Chandauli Love Story: यह अजब गजब प्रेम कहानी है, उत्तर प्रदेश के चंदौली की। जहां पर एक पति ने अपनी पत्नी का विवाह उसके प्रेमी से कराया। इस रियल लव स्टोरी में कई उतार चढ़ाव आए। आइए विस्तार से जानते हैं पूरी सच्ची प्रेम कहानी ….
प्रेम के न जाने कितने रंग होते हैं। कभी यह दो अजनबियों को जीवन भर के लिए एक अटूट बंधन में बाँध देता है, तो कभी बरसों पुरानी बसी-बसाई गृहस्थी को पल भर में तिनके की तरह बिखेर देता है। Chandauli Love Story
साहित्य, सिनेमा और कहानियों में अक्सर हमने प्रेम की बेहद खूबसूरत, आदर्श और परियों जैसी कहानियाँ पढ़ी व देखी हैं- जहाँ दो दिल मिलते हैं, ज़माने से लड़ते हैं और अंत में खुशी-खुशी साथ रहने लगते हैं।
लेकिन असल ज़िंदगी हमेशा किसी फिल्मी पटकथा की तरह हसीन नहीं होती। कभी-कभी प्यार के नाम पर पनपने वाले रिश्ते कड़वाहट, मजबूरी, अकेलेपन और सामाजिक मान्यताओं की ऐसी उलझन बनकर सामने आते हैं कि देखने और सुनने वाले हैरान रह जाते हैं।
आज हम आपको उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित चंदौली जिले की एक ऐसी ही सच्ची घटना पर आधारित कहानी सुनाने जा रहे हैं। यह दास्तान है 47 वर्ष की एक महिला, 20 वर्ष के एक नौजवान और एक लाचार-सहमे हुए पति की… जो एक ऐसे चौराहे पर आकर खड़े हो गए जहाँ से किसी की भी ज़िंदगी पहले जैसी नहीं रही।
Chandauli Love Story डैना गाँव, 25 साल पुराना बंधन और दिल्ली का संघर्ष
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र। यहीं स्थित है एक शांत और साधारण सा गाँव—’डैना’। गाँव की पक्की-कच्ची गलियों में जीवन अपनी पुरानी रफ्तार से चल रहा था। आज से लगभग 25 साल पहले, इसी डैना गाँव के जीवनाथ राजभर का विवाह पास के ही महेसुआ (नई बाज़ार) गाँव की सरिता राजभर के साथ हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था।
शुरुआती दिनों में सब कुछ वैसा ही था जैसा हर आम देहाती परिवार में होता है। नए-नए सपने, थोड़ा हँसी-मज़ाक, आने वाले कल की चिंताएँ और जीवन में साथ चलने का अटूट वादा। वक्त बीतता गया और दोनों के दांपत्य जीवन में तीन किलकारियाँ गूँजीं:
बड़ा बेटा: अब 17 साल का (सकलडीहा इंटर कॉलेज में 9वीं कक्षा का छात्र)
मझली बेटी: 14 साल की (गांव के ही स्कूल में पढ़ने वाली)
छोटा बेटा: महज 7 साल का मासूम बच्चा
जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगे, घर की ज़रूरतें और पढ़ाई-लिखाई का खर्च भी बढ़ने लगा। गाँव में छोटी-मोटी मजूदरी या खेती से तीन बच्चों की परवरिश और पूरे घर का खर्च चलाना नामुमकिन सा होने लगा। ऐसे में परिवार के बेहतर भविष्य और बच्चों के अच्छे कल के लिए जीवनाथ ने एक बड़ा और कठोर फैसला लिया- ‘परदेश’ जाने का।
जीवनाथ देश की राजधानी दिल्ली चले गए। वहाँ उन्होंने एक वेल्डिंग की वर्कशॉप में हाड़-तोड़ मेहनत करना शुरू किया। सुबह से देर रात तक लोहे के स्पार्क और धुएँ के बीच काम करना, ताकि महीने के अंत में कुछ पैसे बचाकर गाँव भेजे जा सकें।
लेकिन मीलों की यह भौगोलिक दूरी धीरे-धीरे रिश्तों में एक अनजानी खामोशी और दरार बनकर सामने आने लगी। सरिता गाँव में अकेली तीन-तीन बच्चों को संभालती, चूल्हा-चौका करती और रोज़मर्रा की दिक्कतों से जूझती।
