Patiala Live-in story: पंजाब का पटियाला शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों, रवायतों और खुलेपन के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी शहर के एक गुमनाम कोने में, उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों से आए दो दिल अपनी तकदीर का ताना-बाना बुन रहे थे। नेहा, जो जौनपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार की सीधी-सादी लड़की थी, और विराट, जो बहराइच का रहने वाला एक महत्वाकांक्षी युवक था।
नेहा की आँखों में बड़े शहर में आकर अपने पैरों पर खड़े होने और अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने के सपने थे। जौनपुर की तंग गलियों से निकलकर जब वह पटियाला आई, तो उसकी मुलाकात विराट से हुई। विराट का अंदाज, उसकी बातें और उसका सहारा नेहा को इस अजनबी शहर में बेहद अपना सा लगा।
शुरुआत में दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे एक गहरे आकर्षण में बदल गई। विराट ने कभी नेहा को यह भनक तक नहीं लगने दी कि उसके अतीत की दीवारें किसी और के नाम से पहले ही सज चुकी हैं-वह शादीशुदा था। उसने अपनी इस सच्चाई को एक गहरे राज़ की तरह अपने सीने में दफन कर रखा था। नेहा के लिए विराट ही उसका संसार, उसका दोस्त और उसका रक्षक था।
Patiala Live-in story: डेढ़ साल का वो आशियाना
जब प्यार परवान चढ़ा, तो दोनों ने समाज की रूढ़ियों से दूर जाकर एक साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने पटियाला में एक छोटा सा कमरा किराए पर लिया और ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ की शुरुआत की।
शुरुआती छह महीने किसी हसीन ख्वाब जैसे थे। सुबह की चाय साथ पीना, शाम को काम से लौटकर एक-दूसरे के दिनभर के किस्से सुनना और भविष्य के सुनहरे सपने देखना। नेहा इस रिश्ते को लेकर पूरी तरह समर्पित थी। वह इस कच्चे मकान को अपने प्यार से एक पक्के आशियाने में तब्दील करना चाहती थी।
“जब दो लोग एक छत के नीचे पति-पत्नी की तरह रहने लगते हैं, तो सामाजिक मान्यता की भूख अपने आप जाग उठती है। नेहा के लिए यह सिर्फ एक ‘रिलेशनशिप’ नहीं था, यह उसकी पूरी जिंदगी थी।”
जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, डेढ़ साल का अरसा मुकम्मल हो गया। अब नेहा के मन में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना घर करने लगी थी। उसके माता-पिता और समाज के सवाल उसके कानों में गूंजने लगे थे। वह विराट से एक ही गुहार लगाने लगी—”अब हमें सामाजिक और कानूनी रूप से शादी कर लेनी चाहिए।”
Patiala Live-in story: दरारें और बंद कमरों की बहस
नेहा के लिए जो मांग उसका अधिकार थी, विराट के लिए वही मांग एक गले का फंदा बनने लगी थी। विराट पहले से ही शादीशुदा था, वह नेहा से सिर्फ अपना वक्त काटने और एक समानांतर जिंदगी जीने के लिए जुड़ा था। वह नेहा से कभी शादी कर ही नहीं सकता था, और न ही वह इस दलदल में और धंसना चाहता था।
अब उस छोटे से कमरे का माहौल बदलने लगा था। जहाँ कभी हंसी-मजाक की आवाजें आती थीं, वहाँ अब सन्नाटा या फिर तीखी बहसें होने लगी थीं।
नेहा का पक्ष: “मैं तुम्हारे साथ डेढ़ साल से हूँ। मैंने अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया। मुझे समाज में एक नाम चाहिए, मुझे तुम्हारी पत्नी का हक चाहिए।”
विराट का रुख: वह हर बार बात को टाल जाता, कभी काम का बहाना बनाता, तो कभी आर्थिक तंगी का। अंदर ही अंदर वह नेहा से पीछा छुड़ाने के रास्ते तलाशने लगा था।
विराट को लगने लगा था कि नेहा अब उसके नियंत्रण से बाहर हो रही है। उसका कानूनी और सामाजिक दबाव विराट के दोहरे चेहरे को बेनकाब कर सकता था। यहीं से प्यार के उस तथाकथित आशियाने में एक खौफनाक साजिश की नींव पड़ी।
Patiala Live-in story: 25 मई की वो काली रात
तारीख थी 25 मई। पटियाला की हवाओं में एक अजीब सी खामोशी थी। विराट ने उस रात नेहा को रास्ते से हटाने का पूरा मन बना लिया था। उसने बेहद शातिराना अंदाज में, अपनी आवाज में वही पुराना प्यार और मिठास घोलकर नेहा को फोन किया और उसे अपने पास बुलाया।
नेहा, जो विराट के हर बुलावे को अपनी खुशियों का जरिया समझती थी, बिना किसी शक के उससे मिलने पहुँच गई। उसे लगा था कि शायद आज विराट उसकी मांग मान लेगा, शायद आज उनके बीच का तनाव हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
लेकिन बंद कमरे के भीतर कहानी कुछ और ही मोड़ ले रही थी। मिलते ही फिर वही शादी की बात छिड़ी। नेहा ने रोते हुए, मिन्नतें करते हुए अपनी बात दोहराई। लेकिन विराट के सिर पर खून सवार था। वह इस रोज-रोज के ड्रामे को हमेशा के लिए शांत करना चाहता था। बहस जब अपने चरम पर पहुँची, तो विराट ने आव देखा न ताव, नेहा की तरफ झपट्टा मारा। नेहा कुछ समझ पाती, इससे पहले ही विराट के बेरहम हाथों ने उसकी गर्दन को जकड़ लिया।
