Love Fraud Story तस्वीरों में दिखाई देने वाली यह मासूम सी दिखने वाली कोई सामान्य लड़की नहीं है। इसका दिमाग बहुत तेज चलता है और इसके कारनामों ने हर किसी को हैरान कर दिया। पहली नज़र में जिसे भी लगता कि वह एक सीधी-सादी, ज़िंदगी की थपेड़ों से टूटी हुई महिला है, वह दरअसल उसके बुने हुए सबसे खतरनाक जाल का पहला मोहरा बन चुका होता था।
मासूमियत का नकाब, बातों में बेपनाह कशिश और आंखों में झूठी लाचारी—इन तीन हथियारों के दम पर उसने एक ऐसा मायाजाल खड़ा किया, जिसमें डॉक्टर से लेकर खाकी वर्दी वाले तक सब एक-एक करके समाते चले गए। Love Fraud Story
यह कहानी है बस्ती के उस गांधार गांव से शुरू होकर सत्ता और पुलिस महकमे के गलियारों तक गूंजने वाले एक ऐसे हनीट्रैप कांड की, जिसने मोहब्बत के नाम पर ब्लैकमेलिंग का एक खौफनाक अध्याय लिख दिया।

Love Fraud Story: गांधार की ‘प्रियंका‘ और मुंबई के सपने
बस्ती जिले का एक शांत सा गांव—गांधार। इसी गांव के एक छोटे से मकान में पली-बढ़ी प्रियंका चौधरी की आंखों में गांव की संकरी गलियों से बहुत बड़े सपने थे। 15 साल पहले जब उसकी शादी पैकोलिया मुस्लिम गांव के महेंद्र प्रताप वर्मा से हुई, तो लगा कि जिंदगी एक सामान्य ढर्रे पर चल पड़ेगी। दो बच्चे भी हुए—एक बेटा और एक बेटी। लेकिन प्रियंका की महत्वाकांक्षाएं किसी सामान्य घरेलू जिंदगी में बांधकर रखने लायक नहीं थीं।
पति से आए दिन होने वाले विवाद और वैचारिक मतभेद का नतीजा यह हुआ कि शादी के करीब 6 साल बाद महेंद्र ने प्रियंका को छोड़ दिया। प्रियंका अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके लौट आई। लेकिन मायके की तंगहाली और गांव की बंदिशें उसे रास नहीं आ रही थीं। Love Fraud Story
उसने शहर का रुख किया। मुंबई जाकर उसने ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटरों में काम करना शुरू किया। मुंबई की चकाचौंध, आधुनिक जीवनशैली और झटपट पैसा कमाने की हवस ने प्रियंका को अंदर से बदल दिया। उसने समझ लिया था कि इस दुनिया में ताकत और पैसा हासिल करने का सबसे छोटा रास्ता लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाना है। और इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी होती है—उसकी हवस, उसकी बदनामी का डर और उसका अकेलापन।
मुंबई से वापस बस्ती लौटने तक प्रियंका पूरी तरह बदल चुकी थी। अब वह सिर्फ एक महिला नहीं थी, वह एक शातिर मास्टरमाइंड बन चुकी थी।

Love Fraud Story: जाल फैलाने का हुनर और पहली शिकार ‘अहमद और डॉक्टर‘
प्रियंका के परिवार की आर्थिक स्थिति तब थोड़ी सुधरी जब उसकी ननद की मौत के बाद मिली जमीन को बेचकर उसके घर वालों ने 2024 में एक बोलेरो गाड़ी खरीदी। गाड़ी चलाने के लिए पड़ोसी गांव जमदाशाही के एक युवक अहमद रजा को ड्राइवर रखा गया।
प्रियंका की नजर अब अहमद पर थी। उसने अपनी मीठी बातों और लाचारी का ऐसा नाटक रचा कि अहमद रजा उसके प्यार में गिरफ्तार हो गया। प्रियंका के घरवालों को जब इस अफेयर की भनक लगी, तो उन्होंने कड़ा विरोध किया। लेकिन प्रियंका को अब किसी की परवाह नहीं थी। घरवालों ने उसे घर से निकाल दिया, बच्चों को अपने पास रख लिया। प्रियंका ने भी बिना झिझके अहमद के साथ रहने का फैसला किया।
