Pyar Ka Panchnama | प्यार का पंचनामा
रियल लव स्टोरी

प्यार का पंचनामा, पंजाब; इश्क, धोखा और मौत का परना, कहानी पढ़कर कांप जाएगी रुह

Pyar ka panchnama: मानसा का वो खौफनाक ‘प्यार पंचनामा’ कहते हैं कि प्यार अगर सही इंसान से हो, तो जिंदगी को जन्नत बना देता है। लेकिन वही प्यार जब वासना, लालच और धोखे की ‘कॉकटेल’ बन जाए, तो हँसते-खेलते परिवार को श्मशान में तब्दील होने में देर नहीं लगती। पंजाब के मानसा जिले के कोट धर्मू गांव से आई यह रूह कंपा देने वाली सच्ची घटना इसका सबसे बड़ा और कड़वा सबूत है।

यह कहानी है एक ऐसे भरोसे की, जिसे किसी गैर ने नहीं, बल्कि घर की लक्ष्मी कही जाने वाली पत्नी और खून के रिश्ते के भाई ने मिलकर तार-तार कर दिया। आइए, ‘प्यार का पंचनामा’ की इस विशेष कड़ी में खोलते हैं मानसा के उस ‘तरसेम सिंह हत्याकांड’ की परतें, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी।

Pyar Ka Panchnama एक साधारण परिवार और मेहनत की रोटी

मानसा के कोट धर्मू गांव का रहने वाला 38 वर्षीय तरसेम सिंह एक बेहद सीधा और मेहनती इंसान था। वह पेशे से मार्बल मिस्त्री था। दिन भर पत्थर घिसना, धूल और मलबे के बीच पसीना बहाना और शाम को जो चार पैसे कमाकर लाना, उसी से उसका संसार चलता था। तरसेम की शादी 38 साल की जगजीत कौर से हुई थी। शादीशुदा जिंदगी ठीक-ठीक पटरी पर चल रही थी। दोनों के दो प्यारे बच्चे भी थे, जिनकी हंसी से घर गूंजता रहता था।

तरसेम अपनी पत्नी जगजीत पर आंख मूंदकर भरोसा करता था। उसे लगता था कि उसकी गैर-मौजूदगी में जगजीत बच्चों और घर को बखूबी संभाल रही है। लेकिन तरसेम इस बात से बिल्कुल अनजान था कि जिस घर को वह अपनी मेहनत के पत्थरों से सजा रहा था, उसी घर की बुनियाद में बेवफाई का दीमक लग चुका था।

Pyar Ka Panchnama | प्यार का पंचनामा
Pyar Ka Panchnama | मृतक तरसेम का फाइल फोटो

Pyar Ka Panchnama ‘लव कॉकटेल’ की शुरुआत: जब घर में आया ‘तीसरा’

कहानी में मोड़ आज से करीब सवा साल पहले आया। तरसेम सिंह के सगे मामा का बेटा, 40 वर्षीय दीप सिंह उर्फ कालू, तरसेम के पास आया। दीप सिंह बेरोजगार था और मार्बल का काम सीखना चाहता था। तरसेम ठहरा नेकदिल इंसान; उसने सोचा कि भाई की मदद हो जाएगी और उसका काम भी बढ़ जाएगा। उसने दीप सिंह को न सिर्फ काम पर रखा, बल्कि अपने घर में पनाह भी दी।

यहीं से शुरू हुआ वो ‘लव कॉकटेल’ जिसका नशा अंत में जानलेवा साबित होने वाला था।

तरसेम दिन भर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहता था। पीछे घर पर दीप सिंह और तरसेम की पत्नी जगजीत कौर अकेले होते थे। धीरे-धीरे दोनों की बातचीत बढ़ी, फिर नजदीकियां और अंत में वह नजदीकियां एक गहरे नाजायज रिश्ते में बदल गईं। जिस भाई को तरसेम ने अपने घर की रोटी दी, वह उसकी पीठ पीछे उसकी पत्नी के साथ मिलकर उसकी ही बर्बादी की कहानी लिखने लगा। जगजीत कौर भी बच्चों की ममता और पति के सात फेरों के वचनों को भूलकर अपने ही देवर (पति के मामा के लड़के) के इश्क में अंधी हो चुकी थी।