उधर जीवनाथ दूर शहर में अपनों की याद में रातें गुज़ारते। वक्त के साथ दोनों के बीच संवाद कम होता गया। जब भी फोन पर बात होती, तो प्यार-मोहब्बत की जगह घर के खर्चे, तंगी और शिकायतों का दौर ही हावी रहने लगा।
“दूरी जब सिर्फ किलोमीटर की हो तो उसे ट्रेन के सफर से मिटाया जा सकता है, पर जब दूरी दिलों के बीच आने लगे… तो एक ही छत के नीचे रहने वाले भी अजनबी हो जाते हैं।”
Chandauli Love Story : रियल लव स्टोरी : अजय गुप्ता।
Chandauli Love Story लोहे की पटरियों पर गूँजती आवाज़ और 20 साल का अजय
गाँव-देहात में छोटी-मोटी चीज़ों की खरीदारी, रिश्तेदारी में जाने या तहसील-बाज़ार के कामों के लिए आज भी लोकल पैसेंजर ट्रेनें ही सबसे सुलभ सहारा होती हैं। सरिता को भी अक्सर घरेलू कामों के सिलसिले में सकलडीहा से आसपास के स्टेशनों तक जाना पड़ता था।
इसी बीच कहानी में प्रवेश होता है गाज़ीपुर जिले के गहमर गाँव के रहने वाले अजय गुप्ता का। अजय की उम्र महज़ 20 साल थी। गहमर का यह नवयुवक ट्रेनों में घूम-घूमकर मूंगफली बेचा करता था। कंधे पर मूंगफली की बोरी, हाथ में तराज़ू और चेहरे पर एक अजीब सी बेफ़िक्री। सुबह की पहली पैसेंजर ट्रेन से लेकर देर रात तक पटरियों पर दौड़ना ही उसकी दिनचर्या थी।
तकरीबन एक साल पहले की बात है। सकलडीहा रेलवे स्टेशन पर दोपहर के वक्त पैसेंजर ट्रेन आकर रुकी। भीषण गर्मी का मौसम था, डिब्बे में यात्रियों की भारी भीड़ थी और पंखे नाममात्र की हवा फेंक रहे थे। सरिता डिब्बे की एक खिड़की वाली सीट पर बैठी पसीना पोंछ रही थीं। तभी मूंगफली बेचता हुआ अजय उस डिब्बे में दाखिल हुआ।
लोकल पैसेंजर ट्रेन (दोपहर का वक्त)
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अजय (आवाज़ लगाते हुए) : "गरमा-गरम भुनी मूंगफली... ले लो भाई!"
(अजय की नज़र सरिता पर पड़ती है जो परेशान दिख रही थीं)
अजय : "चाची... मूंगफली लोगी क्या? एकदम ताज़ा है।"
सरिता (गहरी सांस लेते हुए): "चाची मत कहो भाई... घर-परिवार की
चिंताओं ने इंसान को वक्त से पहले ढाल दिया है।
दे दो थोड़ी सी..."
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वह पहली मुलाकात बेहद साधारण थी। लेकिन उस दिन के बाद, सरिता जब भी उस रूट पर सफर करतीं, इत्तेफाक से या फिर जान-बूझकर, अजय से उनकी मुलाकात हो जाती।
अजय के लिए सरिता एक ऐसी परिपक्व महिला थीं जो उसकी बातें सुनती थीं, उसे तवज्जो (Attention) देती थीं। वहीं सरिता के लिए, जो बरसों से अपने जीवन में अकेलेपन, तंगी और पति की बेरुखी की शिकायत से जूझ रही थीं, अजय एक ऐसा इंसान बनकर आया जो उनकी परवाह करता था। उसकी मीठी बातें सरिता के उदास मन को सुकून देने लगीं।
उम्र में 27 साल का विशाल फ़ासला था। एक तरफ 47 साल की तीन बच्चों की माँ, और दूसरी तरफ 20 साल का नौजवान। लेकिन जैसा कि कहा जाता है- ‘अकेलापन कभी उम्र का लिहाज़ नहीं करता।’ धीरे-धीरे दोनों के बीच फोन नंबरों का आदान-प्रदान हुआ। देर रात तक छुप-छुपकर बातें होने लगीं और देखते ही देखते यह जान-पहचान एक गहरे और बेकाबू प्रेम संबंध में बदल गई।
Chandauli Love Story : रियल लव स्टोरी: शादी के बाद अजय और सरिता।
Chandauli Love Story अप्रैल की वो खामोश रात: जब बिखरा घर-आँगन
