Physical Relation Refusal Murder Palwal : पति और पत्नी का रिश्ता इस दुनिया का सबसे खूबसूरत और पवित्र बंधन माना जाता है। यह रिश्ता दो दिलों के मेल, आपसी विश्वास, सम्मान, और एक-दूसरे की मर्जी की बुनियाद पर टिकता है। वैवाहिक जीवन में शारीरिक संबंध केवल दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का एक-दूसरे के प्रति समर्पण होता है।
लेकिन जब इस समर्पण में ‘सहमति’ (Consent) की जगह जबरदस्ती, हवस, शराब का अंधा नशा और पुरुषवादी दंभ ले लेता है, तो वही प्रेम का मंदिर एक खौफनाक कत्लगाह में तब्दील हो जाता है। Physical Relation
एक स्त्री जब विवाह के बंधन में बंधकर किसी पराए घर में कदम रखती है, तो वह उम्मीद करती है कि उसका पति उसका रक्षक बनेगा। लेकिन क्या होता है जब रक्षक ही भक्षक बन जाए? क्या होता है जब एक माँ की गोद में सोता हुआ डेढ़ महीने का मासूम अपनी ही माँ की चीखों के साथ हमेशा के लिए शांत हो जाता है?
हरियाणा के पलवल जिले के एक शांत से गांव में घटी यह घटना कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। यह समाज के उस कड़वे और भयावह सच की दास्तान है, जहाँ शराब के एक घूंट और संबंध बनाने की ज़िद ने एक हंसते-खेलते परिवार का अंत कर दिया। यह कहानी है 31 वर्षीय शगुफ्ता की, उसके डेढ़ महीने के मासूम बेटे जुहान की, और उस वहशी पति सोहिल की, जिसने एक ‘ना’ का बदला दो कत्ल करके लिया।

Physical Relation : खुशियों का मुखौटा और उम्मीदों का सवेरा
साल 2023 का वह दिन रौनक अली के लिए अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा और खुशी का दिन था। नूंह जिले के सलम्बा गांव निवासी रौनक अली ने अपनी लाडली बेटी शगुफ्ता का हाथ पलवल जिले के रजपुरा गांव के रहने वाले सोहिल के हाथ में दिया था। सोहिल गांव में ही एक सहज जन सेवा केंद्र (CHC सेंटर) चलाता था। लोग उसे एक पढ़ा-लिखा और सुलझा हुआ युवक मानते थे।
रौनक अली ने अपनी मेहनत की कमाई से बेटी का विवाह बड़े ही धूमधाम से किया। उन्होंने अपनी हैसियत के मुताबिक हर वो सामान दिया जो एक बेटी को नए घर में सहूलियत दे सके। शादी के बाद जब शगुफ्ता अपने ससुराल रजपुरा आई, तो उसकी आँखों में एक नई दुनिया बसाने के सपने थे।
शुरुआती महीनों में सब कुछ किसी हसीन सपने जैसा लग रहा था। शादी के कुछ ही समय बाद शगुफ्ता के आंगन में एक नन्ही परी की किलकारी गूंजी। आज वह बेटी तीन साल की है और अपने तुतलाते शब्दों से पूरे घर को चहकाती थी। शगुफ्ता एक समर्पित पत्नी और माँ थी। वह घर के सारे काम संभालती, सबका ख्याल रखती और अपने पति सोहिल के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए हर संभव कोशिश करती थी।
लेकिन खुशियों के इस बाहरी मुखौटे के पीछे, ससुराल की दीवारों के भीतर एक खौफनाक साजिश और प्रताड़ना की गहरी खाई धीरे-धीरे आकार ले रही थी।

Physical Relation : दहेज की भूख और ‘छुछक‘ की शर्त
समय बीतता गया और करीब डेढ़ महीने पहले शगुफ्ता ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया। इस बार उनके घर एक नन्हा बेटा आया, जिसका नाम रखा गया जुहान। किसी भी परिवार के लिए बेटा और बेटी दोनों का होना एक मुकम्मल परिवार की निशानी होती है। रौनक अली और उनका पूरा परिवार इस बात से बेहद खुश था कि उनकी बेटी अब दो बच्चों की माँ बन चुकी है।
लेकिन सोहिल और उसके परिवार वालों के लिए यह खुशी का मौका नहीं, बल्कि अपनी लालच की लिस्ट को आगे बढ़ाने का एक जरिया था।
हमारे समाज में बच्चे के जन्म के बाद ‘छुछक’ (मायके पक्ष से दिए जाने वाले उपहारों की रस्म) की एक प्रथा होती है। इसी रस्म की आड़ में सोहिल और उसके परिजनों ने अपनी असली नीयत दिखा दी। सोहिल के घर वालों ने शगुफ्ता के पिता से एक चमचमाती कार की मांग रख दी।
