Bhabhi ki love story: नवंबर का महीना था। सहारनपुर जिले के एक समृद्ध गाँव की उस विशाल, पुरानी हवेली में हफ्तों से चहल-पहल बनी हुई थी।
हवेली के बड़े बेटे की साले की शादी तय हुई थी, और रस्मों का गवाह बनने के लिए दूर-दूर से रिश्तेदार जुटे थे। चारों तरफ गेंदे के फूलों की महक, पीतल के बर्तनों की छनक और ढोलक की थाप की गूँज थी। Bhabhi ki love story
हवेली के बड़े बेटे की पत्नी, यानी घर की बड़ी बहू सिमरन, पूरे घर की धुरी बनी हुई थी। लाल रंग की सिल्क की साड़ी, माथे पर छोटी सी बिंदी, हाथों में छनकाती काँच की लाल चूड़ियाँ और चेहरे पर सादगी भरा नूर—सिमरन जब आँगन से निकलती, तो ऐसा लगता मानो पुरानी हवेली की दीवारों में प्राण फूँक दिए गए हों। Bhabhi ki love story
दूसरी तरफ रोहन था—उसका देवर। शहर से पढ़ाई पूरी करके लौटा एक बेबाक और हंसमुख नौजवान। रोहन स्वभाव से थोड़ा मनमौजी था, लेकिन सिमरन के प्रति उसके मन में एक गहरा, अनकहा आदर और एक अजीब सी तड़प थी, जिसे उसने हमेशा अपनी शरारतों के पीछे छुपाकर रखा था। Bhabhi ki love story
घर में शादी का माहौल था, इसलिए तैयारियों का पूरा बोझ सिमरन के कांधों पर था। और उस बोझ को बांटने का जिम्मा घर के बड़ों ने रोहन को सौंप दिया था। Bhabhi ki love story
“रोहन, ज़रा सिमरन के साथ जाकर ज़मींदार साहब के खेत से ताज़े आम के पत्ते और पूजा के फूल ले आओ,” चाची जी ने आवाज़ लगाई।
रोहन ने अपनी आस्तीनें ऊपर चढ़ाते हुए मुस्कुराकर सिमरन की तरफ देखा, “जी चाची जी! हुक्म सर आँखों पर। चलिए भाभी जी, आपकी गाड़ी का ड्राइवर तैयार है।”
सिमरन ने अपनी साड़ी का पल्लू सँभाला और रोहन को एक हल्की सी तिरछी नज़र से देखते हुए बोली, “ज्यादा इतराओ मत रोहन, अगर एक भी काम अधूरा छूटा तो शाम की चाय नहीं मिलेगी।”

Bhabhi ki love story: सरसों के खेत और मीठी नोक-झोंक
गाँव की पगडंडियों पर दोपहर की धूप छन-छनकर आ रही थी। दोनों हवेली से थोड़ी दूर, खेतों की तरफ निकल पड़े। हवेली का शोर पीछे छूट चुका था, और चारों तरफ सिर्फ हवा में झूमती फसलों की सरसराहट थी।
“भाभी, वैसे एक बात कहूँ?” रोहन ने पगडंडी पर चलते हुए कहा।
“कहने से पहले सोच लेना कि किसे बोल रहे हो,” सिमरन ने अपनी पायल की झंकार संभालते हुए मुस्कुराकर कहा।
“यही कि… इस पूरी शादी में अगर कोई सबसे खूबसूरत लग रहा है, तो वो दुल्हन नहीं, बल्कि हमारी भाभी साहिबा हैं,” रोहन ने अपनी आवाज़ में एक हल्की सी नटखट नरमी लाते हुए कहा।
सिमरन का दिल एक पल के लिए धड़का। उसने कदम रोके और अपनी उंगली से रोहन की तरफ इशारा करते हुए नकली गुस्से से कहा, “देवर जी, ज़बान थोड़ी संभालकर! अगर तुम्हारी बातें किसी ने सुन लीं, तो हवेली में शादी से पहले महाभारत हो जाएगी।”
“सुनने दीजिए भाभी। सच कहने में कैसी झिझक?” रोहन थोड़ा नज़दीक आया और उसने झुके हुए सरसों के पौधे को हटाकर सिमरन के जाने का रास्ता साफ किया। उस पल, दोनों के बीच की दूरी महज़ कुछ इंच रह गई थी। सिमरन ने रोहन की आँखों में एक अजीब सी शिद्दत देखी—एक ऐसा ठहराव, जो उसने पहले कभी नहीं देखा था।
सिमरन ने तुरंत अपनी नज़रें झुका लीं, लेकिन उसकी गालों पर आई हल्की लाली छिप न सकी। उसने बात बदलने के लिए कहा, “फूल और पत्ते जमा करो, देर हो रही है।”