दोनों ने शहर में एक किराए का मकान लिया। यह मकान एक जाने-माने डॉक्टर का था। डॉक्टर को क्या पता था कि वह अपने घर में किराएदार नहीं, बल्कि अपनी बर्बादी का सबब बसा रहे हैं।
प्रियंका और अहमद 2000 रुपये महीने के किराए पर वहां रहने लगे। कुछ ही महीनों में प्रियंका ने डॉक्टर पर अपनी नजरें टिका दीं। वह कभी घर की कोई समस्या बताने के बहाने, तो कभी यूं ही डॉक्टर से बातें करने लगी। उसकी बातों में एक अजीब सा आकर्षण था। डॉक्टर उसकी मासूमियत के जाल में उलझते चले गए। Love Fraud Story
एक दिन जब डॉक्टर कमरे में आए, प्रियंका ने बेहद करीने से बातचीत के दौरान उनके कुछ आपत्तिजनक फोटो और ऑडियो रिकॉर्ड कर लिए।
अगले ही दिन से खेल शुरू हुआ।
प्रियंका ने डॉक्टर को कॉल किया। आवाज में वही मिठास थी, लेकिन शब्दों में जहर था।
“डॉक्टर साहब, जो तस्वीरें मेरे पास हैं, अगर वे आपकी पत्नी और आपके अस्पताल के बाहर चस्पां हो जाएं, तो आपकी इज्जत का क्या होगा?”
डॉक्टर के पैरों तले जमीन खिसक गई। बदनामी के डर से थर-थर कांपते डॉक्टर ने पहली बार में 5,000 रुपये दिए। लेकिन ब्लैकमेलिंग का यह तो सिर्फ आगाज था। Love Fraud Story
प्रियंका ने इस पूरी साजिश में अपने लिव-इन पार्टनर अहमद को भी शामिल कर लिया। उसने अहमद से झूठी कहानी गढ़ी कि डॉक्टर उसके साथ जबर्दस्ती करता है। अहमद गुस्से में आ गया और फिर दोनों ने मिलकर डॉक्टर को शिकार बनाना शुरू किया। कभी 50 हजार, कभी 1 लाख… डॉक्टर अपनी जमा-पूंजी प्रियंका के कदमों में उड़ेलते रहे। स्थिति यहां तक आ पहुंची कि डॉक्टर को अपने खेत बेचकर प्रियंका को पैसे देने पड़े।
डॉक्टर की दिमागी हालत इतनी बिगड़ गई कि बिना नींद की गोलियों के उन्हें रात में चैन नहीं आता था। उन्होंने बाद में बदहवासी में स्वीकार किया था, “मैं इतना परेशान हो चुका था कि हर रात लगता था कि सुसाइड कर लूं।”

Love Fraud Story: कानून को ही हथियार बनाना
प्रियंका का हौसला अब सातवें आसमान पर था। उसे समझ आ गया था कि कानून और पुलिस का डर दिखाकर लोगों को निचोड़ा जा सकता है। लेकिन अब उसे अहमद की जरूरत नहीं रही थी। अहमद को भी धीरे-धीरे शक होने लगा था कि प्रियंका एक दलदल है, जिसमें वह डूबता जा रहा है। उसने प्रियंका से दूरी बनानी शुरू कर दी।
लेकिन प्रियंका अपने शिकार को इतनी आसानी से हाथ से निकलने नहीं देती थी।
मार्च 2025 में, प्रियंका वाल्टरगंज थाने पहुंची। इस बार उसके निशाने पर उसका अपना प्रेमी अहमद रजा था। उसने थाने में एक सनसनीखेज तहरीर दी—”अहमद ने चाकू की नोक पर मेरा रेप किया, शादी का झांसा देकर भगा लाया, जबरन धर्मांतरण और गोमांस खाने का दबाव बनाया और तीन बार मेरा अबॉर्शन करवाया।”
मामले में लव-जिहाद का एंगल आते ही हिंदू संगठनों ने हंगामा कर दिया। पुलिस हरकत में आई और अहमद रजा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अहमद करीब ढाई महीने जेल में सड़ता रहा। प्रियंका ने दिखा दिया था कि जो उसके रास्ते में आएगा या उससे दूर भागने की कोशिश करेगा, उसका अंजाम क्या होगा। Love Fraud Story
