Devar Bhabhi Story: हिमाचल प्रदेश का मंडी शहर की सर्दियाँ हमेशा से अलग होती हैं। ब्यास नदी के उफान को समेटे इस पहाड़ी शहर में दिसंबर की रातें इतनी ठंडी पड़ती थीं कि साँस भी हवा में भाप बनकर जम जाती।
पुरानी मंडी के ढलान पर बने दो मंजिला पारम्परिक मकान की पहली मंजिल वाली खिड़की से रीना कपूर बाहर देख रही थी। नीचे बाजार की पीली रोशनियाँ मद्धिम पड़ चुकी थीं और दूर पराशर की पहाड़ियों पर बर्फ की पतली चादर चाँदनी में चाँदी की तरह चमक रही थी।
रीना बत्तीस साल की थी। गोरा-गेहुँआ रंग, गहरी काली आँखें और लंबे रेशमी बाल, जिन्हें वह अक्सर ढीले जूड़े में बाँधकर रखती थी। उसकी आँखों में एक ऐसी उदासी तैरती थी जो अक्सर लंबे अकेलेपन से पैदा होती है। Devar Bhabhi Story
उसका पति राहुल ज्यादातर चंडीगढ़ या दिल्ली में ही रहता था। अपने ऑटोमोबाइल बिजनेस के सिलसिले में महीने में मुश्किल से दस-बारह दिन ही घर आ पाता था। विशाल से खाली घर में रीना के साथ सिर्फ उसका छोटा देवर आरव रहता था।
आरव छब्बीस का था- लंबा, चौड़े कंधे, उलझे हुए काले बाल और आँखों में एक अजीब सी खामोश बेचैनी। वह मंडी के स्थानीय कॉलेज से एमबीए कर रहा था। शाम को कॉलेज से लौटकर वह रीना के साथ ही रसोई के पास छोटी मेज पर बैठकर खाना खाता था।
शुरुआत में रीना उसे सिर्फ अपने छोटे भाई या देवर जैसा ही मानती थी। लेकिन पिछले तीन-चार महीनों से घर की हवा में एक अजीब सा खिंचाव आ गया था। आरव की नजरें अब सिर्फ संकोच भरी नहीं थीं। जब रीना किचन में चाय बनाती, तो वह दरवाजे की चौखट से टेक लगाकर उसे निहारता। Devar Bhabhi Story
जब वह नहाकर गीले बाल सुखाती, तो आरव की नजरें उसकी गर्दन और भीगी लटों पर ठहर जातीं। रीना मन ही मन इस अहसास को नकारती, लेकिन रात को जब वह अकेली ठंडे बिस्तर पर लेटी होती, तो आरव का वह टकटकी लगाकर देखना ही उसकी बंद आँखों के सामने घूम जाता। एक अनजानी सी सिहरन उसके शांत जीवन में हलचल मचा रही थी।
Devar Bhabhi Story : देवर भाभी का रोमांस, एआई द्वारा जनरेटेड इमेज।
Devar Bhabhi Story सन्नाटे की दस्तक और एक अनकहा सच
दिसंबर की एक शनिवार की शाम। बाहर हल्की-हल्की बर्फ के फाहे गिरने लगे थे। हवा इतनी सर्द थी कि खिड़कियाँ थरथरा रही थीं। तभी राहुल का फोन आया कि वह काम की वजह से सोमवार से पहले नहीं लौट पाएगा। फोन कटते ही घर का सन्नाटा और गहरा हो गया। रीना ने खुद को व्यस्त रखने के लिए सूप बनाया और आरव को आवाज दी।
दोनों बैठक में लगे हीटर के पास बैठे थे। कमरे में सिर्फ हीटर की धीमी गूंज और खिड़की के शीशों से टकराती बर्फ की सनसनाहट थी।
“भाभी, आज ठंड कुछ ज्यादा ही चुभ रही है,” आरव ने सूप का कप उठाते हुए कहा। उसकी आवाज में एक अजीब सी भारीपन थी।
रीना ने नजरें झुकाकर मुस्कुराने की कोशिश की, “तुम स्वेटर पहन लो न आरव। ऊपर अलमारी में तुम्हारा नया वाला कार्डिगन रखा है।”
आरव उठा और सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर चला गया। पाँच मिनट बाद वह वापस लौटा, लेकिन उसने स्वेटर नहीं पहना था। वह आकर रीना के ठीक पास सोफे पर बैठ गया। दूरी इतनी कम थी कि रीना उसकी गर्म साँसों और शरीर की गर्माहट को साफ महसूस कर सकती थी। Devar Bhabhi Story
“भाभी…” आरव ने बेहद धीमी, काँपती आवाज में पुकारा।
रीना का दिल एक पल को जोर से धड़का। उसने हाथों की उँगलियाँ भींच लीं, “क्या हुआ आरव?”
