Devar Bhabhi Love Story : devar bhabhi romance : एआई द्वारा तैयार इमेज
रोमांटिक कहानियां

मुजफ्फरनगर की वो रात, जिसने भाभी और देवर की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी Devar Bhabhi Love Story

Devar Bhabhi Love Story: मुजफ्फरनगर की गर्मियों की शामें हमेशा से भारी और उबाऊ होती हैं। ढलते सूरज की तपन के साथ हवा में आसपास के गन्ने के खेतों की मीठी और सोंधी-सी गंध घुलने लगती है। शहर के पुराने, संकरे मोहल्लों में जब नीम के विशाल पेड़ों की छाया लंबी होने लगती, तब ऐसा लगता मानो पूरा शहर किसी अनदेखे बोझ तले दबा हुआ सांस ले रहा हो।
उसी शहर के एक साधारण, दो मंजिला मकान में पूनम रहती थी। उम्र 28 साल, चेहरा गहरा गेहुँआ, और आँखें इतनी शांत कि पहली नज़र में कोई सोच भी नहीं सकता था कि उनके पीछे कितनी बेचैनी छिपी है।
शादी के पाँच लंबे साल बीत चुके थे। उसका पति राजेश ज्यादातर दिल्ली, मेरठ या मुरादाबाद के दौरों पर ही रहता था। चीनी मिल के ठेकेदारी का काम था उसका- कागज़ों, वेंडरों और रुपयों के जोड़-तोड़ में उलझा हुआ।
घर में अकेली रहने वाली पूनम के दिन रसोई की भाप, आँगन की झाड़ू-पोंछ और सास-ससुर की समय पर दवा-चाय की सेवा में ही बीत जाते थे। उसकी जिंदगी में कोई नया रंग नहीं था, कोई नया मोड़ नहीं था; बस एक ही ढर्रे पर घूमती हुई घड़ी की सुइयां थीं।
Devar Bhabhi Love Story in hindi
राजेश का छोटा भाई, प्रदोष भी उसी घर में रहता था। उम्र 25 साल। कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके वह अभी घर पर ही था और सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ-साथ किसी अच्छी जॉब की तलाश में जुटा था। लंबा-चौड़ा गठीला बदन, माथे पर एक हल्की सी विचारशील रेखा, और आवाज में युवाओं वाली स्वाभाविक बेचैनी।
शुरुआत से ही पूनम और प्रदोष का रिश्ता एक सामान्य भाभी-देवर का ही था- हल्की-फुल्की नोक-झोंक, सुबह की चाय पर थोड़ा-बहुत मज़ाक, दोपहर के खाने की थाली में पूनम का एक रोटी ज्यादा परोस देना, और प्रदोष का कभी-कभार मुस्कुराकर कह देना- “भाभी, आज आलू-गोभी की सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनी है।”
लेकिन वक्त के साथ, बिना किसी आहट के, कुछ चीज़ें अंदर ही अंदर बदलने लगी थीं।
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Devar Bhabhi Love Story: अनजाने स्पर्श और उभरती दरारें

जून की एक तपती शाम को, जब सास-ससुर किसी रिश्तेदार के यहाँ तीये में गए हुए थे और राजेश दो दिनों से मेरठ के दौरे पर था, पूनम आँगन में बैठी कपड़े सुखा रही थी। धूप भले ही ढल चुकी थी, लेकिन दीवारों से अब भी उमस की लपटें निकल रही थीं। तभी प्रदोष बाहर से अपनी साइकिल से लौटा। पसीने से तर-बतर बदन, बाल माथे पर चिपके हुए और साँसें थोड़ी तेज़।
