरे सिद्धार्थ का रोना कम होने लगा, लेकिन दोनों में से किसी ने भी एक-दूसरे को अलग करने की कोशिश नहीं की।
कमरे का तापमान अचानक बदल गया। जो आलिंगन (hug) केवल सांत्वना और हमदर्दी के लिए शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे एक बहुत ही गहरे, शारीरिक और मानसिक खिंचाव में बदलने लगा।

Devar Bhabhi story कमरा नंबर 402 में नई केमिस्ट्री
सिद्धार्थ ने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया। लेकिन उसने अनन्या को अपनी बाहों से आजाद नहीं किया।
दोनों के चेहरे के बीच केवल कुछ इंच का फासला था। अनन्या की सांसें तेज़ चल रही थीं। उसकी आँखें सिद्धार्थ के होठों पर गईं और फिर उसकी गहरी, भावुक आँखों में जा टिकीं।
“तुम इतनी अच्छी क्यों हो, अनू?” सिद्धार्थ ने बहुत धीमी, कांपती हुई आवाज़ में पूछा। उसकी उंगलियां अनन्या की कमर पर थोड़ा कस गईं।
“क्योंकि… क्योंकि मैं तुम्हें इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकती, सिड,” अनन्या की आवाज़ भी धीमी हो गई।
“यह सिर्फ हमदर्दी है… या कुछ और?” सिद्धार्थ ने अनन्या की आँखों में झांकते हुए पूछा।
यह एक ऐसा सवाल था जिसका जवाब अनन्या के पास शब्दों में नहीं था। वह जानती थी कि यह उसका देवर है, उसके पति का छोटा भाई। लेकिन इस वक्त, कमरा नंबर 402 की इस रहस्यमयी रोशनी में, वे केवल ‘देवर और भाभी’ नहीं थे। वे दो ऐसे इंसान थे जो एक-दूसरे की रूह की गहराई को महसूस कर रहे थे। पिछले छह महीनों में जो दोस्ती, जो कम्फर्ट, जो सीक्रेट बॉन्डिंग उनके बीच पनपी थी, वह आज अपने चरम पर थी। Devar Bhabhi story
सिद्धार्थ की उंगलियां अनन्या के चेहरे से होती हुई उसकी ठुड्डी तक आईं। उसने बहुत ही नज़ाकत से अनन्या के चेहरे को थोड़ा ऊपर उठाया।
“सिड…” अनन्या के मुंह से एक हल्की सी चेतावनी निकली, लेकिन उसकी अपनी बांहें सिद्धार्थ के गालों को सहला रही थीं। उसका कोई भी अंग सिद्धार्थ को पीछे धकेलने की कोशिश नहीं कर रहा था।
“बस आज रात के लिए… मुझे खुद को भूल जाने दो, अनू,” सिद्धार्थ ने फुसफुसाते हुए कहा।
सिद्धार्थ धीरे से आगे बढ़ा। उसने सबसे पहले अनन्या की दाहिनी आँख के कोने पर ठहरे आंसू की बूंद पर अपने होंठ रखे। अनन्या ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसके जिस्म में एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई। Devar Bhabhi story
इसके बाद सिद्धार्थ के होंठ अनन्या के गालों से होते हुए उसके होठों के बिल्कुल करीब पहुँच गए।
अनन्या की सांसें अटक गईं। उसने कोई विरोध नहीं किया।
सिद्धार्थ ने बहुत ही धीमे, सम्मानजनक और गहरे अंदाज़ में अपने होंठ अनन्या के होठों पर रख दिए। यह चुंबन किसी हवस या वासना का नतीजा नहीं था। यह दो अकेले, थके हुए और एक-दूसरे को बेइंतहा चाहने वाले दिलों का मिलन था।
अनन्या का सारा संयम पिघल गया। उसने अपनी उंगलियां सिद्धार्थ के घने बालों में फंसा लीं और उस चुंबन का पूरा जवाब दिया। सिद्धार्थ ने अनन्या को उठाकर अपने साथ उस विशाल काउच पर बैठा लिया। Devar Bhabhi story
कमरा नंबर 402 में उस रात कोडिंग के सारे लॉजिक हार गए थे और जज्बातों की एक नई स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी। दोनों एक-दूसरे के स्पर्श में खो चुके थे। सिद्धार्थ का हर स्पर्श अनन्या को यह अहसास करा रहा था कि वह कितनी खूबसूरत है, कितनी ख़ास है- एक ऐसा अहसास जो उसका पति अंकित उसे सालों में भी नहीं दे पाया था।
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Devar Bhabhi story. एक नई भोर और बदला हुआ रिश्ता
सुबह के 6:00 बज चुके थे। गुरगाँव की ऊंची इमारतों के पीछे से सूरज की हल्की नारंगी और गुलाबी किरणें निकल रही थीं। कांच की बड़ी खिड़की से छनकर आती रोशनी लिविंग रूम में फैल रही थी।
काउच पर अनन्या सिद्धार्थ की बाहों में अपना सिर रखे सो रही थी। सिद्धार्थ का एक हाथ उसके बालों में था और दूसरा हाथ उसकी कमर को घेरे हुए था।
सिद्धार्थ की आँखें खुलीं। उसने अपने पास सोई हुई अनन्या को देखा। उसके चेहरे पर एक अजीब सा सुकून था, एक ऐसा निखार था जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। सिद्धार्थ ने बहुत धीरे से उसके माथे पर अपने होंठ टिका दिए।
अनन्या ने भी धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसने सामने सिद्धार्थ को देखा, जो उसे ही निहार रहा था।
एक पल के लिए कमरे में खामोशी छा गई- शायद ‘गिल्ट’ (अपराधबोध) के आने का खतरा था। लेकिन सिद्धार्थ ने अनन्या का हाथ उठाया और अपनी हथेलियों में लेकर उसे चूमा।
“गुड मॉर्निंग, मेरी डिज़ाइनर,” सिद्धार्थ ने एक प्यारी सी मुस्कान के साथ कहा।
अनन्या भी मुस्कुरा दी। उसके दिल से सारा डर, सारा अपराधबोध गायब हो गया। “गुड मॉर्निंग, मेरे जिद्दी फाउंडर।”
“आज से हम नई शुरुआत करेंगे,” सिद्धार्थ ने कहा। “तुम मेरी नई डिज़ाइनर बनोगी, और हम अपनी कंपनी को फिर से खड़ा करेंगे।”
“और… हमारे इस रिश्ते का क्या?” अनन्या ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा।
सिद्धार्थ ने अनन्या के गाल को छुआ और संजीदगी से बोला, “दुनिया के लिए हम इस घर के दो रूममेट्स रहेंगे… लेकिन कमरा नंबर 402 की इस चारदीवारी के अंदर, तुम मेरी वो प्रेरणा रहोगी जिसके बिना मैं अधूरा हूँ।”
अनन्या ने अपना सिर सिद्धार्थ के सीने पर रख दिया।
अंकित का फोन बैंगलोर से आ सकता था, दुनिया सवाल उठा सकती थी, लेकिन उस सुबह, 22वीं मंज़िल के उस फ्लैट में दो लोगों ने यह समझ लिया था कि प्यार हमेशा बनाए बनाए नियमों पर नहीं चलता। कभी-कभी वह देर रात की एक कप कॉफी, एक-दूसरे पर अटूट विश्वास और कमरा नंबर 402 के सन्नाटे में चुपके से जन्म ले लेता है। Devar Bhabhi story
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