Kurukshetra Live-in Story: कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक और शांत शहर के मोहननगर इलाके में 46 वर्षीय रामअवतार अपनी जिंदगी का ताना-बाना बुन रहे थे। अग्रसेन चौक के पास उनकी जनरल स्टोर की एक अच्छी-भली दुकान थी।
सुबह दुकान खोलना, ग्राहकों से हंसकर बात करना और शाम को घर लौटना- यही उनका नियम था। लगभग 24 साल पहले उनकी शादी रेखा से हुई थी। चार बच्चों (तीन बेटियां और एक बेटा) के साथ उनका भरा-पूरा परिवार था। घर में हर तरफ हंसी-खुशी का माहौल रहता था।
लेकिन वक्त का पहिया घूमा और साल भर पहले एक गंभीर बीमारी के चलते उनकी पत्नी रेखा का निधन हो गया। रेखा के जाने से रामअवतार के जीवन में ऐसा सन्नाटा पसरा कि भरे-पूरे घर में भी वह खुद को बेहद अकेला महसूस करने लगे। बच्चे अपनी पढ़ाई और दुनिया में व्यस्त थे, और रामअवतार दुकान मंगल करने के बाद जब घर लौटते, तो अकेलेपन का भूत उन्हें डराने लगता।
एक शाम, दुकान के काउंटर पर बैठे-बैठे रामअवतार थके हुए मन से अपने मोबाइल पर सोशल मीडिया स्क्रॉल कर रहे थे। वह बस वक्त काटने (टाइम पास) के लिए फोन चला रहे थे कि अचानक स्क्रीन पर एक मशहूर मैट्रिमोनियल वेबसाइट का विज्ञापन चमका। विज्ञापन में लिखा था-“उम्र के किसी भी पड़ाव पर ढूंढिए अपना सच्चा जीवनसाथी।”
रामअवतार का दिल धड़का। उन्होंने सोचा, “क्या मुझे एक और मौका मिलना चाहिए?” उन्होंने हिचकिचाते हुए उस विज्ञापन पर क्लिक किया और अपनी प्रोफाइल रजिस्टर कर दी। कुछ ही दिनों बाद, उनके सामने दिल्ली के नरेला की रहने वाली एक महिला की प्रोफाइल आई। नाम था—शालू। शालू के पति का भी करीब डेढ़ साल पहले देहांत हो चुका था और वह भी अपनी जिंदगी में किसी हमसफर की तलाश में थी।
Kurukshetra Live-in Story: चैटिंग से वीडियो कॉल का रोमांटिक सफर
शुरुआत मैट्रिमोनियल साइट के इनबॉक्स में एक साधारण ‘हेलो’ से हुई। शालू ने लिखा था, “नमस्ते रामअवतार जी, आपकी प्रोफाइल देखी। अच्छा लगा जानकर कि आप अपने बच्चों के लिए और खुद के लिए एक गंभीर रिश्ता ढूंढ रहे हैं।”
रामअवतार ने तुरंत टाइप किया, “जी शालू जी, बस जिंदगी में एक ठहराव और अपनेपन की तलाश है।”
वेबसाइट पर शुरू हुई यह बातचीत जल्द ही व्हाट्सऐप तक पहुंच गई। अब दोनों के दिन की शुरुआत एक-दूसरे को ‘गुड मॉर्निंग’ के मैसेज भेजने से होती थी। रामअवतार दुकान पर होते, तो शालू के मैसेज का इंतजार करते। शालू भी दिल्ली में बैठे-बैठे कुरुक्षेत्र के इस सीधे-सादे दुकानदार के ख्यालों में खोई रहती।
कुछ ही दिनों में ऑडियो कॉल्स का सिलसिला शुरू हुआ। शालू की आवाज में एक अजीब सी कशिश थी जो रामअवतार के जख्मी दिल पर मरहम का काम करती थी। एक रात, जब घर के सब लोग सो चुके थे, रामअवतार ने शालू को वीडियो कॉल किया।
जैसे ही फोन कनेक्ट हुआ, स्क्रीन पर शालू का हंसता हुआ चेहरा उभरा। रामअवतार उसे देखते ही रह गए।
“तुम वीडियो कॉल पर और भी ज्यादा खूबसूरत लगती हो, शालू,” रामअवतार ने अपनी धीमी आवाज में कहा।
शालू ने अपनी जुल्फों को कान के पीछे समेटते हुए शरमा कर कहा, “अच्छा! बस तारीफ करना आता है या कभी मिलने का इरादा भी है? इतने महीने हो गए हमें बातें करते हुए।”
“इरादा तो तुम्हें जिंदगी भर के लिए अपने पास बुलाने का है। मैं अपने बच्चों को हमारे बारे में बता चुका हूं। वे मेरी खुशी में खुश हैं,” रामअवतार ने पूरी संजीदगी से कहा।