उसने आँगन में आते ही साइकिल स्टैंड पर लगाई और हांफते हुए कहा, “भाभी, थोड़ा ठंडा पानी मिलेगा? गला सूख रहा है।”
पूनम ने तुरंत फ्रीज से स्टील के गिलास में पानी भरा और उसकी तरफ बढ़ाया। पानी लेते वक्त प्रदोष की पसीने से भीगी उंगलियां पूनम की उंगलियों से अचानक छुप गईं। वह महज एक सेकंड का स्पर्श था, लेकिन जैसे दोनों के बदन में एक हल्की सी बिजली कौंध गई। दोनों एक पल के लिए अपनी-अपनी जगह ठिठक गए।
प्रदोष ने गिलास लिया, एक ही सांस में पूरा पानी पी गया और गिलास वापस बढ़ाते हुए धीरे से कहा, “भाभी, आज बाहर बहुत ज्यादा गर्मी है… अंदर भी घुटन सी हो रही है।”
पूनम ने नजरें झुकाकर मुस्कुराने की कोशिश की, “तुम रोज दोपहर में इतनी धूप में क्यों निकलते हो? थोड़ा रुककर जाया करो।”
उस रात खाना खाते समय दोनों के बीच बातचीत बिल्कुल सामान्य रही, लेकिन जब प्रदोष अपने कमरे में सोने चला गया, तो पूनम रसोई की सफाई करते हुए बार-बार अपनी उंगलियों के उस हिस्से को देख रही थी जहाँ प्रदोष का स्पर्श हुआ था।
Devar Bhabhi Love Story
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उसने खुद को मन ही मन डाँटा- ‘यह मैं क्या सोच रही हूँ? वह मेरा देवर है, छोटे भाई जैसा है।’ लेकिन सोच इतनी आसानी से कहाँ रुकती है? अकेलेपन की दरारों में से भावनाएं अपना रास्ता ढूंढ ही लेती हैं।

अगले कुछ हफ्तों में ऐसी ही छोटी-छोटी, मामूली बातें जमा होती गईं। एक दोपहर पूनम छत पर धोए हुए सूती कपड़े सुखाने डाल रही थी। अचानक तेज हवा का झोंका आया और उसकी साड़ी का पल्लू सरककर हवा में उड़ गया।
प्रदोष ठीक उसी वक्त नीचे आँगन में खड़ा होकर नल पर मुंह धो रहा था। उसने अनजाने में ऊपर देखा। पूनम ने घबराकर जल्दी से पल्लू संभाला, लेकिन उसकी नजरें सीधे प्रदोष की नजरों से जा टकराईं। प्रदोष ने तुरंत नजरें फेर लीं और कमरे की तरफ बढ़ गया, लेकिन उस एक पल की खामोशी ने दोनों को यह बता दिया था कि उनके बीच कुछ ऐसा अंकुरित हो चुका है, जिसे छिपाना अब नामुमकिन था।

Devar Bhabhi Love Story: सीमा पार करता मन

एक रात राजेश का फोन आया, “पूनम, इस बार मिल के काम में कुछ अड़चन आ गई है। मुझे यहाँ दस दिन और लग जाएंगे। तुम घर का और माँ-पिताजी का ख्याल रखना।”
पूनम ने धीमी आवाज में हामी भर दी। फोन कटने के बाद जब वह बिस्तर पर लेटी, तो उसे अजीब सी घबराहट और बेचैनी होने लगी। पूरा घर सन्नाटे में डूबा था। सास-ससुर दवाई खाकर अपने कमरे में गहरी नींद में सो चुके थे। बरामदे के उस पार प्रदोष का कमरा था, जिसके किवाड़ के नीचे से हल्की पीली रोशनी छनकर बाहर आ रही थी।
पूनम का गला सूखने लगा। वह पानी पीने के लिए उठी। रसोई में जाकर उसने जग से पानी उड़ेला ही था कि पीछे से एक शांत, लेकिन भारी आवाज आई, “भाभी… नींद नहीं आ रही क्या?”
