Roorkee Love Story: साल 2008 की बात है। उत्तराखंड का खूबसूरत और शांत शहर रुड़की, जिसे लोग अदब से ‘शिक्षा की नगरी’ कहते थे, अपनी एक अलग ही रफ्तार से चल रहा था। गंगा की गंगनहर के किनारे बसे इस शहर की हवाओं में एक तरफ जहां ज्ञान और बौद्धिकता की महक थी,
वहीं दूसरी तरफ तीर्थ नगरी हरिद्वार के पास होने के कारण इसमें एक आध्यात्मिक शांति भी घुली हुई थी। इसी शहर के मुख्य हरिद्वार रोड पर स्थित था एक डिग्री कॉलेज। लड़कियों की खिलखिलाहट और किताबों के पन्नों के बीच, वहां एक जिंदगी बेहद खामोशी और गरिमा के साथ गुजर रही थी।
यह जिंदगी थी अलीशा की। अलीशा, जो उसी कॉलेज में एक लेडी लेक्चरार थीं। उम्र के उस पड़ाव पर जहाँ लोग अक्सर अपने लिए एक नया आशियाना ढूंढ लेते हैं, अलीशा ने अपनी दुनिया को बेहद सीमित कर लिया था। माता-पिता का साया सिर से जल्दी ही उठ गया था, जिसके बाद उनके हिस्से के अकेलेपन को उनके भाई ने संभाला था। भाई की शादी हो चुकी थी, और अलीशा अपने भाई-भाभी के साथ उसी घर में रहती थीं।
अलीशा का रंग सांवला था, लेकिन खुदा ने उनके नैन-नक्श कुछ ऐसे तराशे थे कि जो भी उन्हें एक बार देख लेता, बस देखता रह जाता। उनकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी—जैसे कोई ठहरा हुआ समंदर हो, जिसमें कई अनकही कहानियां दफन हों। कॉलेज की ऊँची और भारी दीवारों के बीच, सूती साड़ियों के सलीके और चेहरे पर एक गंभीर मगर सौम्य मुस्कान लिए अलीशा अपनी जिंदगी को बस एक ढर्रे पर जी रही थीं। शादी न होने का मलाल या अकेलेपन का दर्द, उन्होंने कभी अपने चेहरे पर आने नहीं दिया था।

Roorkee Love Story: देहरादून की हलचल और एक नया मोड़
उसी दौरान, यहाँ से कुछ किलोमीटर दूर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पत्रकारिता की दुनिया करवट बदल रही थी। देहरादून के एक प्रतिष्ठित और बड़े समाचार पत्र के दफ्तर में हलचल तेज थी। वहां एक बेहद होनहार, समझदार और बेबाक युवा रिपोर्टर काम करता था-यशराज कुमार। यशराज ने अपनी धारदार लेखनी और जमीनी रिपोर्टिंग के दम पर बहुत कम समय में पूरे उत्तराखंड के मीडिया जगत में अपनी एक मजबूत साख बना ली थी। संपादक की नजरों में वह एक ऐसा हीरा था, जिसे किसी भी मोर्चे पर भेजा जा सकता था।
तभी देहरादून के मीडिया बाजार में एक भूचाल आया। एक नए समाचार पत्र की लॉन्चिंग हुई और होड़ मच गई। इस होड़ का असर रुड़की में भी दिखा, जहाँ यशराज के ही अखबार की महिला रिपोर्टर (जो रुड़की में एजुकेशन बीट देखती थीं) इस्तीफा देकर उस नए अखबार में शामिल हो गईं। रुड़की जैसे महत्वपूर्ण शहर में शिक्षा और संस्थानों की बड़ी बीट रातों-रात खाली हो गई।
देहरादून दफ्तर में संपादक ने तुरंत यशराज को अपने केबिन में बुलाया। उन्होंने यशराज की तरफ देखा, मेज पर रखे ट्रांसफर लेटर पर दस्तखत किए और उसे यशराज के हाथ में सौंपते हुए कहा, “यशराज, रुड़की हमारा बहुत बड़ा गढ़ है। वहां इस वक्त हमें तुम्हारी जरूरत है। कल सुबह से तुम्हें रुड़की दफ्तर में जॉइन करना है।”