रौनक अली एक साधारण मध्यमवर्गीय इंसान थे। बेटी की शादी में अपनी सामर्थ्य से ज्यादा खर्च कर चुके रौनक अली के लिए अचानक एक कार देना मुमकिन नहीं था। उन्होंने अपनी मजबूरी जताई, हाथ जोड़े, लेकिन सोहिल के घर वालों के दिल में तरस नाम की कोई चीज़ नहीं थी। कार की मांग पूरी न होने पर शगुफ्ता पर जुल्मों का पहाड़ टूटने लगा। Physical Relation
मासूम जुहान अभी महज कुछ ही दिनों का था, शगुफ्ता का शरीर डिलीवरी के दर्द से उबरा भी नहीं था कि उसके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। 15 अगस्त—जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था—उसी दिन शगुफ्ता को उसके डेढ़ महीने के बच्चे के साथ पीटकर घर से निकाल दिया गया और मायके छोड़ दिया गया। जाते-जाते सोहिल और उसके परिजनों की धमकी साफ थी: “जब तक कार की चाबी हाथ में नहीं होगी, शगुफ्ता इस घर में वापस कदम नहीं रखेगी।“

Physical Relation : पंचायत, झूठे वादे और एक पिता की लाचारी
मायके पहुंची शगुफ्ता रो-रोकर अपने पिता को अपनी आपबीती सुना रही थी। उसके शरीर पर नीले निशान इस बात की गवाही दे रहे थे कि उसके साथ किस कदर बर्बरता की गई थी। लेकिन भारतीय समाज में बेटी का घर न टूटे, इस चिंता में पिता हमेशा अपनी रीढ़ झुका लेता है। रौनक अली भी एक लाचार पिता थे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी का घर उजड़े और दो छोटे बच्चों का भविष्य अंधकार में लटक जाए। Physical Relation
इसके बाद सोहिल के परिवार के दबाव और रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से पंचायत बुलाई गई। सोहिल के पक्ष से उसके रिश्तेदार जमशेद, अकरम और राशिद पंचायत लेकर रौनक अली के घर पहुंचे।
पंचायत की मेज पर बड़ी-बड़ी बातें हुईं। सोहिल के रिश्तेदारों ने कसमें खाईं, हाथ जोड़कर मिन्नतें कीं और भरोसा दिलाया कि अब शगुफ्ता को शिकायत का कोई मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने वादा किया कि शगुफ्ता को ससुराल में रानी की तरह रखा जाएगा और आगे से कभी गाड़ी या किसी सामान की मांग नहीं की जाएगी।
पिता का दिल पिघल गया। बेटी का बसा-बसाया संसार बचाने के लिए रौनक अली ने एक बार फिर अपनी जेब खाली की। उन्होंने 17 अगस्त को अपनी जमापूंजी से एक नया एयर कंडीशनर (AC) और 50,000 रुपये नकद सोहिल के परिजनों के हाथ में सौंपे और भारी मन से शगुफ्ता को विदा कर दिया।
जब शगुफ्ता अपनी गोद में डेढ़ महीने के जुहान को लेकर ससुराल की तरफ लौट रही थी, तो उसे क्या पता था कि वह अपने पति के घर नहीं, बल्कि अपनी मौत के कुएं में कदम रख रही है।

Physical Relation : 18 अगस्त की वह खौफनाक काली रात
17 अगस्त को ससुराल पहुँची शगुफ्ता को लगा था कि शायद पंचायत के बाद चीज़ें बेहतर होंगी। लेकिन 18 अगस्त की सुबह से ही घर का माहौल फिर से तनावपूर्ण होने लगा था। ससुराल वालों के तेवर बदले नहीं थे। दिन भर शगुफ्ता के साथ तानेबाजी और छोटी-मोटी बातों पर मारपीट की गई।
डर के मारे शगुफ्ता ने 18 अगस्त की दोपहर में ही अपने मायके फोन किया। उसने रोते हुए अपने पिता रौनक अली को बताया कि सोहिल और उसके घर वाले—अफसाना, यकीम, अरबाज, जिया, रफीक, वसीम और सरपंच साहिब—सब मिलकर उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। पिता ने उसे सब्र रखने को कहा और आश्वासन दिया कि वे जल्द ही आकर बात करेंगे। लेकिन पिता को क्या मालूम था कि वे अपनी बेटी से आखिरी बार बात कर रहे हैं।
रात गहराने लगी। गांव रजपुरा में चारों तरफ सन्नाटा पसार चुका था।
