devar bhabhi love story: हवेलीनुमा घर के आँगन में जब पहली बार नेहा ने कदम रखा था, तो उसके हाथों की मेहंदी का रंग बेहद गहरा था। बड़े–बुजुर्ग कहते हैं कि मेहंदी का रंग जितना गहरा हो, पति का प्यार उतना ही गहरा मिलता है। लेकिन नियति ने नेहा के लिए कुछ और ही लिखा था।
नेहा की शादी कबीर से हुई थी—एक सफल, महत्वाकांक्षी और अपने ही काम में खोया रहने वाला इंसान। शादी के शुरुआती कुछ हफ़्तों में ही नेहा को यह समझ आ गया था कि कबीर के जीवन में उसके लिए कोई भावनात्मक जगह नहीं थी। कबीर का दिल किसी और अतीत में अटका था, जिसे वह कभी भुला नहीं पाया था। नेहा एक सजे–धजे कमरे में हर रात अकेले बैठकर अपनी किस्मत के पन्नों को पलटा करती। devar bhabhi love story
उसी घर में एक और शख्स था—रोहन। कबीर का छोटा भाई। रोहन स्वभाव से चुलबुला, हंसमुख और बेहद संवेदनशील था। घर में जहाँ कबीर की गूँजती भारी आवाज़ और गंभीरता का माहौल रहता, वहीं रोहन की मौजूदगी से घर में थोड़ी सी गर्माहट महसूस होती थी। devar bhabhi love story
शुरुआत में नेहा और रोहन का रिश्ता सिर्फ एक देवर और भाभी का था—हँसी–मज़ाक, चाय का कप बढ़ा देना और एक–दूसरे के हाल–चाल पूछ लेना। लेकिन जब घर का बड़ा बेटा अपनी ही पत्नी से मुँह मोड़ ले, तो घर के सन्नाटे बाकी सदस्यों को साफ सुनाई देने लगते हैं। रोहन ने बहुत जल्दी ताड़ लिया था कि उसकी ‘भाभी‘ की मुस्कान के पीछे एक गहरा दर्द छिपा है।

devar bhabhi love story: सन्नाटों के बीच एक सहारा
बरसात का मौसम था। कबीर एक बार फिर किसी बिज़नेस ट्रिप के बहाने शहर से बाहर गया हुआ था। घर के बाकी सदस्य किसी रिश्तेदार के यहाँ गए हुए थे। बड़ी–सी हवेली में सिर्फ नेहा और रोहन थे।
नेहा छत पर सूख रहे कपड़ों को समेटने गई। अचानक तेज़ हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। कपड़ों को बचाते–बचाते नेहा का पैर फिसल गया। वह गिरने ही वाली थी कि रोहन ने सही वक्त पर आकर उसे थाम लिया। कुछ लम्हों के लिए दोनों की आँखें मिलीं। नेहा की आँखों में वो खालीपन था, जिसे रोहन महीनों से पढ़ने की कोशिश कर रहा था।
“आप ठीक हैं, भाभी?” रोहन ने संभलते हुए पूछा।
“हाँ… रोहन, बस पैर फिसल गया था,” नेहा ने अपनी साड़ी का पल्लू संभालते हुए कहा, लेकिन उसकी आँखों से आँसू छलक पड़े।
यह पहला मौका था जब नेहा रोहन के सामने रोई थी। रोहन से नेहा का यह दर्द देखा नहीं गया। उसने बिना कुछ कहे नेहा को छत के बने शेड के नीचे बैठाया और खुद नीचे जाकर गर्म चाय और दो कप ले आया।
“भैया कभी नहीं बदलेंगे, है न?” रोहन ने चाय की चुस्की लेते हुए अचानक पूछा।
नेहा ने चौंक कर रोहन की तरफ देखा। “तुम… तुम क्या कह रहे हो?”