Bhabhi ki love story: कोठरी का सन्नाटा और कंगन की उलझन
शाम होते-होते हवेली में मेहमानों की भीड़ और बढ़ गई। ढोलक की थाप पर महिलाएँ पारंपरिक विवाह गीत गा रही थीं। हर तरफ चहल-पहल थी।
शादी के शामियाने के लिए सामान निकालने के लिए सिमरन को हवेली के पिछले हिस्से में बनी पुरानी कोठरी में जाना पड़ा। वह लकड़ी के बड़े संदूक में से पुरानी ज़री की चादरें निकाल रही थी कि तभी दरवाज़ा हल्का सा खड़का और रोहन अंदर आ गया।
“यहाँ क्या ढूंढ रही हैं भाभी?” रोहन ने दरवाज़ा थोड़ा सा ढकेलते हुए पूछा।
“रोहन? तुम यहाँ क्या कर रहे हो? बाहर चाची जी तुम्हें बुला रही थीं,” सिमरन ने घबराते हुए संदूक का ढक्कन बंद करने की कोशिश की।
लेकिन पुरानी कोठरी में रोशनी कम थी। सिमरन का लाल काँच का कंगन संदूक के लोहे के कुंडे में उलझ गया। जैसे ही उसने हाथ खींचने की कोशिश की, कंगन टूट गया और उसकी कलाई पर एक छोटा सा खरोंच का निशान बन गया।
“आह!” सिमरन के मुँह से हल्की सी कराह निकली।
रोहन बिना एक पल गंवाए आगे बढ़ा। उसने सिमरन का हाथ अपने दोनों हाथों में थाम लिया। उसकी उंगलियों की गर्माहट सिमरन की कलाई को छू रही थी।
“ध्यान कहाँ रहता है आपका?” रोहन की आवाज़ में शरारत गायब थी, उसकी जगह एक गहरी चिंता थी। उसने अपनी जेब से रुमाल निकाला और बड़ी नज़ाकत से सिमरन की कलाई पर लपेटने लगा।
“रोहन… छोड़ो, कोई देख लेगा तो…” सिमरन की साँसें तेज़ हो गई थीं। कोठरी का सन्नाटा इतना गहरा था कि दोनों को एक-दूसरे की दिल की धड़कनें साफ सुनाई दे रही थीं।

“देखने दीजिए,” रोहन ने सिमरन की आँखों में आँखें डालकर कहा, “यह पूरा घर शोर मचा रहा है, लेकिन मेरा ध्यान सिर्फ आपकी इस खामोशी पर है। आप दिन भर सबके लिए भागती रहती हैं, कभी अपने बारे में भी सोचती हैं?”
सिमरन की नज़रें रोहन के चेहरे पर टिक गईं। उस अंधेरी कोठरी में, बाहर ढोलक की आवाज़ और अंदर दो दिलों की धड़कनों का एक अलग ही संगीत बज रहा था। रोहन ने धीरे से उसके हाथ पर अपने होंठ रख दिए। वह स्पर्श इतना कोमल, इतना नज़दीक और इतना आत्मीय था कि सिमरन के पूरे वजूद में एक सिहरन दौड़ गई।
“रोहन… यह सही नहीं है,” सिमरन ने कांपती आवाज़ में कहा, लेकिन उसने अपना हाथ तुरंत पीछे नहीं खींचा।
“सही और गलत का फैसला दुनिया करती है भाभी… अहसास का फैसला दिल करता है,” रोहन ने धीमी आवाज़ में कहा, और फिर धीरे से मुस्कुराते हुए पीछे हट गया।

