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Jija Sali Love Story: जब जीजा-साली के इश्क ने दिया संतान का सुख, 2 पत्नियों का अनोखा आशियाना

Jija Sali Love Story: उत्तर प्रदेश का सहारनपुर शहर। यहाँ की तंग गलियों और व्यस्त जिंदगी के बीच प्रदीप और शालिनी का एक छोटा सा आशियाना था। दोनों की शादी को करीब आठ साल बीत चुके थे।

शुरुआत के कुछ साल तो हँसी-खुशी बीते, लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता गया, घर के आँगन में किसी बच्चे की किलकारी न गूंजने का सन्नाटा शोर में बदलने लगा। Jija Sali Love Story

समाज और परिवार की नजरों में एक सफल शादी का पैमाना अक्सर औलाद होती है। इस पैमाने पर प्रदीप और शालिनी पिछड़ रहे थे। शालिनी के एक से बढ़कर एक डॉक्टरों से चेकअप कराए गए, महंगे से महंगा इलाज चला, मन्नतें मांगी गईं, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

कोई मेडिकल रिपोर्ट साफ तौर पर किसी एक को दोष नहीं दे पा रही थी, लेकिन समाज और परिवार का नजरिया शालिनी और प्रदीप के लिए तानों में तब्दील होने लगा था।

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Jija Sali Love Story चुभते हुए तीर और एक मनहूस शाम

प्रदीप एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। दिन भर की थकान के बाद जब वह घर लौटता, तो उसे सुकून की जरूरत होती थी। लेकिन घर का माहौल अब एक रणभूमि जैसा हो गया था। बात-बात पर तनाव, अजीब सी खामोशी और बीच-बीच में रिश्तेदारों के ताने।

एक शाम प्रदीप ऑफिस से बेहद थका हुआ लौटा। किसी बात को लेकर घर में पहले से ही तनाव था। खाना खाते समय बात फिर से बच्चे की उठ गई। प्रदीप ने शांति से बात खत्म करनी चाही, लेकिन उसके पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर था। बहस बढ़ती गई और तभी प्रदीप के पिता ने एक ऐसा तंज कसा, जिसने प्रदीप की रूह को छलनी कर दिया।

पिता ने चीखते हुए कहा, क्या फायदा तुम्हारी इस जवानी का? शादी को आठ साल हो गए हैं और तुम एक बच्चा तक पैदा नहीं कर सके! लोग पूछते हैं तो नजरें झुक जाती हैं हमारी। तुम तो नामर्द निकले!”

ये शब्द किसी खंजर की तरह प्रदीप के सीने में उतर गए। वह पत्थर की मूरत बन गया। शालिनी भी घूंघट की आड़ में सिसक रही थी। प्रदीप बिना खाना खाए उठा और अपने कमरे में चला गया।

उस रात वह एक पल के लिए भी सो नहीं सका। पिता के शब्द उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह गूंज रहे थे। उसकी मर्दानगी पर उठाया गया यह सवाल उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था।

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Jija Sali Love Story सुकून की तलाश और मेरठ का सफर

अगली सुबह प्रदीप ने फैसला किया कि वह कुछ दिन इस घुटन भरे माहौल से दूर रहेगा। उसने बैग उठाया और अपनी ससुराल, मेरठ के लिए निकल गया। मेरठ में शालिनी के माता-पिता और उसकी 25 साल की छोटी बहन नीरू रहती थी।

नीरू स्वभाव से चुलबुली, समझदार और जिंदगी को खुलकर जीने वाली लड़की थी। जब प्रदीप मेरठ पहुँचा, तो उसका उतरा हुआ चेहरा देखकर नीरू समझ गई कि जीजाजी किसी गहरी परेशानी में हैं।

शाम के वक्त, जब घर के बड़े बाहर गए थे, नीरू दो कप चाय लेकर छत पर आई, जहाँ प्रदीप गुमसुम बैठा आसमान को घूर रहा था।

क्या बात है जीजाजी? आज आपका यह स्मार्ट सा चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों है? दीदी से झगड़ा हुआ है या बॉस ने डांट लगाई है?” नीरू ने माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए मजाकिया लहजे में पूछा। Jija Sali Love Story