यशराज के लिए यह एक नई चुनौती थी। उसने बिना वक्त गंवाए अपना सामान पैक किया। पत्रकार की जिंदगी में सामान ही कितना होता है- कुछ जोड़ी कपड़े और ढेरों डायरियां। रुड़की जाने से पहले वह कुछ वक्त के लिए अपने घर गया, अपने परिवार से मिला और फिर भारी मन और नई उम्मीदों के साथ रुड़की शहर में कदम रख दिया।

Roorkee Love Story: रुड़की की जमीन पर यशराज का आगाज
रुड़की दफ्तर में जॉइन करते ही यशराज को ‘हायर एजुकेशन’ (उच्च शिक्षा) की बेहद संवेदनशील और प्रतिष्ठित बीट सौंपी गई। इसके दायरे में देश का गौरव ‘आईआईटी रुड़की’, ‘राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान’ (NIH), ‘केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान’ (CBRI) के साथ-साथ शहर के तमाम नामी स्कूल और कॉलेज आते थे।
यशराज ने पहले ही दिन अपनी पत्रकारिता का लोहा मनवा दिया। उसने एक ऐसी खोजी और शानदार स्टोरी पब्लिश की, जिसने रुड़की के प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में तहलका मचा दिया। सुबह की चाय के साथ जब लोगों ने अखबार खोला, तो हर जुबान पर यशराज कुमार का नाम था। इसके बाद तो जैसे सिलसिला ही चल पड़ा। हर हफ्ते, कोई न कोई बड़ी और मुकम्मल खबर यशराज के नाम के साथ अखबार के फ्रंट पेज (मुख्य पृष्ठ) की जीनत बनती थी। वह रुड़की के प्रबुद्ध वर्ग और संस्थानों का एक जाना-माना चेहरा बन चुका था।
लेकिन इस चमकती हुई पेशेवर जिंदगी के पीछे, यशराज की एक मुकम्मल घरेलू दुनिया भी थी। उसकी शादी हो चुकी थी और उसके दो मासूम, छोटे बच्चे थे, जो उसकी जिंदगी का आधार थे। वह अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझता था।

Roorkee Love Story: वो मुलाकात और मैसेजों का जाल
वह नवंबर की एक हल्की गुलाबी ठंड वाली दोपहर थी। आईटीआई चौक के पास वाले उसी महिला डिग्री कॉलेज में ‘राष्ट्रीय सेवा योजना’ (NSS) का एक विशेष कैंप आयोजित किया गया था। शहर के नामी अखबार का मुख्य रिपोर्टर होने के नाते, यशराज इस कैंप की कवरेज और रिपोर्टिंग के लिए वहां पहुंचा।
कॉलेज के मैदान में छात्राओं की चहल-पहल थी। यशराज अपनी डायरी और पेन लिए कार्यक्रम के मुख्य बिंदुओं को नोट कर रहा था, तभी उसकी मुलाकात वहां कैंप की व्यवस्था संभाल रहीं दो लेडी लेक्चरार से हुई। उनमें से एक थीं अलीशा, और दूसरी थीं उनकी सबसे अजीज सहेली, अलीजा।
“नमस्कार, मैं समाचार पत्र से यशराज,” उसने शालीनता से अपना परिचय दिया।
अलीशा ने अपनी गहरी आँखों से यशराज को देखा। अखबारों में उसका नाम रोज छपता था, लेकिन उसे सामने देखना एक अलग अनुभव था। अलीजा ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, यशराज जी! आपकी स्टोरीज हम रोज पढ़ते हैं।”
कार्यक्रम की आगे की रूपरेखा और प्रेस नोट के आदान-प्रदान को आसान बनाने के लिए, यशराज ने अपना मोबाइल नंबर उन दोनों को दे दिया। उसने कहा, “कैंप की जो भी तस्वीरें या आगे के कार्यक्रम की सूचना हो, आप मुझे इस नंबर पर दे सकती हैं।”