“मैं अब और नाटक नहीं कर सकता,” आरव ने रीना के चेहरे को देखते हुए कहा। “मैं जब भी आपको देखता हूँ… मुझे सिर्फ भाभी नहीं दिखतीं। एक बेहद खूबसूरत, अकेली औरत दिखती है… जिसकी मुझे जरूरत महसूस होती है।”
रीना का चेहरा मारे झिझक और घबराहट के लाल हो गया। वह तुरंत खड़े होने लगी, लेकिन आरव ने लपककर उसकी कलाई थाम ली। उसका स्पर्श बर्फ जैसी रात में दहकते अंगारे जैसा गर्म था।
“छोड़ो आरव… यह गलत है, पाप है,” रीना ने फुसफुसाते हुए कहा, पर उसकी आवाज में सख्ती से ज्यादा एक बेबसी थी।
“गलत तो यह भी है कि आप हर रात इस विशाल घर में अकेली सोती हैं,” आरव ने उसकी कलाई को थोड़ा और कसते हुए कहा, “और मैं दीवार के उस पार लेटकर आपकी एक-एक करवट और साँस को गिनता हूँ।”
दोनों की नजरें मिलीं। रीना की साँसें तेज हो गईं। उसने धीरे से अपना हाथ छुड़ाया और अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया। उस रात वह सो नहीं सकी। दिल में एक ओर डर था, तो दूसरी ओर इतने सालों बाद किसी मर्द की नजरों में अपने लिए यह तीव्र लालसा देखकर एक अजीब सा सुकून भी था।
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Devar Bhabhi Story मोमबत्ती की रोशनी और पहला मिलन
अगले तीन दिन बेहद भारी और धीमे बीते। घर में हर छोटी बात में एक खिंचाव था। जब भी दोनों की नजरें मिलतीं, रीना अपनी पलकें झुका लेती और आरव की आँखों में एक गहरी उम्मीद चमकने लगती।
चौथी रात बर्फबारी तेज हो गई। तेज हवाओं के कारण पूरे मंडी शहर की बिजली गुल हो गई। घर में चारों तरफ सिर्फ मोमबत्तियों की मद्धिम, पीली रोशनी तैर रही थी। रीना अपने कंधे पर भारी ऊनी शॉल लपेटे बैठक में बैठी मोमबत्ती की लौ को ताक रही थी। तभी आरव दबे पाँव आया और सोफे के नीचे फर्श पर, रीना के घुटनों के पास बैठ गया।
कुछ देर सिर्फ मोमबत्ती के मोम के टपकने की आवाज आती रही। फिर आरव ने धीरे से अपना हाथ रीना के शॉल के ऊपर से उसके घुटने पर रखा। Devar Bhabhi Story
“भाभी, अगर आप कहेंगी तो मैं अभी इसी वक्त उठकर बाहर बर्फ में चला जाऊँगा,” उसने रीना की आँखों में झाँकते हुए कहा, “लेकिन अगर आप भी वही तड़प महसूस करती हैं जो मैं कर रहा हूँ…”
रीना ने कोई जवाब नहीं दिया। उसके पास शब्द खत्म हो चुके थे। उसने बस अपनी आँखें बंद कर लीं और अपना कँपकँपाता हाथ आरव की हथेलियों के बीच छोड़ दिया।
आरव की हिम्मत बढ़ गई। वह थोड़ा और ऊपर उठा। उसके हाथों ने रीना के गालों को थाम लिया। उसकी उँगलियों का स्पर्श रीना की ठंडी त्वचा में सिहरन दौड़ा गया। आरव ने धीरे-धीरे अपना चेहरा आगे बढ़ाया और रीना के माथे पर अपने गर्म होंठ रख दिए। वह स्पर्श इतना कोमल और गहरा था कि रीना की आँखों के कोने से एक आँसू छलक कर आरव की उँगली पर गिर पड़ा।
“डर लगता है आरव…” रीना ने काँपते होंठों से फुसफुसाया।
“मैं हूँ न…” आरव ने कहा और रीना को अपनी बाँहों में समेट लिया।