पूनम चौंककर पलटी। प्रदोष टी-शर्ट और सूती पैजामे में किवाड़ से टिका खड़ा था। पूनम ने धीरे से अपना सिर हिलाया, “नहीं… मुझे भी नहीं।”
बिना कुछ कहे दोनों आँगन की पक्की सीढ़ियों पर आकर बैठ गए। आसमान में आधा चाँद निकला हुआ था और नीम के पत्तों की परछाई आँगन में तैर रही थी।
प्रदोष ने काफी देर की खामोशी के बाद धीरे से कहा, “भाभी, कभी-कभी लगता है कि मेरी जिंदगी जैसे एक ही जगह रुक गई है। भाई साहब हमेशा काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, मैं यहाँ बेकार बैठा हूँ… और आप… आप भी तो इस पूरे घर में एकदम अकेली हैं।”
पूनम काफी देर तक शांत रही। फिर अपने आंचल के कोने को उंगलियों में लपेटते हुए बोली, “हम सब अपनी-अपनी जगह पर हैं प्रदोष। जिंदगी जैसी मिलती है, जीनी पड़ती है। कुछ चीजें हम चाहकर भी बदल नहीं सकते।”
“क्या सच में हम कुछ नहीं बदल सकते?” प्रदोष की आवाज में एक गहरा सवाल और छटपटाहट थी। Devar Bhabhi Love Story
उस रात दोनों के बीच बातें बहुत देर तक चलती रहीं। पुरानी यादों के पन्ने पलटे गए- जब प्रदोष पंद्रह-सोलह साल का छोटा लड़का था और पूनम नई-नवेली दुल्हन बनकर इस घर में आई थी। कैसे वह सास से छिपाकर प्रदोष के लिए अलमारी में मिठाइयां रखती थी, कैसे जब वह परीक्षा के दिनों में बीमार पड़ता था तो पूनम रात-रात भर जागकर उसके माथे पर ठंडी पट्टियां रखती थी। बातें बहुत हल्की और बेफिक्र थीं, लेकिन उनके नीचे भावनाओं का एक बेहद गहरा और तूफानी समंदर बह रहा था।
अगले दिन से दोनों के बीच एक अदृश्य, लेकिन मजबूत रेखा खिंच गई। जब भी नजरें मिलतीं, तो स्वतः ही झुक जातीं। रसोई में काम करते हुए अगर हाथ गलती से छू जाते, तो दोनों सहमकर पीछे हट जाते। लेकिन जितनी वे दूरी बनाने की कोशिश करते, आकर्षण का खिंचाव उतना ही तीव्र होता चला जाता।
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Devar Bhabhi Love Story: रात के साये में

एक दोपहर, सास-ससुर पास के मंदिर में होने वाले कीर्तन में गए हुए थे। पूनम रसोई में दोपहर के खाने के लिए आटा गूँद रही थी। पसीने की छोटी-छोटी बूंदें उसकी गर्दन और माथे पर चमक रही थीं। तभी प्रदोष चुपचाप अंदर आया और रसोई के दरवाजे पर खड़ा हो गया, “भाभी… थोड़ा चाय बना देंगी?”
पूनम ने बिना ऊपर देखे सिर हिला दिया। प्रदोष चूल्हे के पास आकर खड़ा हो गया। आटे में हाथ साने पूनम की साँसें थोड़ी तेज़ थीं। प्रदोष ने उसे कुछ देर चुपचाप देखा और अचानक बहुत धीमी आवाज में कहा, “आप बहुत सुंदर लगती हैं भाभी… जब आप ऐसे काम करती हैं।”
पूनम के आटा गूँदते हाथ एक पल में थम गए। उसने घबराकर घूमकर देखा। प्रदोष की आँखों में एक ऐसी लालसा और गहराई थी, जो उसने पहले कभी नहीं देखी थी।
“प्रदोष… ये तुम क्या बोल रहे हो? ऐसी बातें मत करो,” पूनम की आवाज कांप रही थी।
“क्यों न करूँ?” प्रदोष ने एक कदम आगे बढ़ाया। “इसलिए क्योंकि यह गलत है? या इसलिए क्योंकि आप भी वही महसूस कर रही हैं जो मैं कर रहा हूँ?”