Bhabhi ki love story: हल्दी की रात और छुपा हुआ गुलाल
अगली शाम हल्दी और संगीत की रस्म थी। पूरा आँगन पीले और नारंगी गेंदे के फूलों से सजा था। ढोलक पर थाप पड़ रही थी और औरतें नाच रही थीं।
सिमरन पीले रंग के सूती लहंगे में बला की खूबसूरत लग रही थी। उसके गीले बाल पीठ पर ढलके हुए थे। वह कटोरी में हल्दी का लेप लेकर चाची जी की तरफ बढ़ रही थी कि रोहन ने रास्ते में उसे घेर लिया।
“हल्दी की रस्म तो शुरू हो गई, पर सबसे खास हल्दी तो अभी बाकी है,” रोहन ने चुटकी में थोड़ी सी हल्दी उठाई।
“रोहन, यहाँ मत करो… सब लोग हैं,” सिमरन ने चारों तरफ देखते हुए फुसफुसाकर कहा।
“तो फिर कहाँ चलें?” रोहन ने आँख मारते हुए कहा।
सिमरन ने उसे घूरकर देखा, लेकिन उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। रोहन ने चालाकी से अपने हाथ में ली हल्दी सिमरन के गालों पर हल्के से लगा दी। उसकी उंगलियाँ सिमरन के गालों को छूती हुई उसकी गर्दन के पास से गुज़रीं। वह स्पर्श इतना रेशमी और जादुई था कि सिमरन अपनी आँखें मूँदने पर मजबूर हो गई।
“यह हल्दी शादी की नहीं… हमारे इस छोटे से सीक्रेट की है,” रोहन ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया।
सिमरन ने आँखें खोलीं और रोहन की छाती पर हल्का सा मुक्का मारते हुए कहा, “तुम बहुत शैतान हो गए हो रोहन!”
“और आप बहुत खूबसूरत,” रोहन ने हंसते हुए जवाब दिया।

Bhabhi ki love story: छत पर चाँद और अधूरी रात
शादी की रस्में देर रात तक चलीं। रात के करीब दो बजे जब हवेली के सारे मेहमान सो गए, और आँगन में सन्नाटा पसार गया, तब सिमरन हवेली की विशाल छत पर अकेली खड़ी थी। हवा में हल्की सी ठंडक थी और आसमान में पूरा चाँद चमक रहा था।
वह अपने थके हुए पल्लू को सँभाल रही थी कि पीछे से कदमों की आहट हुई। रोहन दो कुल्हड़ में गर्म चाय लिए खड़ा था।
“मुझे मालूम था आप यहाँ होंगी,” रोहन ने एक कुल्हड़ उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा।
सिमरन ने कुल्हड़ थाम लिया, “थके नहीं तुम अभी तक?”
“आपके पास आने की थकान कैसी भाभी?” रोहन उसके साथ मुंडेर से टेक लगाकर खड़ा हो गया।
दोनों ने खामोशी से चाय की चुस्कियाँ लीं। गाँव की रात बहुत शांत थी, दूर कहीं सियारों की आवाज़ें आ रही थीं और हवेली के आँगन में लगे नीम के पेड़ से ठंडी हवा टकरा रही थी।
“रोहन…” सिमरन ने कुछ सोचकर कहा, “शादी खत्म हो जाएगी, फिर तुम शहर वापस चले जाओगे ना?”
रोहन ने सिमरन की तरफ देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी। उसने सिमरन का दूसरा हाथ अपने हाथ में ले लिया। इस बार सिमरन ने अपना हाथ नहीं हटाया।
“शहर तो चला जाऊँगा भाभी, पर मेरा दिल यहीं इस पुरानी हवेली के आँगन में, इस नीम की छाँव में और आपके इस कंगन की छनक में छूट जाएगा।”
सिमरन ने रोहन की तरफ देखा। दोनों की नज़रें एक-दूसरे में उलझ गईं। दूरियाँ मिट चुकी थीं। रोहन ने धीरे से सिमरन के माथे पर अपने होंठ टेक दिए। वह चुंबन समर्पण, सम्मान और एक अनकहे प्यार का प्रतीक था, जो इस गाँव की माटी में, ढोलक की ताल में और हवेली की हवाओं में हमेशा के लिए अमर हो गया था।
हवेली के कोने में अटका चाँद उन दोनों के इस खूबसूरत, मसालेदार और आत्मीय रिश्ते पर अपनी चाँदनी बिखेर रहा था। Bhabhi ki love story
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