“मैं सब देखता हूँ, भाभी। इस घर की दीवारें भी आपकी चुप्पी का दर्द जानती हैं। भैया अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं और आप यहाँ हर दिन घुटती हैं,” रोहन की आवाज़ में एक अजीब सी तड़प थी।
उस रात के बाद दोनों के बीच एक अनकहा पुल बन गया। रोहन अब सिर्फ देवर नहीं रहा, वह नेहा की उस तन्हाई का साथी बन गया, जिसे उसने कभी किसी से शेयर नहीं किया था।

devar bhabhi love story: एक खूबसूरत अहसास
दिन बीतते गए। रोहन की कोशिश रहती कि वह नेहा को उदास न होने दे। कभी वह उसके लिए उसकी पसंदीदा किताबें ले आता, तो कभी रसोई में उसकी मदद करने के बहाने घंटों बातें करता।
नेहा को पहली बार अहसास हुआ कि किसी की परवाह पाने का अहसास कैसा होता है। जब कबीर घर पर होता, तो वह नेहा की तरफ देखता भी नहीं था, लेकिन रोहन की नज़रें हमेशा नेहा की हर छोटी ज़रूरत पर रहती थीं। नेहा को अगर हल्का–सा सिरदर्द भी होता, तो रोहन बिना माँगे चाय बनाकर ले आता।
धीरे–धीरे, दोनों के दिल में एक–दूसरे के प्रति आकर्षण पनपने लगा। यह आकर्षण किसी शारीरिक लालसा का नहीं था, बल्कि दो तन्हा रूहों का एक–दूसरे में पनाह ढूँढने जैसा था।
एक रात, रोहन अपनी गिटार लेकर छत पर बैठा बजा रहा था। नेहा दबे पाँव वहाँ आई और उसके पास बैठ गई।
“तुम बहुत अच्छा बजाते हो, रोहन,” नेहा ने धीमी आवाज़ में कहा।
रोहन ने गिटार बजाना बंद किया और नेहा की तरफ देखा। चाँदनी रात में नेहा का चेहरा बेहद मासूम और उदास लग रहा था। रोहन का दिल किया कि वह नेहा को अपने आगोश में ले ले और दुनिया का सारा दर्द उससे छीन ले।
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“नेहा…” रोहन के मुँह से पहली बार ‘भाभी‘ की जगह उसका नाम निकला।
नेहा ने चौंक कर देखा।
“अगर मैं आपसे एक बात कहूँ, तो क्या आप बुरा मानेंगी?” रोहन ने नेहा का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा।
नेहा का दिल जोर–जोर से धड़कने लगा। उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा।
“मैं जानता हूँ कि यह गलत है… समाज की नजरों में, इस घर की नजरों में। लेकिन मैं आपसे प्यार करने लगा हूँ, नेहा। मैं आपको इस तरह घुटते हुए नहीं देख सकता,” रोहन ने अपनी आँखें बंद करके अपनी भावनाएं उड़ेल दीं।
नेहा की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। उसने रोहन के गाल पर हाथ रखा और बोली, “रोहन, जो प्यार मुझे कबीर से मिलना चाहिए था, वो मुझे तुम्हारी परवाह में मिला। लेकिन हमारी किस्मत में एक साथ होना नहीं लिखा है।“
दोनों ने उस रात बिना मर्यादा लांघे, एक–दूसरे के सामने अपने प्यार को कुबूल कर लिया। वह प्यार जो पवित्र था, लेकिन समाज के नियमों की ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ था।

devar bhabhi love story: तूफान की आहट
कबीर का रवैया दिन–ब–दिन और खराब होता गया। एक दिन घर में बहुत बड़ा हंगामा हुआ। कबीर अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड के साथ शहर छोड़ कर हमेशा के लिए जाने की तैयारी कर चुका था। उसने अपने पिता के सामने साफ कह दिया कि वह नेहा के साथ और नहीं रह सकता और वह तलाक चाहता है।