यह साल 2008 का वो दौर था जब नीली या हरी रोशनी वाले कीपैड फोन हुआ करते थे, जिनमें सीमित कैरेक्टर वाले टेक्स्ट मैसेज (SMS) भेजे जाते थे। उन दिनों मैसेजों की अपनी एक अलग ही अहमियत और तहजीब थी। लोग त्योहारों पर, शाम को या फुरसत के पलों में एक-दूसरे को शेरों-शायरी, कोट्स और चुटकुले भेजा करते थे।
दफ्तर के काम से फारिग होकर एक शाम यशराज ने शिष्टाचार के नाते अलीजा के नंबर पर एक शायरी से भरा मैसेज फॉरवर्ड कर दिया। अगले दिन, अलीजा की तरफ से उस शायरी का एक जवाब आया। धीरे-धीरे, शब्दों का यह पुल गहरा होने लगा। कुछ ही दिनों में, यह सिलसिला सिर्फ मैसेजों तक महदूद नहीं रहा। कभी-कभी फोन की घंटी बजती और दोनों में बातें होने लगीं।

Roorkee Love Story: ईर्ष्या की दीवार और एक नया राब्ता
सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब एक शाम यशराज ने वही खूबसूरत शायरी वाला मैसेज अलीशा और अलीजा दोनों को एक साथ फॉरवर्ड कर दिया।
अगले दिन जब कॉलेज में अलीशा ने सहज भाव से अलीजा को वह मैसेज दिखाया, तो अलीजा के चेहरे का रंग उड़ गया। उसके भीतर छिपी जलन और अधिकार भावना अचानक बाहर आ गई। वह नहीं चाहती थी कि उसका ‘खास दोस्त’ किसी दूसरी लड़की को-यहाँ तक कि उसकी अपनी सहेली को भी-वैसे मैसेज भेजे।
“तुम्हें उसे इतनी तवज्जो देने की जरूरत नहीं है, अलीशा,” अलीजा ने तल्ख लहजे में कहा।
इस बात को लेकर दोनों सहेलियों के बीच एक अनकही तकरार हो गई। जब यशराज को इस खिंचाव का अहसास हुआ, तो उसने एक परिपक्व फैसला लिया। उसने अलीजा को मैसेज भेजना पूरी तरह बंद कर दिया। लेकिन इस प्रक्रिया में, वह अनजाने ही अलीशा के सीधे संपर्क में आ गया।
अब यशराज और अलीशा के बीच मैसेजों का लेन-देन शुरू हुआ। जो अलीशा पहले बेहद रिजर्व और शांत रहती थी, वह अब यशराज के शब्दों में खुद को ढूंढने लगी थी। धीरे-धीरे, कीपैड की ‘टिक-टिक’ रात के सन्नाटे को चीरने लगी। मैसेजों की जगह अब लंबी कॉल्स ने ले ली थी। रात-रात भर दोनों के बीच बातें होतीं- कभी जिंदगी के फलसफों पर, कभी दोस्ती के मायनों पर, तो कभी दिल की उस खामोश धड़कन पर जिसे ‘प्यार’ का नाम देने से दोनों डर रहे थे। दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ चुके थे।

Roorkee Love Story: सच का वजन और खामोश मोहब्बत
एक रात, जब रुड़की शहर सो चुका था और गंगनहर का पानी खामोशी से बह रहा था, यशराज ने अपने दिल की गहराइयों में दबी बात बाहर निकाल ही दी। उसने पूरी हिम्मत जुटाई और फोन पर अलीशा से कहा, “अलीशा, मैं तुम्हें अपनी जिंदगी में एक बेहद खास जगह दे चुका हूँ। मैं तुम्हें पसंद करता हूँ… लेकिन एक सच है जो तुम्हें जानना जरूरी है। मैं शादीशुदा हूँ और दो बच्चों का पिता हूँ।”
यह सुनते ही फोन के दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया। अलीशा के दिल पर जैसे किसी ने भारी पत्थर रख दिया हो। उसे एक गहरा अफसोस हुआ। वह अपनी सामाजिक मर्यादाओं और नैतिकताओं को जानती थी। वह खुलकर कुछ कह नहीं पा रही थी, लेकिन सच तो यह था कि वह भीतर ही भीतर यशराज के इस निश्छल स्वभाव और उसकी परवाह की आदी हो चुकी थी। वह उसे चाहने लगी थी।