पूनम का गला पूरी तरह सूख गया। उसके पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे। प्रदोष ने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया- आटे से सना हुआ, कांपता हुआ हाथ।
“भाभी, मैं पिछले कई महीनों से खुद को रोक रहा हूँ… मैं आपको देखकर अंदर ही अंदर पागल हो रहा हूँ,” प्रदोष की आवाज में एक अजीब सी लाचारी थी।
पूनम ने अपना हाथ छुड़ाने की नाममात्र कोशिश की, लेकिन उसका मन और शरीर दोनों ही उस पल कमजोर पड़ चुके थे। प्रदोष ने उसे अपनी तरफ खींच लिया। दोनों की साँसें एक-दूसरे से टकराने लगीं। पहली बार उनके होंठ आपस में छुए। Devar Bhabhi Love Story
पहले हल्के से, डरते और झिझकते हुए… फिर एक गहरे, उग्र आवेग के साथ। पूनम की आँखों से आँसू छलककर प्रदोष के गालों पर गिर गए, लेकिन इस बार उसने कोई विरोध नहीं किया।
उसके बाद के कुछ दिन एक भयानक चुप्पी में बीते। दिन के उजाले में दोनों ने एक-दूसरे से नजरें तक नहीं मिलाईं। लेकिन रात के सन्नाटे में, जब पूरा घर सो जाता, प्रदोष के कमरे की खामोशी पूनम को एक तीखी पुकार की तरह बुलाती।
एक रात, जब चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था, पूनम खुद अपने कदमों को रोक नहीं पाई। वह दबे पाँव चलकर प्रदोष के कमरे में पहुँची। किवाड़ हल्का सा खुला हुआ था। प्रदोष मेज पर किताब सामने रखे बैठने का नाटक कर रहा था। जैसे ही उसने पूनम को चौखट पर देखा, उसने तुरंत किताब बंद कर दी।
पूनम अंदर आई और पीछे से दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी।
“प्रदोष… यह जो कुछ भी हमारे बीच हो रहा है… यह बहुत बड़ा पाप है। यह गलत है,” पूनम ने दीवार से टिककर रुंधे हुए गले से कहा।
“मैं जानता हूँ भाभी,” प्रदोष ने उठकर उसके पास आते हुए कहा।
“फिर भी हम यह क्यों कर रहे हैं?”
“क्योंकि कभी-कभी जिंदगी में सही चीजें हमें नहीं मिलतीं। हमारे पास सिर्फ ये कुछ चुनिंदा पल होते हैं,” प्रदोष ने उसकी कलाई थामते हुए कहा।
उस रात वे पहली बार पूरी तरह से एक-दूसरे के करीब आए। शरीर की गर्मी, अंधेरे में गूँजती तेज साँसों की आवाज, और उनके बीच में बहते पूनम के पछतावे के आँसू। प्रदोष ने उसके गीले गालों को चूमा और फुसफुसाया, “मैं आपको कभी कोई दुख नहीं देना चाहता भाभी।”
पूनम ने प्रदोष के घने बालों में अपनी उंगलियां उलझाते हुए कहा, “तुम दुख दे रहे हो प्रदोष… और मैं खुशी-खुशी उसे सह रही हूँ।”
इसके बाद से रातें पूरी तरह बदल गईं। जब भी राजेश घर पर नहीं होता, दोनों किसी न किसी बहाने मिलते। कभी रात को सूनी छत पर, चाँदनी के धुंधले साये में, तो कभी प्रदोष के बंद कमरे में। बातें होती थीं- जिंदगी की अधूरी ख्वाहिशों की, अकेलेपन की उस अंतहीन टीस की, और उस रिश्ते की जिसका समाज में कोई नाम नहीं हो सकता था।