सोहिल उस रात घर देर से लौटा। वह शराब के गहरे नशे में धुत था। उसके कदम डगमगा रहे थे और आंखों में वहशीपन तैर रहा था। वह सीधे अपने कमरे में दाखिल हुआ। कमरे में डिम लाइट जल रही थी। शगुफ्ता अपने डेढ़ महीने के मासूम बच्चे जुहान को अपनी छाती से सटाकर सुलाने की कोशिश कर रही थी। दिनभर की मारपीट और मानसिक प्रताड़ना से उसका शरीर और आत्मा दोनों थक चुके थे। Physical Relation
सोहिल ने कमरे का दरवाजा बंद किया और सीधे बेड पर आ गया। शराब की बदबू से कमरा भर गया। उसने शगुफ्ता पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालना शुरू कर दिया।
शगुफ्ता ने धीरे से उसका हाथ हटाया। उसने कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है, दिनभर की मारपीट से उसका शरीर टूट रहा है और पास में बच्चा सो रहा है। उसने बहुत ही शालीनता से संबंध बनाने से मना कर दिया।
Physical Relation : जब ‘ना‘ बन गई कत्ल की वजह
एक स्त्री की ‘ना’—जो उसका मौलिक और प्राकृतिक अधिकार है—वह सोहिल के शराब से चढ़े दिमाग को बर्दाश्त नहीं हुई। उसके भीतर का मर्दवादी अहंकार जाग उठा। उसे लगा कि उसकी पत्नी उसकी जागीर है और वह उसे मना कैसे कर सकती है?
सोहिल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने शगुफ्ता को गालियां देनी शुरू कर दीं। शगुफ्ता ने जब इसका विरोध किया तो दोनों के बीच तीखी बहस और झगड़ा शुरू हो गया। सोहिल पर उस वक्त हवस और गुस्से का भूत सवार हो चुका था।
झगड़ा इतना बढ़ा कि सोहिल ने अपनी इंसानियत का आखिरी कतरा भी खो दिया।
उसने शगुफ्ता के गले में पड़ी उसकी ही सूती चुन्नी को कसकर पकड़ लिया। सोहिल ने चुन्नी को शगुफ्ता की गर्दन पर लपेटा और पूरी ताकत से खींचने लगा।
शगुफ्ता के लिए यह अप्रत्याशित था। गले में फंदा कसते ही उसकी सांसें अटकने लगीं। उसने अपने हाथों से सोहिल की कलाई पकड़ी, उसके पैरों में हाथ मारे, हवा में पैर पटकने शुरू किए। वह अपनी जिंदगी के लिए, अपने बच्चों के लिए गिड़गिड़ाना चाहती थी, लेकिन गले से कोई आवाज़ बाहर नहीं निकल पा रही थी। उसकी आँखें खौफ से बाहर उबलने लगीं।
सोहिल बिना किसी दया के चुन्नी के फंदे को और जोर से खींचता रहा। शगुफ्ता ने छटपटाते हुए अपने बचाव में हाथ-पांव मारे, लेकिन सोहिल की पकड़ ढीली नहीं हुई। कुछ ही मिनटों की दर्दनाक छटपटाहट के बाद, शगुफ्ता का शरीर ढीला पड़ गया। उसकी सांसें थम गईं और वह बेसुध होकर बिस्तर पर गिर पड़ी।
31 साल की शगुफ्ता, जो कुछ घंटे पहले तक जीने की आस लगाए बैठी थी, अब एक बेजान लाश बन चुकी थी।

Physical Relation : मासूम जुहान की चीखें और दूसरी बलि
कमरे में खामोशी छा गई थी। सोहिल हाँफ रहा था और उसकी नज़रें बिस्तर पर पड़ी शगुफ्ता की बेजान देह पर थीं।
लेकिन तभी, उस सन्नाटे को चीरती हुई एक पतली सी रोने की आवाज़ गूंजी।
वह आवाज़ थी डेढ़ महीने के मासूम जुहान की। अपनी माँ की छटपटाहट और झगड़े के शोर से नन्हा जुहान जाग चुका था। उसे अपनी माँ की गर्माहट नहीं मिल रही थी, इसलिए वह ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा।
पत्नी का कत्ल करने के बाद सोहिल के सिर से कत्ल का नशा थोड़ा उतरा। उसने रोते हुए बच्चे को देखा। उसने बच्चे को चुप कराने की कोशिश की, उसे गोदी में उठाने का नाटक किया, लेकिन वह नन्हा जुहान, जिसे अपनी माँ की दूध की महक चाहिए थी, रोए जा रहा था।
सोहिल को डर सताने लगा कि बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर आसपास के लोग न जाग जाएं या घर के अन्य सदस्य कमरे में न आ जाएं। अपनी दरिंदगी और अपराध को छिपाने की सनक में सोहिल इस कदर अंधा हो गया कि उसने उस मासूम बच्चे की तरफ देखा जो अभी ठीक से अपनी पलकें भी नहीं खोल पाता था।