इसी पुलिस केस की पैरवी के दौरान प्रियंका की मुलाकात एक ऐसे इंसान से हुई, जिसने इस कहानी को एक दर्दनाक और खौफनाक मोड़ दे दिया।
वह इंसान थे—वकील विजय प्रकाश और उनके पिता रामनयन चौधरी, जो इस पूरे खेल के नए पार्टनर बनने वाले थे।

Love Fraud Story: वर्दी पर पड़ा ‘ब्लैक विडो‘ का साया
18 अप्रैल, 2026।
56 साल के सूर्य प्रकाश सिंह ने वाल्टरगंज थाने के नए प्रभारी (इंचार्ज) के रूप में चार्ज संभाला। मूल रूप से आजमगढ़ के भीलमपुर छपरा के रहने वाले सूर्य प्रकाश सिंह एक बेहद सीधे, शांत और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी माने जाते थे। 4 साल बाद उनका रिटायरमेंट था। परिवार में पत्नी, 30 साल का बड़ा बेटा संदीप और दो बेटियां थीं। पूरा हंसता-खेलता परिवार था।
थाने का प्रभार संभालते ही सूर्य प्रकाश सिंह के सामने प्रियंका चौधरी का मामला आया। प्रियंका अपने पति और प्रेमी अहमद के खिलाफ दर्ज मुकदमों के सिलसिले में अक्सर थाने आने लगी।
प्रियंका जानती थी कि इस बार उसका शिकार कोई आम आदमी नहीं, बल्कि खुद इलाके का थानेदार है। अगर थानेदार हाथ में आ गया, तो फिर पूरे इलाके पर उसका राज होगा।
प्रियंका ने अपनी चालें चलनी शुरू कीं।
वह जब भी थानाध्यक्ष के केबिन में जाती, बेहद सलीके और रुंधे हुए गले से अपनी आपबीती सुनाती। “साहब, मैं एक अकेली औरत हूं… पति ने छोड़ दिया, प्रेमी ने धोखा दिया… इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है।”
सूर्य प्रकाश सिंह, जो उम्र के उस पड़ाव पर थे जहां इंसान भावनाओं में जल्दी बह जाता है, प्रियंका की बातों में आते चले गए। उन्हें लगा कि वह एक बेसहारा महिला की मदद कर रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह सहानुभूति दोस्ती में बदली और फिर मुलाकातों का दौर शुरू हो गया।
प्रियंका ने सूर्य प्रकाश सिंह को अपने सरकारी आवास पर भी मिलना-जुलना शुरू कर दिया। दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए। और इसके साथ ही, प्रियंका के हिडन कैमरों और ऑडियो रिकॉर्डर ने अपना काम कर दिया।

Love Fraud Story: नस काटने का नाटक और 1 करोड़ की डिमांड
अब प्रियंका अकेली नहीं थी। उसके साथ उसका पिता रामनयन चौधरी और उसका शातिर वकील विजय प्रकाश यादव भी इस सिंडिकेट का हिस्सा बन चुके थे। वकील विजय प्रकाश कानूनी दांव-पेच जानता था और पिता रामनयन ब्लैकमेलिंग के पैसों का हिसाब-किताब रखता था।
एक दिन, थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह के फोन पर एक वीडियो कॉल आई।
स्क्रीन पर प्रियंका थी। उसकी आंखों में दरिंदगी और चेहरे पर एक सिरफिरी मुस्कान थी। उसने अपने हाथ में एक धारदार ब्लेड पकड़ा हुआ था।
“सूर्य प्रकाश जी,” प्रियंका की ठंडी आवाज गूंजी, “मुझे 1 करोड़ रुपये चाहिए।”
थानेदार का खून जम गया। “1 करोड़? प्रियंका तुम पागल हो गई हो? मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं, मेरे पास इतने पैसे कहां से आएंगे?”