घर के बुजुर्गों के पैर तले ज़मीन खिसक गई। सास–ससुर ने नेहा को ही कोसना शुरू कर दिया कि शायद उसी में कोई कमी रही होगी जो कबीर घर छोड़कर चला गया। समाज की पुरानी सोच ने एक बार फिर एक बेकसूर औरत को कटघरे में खड़ा कर दिया।
रोहन यह सब देख रहा था। उसका खून खौल रहा था। वह अपने पिता के सामने खड़ा हो गया।
“बस कीजिए आप लोग! इसमें नेहा की क्या गलती है? भैया ने कभी इसे अपनाया ही नहीं! आप लोग हमेशा अपनी नाकामी का साया इस पर क्यों डालते हैं?” रोहन चिल्लाया।
“तू अपने भाई के खिलाफ बोल रहा है? इस औरत के लिए?” पिता ने गुस्से में पूछा।
“हाँ! क्योंकि मैं इससे प्यार करता हूँ!” रोहन ने पूरे परिवार के सामने यह सच उगल दिया।
घर में सन्नाटा छा गया। सास ने अपने माथे पर हाथ रख लिया और पिता का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उन्होंने रोहन को साफ कह दिया कि अगर उसने इस ‘कुलटा‘ का पक्ष लिया, तो उसे इस घर से बेदखल कर दिया जाएगा और समाज में उसकी कोई इज़्ज़त नहीं रहेगी।

devar bhabhi love story: त्याग और दर्दभरा अंत
रोहन ने नेहा का हाथ पकड़ा और कहा, “चलो नेहा, हम इस शहर से दूर चले जाते हैं। मैं कमाऊँगा, तुम्हारे लिए नई दुनिया बसाऊँगा। मुझे समाज की कोई परवाह नहीं।“
नेहा ने रोहन की आँखों में देखा। उसमें सच्चा प्यार था, समर्पण था। लेकिन नेहा जानती थी कि अगर वह रोहन के साथ गई, तो रोहन का भविष्य तबाह हो जाएगा। समाज रोहन को कभी माफ़ नहीं करेगा, उसकी माँ–बाप से दूरी हो जाएगी और उस पर ‘भाई की पत्नी को चुराने‘ का ऐसा दाग लगेगा जो कभी नहीं मिटेगा।
नेहा ने मुस्कुराते हुए रोहन के हाथ को धीरे से छोड़ दिया।
“नहीं रोहन। तुम मेरे लिए बहुत कीमती हो। मैं तुम्हारे प्यार के नाम पर तुम्हारे भविष्य की बलि नहीं दे सकती,” नेहा ने शांत आवाज़ में कहा।
“नेहा, तुम यह क्या कह रही हो? मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकता!” रोहन रो पड़ा।
“तुम जिओगे, रोहन। मेरे इस अहसास के साथ जिओगे कि कोई था, जिसने तुम्हें खुद से भी ज्यादा चाहा,” नेहा ने रोहन के माथे को चूमा।
उसी रात, जब पूरा घर सो रहा था, नेहा ने अपना छोटा–सा सूटकेस उठाया। उसने रोहन के कमरे के दरवाज़े के नीचे एक डायरी खिसका दी और खामोशी से हवेली के भारी दरवाज़े को पार कर गई।
सुबह जब रोहन की आँख खुली, तो उसे दरवाज़े के पास वह डायरी मिली। उसने काँपते हाथों से डायरी खोली। आखिरी पन्ने पर लिखा था:
“प्रिय रोहन,
तुम मेरी ज़िंदगी का वो खूबसूरत मोड़ थे, जहाँ मैं ठहरना तो चाहती थी, लेकिन ठहर नहीं सकी। अगर मैं तुम्हारे साथ रुक जाती, तो दुनिया हमारे प्यार को गंदा नाम देती। मैं चाहती हूँ कि तुम अपने सपनों को पूरा करो। मेरी चिंता मत करना, मैं जहाँ भी रहूँगी, तुम्हारी परवाह और तुम्हारी मोहब्बत के सहारे जी लूँगी। तुम मेरी वो खामोश मोहब्बत हो, जो कभी पूरी न होकर भी हमेशा के लिए अमर हो गई।“
– तुम्हारी नेहा
रोहन भागता हुआ स्टेशन पहुँचा, लेकिन ट्रेन छूट चुकी थी। पटरियों के सन्नाटे में रोहन अकेला खड़ा रहा, आँखों में आँसू लिए, हवाओं में नेहा की खुशबू ढूँढता हुआ।
दो दिल जो एक–दूसरे के लिए ही बने थे, समाज की मर्यादा और त्याग की आग में जलकर हमेशा–हमेशा के लिए अलग हो गए। devar bhabhi love story
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