Success Love Story: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून। चारों ओर पहाड़ियों से घिरे इस शहर में जन्मी एक रियल लव स्टोरी (Real Love Story) आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो सच्चे प्यार की तलाश में और प्यार की राह पर आगे बढ़ना चाहते हैं। यह कहानी रास्ता दिखाती है कि प्यार केवल हवस नहीं, बल्कि दुख-सुख और विपरित परिस्थितियों में एक साथ खड़े रहना ही प्यार है। आज यह रियल लव स्टोरी एक सफल प्रेम कहानी (Success Love Story) बन चुकी है।
यह कहानी उन दिनों की है, जब समूचे उत्तराखंड के लोग अलग राज्य बनाए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। इस आंदोलन में उत्तराखंड के अनेकों युवक-युवतियां और अन्य लोग शहीद हुए।
मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है, उस समय यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और मुलायम सिंह यादव यूपी के सीएम थे। मुजफ्फरनगर जिले का रामपुर तिराहा कांड की यादें आज भी उत्तराखंड वासियों को झकझोर देती है।
Success Love Story: उत्तराखंड आंदोलन का दौर
उत्तराखंड आंदोलन के दौरान हजारों युवा अलग प्रदेश बनाने को लेकर संघर्ष कर रहे थे, वहीं देहरादून का एक युवक मुकेश वर्मा भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा था। मुकेश बेरोजगार था और आंदोलनकारियों का साथ दे रहा था।
32 साल पहले देहरादून के मोहित नगर में अपनी मां और बड़े भाई दिनेश के साथ एक किराए के मकान में रहने वाला मुकेश दिनभर उत्तराखंड आंदोलन की गतिविधियों में व्यस्त रहने के बाद शाम को अपनी कालोनी में समय गुजारता था। वक्त मिलते ही मुकेश किताबें पढ़ता या अखबार। एक दिन मुकेश अपने रिश्तेदार के यहां माता के जागरण में गया। जागरण में सभी भक्त माता का गुणगाण कर रहे थे।
मुकेश भी एक ओर बैठा मां दुर्गा की अराधना कर रहा था। उस समय उसके दिल से शायद यही प्रार्थना निकल रही थी कि, हे माता रानी… यूपी और केंद्र में बैठी सरकार उत्तराखंड राज्य को अलग कर दे। शायद इसी के साथ मुकेश के दिल में एक और प्रार्थना थी। वह थी, सरकारी नौकरी मिलने की।
Success Love Story: माता के जागरण की रात
जागरण की रात जैसे- जैसे गुजरती जा रही थी, वैसे ही जागरण पार्टी के कलाकारों में भजन गायकी का जोश भी बढ़ता जा रहा था। इसी दरम्यान मुकेश की नजर एक अनजान लड़की पर पड़ी। यह लड़की थी लक्ष्मी, गढ़ी कैंट-बीरपुर रोड की रहने वाली। मुकेश ने लक्ष्मी को देखा तो बस देखता ही रह गया। वहीं लक्ष्मी भी यह महसूस कर रही थी कि उसे कोई वॉच कर रहा है। लेकिन उसने उस वक्त नजर अंदाज कर दिया।
अगली सुबह जागरण खत्म हुआ। आरती हो रही थी। मुकेश और लक्ष्मी भी आरती में खड़े थे। अब दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे, मर्यादा और पाबंदियों के चलते उस वक्त दोनों एक-दूसरे को कुछ कह नहीं पाए। मोबाइल फोन भी नहीं थे, जो एक दूसरे का नंबर ही एक्सचेंज कर लेते। एक दिन, दो दिन, इस तरह से करके कई दिन गुजर गए।
मुकेश फिर से उसी रिश्तेदारी में गया और लक्ष्मी के बारे में पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद क्या था, मुकेश ने रोजाना गढ़ी कैंट पहुंचना शुरू कर दिया। जब भी वक्त मिलता मुकेश गढ़ी कैंट पहुंच जाता और लक्ष्मी के घर के सामने स्थित एक छोटे से पार्क में जाकर बेंच पर बैठ जाता और बाहर आती-जाती लक्ष्मी को देखता। अब लक्ष्मी पूरी तरह से समझ चुकी थी कि यह लड़का उसे वॉच कर रहा है।
Success Love Story: जब पहली बार दिल की धड़कन तेज हुई
अब समस्या यह थी कि मुकेश, लक्ष्मी को अपने दिल की बात कहे कैसे? एक दिन मुकेश ने एक लव लेटर (Love Letter) लिखा, जेब में डाला और चल दिया लक्ष्मी के घर तरफ। कहते हैं कि जब ऊपर वाला दो दिलों का मिलन कराता तो संयोग भी अपने आप बन जाते हैं। मुकेश पैदल ही जा रहा था, सामने से लक्ष्मी भी आ रही थी।