प्रियंका ने बिना कुछ बोले ब्लेड को अपनी कलाई पर फेर दिया। खून की पतली धार बह निकली।
“अगर मुझे 1 करोड़ रुपये नहीं मिले, तो मैं अभी अपनी हाथ की नस काट लूंगी। और सुसाइड नोट में लिखूंगी कि वाल्टरगंज के थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह ने मेरा बलात्कार किया और मुझे मरने पर मजबूर किया। सोचिए, 4 साल बाद रिटायरमेंट है, इज्जत, नौकरी, परिवार… सब एक पल में श्मशान बन जाएगा।”
सूर्य प्रकाश सिंह कांप उठे। यह कोई मामूली धमकी नहीं थी। वह जानते थे कि प्रियंका किस हद तक जा सकती है। उसने अपने प्रेमी अहमद को जेल भिजवा दिया था, डॉक्टर को सड़क पर ला दिया था।
प्रियंका का वकील विजय प्रकाश अब बिचौलिए की भूमिका में आ गया। वह थानाध्यक्ष को फोन करके धमकाता, “साहब, मैडम का दिमाग खराब है। नस काट लेगी तो आप कहीं के नहीं रहोगे। पैसे का इंतजाम करो।”
दिन बीतते गए। ब्लैकमेलिंग का दबाव बढ़ता गया। 1 करोड़ रुपये की रकम किसी भी ईमानदार या मध्यमवर्गीय पुलिस अफसर की हैसियत से बहुत बाहर थी। सूर्य प्रकाश सिंह न तो यह बात अपनी पत्नी को बता पा रहे थे, न अपने बेटे संदीप को।
जिस वर्दी को पहनकर उन्होंने पूरी जिंदगी शान से नौकरी की थी, वही वर्दी अब उनके लिए घुटने टेकने का कारण बन चुकी थी। वह अपने ही सरकारी आवास में एक कैदी की तरह महसूस करने लगे थे। रात-रात भर उन्हें नींद नहीं आती थी।

Love Fraud Story: 29 अगस्त की वो आखिरी दोपहर
29 अगस्त, 2026।
बस्ती में कलेक्ट्रेट के पास स्थित सरकारी आवास में सन्नाटा पसरा हुआ था। दोपहर के 1 बज रहे थे।
सूर्य प्रकाश सिंह अपने कमरे में अकेले बैठे थे। उनके चेहरे पर गहरी झुर्रियां और आंखों के नीचे काले घेरे साफ बता रहे थे कि वे पिछले कई दिनों से सोए नहीं हैं।
दोपहर ठीक 1:41 बजे उनके फोन की घंटी बजी।
स्क्रीन पर नाम चमका—’वकील विजय प्रकाश’।
सूर्य प्रकाश सिंह ने कांपते हाथों से फोन उठाया।
“हां विजय…”
दूसरी तरफ से वकील की भारी और रूखी आवाज आई, “थानेदार साहब! मैडम का सब्र खत्म हो रहा है। 1 करोड़ रुपये का इंतजाम हुआ या नहीं? अगर आज शाम तक कैश नहीं मिला, तो प्रियंका थाने के सामने आकर हाथ की नस काटेगी और आपका नाम लेगी। मीडिया को भी बुला लिया गया है। फैसला आपके हाथ में है—पैसा या फांसी?”
फोन कट गया।
सूर्य प्रकाश सिंह ने फोन को मेज पर रख दिया। उनके सामने दो ही रास्ते थे—या तो वह 1 करोड़ रुपये दें, जो उनके पास थे ही नहीं, और जिंदगी भर इस गिरोह के गुलाम बने रहें। या फिर लोक-लज्जा, बदनामी और जेल जाने का दंश झेलें।
उन्होंने एक गहरा सांस लिया। अपनी सर्विस की तस्वीरें देखीं, अपने हंसते-खेलते परिवार की फोटो देखी।
उन्होंने अपना फोन उठाया और वाट्सऐप खोला। स्टेटस सेक्शन में गए। उन्होंने अपने जीवन का आखिरी संदेश लिखा—
“धन–संपदा भी आवश्यक है, परंतु शांति और प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है।“
यह स्टेटस लगाने के बाद, उन्होंने फोन एक तरफ रखा। पंखे से रस्सी का फंदा लटकाया और उस पर झूल गए। 56 साल का एक अनुभवी पुलिस अधिकारी, जो न जाने कितने अपराधियों को जेल भेज चुका था, एक शातिर औरत के हनीट्रैप के जाल में उलझकर जिंदगी की जंग हार गया।
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Love Fraud Story: खाकी का गुस्सा और खात्मा
जब सूर्य प्रकाश सिंह का शव सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला, तो पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एक थानाध्यक्ष का सुसाइड कोई मामूली घटना नहीं थी।
सूर्य प्रकाश के बेटे संदीप सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। उसने पुलिस को बिलखते हुए कहा, “मेरे पिता को मार दिया गया! उस औरत और उसके साथियों ने मेरे पिता की जान ली है! मुझे सिर्फ इंसाफ चाहिए, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले!”