मोमबत्ती की मद्धिम रोशनी में आरव ने रीना के चेहरे पर बिखरी लटों को पीछे किया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ टिका दिए। रीना ने एक हल्की सी सिस्की ली और आरव के चौड़े कंधों को कसकर थाम लिया।
उस ठंडी रात में दोनों की साँसें एक-दूसरे में उलझ रही थीं। आरव की उँगलियाँ रीना की कमर पर धीरे-धीरे सरक रही थीं, और रीना सालों बाद खुद को किसी के आघोश में इतना सुरक्षित और चाही हुई महसूस कर रही थी।
वे पूरी रात सोफे से लगकर बैठे रहे। आरव ने रीना का सिर अपने सीने पर टिका रखा था, और उसकी उँगलियाँ रीना के लंबे बालों में उलझी हुई थीं। बिना किसी सीमा को पार किए भी, वह रात उनके लिए जिस्मानी से ज्यादा रूहानी तौर पर एक हो जाने की रात थी।
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Devar Bhabhi Story सर्द रातों में गर्माहट का अहसास
सुबह जब रीना की आँख खुली, तो आरव सोफे पर ही उसके पैरों के पास सोया हुआ था। खिड़की से बाहर देखा तो पूरा मंडी शहर सफेद बर्फ की चादर से ढका था, और ब्यास नदी का नीला पानी ठंडी भाप उड़ा रहा था।
अगले कुछ हफ्ते जैसे किसी सुनहरे ख्वाब की तरह बीते। दिन में वे बेहद सामान्य रहते—आरव कॉलेज चला जाता, रीना घर के काम करती। लेकिन शाम होते ही घर में एक अनदेखा रोमांस घुल जाता।
कभी किचन में चाय बनाते हुए आरव पीछे से आकर रीना की कमर में हाथ डाल देता और उसकी गर्दन में अपना चेहरा छुपा लेता। रीना झिझकती, पर फिर आरव के बालों में उँगलियाँ फिराते हुए खुद को सौंप देती। कभी छत पर बर्फ गिरते देखते हुए रीना खुद अपना सिर आरव के कंधे पर टिका देती और आरव उसका हाथ अपने कोट की जेब में रखकर गर्माहट देता।
हर रात मोमबत्ती की रोशनी में दोनों पास बैठते, पुरानी बातें करते, एक-दूसरे की अधूरी ख्वाहिशों को सुनते। वे दोनों जानते थे कि यह गलत है, लेकिन उस तन्हाई में वह गलत अहसास ही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई बन चुका था।
Devar Bhabhi Story अचानक वापसी और हकीकत का सामना
लेकिन ख्वाब आखिरकार टूटते ही हैं। जनवरी के अंत में एक शाम राहुल बिना बताए अचानक वापस आ गया। उसके आने से घर की फिज़ा अचानक भारी हो गई। यद्यपि राहुल को कुछ पता नहीं था, लेकिन आरव और रीना के बीच की खामोशी, एक-दूसरे से नजरें चुराना और घर में फैला तनाव राहुल की अनुभवी आँखों से पूरी तरह छिपा न रह सका।
रात के खाने के वक्त टेबल पर सन्नाटा छाया रहा। राहुल बार-बार रीना और आरव को देख रहा था।
रात को जब राहुल थका-हारा सो गया, तो आरव दबे पाँव बैठक में आया। रीना वहाँ खिड़की के पास खड़ी बाहर गिरती बर्फ को देख रही थी। उसकी आँखें लाल थीं।
आरव ने पीछे से आकर उसके काँपते हाथों को थाम लिया, “मैं तुम्हें छीन नहीं सकता भाभी… न तो मैं अपने भाई को धोखा दे सकता हूँ, और न ही तुम्हें इस समाज की नजरों में नीचा देखना पड़े, यह सह सकता हूँ।”
रीना ने मुड़कर आरव के सीने पर अपना सिर रख दिया, उसके आँसू आरव की टी-शर्ट को भिगोने लगे, “तो क्या यह सब यहीं खत्म हो गया आरव? क्या हम सिर्फ इस डर के साये में जिएँगे?”