प्रदीप ने एक फीकी मुस्कान के साथ चाय का कप लिया। बॉस की डांट तो सह लूं नीरू, लेकिन अपनों के ताने अब सहे नहीं जाते।

नीरू ने गंभीरता से पूछा, क्या हुआ जीजाजी? आप मुझे बता सकते हैं।

प्रदीप का सब्र टूट गया। उसने आठ सालों का दर्द, घर की घुटन और पिता के उन चुभते हुए शब्दों को नीरू के सामने रख दिया। कहानी सुनाते-सुनाते प्रदीप की आँखों से आंसू छलक पड़े।

नीरू यह सब सुनकर सन्न रह गई। उसे प्रदीप की हालत पर तरस भी आया और गुस्सा भी कि कोई पिता अपने ही बेटे को इतने कड़वे शब्द कैसे कह सकता है। उसने प्रदीप के हाथ पर अपना हाथ रखा और हौसला देते हुए कहा, जीजाजी, आप खुद को मत कोसिए। इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। वक्त हमेशा एक सा नहीं रहता।

उस दिन नीरू के उस स्पर्श और हमदर्दी ने प्रदीप के बंजर मन में एक अजीब सी ठंडक का अहसास कराया।

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Jija Sali Love Story मजाक, हमदर्दी और एक नया अहसास

प्रदीप का मेरठ में रुकना लंबा हो गया। नीरू ने ठान लिया था कि वह अपने जीजाजी को इस डिप्रेशन से बाहर निकालकर ही दम लेगी। धीरे-धीरे दोनों के बीच की झिझक खत्म होने लगी और जीजा-साली वाला वो पुराना मजाकिया रिश्ता फिर से जिंदा हो गया।

एक दिन नीरू ने नई साड़ी पहनी थी। प्रदीप हॉल में बैठा टीवी देख रहा था। नीरू मटकते हुए आई और बोली, जीजाजी, जरा नजरें उठाकर देखिए, आपकी साली कितनी खूबसूरत लग रही है! अगर आप दीदी से शादी ना करते, तो पक्का मैं आप ही पर डोरे डालती।

प्रदीप मुस्कुराया, अरे नीरू, मैं तो वैसे भी देवदास बन चुका हूँ। तू क्यों मुझ जैसे बोरिंग इंसान पर डोरे डालती?”

नीरू प्रदीप के करीब सोफे पर बैठ गई। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। देवदास को तो पारो का प्यार मिल गया था जीजाजी। और आप बोरिंग नहीं हैं, बस दुनिया ने आपको समझना छोड़ दिया है।

नीरू की बातों में एक कशिश थी। प्रदीप ने उसकी आँखों में देखा। उन आँखों में सिर्फ हमदर्दी नहीं थी, कुछ और भी था। दोनों के बीच एक लंबा आई-कॉन्टैक्ट हुआ, जिसे नीरू ने अचानक नजरें झुकाकर तोड़ा। Jija Sali Love Story

यह मजाक धीरे-धीरे एक अनकहे आकर्षण में बदलने लगा। प्रदीप को नीरू में वो इंसान नजर आने लगा जो उसकी मर्दानगी पर सवाल नहीं उठाता था, बल्कि उसे एक संपूर्ण पुरुष मानता था। वहीं नीरू, प्रदीप के शांत और सुलझे हुए स्वभाव की तरफ खिंचती जा रही थी।

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Jija Sali Love Story चोरीछिपे मुलाकातें और इश्क की हदें

कुछ दिन बाद प्रदीप वापस सहारनपुर लौट आया, लेकिन उसका दिल मेरठ में ही छूट गया था। फोन पर जीजा-साली की लंबी बातें होने लगीं। कभी व्हाट्सएप पर चुटकुले, तो कभी रात-रात भर जिंदगी की बातें।

इस नए रिश्ते की सबसे बड़ी कड़ी तब जुड़ी जब नीरू कुछ दिनों के लिए अपनी दीदी शालिनी से मिलने सहारनपुर आई। शालिनी अपनी उलझनों और उदासी में इतना डूबी रहती थी कि उसे अपने घर में पनप रहे इस नए तूफान की भनक तक नहीं लगी।

एक दोपहर, जब शालिनी मंदिर गई हुई थी और प्रदीप के माता-पिता किसी रिश्तेदार के यहाँ गए थे, घर में सिर्फ प्रदीप और नीरू अकेले थे। प्रदीप अपने कमरे में लैपटॉप पर काम कर रहा था। तभी नीरू दो कप कॉफी लेकर आई। कमरे का दरवाजा खुला था, लेकिन नीरू ने अंदर आते ही पैर से दरवाजा आधा बंद कर दिया।

जीजाजी, कॉफी!”