करीब 8 से 10 महीनों तक दोनों इसी तरह डिजिटल डेटिंग करते रहे। घंटों बातें होतीं, भविष्य के सपने बुने जाते। शालू ने बताया कि पहली शादी से उसकी एक 18 साल की बेटी रिया और 14 साल का एक बेटा चिराग है। रामअवतार ने बड़े दिल का परिचय देते हुए कहा, “शालू, तुम्हारे बच्चे अब मेरे बच्चे हैं। जब तुम आओगी, तो हमारा परिवार फिर से पूरा हो जाएगा।”
Kurukshetra Live-in Story: कुरुक्षेत्र आगमन और लिव-इन का सवेरा
वह तारीख थी 20 अप्रैल। रामअवतार ने शालू को अपने पास कुरुक्षेत्र बुला लिया। शालू ने दिल्ली के नरेला में अपने भाई-भाभी को इस नए रिश्ते के बारे में पूरी बात बता दी थी। वह अपने दोनों बच्चों, रिया और चिराग को साथ लेकर बस में बैठी और दिल्ली से कुरुक्षेत्र पहुंच गई।
कुरुक्षेत्र बस स्टैंड पर रामअवतार हाथ में गुलाब का फूल लिए उसका इंतजार कर रहे थे। जब शालू बस से उतरी, तो दोनों की नजरें मिलीं। महीनों का डिजिटल रोमांस अब हकीकत में बदल चुका था। रामअवतार ने शालू का हाथ थाम लिया और उसे अपने मोहननगर स्थित घर ले आए।
शुरुआत के कुछ दिन किसी हसीन सपने जैसे थे। सुबह-सुबह शालू रामअवतार के लिए चाय बनाती, दोनों बालकनी में बैठकर बातें करते।
“मुझे यकीन नहीं हो रहा कि मैं सच में तुम्हारे साथ कुरुक्षेत्र में हूं,” शालू ने रामअवतार के कंधे पर सिर रखते हुए कहा।
रामअवतार ने उसके हाथ को चूमते हुए कहा, “अब तुम यहीं की हो शालू। इस घर की खुशियां लौट आई हैं।”
रामअवतार को लगा कि उनकी जिंदगी की दूसरी पारी बेहद खूबसूरत होने वाली है। उन्होंने बिना कोई वक्त गंवाए शालू के 14 साल के बेटे चिराग का एडमिशन कुरुक्षेत्र के एक नामी और महंगे प्राइवेट स्कूल में करवा दिया, ताकि बच्चे की पढ़ाई खराब न हो।
Kurukshetra Live-in Story: फरमाइशें, हवस और बदलता रंग
लिव-इन रिलेशनशिप को अभी जुम्मा-जुम्मा कुछ ही दिन हुए थे कि शालू का रोमांटिक मुखौटा धीरे-धीरे उतरने लगा। उसकी बातें अब प्यार-मोहब्बत से हटकर ‘चीजों’ पर आकर टिकने लगीं।
एक दोपहर जब रामअवतार दुकान से लौटे, तो शालू का मुंह फूला हुआ था।
“क्या हुआ शालू? तबीयत ठीक नहीं है क्या?” रामअवतार ने फिक्रमंदी से पूछा।
“क्या खाक ठीक होगी! दिल्ली छोड़कर इस छोटे शहर में आ तो गई, लेकिन घर में ढंग का सामान तक नहीं है। पुरानी अलमारी, पुराना बेड… और फ्रिज तो देखो, पानी भी ठीक से ठंडा नहीं करता। मेरी सहेलियां पूछती हैं कि कुरुक्षेत्र जाकर क्या मिला?” शालू ने तुनक कर कहा।
रामअवतार सीधे इंसान थे, वह शालू को किसी भी कीमत पर नाराज नहीं करना चाहते थे। उन्होंने तुरंत बाजार जाकर एक नया आलीशान बेड, चमचमाती अलमारी और एक बड़ा नया फ्रिज खरीद डाला। शालू के आने के बाद घर के खर्चे बेतहाशा बढ़ने लगे थे। रामअवतार की बड़ी बेटी शुभम यह सब देख रही थी। मात्र 26 दिनों के भीतर शालू ने रामअवतार के करीब 5 से 7 लाख रुपये ऐशो-आराम और अपनी डिमांड्स पर खर्च करवा दिए थे।
लेकिन शालू की भूख शांत नहीं हो रही थी। वह आए दिन और महंगी चीजों की मांग को लेकर रामअवतार से झगड़ा करने लगी थी। घर का रोमांटिक माहौल अब तनाव के अखाड़े में तब्दील हो चुका था।
Kurukshetra Live-in Story: वो खौफनाक रात
शुक्रवार की रात थी। तारीख के हिसाब से दोनों को लिव-इन में रहते हुए ठीक 26 दिन हो चुके थे। घर में अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी। रात के करीब 11 बज रहे थे। रामअवतार की बेटी शुभम अपने भाई-बहनों के साथ नीचे वाले कमरे में सोने की तैयारी कर रही थी। ऊपर वाले कमरे में रामअवतार, शालू और उसके बच्चे सो रहे थे।
अचानक, सन्नाटे को चीरती हुई रामअवतार के जोर से चीखने की आवाज आई।