“यह खत्म नहीं होगा रीना… यह हमेशा मेरे दिल में रहेगा,” आरव ने पहली बार उसका नाम लिया और उसके माथे को गहराई से चूमा, “लेकिन मेरा इस घर में रहना अब हम तीनों की जिंदगी तबाह कर देगा।” Devar Bhabhi Story
अगली सुबह आरव ने अपना सामान समेटा और कॉलेज के हॉस्टल में शिफ्ट हो गया। रीना ने चुपचाप उसकी अलमारी खाली की, उसके कपड़े फोल्ड किए और हॉस्टल भिजवा दिए। दोनों में से किसी ने एक शब्द नहीं कहा।
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Devar Bhabhi Story वसंत का आगमन और आखिरी मुलाकात
दो महीने बीत गए। मंडी में वसंत की दस्तक हो चुकी थी। पहाड़ों पर बर्फ पिघल रही थी और देवदार तथा चिनार के पेड़ों पर नए हरे पत्ते उग आए थे। मौसम बदल चुका था, लेकिन रीना के अंदर का सन्नाटा जस का तस था।
एक शाम रीना ब्यास नदी के घाट पर अकेली टहल रही थी। ठंडी हवा उसके बालों को उड़ा रही थी और नदी का कलकल बहता पानी उसकी उदासी को बयाँ कर रहा था। तभी सामने से आरव आता दिखाई दिया। दो महीने बाद दोनों एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े थे। आरव थोड़ा दुबला लग रहा था और रीना का चेहरा भी उतर चुका था। Devar Bhabhi Story
“मैं दिल्ली जा रहा हूँ… एक मल्टीनेशनल कंपनी में मेरी जॉब लग गई है,” आरव ने रुकते हुए कहा। उसकी आवाज में ठहराव था।
रीना की आँखें छलक आईं, उसने भारी दिल से बस इतना कहा, “बधाई हो आरव। तुम इसी के लायक हो।”
वे दोनों नदी किनारे पत्थरों पर बैठ गए। सूरज धीरे-धीरे पहाड़ों के पीछे ढल रहा था। आरव ने आखिरी बार रीना की उँगलियों में अपनी उँगलियाँ उलझाईं।
“तुम हमेशा मेरी पहली और सबसे खूबसूरत याद रहोगी रीना,” आरव ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा।
रीना ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया ताकि उसके गिरते आँसू आरव को न दिखें, “जाओ आरव… और अब कभी लौटकर मत आना। अपनी नई जिंदगी शुरू करो और मुझे मेरी किस्मत के हवाले छोड़ दो।”
आरव ने उसके हाथों को चूमा, फिर खड़ा हुआ। उसने एक आखिरी बार रीना के भीगे चेहरे को देखा और मुड़कर तेज कदमों से चला गया। रीना वहीं बैठी रही, हवा में ब्यास नदी की नमी थी और दूर किसी मंदिर की घंटी बज रही थी। Devar Bhabhi Story
Devar Bhabhi Story अधूरी प्यास और एक अमर याद
रात को जब रीना ने घर लौटकर राहुल को खाना परोसा, तो राहुल ने उसके शांत और उदास चेहरे को देखकर पूछा, “क्या बात है रीना? आज तुम्हारा चेहरा बहुत थका-थका और पीला लग रहा है? तबीयत तो ठीक है?”
रीना ने एक हल्की, फीकी मुस्कान के साथ जवाब दिया, “कुछ नहीं… बस नदी किनारे टहलते हुए शाम की ठंडी हवा लग गई थी।”
उस रात रीना अपने कमरे में अकेली बिस्तर पर लेटी रही। खिड़की से मंडी शहर की पीली बत्तियाँ टिमटिमा रही थीं। पहाड़ों पर जमी बर्फ अब पिघलकर नदी में बह चुकी थी, लेकिन रीना के दिल के किसी कोने में जमी वह रात की बर्फ और अधूरी प्यास… हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो चुकी थी।
वह एक ऐसी प्रेम कहानी थी जो कभी मुकम्मल न हो सकी, लेकिन मंडी शहर की सर्द हवाओं और ब्यास नदी के पानी में हमेशा के लिए घुल गई थी। Devar Bhabhi Story
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महेश कांत (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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