शारीरिक निकटता के साथ-साथ उनके बीच की भावनात्मक डोर और ज्यादा कसती चली गई। पूनम को हर पल लगता कि वह किसी गहरे दलदल में डूब रही है, लेकिन वह उस दलदल से बाहर निकलने के लिए हाथ-पाँव मारना ही नहीं चाहती थी।
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Devar Bhabhi Love Story: अचानक आहट और अलगाव का फैसला

एक दिन, बिना किसी पूर्व सूचना के, राजेश समय से तीन दिन पहले ही घर लौट आया।
दोपहर का वक्त था। पूनम रसोई में खाना बना रही थी और प्रदोष आँगन में बैठकर अपनी साइकिल की चेन ठीक कर रहा था। राजेश ने घर में कदम रखा तो उसकी नजरें उन दोनों पर पड़ीं। उसने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उसकी पारखी नजरें कुछ पलों के लिए पूनम के चेहरे की घबराहट और प्रदोष के झुके हुए सिर पर ठहर गईं। घर की हवा में एक अजीब सा तनाव घुल गया।
रात को सोने से पहले राजेश ने अपने कपड़े अलमारी में रखते हुए पूनम से कहा, “पूनम, मैं देख रहा हूँ कि तुम और प्रदोष आजकल बहुत घुल-मिल गए हो। प्रदोष अब बड़ा हो गया है, उसे यहाँ घर में खाली बैठने के बजाय जल्दी से मेरठ या दिल्ली जाकर कोई नौकरी पकड़नी चाहिए। जवान लड़के का ऐसे हर वक्त घर में पड़े रहना ठीक नहीं होता।”
पूनम का दिल मानो धक से बैठ गया। उसके हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए। उसने चुपचाप सिर झुका लिया और केवल इतना बोली, “जी… आप सही कह रहे हैं।”
अगले ही दिन, जैसे किस्मत ने अपना खेल रच दिया हो, प्रदोष के पास मेरठ की एक प्राइवेट कंपनी से इंटरव्यू और जॉइनिंग का लेटर आ गया। उसके जाने का दिन तय हो गया।
शहर रवाना होने से ठीक पहले, जब सास-ससुर अंदर के कमरे में पैकिंग का सामान देख रहे थे, प्रदोष आँगन में अकेले खड़ी पूनम के पास आया। “भाभी… मैं जा रहा हूँ।”
पूनम ने उसकी आँखों में देखा, जहाँ दर्द का एक समंदर तैर रहा था। “अच्छा है प्रदोष… तुम्हारा बाहर निकलना बहुत जरूरी था। तुम्हारा भविष्य संवर जाएगा।”
प्रदोष ने अपनी आवाज एकदम धीमी करते हुए कहा, “मेरा भविष्य तो आप हैं भाभी… लेकिन मैं जानता हूँ कि मैं यह बात कभी किसी के सामने कह नहीं सकता।”
Devar Bhabhi Love Story
पूनम की आँखें भर आईं। उसने कांपते हाथों से आगे बढ़कर उसकी कमीज का एक ढीला बटन ठीक किया- बिल्कुल एक बड़ी भाभी वाले अधिकार के साथ, ताकि दूर खड़े राजेश को कोई शक न हो। उसने फुसफुसाकर कहा, “जाओ प्रदोष… और जब भी वापस लौटो, तो सिर्फ एक भाई और देवर बनकर लौटना।”
प्रदोष चला गया। घर एक बार फिर गहरा, डरावना और शांत हो गया। लेकिन पूनम के मन के भीतर का तूफान शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। रात को जब राजेश उसके बगल में बेखबर सो जाता, तो पूनम दबे पाँव उठकर छत पर चली जाती।
मुजफ्फरनगर की वे काली रातें अब उसे और भी ज्यादा भारी और दमघोंटू लगती थीं। दूर गन्ने के खेतों से होकर आने वाली हवाओं में उसे आज भी प्रदोष की साँसों की गर्मी और उसकी बातें घुली हुई महसूस होती थीं।