साल 2026 के अप्रैल का महीना था। दिल्ली की चुभती और झुलसाने वाली गर्मी से कुछ दिनों की राहत लेने और परिवार से मिलने के लिए जीवनाथ अपने गाँव डैना लौटे। कुछ दिन गाँव में बिताने के बाद, घर में खाने-पीने का राशन और बच्चों की फीस का इंतज़ाम करके वे वापस दिल्ली अपनी वेल्डिंग की दुकान पर चले गए।
लेकिन जीवनाथ को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उनके गाँव से निकलते ही उनके घर की नींव हमेशा के लिए हिलने वाली है।
दिल्ली पहुँचे अभी महज़ चार दिन ही हुए थे कि एक शाम जीवनाथ के मोबाइल की घंटी बजी। गाँव से रिश्तेदार का फोन था। दूसरी तरफ से जो खबर मिली, उसने जीवनाथ के पैरों तले ज़मीन खिसका दी:
“जीवनाथ! सरिता घर पर नहीं है। वह बिना किसी को कुछ बताए कहीं गायब हो गई है।”
जीवनाथ के हाथ से फोन छूटते-छूटते बचा। वे बदहवास हालत में तुरंत दिल्ली स्टेशन पहुँचे और पहली ट्रेन पकड़कर गाँव डैना आ गए। घर पहुँचे तो देखा कि रसोई ठंडी पड़ी थी, 7 साल का सबसे छोटा बेटा रो-रोकर बदहवास हो चुका था और 17 साल का बड़ा बेटा असहाय नज़र आ रहा था।
जीवनाथ तुरंत सकलडीहा कोतवाली पहुँचे और पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
लेकिन कहानी ने तब और भयानक मोड़ ले लिया जब सरिता के मायके वालों ने उल्टा जीवनाथ पर ही संगीन आरोप मढ़ दिए।
मायके वालों का सनसनीखेज़ आरोप:“जीवनाथ ने ही संपत्ति या किसी विवाद के चक्कर में सरिता की हत्या कर दी है और उसकी लाश को कहीं गायब कर दिया है!”
पुलिस का दबाव जीवनाथ पर बढ़ने लगा। निर्दोष जीवनाथ थाने के चक्कर काटने लगे। लेकिन जब पुलिस ने सरिता के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली, तो सच शीशे की तरह साफ़ हो गया। सरिता किसी हादसे का शिकार नहीं हुई थी, बल्कि वह अपने 20 साल के प्रेमी अजय के साथ स्वेच्छा से घर छोड़ भाग चुकी थी।
Chandauli Love Story सकलडीहा स्टेशन पर ड्रामा: गिड़गिड़ाता पति और अड़ी हुई पत्नी
चार महीने का लंबा वक्त बीत गया। जीवनाथ की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ चुका था। 17 साल का बड़ा बेटा, जो सकलडीहा इंटर कॉलेज में 9वीं का छात्र था, अपनी पढ़ाई छोड़कर अपने छोटे भाई-बहन की माँ और बाप दोनों बनने की कोशिश कर रहा था। गाँव में तरह-तरह के ताने और बातें हो रही थीं।
तभी अगस्त के महीने में एक मंगलवार की दोपहर, जीवनाथ को किसी परिचित से गुप्त सूचना मिली:
“सरिता और अजय पैसेंजर ट्रेन से सकलडीहा रेलवे स्टेशन पहुँच रहे हैं!”
जीवनाथ का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। वे दोपहर करीब 2 बजे ही सकलडीहा स्टेशन पर जा पहुँचे और प्लेटफॉर्म पर खड़े होकर आने वाली हर ट्रेन की ओर टकटकी लगाए देखने लगे।
जैसे ही ट्रेन आई और रुकी, यात्रियों की भीड़ में से सरिता और अजय एक साथ नीचे उतरे। जीवनाथ ने दौड़कर सरिता का हाथ थाम लिया।
सकलडीहा रेलवे स्टेशन (दोपहर 2:00 बजे)
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जीवनाथ (हाथ जोड़कर, आँखों में आँसू) :
"सरिता! हाथ जोड़ता हूँ, घर लौट चलो। बच्चे बिलख रहे हैं।
गाँव में थू-थू हो रही है। जो हुआ सो हुआ, हम सब भूल जाएँगे।
मेरे और बच्चों के खातिर घर चलो!"