प्रदीप ने लैपटॉप बंद किया और कॉफी लेते हुए नीरू के हाथों को छू लिया। नीरू पीछे नहीं हटी। प्रदीप ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, तुम जब यहाँ होती हो नीरू, तो मुझे लगता है कि इस घर में भी कोई रंग है। वरना यह जगह मेरे लिए किसी जेल से कम नहीं है।

नीरू धीरे से प्रदीप के करीब आई। तो मैं हमेशा के लिए यहीं जाऊं?”

प्रदीप की धड़कनें तेज हो गईं। उसने नीरू को अपनी बाहों में खींच लिया। उस दिन दोनों ने समाज, रिश्ते और मर्यादा की सारी दीवारें तोड़ दीं। प्रदीप के लिए यह सिर्फ एक शारीरिक जरूरत नहीं थी, बल्कि यह खुद को साबित करने और सुकून पाने की एक जिद्द थी। नीरू के लिए यह एक ऐसे इंसान के प्रति उसका प्यार था, जिसे वो टूटते हुए नहीं देख सकती थी।

इसके बाद तो यह सिलसिला चल पड़ा। नीरू जब भी चाहती, सहारनपुर आ जाती। शालिनी की गैरमौजूदगी में वह घर प्रदीप और नीरू के रोमांस का ठिकाना बन जाता। दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए थे, इस हद तक कि अब उनके लिए एक-दूसरे के बिना रहना मुश्किल हो गया था।

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Jija Sali Love Story बगावत और देहरादून की वादियां

करीब छह महीने इसी तरह बीत गए। लेकिन इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते। नीरू और प्रदीप को एहसास हो गया था कि अगर उनके रिश्ते का सच परिवार के सामने आया, तो एक बहुत बड़ा तूफान खड़ा हो जाएगा। वे दोनों एक साथ रहना चाहते थे।

एक रात प्रदीप और नीरू ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने समाज की परवाह किए बिना घर छोड़ने का मन बना लिया। एक तय योजना के तहत, प्रदीप ऑफिस जाने के बहाने निकला और नीरू मेरठ से। दोनों बस स्टैंड पर मिले और देहरादून की ओर निकल गए।

दोनों परिवारों में हड़कंप मच गया। शालिनी का रो-रोकर बुरा हाल था। प्रदीप के पिता को समझ नहीं आ रहा था कि जो बेटा घर में नजरें झुका कर रहता था, उसने इतनी बड़ी बगावत कैसे कर दी। पुलिस कंप्लेंट हुई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। Jija Sali Love Story

देहरादून में प्रदीप ने एक नई नौकरी ढूंढ ली। दोनों ने वहाँ एक छोटा सा घर किराए पर लिया और पति-पत्नी की तरह रहने लगे। देहरादून की वादियों में उनका प्यार और भी गहरा हो गया।

कुछ महीनों बाद नीरू ने प्रदीप को एक ऐसी खुशखबरी दी, जिसके लिए प्रदीप पिछले आठ सालों से तरस रहा था। नीरू गर्भवती थी।

करीब एक साल बाद, देहरादून के एक अस्पताल में नीरू ने एक बेहद खूबसूरत बेटे को जन्म दिया। जब प्रदीप ने पहली बार अपने बेटे को गोद में उठाया, तो वह फूट-फूट कर रो पड़ा। यह सिर्फ एक बच्चा नहीं था, यह उन तमाम तानों का जवाब था जो उसे सालों तक दिए गए थे। यह उसके पिता के उन चुभते हुए शब्दों का अंत था।