सोहिल ने अपने भारी हाथों से उस डेढ़ महीने के जुहान का नन्हा सा गला दबा दिया।
बच्चे की रोने की आवाज़ एक धीमी सी कराह में बदली और फिर… हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो गई। जिस बाप को उस मासूम का रक्षक होना चाहिए था, उसी ने अपने ही खून का गला घोंटकर उसकी जीवन-लीला समाप्त कर दी। महज आधा घंटे के भीतर, एक ही कमरे में दो कत्ल हो चुके थे।

Physical Relation : लाशों के पहरेदार से तीसरी मंजिल की छलांग
दो-दो कत्ल करने के बाद सोहिल उसी कमरे में फर्श पर बैठ गया। कमरे में दो लाशें पड़ी थीं—एक उसकी पत्नी की और दूसरी उसके मासूम बेटे की।
रात का नशा धीरे-धीरे उतर रहा था और सुबह की पहली किरणें खिड़की से छनकर अंदर आ रही थीं। जैसे-जैसे नशा छंट रहा था, सोहिल को समझ आ रहा था कि उसने क्या अनर्थ कर दिया है। कानून का डर, जेल की सलाखें और फांसी का फंदा उसकी आंखों के सामने घूमने लगा।
वह घंटों उन लाशों के पास गुमसुम बैठा रहा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। नशा पूरी तरह उतरने के बाद पछतावे और पकड़े जाने के खौफ ने उसे घेर लिया।
सुबह के करीब 6 बजे, जब उसे बचने का कोई रास्ता नहीं दिखा, तो उसने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का फैसला किया। वह कमरे से निकला, भागता हुआ मकान की तीसरी मंजिल की छत पर गया और बिना कुछ सोचे-समझे नीचे छलांग लगा दी।
‘धड़ाम’ की ज़ोरदार आवाज़ और सोहिल की दर्दनिवारक चीख सुनकर आसपास के लोग और परिजन अपने घरों से बाहर दौड़े। सोहिल तीसरी मंजिल से नीचे गिरा था। खून से लथपथ सोहिल के दोनों पैरों की हड्डियां टूट चुकी थीं और वह दर्द से तड़प रहा था।
ग्रामीणों ने तुरंत एम्बुलेंस को फोन किया और उसे अस्पताल पहुँचाने की तैयारी करने लगे।
Physical Relation : खौफनाक सच का खुलासा और पुलिस की एंट्री
सोहिल के छत से कूदने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। किसी ने इस बात की सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी।
सदर थाना प्रभारी हरी किशन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। जब पुलिस सोहिल के घर की जांच करने ऊपर तीसरी मंजिल वाले कमरे में दाखिल हुई, तो वहां का नज़ारा देखकर तजुर्बेकार पुलिस अधिकारियों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
बिस्तर पर 31 वर्षीय शगुफ्ता की लाश पड़ी थी, जिसकी गर्दन पर चुन्नी से घोंटे जाने के साफ और गहरे निशान थे। उसके पास ही मासूम जुहान का बेजान शरीर पड़ा था। कमरे का सामान बिखरा हुआ था, जो इस बात का सबूत था कि मरने से पहले शगुफ्ता ने अपनी जान बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था।
पुलिस ने तुरंत पूरे इलाके को सील कर दिया और फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवाया गया।
इसी बीच अस्पताल में भर्ती सोहिल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। उस वीडियो में अस्पताल के बेड पर लेटा सोहिल बिना किसी झिझक के अपना जुर्म कबूल कर रहा था। उसने कैमरे के सामने पूरी खौफनाक रात की दास्तान सुनाई—किस तरह उसने शराब के नशे में पत्नी से संबंध बनाने को कहा, पत्नी के मना करने पर कैसे चुन्नी से उसका गला घोंटा, और कैसे रोते हुए डेढ़ महीने के मासूम जुहान की उंगलियों से गर्दन दबाकर हत्या कर दी।
Physical Relation : मायके वालों का कोहराम और जेवर की डकैती
जब कत्ल की खबर नूंह में शगुफ्ता के मायके पहुँची, तो मानों रौनक अली के पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रोते-बिलखते परिजन पलवल पहुंचे।