सरिता (झटके से हाथ छुड़ाते हुए) :
"नहीं! अब बहुत देर हो चुकी है। मैं अब तुम्हारे साथ वापस नहीं जाऊँगी।
मेरा रास्ता अब अजय के साथ है, और मैं इसी के साथ रहूँगी।"
अजय (जीवनाथ के सामने आकर) :
"आप इन्हें ज़बरदस्ती नहीं ले जा सकते। यह अपनी मर्जी से मेरे साथ आई हैं।"
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर चीख-पुकार और हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। जीवनाथ फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने अपनी 25 साल पुरानी शादी की दुहाई दी, तीन मासूम बच्चों का वास्ता दिया, समाज की मन्नतें माँगीं।
लेकिन सरिता का फैसला पत्थर की लकीर बन चुका था। उसके दिल में अपने से 27 साल छोटे प्रेमी अजय के प्रति दीवानगी और पुराने जीवन से आज़ाद होने की ज़िद इतनी पक्की थी कि पति के बहते आँसू भी उसे डिगा न सके।
गाँव-देहात के स्टेशन पर लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया। मामला बढ़ता देख स्थानीय लोगों और यात्रियों ने हस्तक्षेप किया और किसी तरह बीच-बचाव करके मामला शांत कराया।
Chandauli Love Story : रियल लव स्टोरी : रजिस्ट्रार कार्यालय में शादी के दौरान का फोटो।
Chandauli Love Story खौफ का साया, कड़वा फैसला और कोर्ट मैरिज का ऐतिहासिक मंज़र
स्टेशन पर हुए इस हंगामे के बाद जीवनाथ का दिल तो पूरी तरह टूट ही चुका था, लेकिन उनके दिमाग में एक गहरा और भयानक खौफ भी घर कर गया।
दरअसल, पिछले कुछ समय से देश और प्रदेश में पत्नियों द्वारा अपने प्रेमियों के साथ मिलकर पतियों की हत्या करवाने की कई जघन्य घटनाएँ (जैसे मेरठ, ग्रेटर नोएडा या अन्य जगह) मीडिया की सुर्खियों में थीं। जीवनाथ के मन में वही खौफ बैठ गया। ऊपर से सरिता पहले भी पारिवारिक विवादों में जीवनाथ पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें 7-8 बार पुलिस-कचहरी और जेल के चक्कर कटवा चुकी थी।
जीवनाथ ने मन ही मन सोचा:
“अगर मैं इसे समाज या कानून के डर से ज़बरदस्ती घर ले भी जाऊँ, तो इस बात की क्या गारंटी है कि यह कल को रात में सोते समय मेरी हत्या न करवा दे? यह औरत कुछ भी कर सकती है… अपनी जान बचाने में ही भलाई है।”
टूटे दिल, बिखरे स्वाभिमान और जान के डर के बीच जीवनाथ ने एक ऐसा फैसला लिया जिसकी कल्पना शायद दुनिया के किसी पति ने नहीं की होगी।
जीवनाथ दोनों को लेकर सीधे सकलडीहा तहसील स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय (रजिस्ट्री दफ़्तर) पहुँचे।
रजिस्ट्रार ऑफिस का वो मंज़र किसी भी देखने वाले का कलेजा काँपने के लिए काफ़ी था। वकील कागज़ात तैयार कर रहे थे, स्टांप पेपर पर दस्तखत हो रहे थे। जीवनाथ खुद गवाह बनकर एक कोने में चुपचाप खड़े थे।
कार्रवाई पूरी होने के बाद, सब लोगों के सामने:
47 साल की सरिता ने अपने से 27 साल छोटे प्रेमी अजय को जयमाला पहनाई। 20 साल के अजय ने सरिता की मांग में चुटकी भर सिंदूर भरा।
25 साल पहले जिस औरत की मांग में जीवनाथ ने पूरे रस्म-रिवाज़ के साथ सिंदूर भरा था, आज उसी औरत को अपनी ही आँखों के सामने किसी और का होते देखना… जीवनाथ के लिए यह पल किसी ज़िंदा मौत जैसा था।
Chandauli Love Story “बच्चे पति के हैं, वही संभाले!” – ममता की हार?