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Jija Sali Love Story पश्चाताप और एक अनोखा फैसला

इधर, सहारनपुर में करीब एक साल बाद किसी तरह प्रदीप के एक दोस्त के जरिए परिवार को पता चल गया कि प्रदीप और नीरू देहरादून में हैं।

जब प्रदीप के पिता को यह पता चला कि नीरू ने एक बेटे को जन्म दिया है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें अपनी उस रात की बात पर गहरा पश्चाताप हुआ, जब उन्होंने अपने ही बेटे को नामर्द कह दिया था। उन्हें एहसास हुआ कि उनकी कड़वी जुबान ने न सिर्फ उनके बेटे को घर छोड़ने पर मजबूर किया, बल्कि दो परिवारों को बिखेर कर रख दिया।

वे तुरंत अपनी बहू शालिनी को लेकर देहरादून पहुंचे। इधर मेरठ से शालिनी के माता-पिता भी अपनी बागी बेटी नीरू को ढूंढते हुए देहरादून आ गए।

देहरादून के उस छोटे से घर में जब सब आमने-सामने हुए, तो माहौल बेहद तनावपूर्ण था। लेकिन जैसे ही प्रदीप के पिता ने उस छोटे से बच्चे को देखा, उनका सारा गुस्सा पिघल गया। वे प्रदीप के सामने हाथ जोड़कर रोने लगे, मुझे माफ कर दे मेरे बच्चे। मैंने तुझे वो घाव दिए जो कोई दुश्मन भी नहीं देता। तू सही था, मैं गलत था।

प्रदीप ने अपने पिता को गले लगा लिया। लेकिन असली फैसला शालिनी को करना था। उसकी अपनी सगी बहन ने उसकी दुनिया उजाड़ दी थी।

शालिनी धीरे-धीरे नीरू के पास गई, जिसकी गोद में बच्चा था। शालिनी ने कांपते हाथों से उस बच्चे को अपनी गोद में लिया। बच्चे ने शालिनी की उंगली कसकर पकड़ ली। शालिनी की आँखों से आंसुओं की धार बह निकली।

शालिनी ने मुड़कर अपने माता-पिता और प्रदीप की तरफ देखा। उसने जो कहा, उसकी उम्मीद वहाँ मौजूद किसी इंसान को नहीं थी। Jija Sali Love Story

आठ साल तक मैंने इस घर में सिर्फ ताने सुने हैं। मुझे पता है कि एक बच्चे की कमी क्या होती है। मेरी बहन ने मेरे पति को वो खुशी दी है, जो मैं कभी नहीं दे सकी। मैं इस बच्चे को अनाथ नहीं होने दूंगी और ना ही अपनी बहन को घर से बाहर निकलने दूंगी।

शालिनी ने गहरी सांस ली और प्रदीप से कहा, मुझे कोई ऐतराज नहीं है प्रदीप। अगर तुम नीरू को इस घर में अपनी दूसरी पत्नी बनाकर रखना चाहते हो, तो मैं उसे अपनी छोटी बहन और इस घर की बहू के रूप में स्वीकार करने को तैयार हूँ। हम दोनों मिलकर इस बच्चे की परवरिश करेंगे।

वहाँ मौजूद हर शख्स शालिनी के इस त्याग और फैसले को देखकर हैरान था। दोनों परिवारों ने लंबी बातचीत के बाद इस अनोखे रिश्ते को अपनी रजामंदी दे दी।

वे सब एक साथ देहरादून से वापस सहारनपुर लौट आए।

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आज प्रदीप के घर में किसी तरह का कोई ताना नहीं गूंजता। घर के आंगन में उस छोटे से बच्चे की किलकारियां गूंजती हैं। शालिनी और नीरू दोनों एक छत के नीचे, एक ही इंसान की पत्नियां और एक ही बच्चे की मां बनकर रहती हैं।

जीजा साली की लव स्टोरीसमाज चाहे जो भी कहे, लेकिन उस घर ने अपने लिए खुशियों की एक नई परिभाषा गढ़ ली थी, जहाँ प्यार, पश्चाताप और समझदारी ने एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ दिया था। Jija Sali Love Story

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Xlaila Editor
महेश कांत (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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