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Pyar Ka Panchnama | हत्या के बाद मृतक के परिजन शोक में घर के बाहर बैठे हुए।

Pyar Ka Panchnama रास्ते का कांटा और वो खौफनाक साजिश

सवा साल तक यह लुका-छिपी का खेल चलता रहा। लेकिन नाजायज रिश्तों की भूख कभी खत्म नहीं होती। दीप सिंह और जगजीत कौर अब पूरी तरह एक-दूसरे के होना चाहते थे। लेकिन उनके इस ‘इश्क के गोरखधंधे’ के बीच में सबसे बड़ा रोड़ा था- तरसेम सिंह।

दोनों को लगने लगा कि जब तक तरसेम जिंदा है, वे कभी खुलकर साथ नहीं रह पाएंगे। यहीं से उनके दिमाग में ‘प्यार का पंचनामा’ लिखने की साजिश शुरू हुई। वे बस एक ऐसे मौके की तलाश में थे, जब घर में तरसेम के अलावा कोई और न हो।

मई-जून का महीना आया। बच्चों के स्कूल में गर्मी की छुट्टियां हो गईं। जगजीत कौर ने इसे ही अपना मोहरा बनाया। उसने तरसेम से कहा कि वह बच्चों के साथ अपने ननिहाल (गांव बोहा) जाना चाहती है। सीधे-साधे तरसेम को भला क्या शक होता। वह खुद अपनी पत्नी और बच्चों को खुशी-खुशी बोहा गांव छोड़कर आया। उसे लगा कि बच्चे छुट्टियां बिता लेंगे और वह यहाँ आराम से अपना काम निपटा लेगा। लेकिन तरसेम को नहीं पता था कि यह विदाई उसकी जिंदगी की आखिरी विदाई थी।

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Pyar Ka Panchnama | पुलिस की गिरफ्त में पकडे़ गए आरोपी।

Pyar Ka Panchnama कत्ल की वो काली रात: दीवार फांदकर आई मौत

घर अब बिल्कुल खाली था। बच्चे और पत्नी ननिहाल में थे। तरसेम घर में अकेला था। साजिश के मुताबिक, जैसे ही तरसेम के अकेले होने की खबर दीप सिंह को मिली, उसने अपने एक साथी गोबिंद सिंह (35) को इस खूनी खेल में शामिल किया।

गुरुवार की वो काली शाम। तरसेम दिनभर की थकान के बाद अपने घर के आंगन में चारपाई पर सोया हुआ था। ठंडी हवा चल रही थी और वह गहरी नींद में था। तभी रात के सन्नाटे को चीरते हुए दो साये तरसेम के घर की दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए। ये दीप सिंह और उसका दोस्त गोबिंद थे।

सोए हुए तरसेम को संभलने का मौका तक नहीं मिला। दोनों आरोपियों ने उसे चारपाई पर ही दबोच लिया। दीप सिंह के हाथ में एक ‘परना’ (पंजाब में पुरुषों द्वारा गले या सिर पर बांधा जाने वाला सूती कपड़ा) था। दीप सिंह ने वो परना तरसेम के गले में डाला और दोनों सिरों को पूरी ताकत से खींच दिया। त

रसेम ने तड़पने की कोशिश की, पैर पटके, लेकिन दो लोगों की ताकत के आगे उसकी सांसें उखड़ने लगीं। कुछ ही मिनटों में, मार्बल के पत्थरों को तराशने वाले तरसेम के जिस्म को उन दोनों ने हमेशा के लिए बेजान पत्थर बना दिया। हत्या के बाद दोनों आरोपी उसी खामोशी से दीवार फांदकर फरार हो गए।

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Pyar Ka Panchnama | पुलिस की गिरफ्त में पकडे़ गए आरोपी।