संयोग यह हुआ कि लक्ष्मी भी उसी साइड में आ गई, सड़क के जिस तरफ मुकेश जा रहा था। एक छोटी सी मुलाकात हुई। मुकेश ने लव लेटर निकाला और लक्ष्मी की ओर बढ़ा दिया। बिना देरी किए लक्ष्मी ने भी लव लेटर पकड़ लिया।
लक्ष्मी बताती हैं कि जिस समय उन्होंने लेटर हाथ में लिया तो उनके दिल की धड़कने तेज हो गई। उन्होंने बताया कि जब पहली बार उन्होंने अकेले में लव पढ़ा तो एक अजीब सा सकून दिल को मिला। ऐसा लगा, जैसे सपनों का राजकुमार मिल गया। इसके बाद दोनों में चोरी छिपे मुलाकात भी होने लगी।
Success Love Story: परीक्षा की घड़ी और पहला कदम
दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड का वक्त था। देहरादून की पहाड़ियों से टकराकर आने वाली ठंडी हवाएं बदन कपा रही थीं, लेकिन मुकेश के दिल में एक अलग ही बेचैनी और गर्माहट थी। एक दोपहर, जब गुनगुनी धूप खिली थी, लक्ष्मी के पिता अपने घर की छत पर धूप सेक रहे थे। मुकेश ने तय किया कि अब और देर करना ठीक नहीं। वे अपने एक करीबी रिश्तेदार को साथ लेकर, पूरे साहस के साथ लक्ष्मी के घर उनका हाथ मांगने पहुंच गए।
छत पर बैठे लक्ष्मी के पिता के सामने जब मुकेश के रिश्तेदार ने शादी की बात रखी, तो माहौल में एक पल के लिए खामोशी छा गई। पिता ने मुकेश को ऊपर से नीचे तक देखा—एक बेरोजगार युवा, जो राज्य आंदोलन में तो सक्रिय था, लेकिन जिसके पास भविष्य का कोई ठोस ठिकाना नहीं था। एक पिता की फिक्र उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। उन्होंने बड़ी शालीनता से बात को संभालते हुए कहा:
“बेटे, तुम्हारी बात तो ठीक है। लेकिन मैं अकेले इस पर फैसला नहीं ले सकता। देखते हैं, परिवार के बाकी लोगों से बात करके तुम्हें बताएंगे।”
यह जवाब न तो पूरी तरह ‘हां’ था और न ही ‘ना’। मुकेश और लक्ष्मी के लिए यह परीक्षा की घड़ी की शुरुआत थी।
Success Love Story: विरोध के सुर और अपनों का साथ
कहते हैं कि एक सफल लव स्टोरी में जब तक बाधाएं न आएं, तब तक प्यार की गहराई का पता नहीं चलता। लक्ष्मी के घर में जब मुकेश के रिश्ते का जिक्र हुआ, तो उम्मीद के विपरीत विरोध के सुर बुलंद हो गए। लक्ष्मी के भाइयों और भाभियों ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि मुकेश के पास कोई पक्की नौकरी नहीं है, वह किराए के मकान में रहता है, ऐसे में वे अपनी बहन का हाथ उसके हाथ में कैसे सौंप दें?
धीरे-धीरे पूरे परिवार ने इस शादी से साफ इनकार कर दिया। लक्ष्मी के सामने जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक तरफ उनका वो प्यार था जिस पर उन्हें खुद से ज्यादा भरोसा था, और दूसरी तरफ उनका अपना परिवार।
जब चारों तरफ अंधेरा दिखने लगा, तब उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आईं लक्ष्मी की बड़ी बहन संतोष और उनके जीजा दीपक जी। संतोष और दीपक ने मुकेश के भोलेपन और लक्ष्मी के सच्चे प्यार को भांप लिया था। उन्होंने लक्ष्मी के आंसू पोंछे और उसके सिर पर हाथ रखकर भरोसा दिलाया:
“तू चिंता मत कर लक्ष्मी। अगर तेरा प्यार सच्चा है और मुकेश एक भला इंसान है, तो हम इस शादी में तुम्हारा पूरा सहयोग करेंगे। दुनिया चाहे जो कहे, हम तुम्हारे साथ खड़े हैं।”
और उन्होंने केवल कहा ही नहीं, बल्कि करके भी दिखाया। परिवार के विरोध के बावजूद, बड़ी बहन संतोष और जीजा दीपक ने आगे बढ़कर सारी जिम्मेदारियां उठाईं और मुकेश व लक्ष्मी की शादी का पूरा प्रबंध किया। रीति-रिवाजों के साथ दोनों हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए।
Success Love Story: एक और प्रेम कहानी का आगाज़
मुकेश और लक्ष्मी की शादी के इस खुशनुमा माहौल में, पर्दे के पीछे एक और खूबसूरत कहानी की बुनियाद रखी जा रही थी। मुकेश के भांजे, महेश, जो उस वक्त फोटोग्राफी का शौक रखते थे और नए-नए इस क्षेत्र में आए थे, कैमरे के साथ पूरी शादी में मुस्तैद थे। मुकेश और लक्ष्मी की शादी के हर एक जज्बात, हर एक रस्म को महेश अपने कैमरे में कैद कर रहे थे।