डीआईजी संजीव त्यागी ने मामले की कमान खुद संभाली। सर्विलांस, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और सूर्य प्रकाश सिंह के व्हाट्सएप चैट की जांच शुरू हुई।
जांच में जो सच निकलकर सामने आया, उसने पुलिस अफसरों के भी होश उड़ा दिए।
थानेदार की कॉल डिटेल में प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश के सैकड़ों कॉल्स दर्ज थे। 29 अगस्त की दोपहर 1:41 बजे आई वही आखिरी कॉल इस केस का सबसे बड़ा सबूत बनी।
पुलिस को पता चला कि यह कोई पहला मामला नहीं था। यह गिरोह अब तक चार बड़े शिकार कर चुका था और उनसे करीब 24 लाख रुपये से ज्यादा ऐंठ चुका था। डॉक्टर, स्थानीय व्यापारी और अब खुद थानाध्यक्ष!
रविवार की सुबह। बस्ती का सदर अस्पताल चौराहा।
सर्विलांस टीम को लोकेशन मिली कि प्रियंका, उसका पिता और वकील शहर छोड़कर भागने की फिराक में सदर अस्पताल के पास एक बोलेरो गाड़ी में मौजूद हैं। वही बोलेरो, जो कभी ननद की जमीन बेचकर खरीदी गई थी और जिसमें बैठकर ब्लैकमेलिंग के नेटवर्क को चलाया जाता था।
भारी पुलिस बल ने सदर अस्पताल के सामने बोलेरो को चारों तरफ से घेर लिया।
गाड़ी का दरवाजा खुला। अंदर प्रियंका चौधरी बैठी थी—वही मासूम सा चेहरा, लेकिन आंखों में अब खौफ था। उसके पास से पुलिस को बोलेरो गाड़ी और 3 मोबाइल फोन मिले। इन मोबाइलों में दर्जनों रसूखदार लोगों के अश्लील वीडियो, ऑडियो और ब्लैकमेलिंग के चैट्स भरे पड़े थे।
पुलिस ने प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर लिया।
Love Fraud Story: नकाब के पीछे का सच
गिरफ्तारी के बाद जब दैनिक भास्कर की टीम गांधार गांव में प्रियंका के घर पहुंची, तो वहां उसकी बूढ़ी मां सुभावती चौधरी और बच्चे मिले।
प्रियंका की मां सुभावती ने रोते हुए मीडिया के सामने हाथ जोड़े, “बेटी दोषी है तो उसे फांसी दे दो, सजा दे दो! लेकिन मेरे पति निर्दोष हैं। उस वकील विजय प्रकाश ने ही मेरी बेटी से यह सब करवाया। मेरे पति का कोई कसूर नहीं है, उन्हें छोड़ दीजिए…”
लेकिन कानून की नजर में कोई निर्दोष नहीं था। पुलिस की जांच में साफ हो चुका था कि पिता रामनयन ब्लैकमेलिंग के पैसों में से अपना हिस्सा लेता था और वकील कानूनी ढाल बनकर लोगों को डराता था।
पुलिस ने तीनों आरोपियों पर रंगदारी, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी और आत्महत्या के लिए उकसाने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।
बस्ती की अदालत के बाहर जब प्रियंका को पुलिस की गाड़ी से उतारा गया, तो उसके चेहरे पर अब वह शातिराना चमक नहीं थी। वह मासूमियत का नकाब, जिसके पीछे एक खौफनाक ‘ब्लैक विडो’ छिपी थी, अब पूरी तरह उतर चुका था।
सूर्य प्रकाश सिंह तो चले गए, लेकिन पीछे छोड़ गए एक खौफनाक सबक—कि प्यार और हमदर्दी के नाम पर बुना गया हर जाल मासूम नहीं होता। कुछ जाल इतने जहरीले होते हैं कि इंसान की आबरू, उसकी जिंदगी और उसका सब कुछ निगल जाते हैं। Love Fraud Story
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