उसी रात, जब बातचीत के आखिरी पलों में यशराज ने बेहद भावुक होकर ‘आई लव यू’ कहा, तो अलीशा ने कोई जवाब नहीं दिया। वह खामोश रही। मगर इस खामोशी ने उनके रिश्ते को तोड़ा नहीं, बल्कि और गहरा कर दिया।
समय बीतता गया। दोनों की मुलाकातें अब छिप-छिप कर होने लगी थीं। कभी रुड़की के किसी शांत सिनेमा हॉल के अंधेरे में एक-दूसरे के पास बैठना, तो कभी किसी दूरदराज के रेस्तरां में चाय और कॉफी के कप से उठते धुएं के बीच एक-दूसरे की आँखों में झांकना। इस बेनाम मगर पाकीज़ा रिश्ते में एक साल का वक्त कैसे पंख लगाकर उड़ गया, पता ही नहीं चला।

Roorkee Love Story: आंसुओं की दस्तक और दर्द का इजहार
एक साल बाद, एक सुबह अलीशा का फोन यशराज के मोबाइल पर आया। उसकी आवाज में एक अजीब सा भारीपन और दबाव था। जैसे वह किसी गहरी तकलीफ को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही हो। उसने बहुत संक्षेप में कहा, “यशराज, आज शाम मुझे तुमसे मिलना है। प्लीज, वक्त निकाल लेना।”
शाम को जब दोनों एक रेस्तरां के केबिन में मिले, तो अलीशा की आँखों के कोर लाल थे। यशराज ने घबराकर पूछा, “क्या हुआ अलीशा? घर पर सब ठीक तो है?”
अलीशा ने अपने आंसू रोकते हुए कहा, “यशराज, जब पापा का देहांत हुआ था, उन्होंने साफ कहा था कि यह मकान हम दोनों भाई-बहन का है। लेकिन अब… मेरा भाई मुझ पर असहनीय दबाव बना रहा है। वह चाहता है कि मैं यह घर छोड़कर हमेशा के लिए चली जाऊँ। भाभी भी उसका साथ दे रही है। उनका कहना है कि जब मैं शादी ही नहीं कर रही, तो यहाँ क्यों रह रही हूँ?” अलीशा की आवाज कांपने लगी, “यशराज, कल रात उन्होंने मेरे साथ मारपीट भी की…”
यशराज का खून खौल उठा, लेकिन वह लाचार था। उसने अलीशा का ढांढस बंधाया, “तुम परेशान मत हो अलीशा, मैं हूँ न। सब ठीक हो जाएगा। हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।” उस दिन बात वहीं खत्म हो गई, लेकिन अलीशा के दिल का तूफान अभी थमा नहीं था।

Roorkee Love Story: वो आखिरी शाम और रूहानी समर्पण
अभी इस बात को एक हफ्ता भी नहीं गुजरा था कि एक शाम करीब 7 बजे अलीशा का दोबारा फोन आया। सर्दियों की शुरुआत हो चुकी थी और रुड़की की हवाओं में एक ठिठुरन थी। अलीशा ने कहा, “मैं तुरंत मिलना चाहती हूँ, उसी रेस्तरां में।”
जब यशराज वहां पहुंचा, तो अलीशा का अंदाज बदला हुआ था। आज वह मेज के उस पार नहीं, बल्कि यशराज के ठीक बराबर वाली कुर्सी पर आकर बैठ गई। वेटर कॉफी देकर चला गया, लेकिन कॉफी की गर्माहट दोनों के बीच की खामोशी को कम नहीं कर पा रही थी। अचानक, अलीशा ने अपनी सूती साड़ी का पल्लू संभाला और अपना सिर यशराज के मजबूत कंधे पर रख दिया।
वह फूट-फूट कर रोने लगी। यशराज स्तब्ध रह गया। जो लड़की हमेशा एक गरिमापूर्ण दूरी बनाए रखती थी, आज वह उसके कंधे पर बिखर रही थी। उसने अलीशा को संभाला, उसके आंसू पोंछे।