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Devar Bhabhi Love Story: अंतहीन प्रतीक्षा और एक नया बंधन

दो महीने बाद प्रदोष घर लौटा। उसकी मेरठ में नौकरी पक्की हो चुकी थी और उसे पहली तनख्वाह भी मिल गई थी। वह घर में सबके लिए कुछ न कुछ सामान लाया था। पूरे घर में खुशी का माहौल था। सास-ससुर अपने बेटे की कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे थे। राजेश ने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा, “शाबाश! अब मन लगाकर काम करो और महीने-दो महीने में एक बार चक्कर लगा लिया करो।”
रात को जब सब लोग खाना खाकर सो गए, तो पूनम रसोई में पानी की बोतलें भरने गई। प्रदोष अंधेरे में वहीं खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। दोनों ने कई मिनटों तक एक-दूसरे को बिना कुछ बोले देखा।
फिर प्रदोष ने रुंधे हुए गले से कहा, “मैं मेरठ में रहकर भी आपको एक पल के लिए नहीं भूल पाया भाभी।”
पूनम ने अपनी साड़ी के पल्लू से आँख में आया आँसू पोंछा, “और मैं भी नहीं… लेकिन अब और नहीं प्रदोष। अब अगर हम आगे बढ़े, तो यह घर, ये रिश्ते, यह पूरा परिवार बिखरकर तबाह हो जाएगा।”
“तो फिर क्या करें? क्या हम अपनी इन भावनाओं को मारकर पिसते रहें?” प्रदोष की आवाज में एक गहरा दर्द था। “मैं हर रात उस अनजान शहर में यही सोचकर तड़पता हूँ कि आप यहाँ अकेली घुट रही हैं और मैं वहाँ मजबूर हूँ।”
पूनम ने आगे बढ़कर उसका हाथ मजबूती से थाम लिया, “सही और गलत के पैमाने अब हमारे लिए खत्म हो चुके हैं प्रदोष। सच तो यह है कि मैं तुम्हें कभी खोना भी नहीं चाहती… और तुम्हें अपने पास रख भी नहीं सकती।”
उस रात वे अंतिम बार एक-दूसरे के बेहद करीब आए। लेकिन इस बार उनके मिलन में सिर्फ वासना या प्यार नहीं था, बल्कि एक गहरा पश्चाताप और अलगाव की अटूट ग्लानि भी थी। प्रदोष ने पूनम के बालों में उंगलियां फेरते हुए कहा, “अगर कभी मुझे जिंदगी में चुनाव करने का मौका मिला, तो मैं बाकी सब छोड़कर सिर्फ आपको चुनूँगा भाभी।” Devar Bhabhi Love Story
पूनम ने अपना सिर उसके चौड़े सीने पर रख दिया और रोते हुए बोली, “लेकिन मैं कभी कुछ चुन ही नहीं सकती प्रदोष… मैं इस घर की मर्यादा और अपनी किस्मत से बँधी हुई हूँ।”
सुबह की पहली किरण फूटने से पहले दोनों ने यह कठिन फैसला कर लिया- प्रदोष मेरठ वापस चला जाएगा, पूनम अपनी गृहस्थी संभालेगी। उनके बीच का शारीरिक रिश्ता यहीं खत्म होगा, लेकिन दिल के कोने में जो अहसास जमा हो चुका है, वह ताउम्र रहेगा।
सुबह जब प्रदोष जाने लगा, तो पूनम आँगन तक आई। सास-ससुर और राजेश भी वहीं खड़े थे। एक बहुत ही सामान्य और औपचारिक विदाई हो रही थी। प्रदोष ने अपना बैग कंधे पर टांगा, पूनम की तरफ एक नजर देखा और बोला, “भाभी… अपना ख्याल रखना।”
पूनम ने चेहरे पर एक झूठी मुस्कान लाते हुए कहा, “तुम भी अपना ध्यान रखना प्रदोष।”