शादी के कागज़ात पर दस्तखत होने और जयमाला के बाद जब वकीलों और उपस्थित लोगों ने तीन मासूम बच्चों की परवरिश का सवाल उठाया, तो सरिता के दो टूक जवाब ने वहाँ खड़े हर इंसान को सन्न कर दिया।
सरिता का बेबाक बयान:
“बच्चे मेरे नहीं, पति के हैं। वही दिल्ली में मजदूरी करे या गाँव में रहे, बच्चों का पालन-पोषण वही करेगा। मैं अपनी नई ज़िंदगी में बच्चों को अपने साथ रखकर बोझ नहीं बढ़ा सकती।”
17 साल का बड़ा बेटा, जो अपनी माँ के इस कृत्य का गवाह बन चुका था, अपनी आँखों में गुस्सा, नफरत और दर्द लिए एक तरफ खड़ा था। 14 साल की बेटी और 7 साल का मासूम बच्चा यह समझ ही नहीं पा रहे थे कि जिस माँ की गोद में वे सोते थे, वही माँ आज उन्हें हमेशा के लिए बेगाना करके किसी अनजान लड़के के साथ जा रही है।
Chandauli Love Story : रियल लव स्टोरी : जीवनाथ ने कहा- मुझे डर था कि पत्नी कहीं मेरी भी हत्या न करवा दे। इसलिए मैंने उसकी शादी उसके प्रेमी से करा दी।
Chandauli Love Story सिक्के का दूसरा पहलू: जुर्म, मजबूरी या अधिकार?
इस पूरी घटना के उजागर होने के बाद जहाँ पूरा गाँव, समाज और सोशल मीडिया सरिता को कोस रहा था, वहीं सरिता ने मीडिया के कैमरों के सामने अपना पक्ष रखते हुए एक अलग ही कहानी बयां की:
सरिता का पक्ष (आरोप):
“जीवनाथ मेरे साथ मारपीट करता था। दिल्ली में रहता था तो घर पर कभी समय से पैसे नहीं भेजता था। तीन-तीन बच्चों को पालना, उनका पेट भरना और अकेले घर संभालना मेरे लिए नर्क बन गया था। अजय ने मेरी तकलीफों को समझा, मुझे सहारा दिया और सम्मान दिया। इसलिए मैंने उसके साथ रहने का फैसला किया।”
जीवनाथ का पक्ष (दर्द):
“मैंने अपनी पूरी जवानी दिल्ली के धुएँ और लोहे के बीच घिस दी ताकि परिवार भूखा न सोए। मैं आज भी सब कुछ भूलकर उसे अपनाने को तैयार था, पर वह नहीं मानी। मुझे डर था कि कहीं वह मेरी हत्या न करवा दे। उसकी इस करतूत ने मेरी हँसती-खेलती गृहस्थी उजाड़ दी। अब मुझे और मेरे तीन मासूम बच्चों को ज़िंदगी भर समाज के ताने सहने पड़ेंगे।”
Chandauli Love Story: प्रेम की त्रासदी या सामाजिक ताने-बाने का बिखराव?
उत्तर प्रदेश के चंदौली से आई यह घटना महज एक ‘अजीबोगरीब लव स्टोरी’ नहीं है। यह हमारे आधुनिक समाज के उस कड़वे और भयावह सच को उजागर करती है जहाँ:
अकेलेपन और तंगी की कटरता इंसान को मर्यादाओं की सीमा लांघने पर मजबूर कर देती है।
सोशल मीडिया और मोबाइल के इस दौर में उम्र, दायित्व और नैतिक सीमाओं के मायने बदल रहे हैं। और सबसे दुखद पहलू यह है कि बड़ों की इस स्वार्थी उलझन और भटकन में सबसे बड़ा नुकसान हमेशा उन निर्दोष और मासूम बच्चों का होता है, जो बिना किसी गलती के ताउम्र माँ के प्यार से वंचित रह जाते हैं और समाज के ताने सहने को मजबूर होते हैं।
आज 20 साल का अजय और 47 साल की सरिता कोर्ट मैरिज के कागज़ात लेकर एक नई दुनिया बसाने निकल चुके हैं, जबकि जीवनाथ अपने तीन बच्चों के साथ उस टूटे हुए मकान में आंसुओं के साथ उनके सुनहरे भविष्य को जोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
आपकी राय क्या है?
क्या सरिता द्वारा अपने पति और तीन मासूम बच्चों को छोड़कर 27 साल छोटे प्रेमी से शादी करना सही था? या फिर जीवनाथ द्वारा जान के डर से खुद पत्नी की शादी कराना एक सही फैसला था? Chandauli Love Story
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महेश कांत (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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