चुप होने के बाद, अलीशा ने बेहद धीमी, लगभग फुसफुसाती आवाज में कहा, “यशराज, मेरे पिता ने मरते वक्त कहा था कि भाई जहां कहेगा, वहां शादी करना। लेकिन मुझे नहीं लगता कि मेरा भाई मेरी शादी में कोई दिलचस्पी ले रहा है। वे बस मुझे इस जिंदगी से बेदखल करना चाहते हैं।” उसने यशराज की तरफ देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सा खालीपन था, “एक साल पहले तुमने मुझे प्रपोज किया था… मैं तुम्हारी मजबूरियों की वजह से जवाब नहीं दे पाई। मुझे माफ कर देना। मैं कल रहूँ या न रहूँ… लेकिन यशराज, मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे मेरे पति का सुख प्रदान करो। मुझे अपनी पत्नी की तरह स्वीकारो, सिर्फ आज के लिए।”
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यह सुनकर यशराज के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने अलीशा का हाथ थामकर कहा, “अलीशा, तुम यह क्या कह रही हो? तुम जानती हो मैं शादीशुदा हूँ। उस दिन जो मैंने ‘आई लव यू’ कहा था, वह एक रूह का जुड़ाव था। क्या एक लड़का और लड़की बिना जिस्मानी रिश्ते के प्यार नहीं कर सकते? मैं इस पाकीज़ा दोस्ती को जिस्म की भूख में नहीं बदल सकता। जैसे एक मर्द अपनी मां, बहन या बेटी को निश्छल प्यार करता है, वैसे ही एक प्रेमिका को भी बिना किसी शारीरिक चाहत के टूटकर प्यार किया जा सकता है। नहीं अलीशा, मैं यह मर्यादा नहीं तोड़ सकता।”
लेकिन अलीशा आज किसी और ही मिट्टी की बनी थी। उसने अपना बैग उठाया और उठकर जाने लगी। यशराज ने पहली बार उसका हाथ कसकर पकड़ा और रोकना चाहा। अलीशा ने उसकी आँखों में झांककर कहा, “मैंने पास के होटल में एक कमरा बुक किया है यशराज। मैं अपनी जिंदगी के कुछ मुकम्मल पल तुम्हारे नाम करना चाहती हूँ। क्या तुम सिर्फ बैठ भी नहीं सकते मेरे पास?”

Roorkee Love Story: मिलन की वो आखिरी रात
होटल के उस शांत कमरे में, जहां वक्त जैसे ठहर गया था, अलीशा ने यशराज के सीने पर अपना सिर रख दिया। उसकी सांसें तेज चल रही थीं। उसने यशराज की आँखों में देखते हुए अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कसम दे दी, “आई लव यू यशराज… मुझे आज अपनी पत्नी मान लो। तुम्हें तुम्हारी पत्नी की कसम, मुझे खाली हाथ मत लौटाओ।”
पत्नी की कसम और अलीशा की आँखों में तैरते उस अथाह दर्द के आगे यशराज का संयम, उसकी सारी दलीलें ढह गईं। वह हार गया।
उसने आगे बढ़कर अलीशा के उस सांवले, मगर बेइंतहा मासूम चेहरे को अपने हाथों के प्याले में उठाया। उसकी कांपती हुई पलकों पर ठहरे आंसुओं को चूमा और फिर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। यह केवल दो शरीरों का मिलन नहीं था, बल्कि दो तन्हा और सतायी हुई रूहों का एक-दूसरे में विलीन हो जाना था।
सर्द रात की उस खामोशी में, कमरे की मद्धम रोशनी गवाह बनी जब दोनों ने दुनिया के सारे बंधनों को पीछे छोड़ दिया। यशराज की बाहों की गर्माहट में अलीशा अपने जीवन के सारे दुखों, भाई की प्रताड़ना और दुनिया के तानों को भूल चुकी थी। वह पूरी तरह यशराज की हो चुकी थी। सिसकियों और सांसों के उतार-चढ़ाव के बीच, प्यार की वह खुशबू उस कमरे के जर्रे-जर्रे में समा गई। जिस्म से रूह तक की उस यात्रा में पूरी रात कैसे कट गई, दोनों को अहसास ही नहीं हुआ। वह रात अलीशा के लिए उसकी जिंदगी की इकलौती और सबसे मुकम्मल सुहागरात थी।