उन दोनों की आँखों के कोर में वो राज़ हमेशा के लिए दफन था, जिसे दुनिया का कोई भी इंसान नहीं पढ़ सकता था। प्रदोष की साइकिल की घंटी की आवाज धीरे-धीरे गली में दूर होती गई। पूनम चुपचाप रसोई में आई और शेल्फ का सहारा लेकर खड़ी हो गई। उसकी आँखों से बेआवाज़ आँसू बह रहे थे।
तभी पीछे से राजेश आया और उसने पूनम के कंधे पर हाथ रखा, “सब ठीक तो है न पूनम? तुम उदास लग रही हो।”
पूनम ने तुरंत अपने आँसू पोंछे और मुड़कर कहा, “हाँ… सब ठीक है। बस थोड़ा सिर भारी था।”
लेकिन सच्चाई यह थी कि अब कुछ भी पहले जैसा ठीक नहीं रह गया था।

Devar Bhabhi Love Story: खामोशी में बहती धारा

महीनों बीतते चले गए और वक्त अपनी गति से सरकता रहा। प्रदोष कभी-कभी हफ्तों में एक बार फोन करता- ज्यादातर राजेश या माता-पिता से बात करने के बहाने। जब फोन पूनम के हाथ में आता, तो दोनों तरफ बस लंबी साँसें सुनाई देतीं।
कभी-कभी रात के सन्नाटे में प्रदोष उसे फोन पर मैसेज भेज देता- “आज मेरठ में बहुत तेज बारिश हो रही है भाभी… मुझे फिर से मुजफ्फरनगर की वो रातें याद आ रही हैं।” पूनम उन मैसेजेस को बार-बार पढ़ती और फिर चुपचाप डिलीट कर देती।
करीब डेढ़ साल बाद खबर आई कि प्रदोष के लिए मेरठ की ही एक संभ्रांत परिवार की लड़की का रिश्ता तय हो गया है। घर में शहनाइयां बजने लगीं, मिठाइयां बांटी गईं। पूनम ने भी चेहरे पर खुशी का मुखौटा पहनकर पूरे घर की व्यवस्था संभाली, सबको बधाइयां दीं। लेकिन शादी की रात, जब पूरा घर नाच-गाने में मग्न था, पूनम चुपके से छत पर चली गई और घंटों तक मुजफ्फरनगर की उस ठंडी हवा को अपने चेहरे पर महसूस करती रही।
शादी के मंडप में जब प्रदोष दूल्हा बनकर बैठा था, तो उसकी नजरें बार-बार भीड़ में पूनम को ढूंढ रही थीं। शादी की रस्मों के बीच, जब थोड़ा वक्त मिला, तो पूनम ने प्रदोष को आँगन के कोने में बने नीम के पेड़ के पास बुलाया।
“नया जीवन मुबारक हो प्रदोष… हमेशा खुश रहना,” पूनम ने मुस्कुराकर कहा।
प्रदोष ने पूनम की आँखों में झांका, “आपके बिना खुश रहना सीखने की कोशिश कर रहा हूँ भाभी… लेकिन सच कहूँ तो सीख नहीं पा रहा।”
पूनम ने उसकी हथेली पर अपना कांपता हुआ हाथ रखा, “यह जो रिश्ता हमने कभी अपने अकेलेपन में बनाया था… यह सिर्फ हमारा था। अब इसे एक खूबसूरत याद बनाकर दिल के किसी कोने में छुपा लो। जिंदगी का नाम आगे बढ़ना है प्रदोष।”
प्रदोष ने भारी मन से अपना सिर झुका लिया, “मैं पूरी कोशिश करूँगा भाभी।”
उसके बाद प्रदोष अपनी नई दुल्हन के साथ अपनी नई दुनिया में लौट गया।
रात को जब शादी का शोर शराबा शांत हुआ और राजेश गहरी नींद में सो गया, तो पूनम ने अपनी पुरानी अलमारी के सबसे निचले दराज से एक डायरी निकाली। उसने अपनी जिंदगी में पहली बार अपने मन के भावों को पन्नों पर उतारा:
“प्रदोष, तुम चले गए… एक नए रिश्ते में बंधकर। लेकिन जो अहसास तुमने मेरे भीतर छोड़ा है, वह आज भी यहीं सांस ले रहा है।