एक तरफ डेढ़ साल का प्यार, यादें और कसमें थीं; दूसरी तरफ एक कातिल का शिकंजा। नेहा ने तड़पते हुए विराट की आँखों में देखा होगा, शायद अपनी जान की भीख मांगी होगी, लेकिन विराट के दिल में दया का एक कतरा भी नहीं बचा था। कुछ ही मिनटों की कशमकश के बाद, नेहा की सांसों की डोर हमेशा के लिए टूट गई। कमरा एक बार फिर शांत हो गया, लेकिन इस बार यह शांति मौत की थी।
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Patiala Live-in story: नीला ड्रम और ई-रिक्शा का सफर
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद विराट के चेहरे पर पछतावा नहीं, बल्कि पकड़े जाने का डर था। रात के सन्नाटे में वह लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगा। उसने बाजार से प्लास्टिक का एक बड़ा, नीले रंग का ड्रम खरीदा।
बेहद बेरहमी से उसने नेहा के बेजान जिस्म को उस नीले ड्रम के भीतर बंद कर दिया। अब चुनौती थी कि इस भारी ड्रम को बिना किसी के शक के शहर से बाहर कैसे ले जाया जाए। इसके लिए उसने एक शातिराना चाल चली—उसने एक ई-रिक्शा किराए पर लिया।
[हत्या का स्थान] ──(नीला ड्रम)──> [किराए का ई-रिक्शा] ──(डीसीडब्ल्यू पुल)──> [सुनसान झाड़ियाँ]
विराट ने ई-रिक्शा चालक को सम्भवतः कोई सामान होने का झांसा दिया और ड्रम को उस पर लाद दिया। ई-रिक्शा पटियाला की सड़कों से गुजरता हुआ डीसीडब्ल्यू पुल के पास पहुँचा। वहाँ पास ही में एक श्मशान भूमि थी, जिसके इर्द-गिर्द घनी और सुनसान झाड़ियाँ थीं। विराट ने उस सूनसान जगह को देखकर रिक्शा रुकवाया, भारी ड्रम को झाड़ियों के पीछे धकेला और बिना पीछे मुड़े वहाँ से रफूचक्कर हो गया। उसे लगा कि उसने अपने अतीत और भविष्य के सबसे बड़े कांटे को हमेशा के लिए दफन कर दिया है।
Patiala Live-in story: कानून के हाथ और डिजिटल पदचिह्न
लेकिन कहते हैं कि गुनाह कितना भी शातिर क्यों न हो, पीछे अपने निशान छोड़ ही जाता है। जब झाड़ियों से बदबू आने लगी और स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस ने उस नीले ड्रम को खोला, तो अंदर का मंजर देखकर हर कोई दहल गया। पुलिस कप्तान (एसपी सिटी) पलविंदर सिंह चीमा के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम, साइबर सेल और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स तुरंत हरकत में आए।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी मृतका की पहचान करना और कातिल तक पहुँचना। इसके लिए पुलिस ने सबसे अचूक हथियार अपनाया- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)।
जब नेहा के मोबाइल नंबर की स्क्रूटनी की गई, तो तकनीकी इनपुट्स ने पूरी कहानी बयां कर दी:
आखिरी बातचीत: नेहा के फोन से आखिरी कॉल विराट को की गई थी।
लोकेशन ट्रैकिंग: 25 मई की रात नेहा की मोबाइल लोकेशन और विराट की मोबाइल लोकेशन एक ही जगह पर पाई गई थी।
साइबर टीम के इन तकनीकी सबूतों ने विराट को मुख्य संदेही बना दिया। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया। विराट, जो पंजाब से बाहर भागने और कानूनी शिकंजे से दूर उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य में छिपने की फिराक में था, पुलिस की मुस्तैदी के आगे हार गया। 30 मई को पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
Patiala Live-in story: रिमांड के दो दिन और सुलगते सवाल
गिरफ्तारी के बाद जब विराट से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसका झूठ ताश के पत्तों की तरह ढह गया। उसने कबूल किया कि उसी ने नेहा की गला घोंटकर हत्या की है, क्योंकि वह उससे पीछा छुड़ाना चाहता था।
अदालत ने आरोपी विराट को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इन दो दिनों में पटियाला पुलिस कई कड़वे सच सामने लाने की कोशिश कर रही है:
क्या इस खौफनाक कृत्य में ई-रिक्शा ड्राइवर को भी पता था कि ड्रम में क्या है?
क्या लाश को ठिकाने लगाने में किसी तीसरे शख्स ने विराट की मदद की थी?
क्या विराट ने यह साजिश कई दिनों पहले से रच रखी थी?
Patiala Live-in story: एक दुखद अंत
जौनपुर की नेहा ने जिस शख्स को अपना हमसफर, अपना सब कुछ माना था, वही उसकी मौत का सौदागर निकला। एक ‘रियल लिव-इन रिलेशनशिप’ का यह अंत समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करता है। प्यार, भरोसा और शातिरपना जब एक साथ मिलते हैं, तो अंजाम पटियाला के उस नीले ड्रम जैसा ही खौफनाक होता है। नेहा अब इस दुनिया में नहीं है, और विराट अब सलाखों के पीछे अपने गुनाहों की सजा गिन रहा है। Patiala Live-in story
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