Pyar Ka Panchnama शातिर पत्नी का ड्रामा और पुलिस को चुनौती

कत्ल की वारदात को अंजाम देने के बाद, अगली सुबह असली ड्रामा शुरू हुआ। जगजीत कौर को जैसे ही खबर मिली (या यूं कहें कि जैसे ही उसका तय वक्त आया), वह रोती-बिलखती हुई कोट धर्मू गांव पहुंची। घर के आंगन में पति की लाश देखकर उसने ऐसा विलाप शुरू किया कि पूरा गांव इकट्ठा हो गया।

जगजीत ने खुद पुलिस को फोन किया और रोते हुए शिकायत दर्ज कराई:

“साहब! मेरे पति घर में अकेले थे। पता नहीं रात को कौन दुश्मन दीवार फांदकर आया और उनका गला घोंटकर मार गया। हमारी तो किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं थी। मेरे बच्चों के सिर से बाप का साया उठ गया।”

शुरुआत में मामला किसी अज्ञात चोर या रंजिश का लग रहा था। कत्ल का तरीका इतना साफ था कि पुलिस भी एक पल के लिए उलझ गई। लेकिन कातिल चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वो कोई न कोई सुराग छोड़ ही जाता है। इस कहानी में वो सुराग था- पारिवारिक क्लेश।

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Pyar Ka Panchnama. ‘प्यार का पंचनामा’: 24 घंटे में खुला बेवफाई का राज

मानसा के SSP भगीरत मीना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच टीमें गठित कीं। पुलिस जब गांव में पूछताछ कर रही थी, तभी मृतक तरसेम के भाई विक्की सिंह ने एक ऐसी बात कही, जिसने पूरी तफ्तीश का रुख ही बदल दिया। विक्की ने पुलिस को बताया कि घर में पिछले कुछ समय से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। तरसेम और जगजीत के बीच अक्सर क्लेश होता था, और गांव में यह अफवाह थी कि जगजीत के संबंध तरसेम के मामा के लड़के दीप सिंह के साथ हैं।

बस, पुलिस को अपनी ‘कॉकटेल’ का मुख्य इनग्रेडिएंट मिल चुका था। पुलिस ने बिना देर किए दीप सिंह और जगजीत कौर को हिरासत में लिया।

शुरुआत में तो जगजीत कौर पुलिस के सामने रोती रही, खुद को बेकसूर बताती रही। लेकिन जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और दीप सिंह व उसके मोबाइल की लोकेशन के सबूत सामने रखे, तो जगजीत कौर टूट गई। उसने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया: “हाँ, मैंने ही दीप के साथ मिलकर तरसेम को रास्ते से हटाया।”

पुलिस ने महज़ 24 घंटे के अंदर इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाकर जगजीत कौर, उसके प्रेमी दीप सिंह उर्फ कालू और मददगार गोबिंद सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

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Pyar Ka Panchnama | मृतक तरसेम का फाइल फोटो

Pyar Ka Panchnama निष्कर्ष: इस ‘इश्क के गोरखधंधे’ से क्या सीखा?

तरसेम सिंह तो इस दुनिया से चला गया। लेकिन पीछे छोड़ गया कई ऐसे सवाल जो आज के समाज के चेहरे पर एक जोरदार तमाचा हैं।

  • भरोसे का कत्ल: जिस भाई को काम सिखाने के लिए घर में रखा, उसी ने घर उजाड़ दिया।
  • बच्चों का क्या? माँ जेल में है, बाप श्मशान में। उन दो मासूम बच्चों का क्या कसूर था, जिनकी जिंदगी इस नाजायज इश्क की आग में झुलस गई?

यह केस साबित करता है कि जब प्यार में से ‘नैतिकता’ और ‘लॉजिक’ खत्म हो जाता है, तो वह सिर्फ और सिर्फ बर्बादी की तरफ ले जाता है।

दोस्तों, ‘प्यार का पंचनामा’ की इस खौफनाक दास्तान पर आपकी क्या राय है? 1. क्या आपको लगता है कि आज के दौर में अपनों पर भी आंख मूंदकर भरोसा करना भारी पड़ सकता है?

2. ऐसे रिश्तों को आप ‘प्यार’ कहेंगे या सिर्फ एक ‘घिनौनी वासना’?

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Xlaila Editor
महेश कांत (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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