मुजफ्फरनगर की इन शांत गलियों में, नीम की छाँव में, और मेरे इस वीरान दिल में। हम दुनिया की नजरों में शायद बहुत गलत थे, लेकिन अपने अहसासों में हम पूरी तरह सच्चे थे। और सच्ची भावनाएं कभी पूरी तरह नहीं मरतीं।”
उसने डायरी बंद की और खिड़की से बाहर आँगन की तरफ देखा। आसमान में चाँद आज भी वैसा ही चमक रहा था। हवा में गन्ने के खेतों की वही पुरानी मीठी गंध तैर रही थी। लेकिन पूनम के लिए अब सब कुछ बदल चुका था।
साल दर साल बीतते गए। प्रदोष अब अपने बच्चों और पत्नी के साथ कभी-कभार ही त्योहारों पर घर आता। पूनम उससे बेहद सामान्य तरीके से मिलती- बिल्कुल वैसे ही जैसे एक बड़ी भाभी अपने शादीशुदा देवर से मिलती है।
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दोनों मुस्कुराते, बच्चों को दुलारते, लेकिन जब कभी अकेले में नजरें मिल जातीं, तो एक पल के लिए समय जैसे थम जाता। उस एक पल में अतीत का पूरा बवंडर उनकी आँखों के सामने घूम जाता, और फिर अगले ही पल दोनों अपनी-अपनी मर्यादाओं में लौट आते।
एक कड़ाके की सर्दी की शाम, जब प्रदोष अपने बच्चों के साथ मुजफ्फरनगर आया हुआ था, पूनम ने उसके लिए गर्म चाय का कप बढ़ाया। आँगन में बच्चे खुशी से शोर मचा रहे थे।
प्रदोष ने चाय की चुस्की लेते हुए बहुत धीमी आवाज में पूछा, “भाभी… आपको वो रातें आज भी याद आती हैं?”
पूनम ने चाय की भाप को देखते हुए एक गहरी सांस ली, “याद हैं प्रदोष… और हर दिन उन्हें भूलने की कोशिश भी करती हूँ।”
Devar Bhabhi Love Story in hindi
प्रदोष के चेहरे पर एक उदास मुस्कान तैर गई, “कुछ चीजें भूलने के लिए नहीं बनतीं भाभी… उन्हें बस चुपचाप पूरी जिंदगी अपने साथ लेकर चलना होता है।”
पूनम ने दूर आसमान की तरफ देखा और बोली, “हाँ… बस चुपचाप साथ लेकर।”
उस शाम के बाद दोनों ने उस अतीत के बारे में फिर कभी कोई बात नहीं की। लेकिन जब भी मुजफ्फरनगर में बेमौसम बारिश होती, या नीम के पत्तों पर चाँद की शीतल रोशनी पड़ती, तो पूनम को लगता कि कोई अदृश्य साया आज भी उनके आसपास मंडरा रहा है- एक ऐसा साया जो दर्द से भरा था, लेकिन पूरी तरह से उनका अपना था।
और दूर मेरठ शहर में, अपने परिवार के बीच बैठा प्रदोष, कभी-कभी देर रात खिड़की के पास आकर खड़ा हो जाता और मुजफ्फरनगर की दिशा में देखते हुए सोचता कि उसकी जिंदगी की सबसे सच्ची, लेकिन अधूरी कहानी वहीं कहीं छूट गई है।
कहानी वास्तव में कभी खत्म नहीं हुई थी। बस उन दोनों ने उस अधूरी दास्तान के साथ जीना सीख लिया था- खामोशी में, यादों के साये में, और उस प्यार में जिसका कोई नाम नहीं था, पर जो दिल से कभी मिट नहीं पाया। Devar Bhabhi Love Story

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Xlaila Editor
महेश कांत (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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