शुभम का दिल दहल गया। वह भागती हुई ऊपर कमरे की तरफ गई। जैसे ही उसने कमरा खोला, उसने देखा कि रामअवतार फोल्डिंग (चारपाई) पर छटपटा रहे थे। शालू वहां खड़ी थी, उसके चेहरे पर अजीब सी घबराहट और गुस्सा था। शुभम को देखते ही शालू चिल्लाई, “कुछ नहीं हुआ है, तुम नीचे जाओ! तुम्हारे पापा की तबीयत थोड़ी खराब है, मैं देख रही हूं।”
शुभम डरकर कदम पीछे खींच गई, लेकिन उसका मन नहीं माना। कुछ मिनटों बाद जब वह दोबारा हिम्मत जुटाकर ऊपर कमरे में पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
रामअवतार फोल्डिंग पर बेसुध पड़े थे। उनके सिर से खून बह रहा था, मानो किसी भारी चीज से वार किया गया हो। उनकी आंख के पास, होंठ और नाक पर भी ताजी चोटों के निशान थे। सबसे भयानक बात यह थी कि उनके मुंह से सफेद झाग निकल रहा था।
शालू और उसके दोनों बच्चे (रिया और चिराग) कमरे से गायब थे। वह अंधेरे का फायदा उठाकर घर से फरार हो चुकी थी।
Kurukshetra Live-in Story: अस्पताल और पुलिसिया तफ्तीश
शुभम ने रोते-बिलखते तुरंत अपने चाचा सुरेश कुमार को फोन किया। सुरेश आनन-फानन में घर पहुंचे और रामअवतार को लहूलुहान और अचेत अवस्था में एक निजी अस्पताल ले गए। वहां हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी (LNJP) सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। एलएनजेपी अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद रामअवतार को मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही थाना सिटी के एसएचओ (SHO) सुरेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
जांच में फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. नरेश कुमार ने जो खुलासे किए, उसने हत्या की कड़ियों को साफ कर दिया। डॉ. नरेश कुमार ने बताया:
“मृतक राम अवतार के सिर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके कारण अंदरूनी ब्लीडिंग (इंटरनल हैमरेज) हुई थी। इसके अलावा चेहरे, आंख और नाक पर भी चोट के निशान थे जो हाथापाई को दर्शाते हैं। हालांकि, मुंह से झाग निकलना यह साफ करता है कि उन्हें चोट पहुंचाने के साथ-साथ कोई जहरीला पदार्थ भी दिया गया था।”
एसएचओ सुरेंद्र कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच और डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक मौत जहरीला पदार्थ खाने और सिर की चोट के कारण हुई है। मृतक की बेटी शुभम के रोते हुए दिए गए बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी महिला शालू के खिलाफ हत्या का मुकदमा (IPC/BNS की संबंधित धाराओं के तहत) दर्ज कर लिया है।
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Kurukshetra Live-in Story: अधूरा परिवार, फरार कातिल
पुलिस ने कानूनी कार्रवाई और शव का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद रामअवतार का पार्थिव शरीर उनके रोते-बिलखते परिवार को सौंप दिया। मोहननगर में जहां 26 दिन पहले एक नई जिंदगी की उम्मीद में शहनाइयां बजने के कयास लगाए जा रहे थे, वहां अब मातम पसरा हुआ था।
रामअवतार ने मैट्रिमोनियल साइट पर जिस ‘शालू’ को अपना हमसफर मानकर अपने सूने घर को पूरा करने का सपना देखा था, वही शालू उनके पैसों की दुश्मन और अंत में उनकी कातिल बन गई। कुरुक्षेत्र पुलिस अब दिल्ली के नरेला से लेकर संभावित ठिकानों पर शालू और उसके बच्चों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है, लेकिन वह अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। डिजिटल दुनिया से शुरू हुआ यह रोमांटिक सफर एक खूनी दास्तान के साथ खत्म हुआ। Kurukshetra Live-in Story
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