अगले दिन, दोनों जब होटल से निकले, तो उनके चेहरों पर एक अजीब सी शांति थी। दोनों ने एक-दूसरे को देखा, एक सामान्य मुलाकात हुई और दोनों अपने-अपने रास्तों पर चल दिए। Roorkee Love Story

Roorkee Love Story: अलविदा दोस्त… एक अनंत सन्नाटा
तीन दिन बाद। सुबह की पहली किरण के साथ यशराज की आंख खुली। उसने रोज की तरह अलीशा को ‘गुड मॉर्निंग’ का संदेश भेजने के लिए अपना कीपैड फोन उठाया। लेकिन इनबॉक्स खोलते ही उसके दिल की धड़कन रुक गई। वहां अलीशा के दो मैसेज पहले से पड़े थे, जो उसने रात के सन्नाटे में भेजे थे।
पहला मैसेज था: “गुड नाईट यशराज…”
और उसके ठीक नीचे दूसरा मैसेज था: “अलविदा दोस्त! जा रही हूँ, तुम्हारी यादों और तुम्हारे दिए उस सुहाग के अहसास को अपने साथ लेकर…”
यशराज का माथा ठनका। उसने तुरंत अलीशा का नंबर डायल किया। फोन पर घंटी (रिंग टोन) जा रही थी, लेकिन कोई फोन उठा नहीं रहा था। एक अजीब सी अनहोनी के डर से यशराज ने आव देखा न ताव, तुरंत अपने स्कूटर की किक मारी और तेजी से अलीशा के घर की तरफ भागा।
जब वह अलीशा के मोहल्ले में पहुंचा, तो वहां सन्नाटा था। अलीशा के घर के बाहर कुछ लोगों की भीड़ जमा थी। यशराज की सांसें उखड़ रही थीं। वह भागते हुए अंदर गया… और जो मंजर उसने देखा, उसने उसकी दुनिया उजाड़ दी।
सफेद कफन में लिपटी अलीशा शांति से सो रही थी। उसके चेहरे पर वही सांवला सलोनापन था, लेकिन आँखें हमेशा के लिए बंद हो चुकी थीं। भाई और समाज के दबाव ने उस नाजुक रूह को इस दुनिया से विदा होने पर मजबूर कर दिया था। दीवार पर अलीशा की एक तस्वीर टंगी थी, जिस पर लोग पुष्प अर्पित कर रहे थे। कुछ लोग उसे कब्रिस्तान ले जाने की तैयारियों में मशगूल थे।
यशराज के पैर जैसे जमीन में धंस गए। वह चाहकर भी चिल्लाकर रो नहीं सकता था, क्योंकि वह इस दुनिया की नजरों में उसका कोई नहीं था। उसने कांपते हाथों से फूलों का एक गुच्छा उठाया, अलीशा की तस्वीर पर अर्पित किया और एक कोने में जाकर खड़ा हो गया। उसकी आँखों से आंसुओं का सैलाब बह रहा था, जो सर्दियों की उस सुबह की धूप में सूखने का नाम नहीं ले रहा था।
Roorkee Love Story: यशराज के दिल की आवाज
“अलीशा… तुमने मुझसे मेरे हिस्से का प्यार तो मांग लिया, लेकिन अपनी जिंदगी का सारा दर्द अकेले ही समेट कर चली गईं। तुमने उस रात मुझसे कहा था कि तुम कल रहो या न रहो… मुझे क्या पता था कि तुम अपनी मौत का लिबास सिल चुकी थीं।
लोग कहते हैं कि हमारा रिश्ता गलत था, नाजायज था। लेकिन उस कमरे की चारदीवारी गवाह है, जहां तुमने मुझे अपना पति माना था और मैंने तुम्हें अपनी रूह में बसाया था। समाज के बनाए नियम शायद तुम्हें कोई नाम न दें, लेकिन मेरे पत्रकारिता के इस कोलाहल भरे जीवन में, जब भी शांति का कोई लम्हा आएगा, वहां सिर्फ तुम्हारी यादों की गूंज होगी। तुमने विदा ली, मगर मुझे एक ऐसी उम्रकैद दे गई, जहां हर धड़कन के साथ तुम्हारा नाम धड़कता रहेगा। अलविदा मेरी अलीशा… खुदा तुम्हारी रूह को वो सुकून दे, जो यह दुनिया तुम्हें न दे सकी।” Roorkee Love Story
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