मृतका शगुफ्ता की बहन जब अपनी बहन की देह को देखने पहुँची, तो वह चीख पड़ी। उसने देखा कि शगुफ्ता के चेहरे पर मारपीट के भयानक निशान थे। आंखें सूजी हुई थीं और गले पर गहरे घाव थे।
शगुफ्ता की बहन ने मीडिया और पुलिस के सामने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
“मेरी बहन को सिर्फ गला घोंटकर नहीं मारा गया, बल्कि मारने से पहले उसके साथ जानवरों की तरह मारपीट की गई थी। उसके चेहरे की हालत बता रही थी कि उस पर कितने ज़ुल्म ढहाए गए। और सबसे बड़ी हैवानियत यह देखिए कि मेरी बहन की मौत के बाद उसके कानों के सोने के कुंडल, गले की हसली और हाथों के सोने के कंगन तक उतार लिए गए। ये लोग इंसान नहीं, जल्लाद हैं।“
पिता रौनक अली ने बिलखते हुए पुलिस को बताया कि यह केवल एक रात के नशे का गुस्सा नहीं था। यह पूरी तरह से सोची-समझी साजिश और दहेज की भूख का परिणाम था। उन्होंने बताया कि किस तरह 15 अगस्त को कार न मिलने पर बेटी को पीटा गया था और फिर 17 अगस्त को AC और 50 हज़ार रुपये लेने के बाद भी 18 अगस्त को उसके साथ फिर मारपीट की गई।
Physical Relation : कानून का शिकंजा और 11 आरोपियों पर केस
शगुफ्ता के पिता रौनक अली की लिखित शिकायत के आधार पर पलवल के सदर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।
थाना प्रभारी हरी किशन ने बताया कि मृतका के पिता की तहरीर पर मुख्य आरोपी पति सोहिल समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दहेज हत्या, हत्या, और आपराधिक साजिश रचने की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद और भी तथ्य सामने आएंगे। मुख्य आरोपी सोहिल अभी पुलिस हिरासत में अस्पताल में जेरे इलाज है, और पैर ठीक होते ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
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Physical Relation : समाज के चेहरे पर एक बदनुमा दाग
हरियाणा के पलवल की यह खौफनाक वारदात सिर्फ एक पुलिस केस या अखबार की सुर्खी बनकर नहीं रह जानी चाहिए। यह घटना हमारे समाज की उस सड़ी-गली मानसिकता पर एक करारा तमाचा है, जहाँ औरत को इंसान नहीं, बल्कि अपनी जागीर समझा जाता है।
यह घटना तीन बड़े और कड़वे सवाल छोड़ जाती है:
Physical Relation क्या पत्नी की ‘ना‘ की कोई कीमत नहीं?
विवाह का लाइसेंस किसी पुरुष को यह अधिकार नहीं देता कि वह स्त्री की इच्छा और शारीरिक स्थिति के खिलाफ जाकर संबंध बनाए। ‘वैवाहिक बलात्कार’ (Marital Rape) और सहमति (Consent) के प्रति जागरूकता की कमी आज भी महिलाओं की जान ले रही है।
Physical Relation दहेज का दानव कब शांत होगा?
एक 3 साल की बेटी की माँ और डेढ़ महीने के बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री को सिर्फ इसलिए मार दिया जाता है क्योंकि उसका बाप कार नहीं दे पाया। AC और 50 हजार रुपये नकद भी उन दरिंदों की हवस को शांत नहीं कर सके।
Physical Relation मासूमियत का क्या कसूर था?
वह डेढ़ महीने का जुहान, जिसने अभी दुनिया की खूबसूरती भी नहीं देखी थी, अपने ही पिता की हैवानियत का शिकार बन गया।
आज शगुफ्ता और उसका मासूम बेटा जुहान इस दुनिया में नहीं हैं। पीछे छूट गई है वह 3 साल की मासूम बेटी, जो अपने घर के एक कोने में बैठी अपनी माँ और छोटे भाई का इंतज़ार कर रही है। उसे शायद कभी समझ नहीं आएगा कि जिस बाप के कंधे पर बैठकर उसे दुनिया देखनी थी, उसी बाप ने उसकी माँ और भाई का आंचल हमेशा के लिए छीन लिया।
यह कहानी न्याय की गुहार लगाती है कि सोहिल और उसके सहयोगियों को ऐसी सख्त से सख्त सजा मिले, जो समाज में एक मिसाल बन सके—ताकि फिर कभी कोई पति अपनी पत्नी की ‘ना’ पर चुन्नी का फंदा बनाने की हिम्मत न कर सके। Physical Relation
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