इसी शादी में लक्ष्मी की एक बेहद खास और खूबसूरत सहेली आई हुई थी- रीतू। शादी की रस्मों के बीच, जब महेश कैमरे का लेंस घुमाते, तो अनजाने में ही सही, उनका फोकस रीतू पर जाकर टिक जाता।
वहीं रीतू भी उस लड़के की सादगी और लगन को देख रही थी जो इतनी खूबसूरती से यादों को कैमरे में संजो रहा था। महेश और रीतू की नजरें कई बार मिलीं। दोनों के दिलों में एक हल्की सी हलचल शुरू हो चुकी थी। यह मुकेश और लक्ष्मी की शादी का ही असर था कि वहां एक और नई प्रेम कहानी का चुपके से आगाज़ हो गया था। खैर, इस पर फिर कभी विस्तार से बात करेंगे।
Success Love Story: पहले मिलन का वो जादुई पल
शादी के बाद, मुकेश अपनी नई-नवेली दुल्हन लक्ष्मी को लेकर मोहित नगर स्थित अपने उसी किराए के छोटे से घर में आए। मां और बड़ी बहन बिमलेश ने दोनों का स्वागत किया। भले ही घर छोटा था और सुख-सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन वहां अपनों का प्यार और खुशियों की कोई कमी नहीं थी।
रात ढली, तो मुकेश और लक्ष्मी जिंदगी के उस मोड़ पर थे जहां से उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत होनी थी। लक्ष्मी घूंघट ओढ़े बैठी थीं। उनके दिल की धड़कनें तेज थीं, ठीक वैसी ही, जैसी उस दिन थीं जब उन्होंने पहली बार मुकेश का लव लेटर हाथ में लिया था।
मुकेश ने बड़ी कोमलता से लक्ष्मी का घूंघट उठाया। मुकेश ने लक्ष्मी के कांपते हुए हाथों को अपने हाथों में लिया और बेहद प्यार से कहा-
“लक्ष्मी, आज मेरे पास तुम्हें देने के लिए कोई आलीशान महल या ऐश-ओ-आराम की चीजें नहीं हैं। मैं आज भी संघर्ष कर रहा हूं। लेकिन मैं तुमसे वादा करता हूं कि मेरे दिल की हर धड़कन पर सिर्फ तुम्हारा हक होगा। सुख हो या दुख, मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूंगा।” लक्ष्मी ने अपनी भीगी आंखें उठाईं और मुकेश के सीने से लग गईं।
Success Love Story: गृहस्थी का सफर और एक महान त्याग
वक्त का पहिया घूमता रहा। शादी के कुछ समय बाद ही लक्ष्मी और मुकेश के आंगन में किलकारी गूंजी। लक्ष्मी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम रखा गया ‘मयंक’। मयंक के आने से घर की खुशियां दोगुनी हो गई थीं। (वक्त कैसे पंख लगाकर उड़ जाता है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज वही मयंक करीब तीस साल का हो चुका है, और दिलचस्प बात यह है कि उसने भी अपने माता-पिता की राह पर चलते हुए अपनी कॉलेज फ्रेंड से लव मैरिज की है)।
मयंक के जन्म के करीब दो साल बाद, लक्ष्मी ने एक और बेटे को जन्म दिया। इस बच्चे के जन्म के साथ ही मुकेश और लक्ष्मी की जिंदगी का वो अध्याय शुरू हुआ, जिसने समाज के सामने इंसानियत और त्याग की एक मिसाल पेश की।
मुकेश की बड़ी बहन बिमलेश, जो देवबंद में रहती थीं, उनकी शादी को कई साल बीत जाने के बाद भी कोई औलाद नहीं थी। एक औरत और एक बहन का सूना आंगन देखकर मुकेश और लक्ष्मी का दिल पसीज जाता था।
दोनों ने आपस में बात की और एक ऐसा फैसला लिया जिसे लेने के लिए बहुत बड़े जिगर की जरूरत होती है। मुकेश और लक्ष्मी ने अपने जिगर के टुकड़े, अपने दूसरे नवजात बेटे को अपनी बहन बिमलेश को गोद दे दिया।
जब लक्ष्मी ने उस बच्चे को रोते हुए दिल से अपनी जेठानी/ननद बिमलेश की गोद में रखा, तो बिमलेश की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। इस महान त्याग ने बिमलेश के सूने आंगन को बच्चे की किलकारियों से भर दिया।
यह मुकेश और लक्ष्मी की महानता ही थी कि उन्होंने अपने खुद के बच्चे को दूर कर एक बहन की जिंदगी में उजाला कर दिया। इसके बाद, समय अपनी रफ्तार से चलता रहा और आगे चलकर लक्ष्मी ने एक प्यारी सी बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम ‘समीक्षा’ रखा गया।
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Success Love Story: संघर्ष के काले बादल और लक्ष्मी की अग्निपरीक्षा
परिवार बढ़ रहा था, और इसके साथ ही जिम्मेदारियां भी। मुकेश अभी भी स्थाई रोजगार की तलाश में थे। उन्होंने परिवार का पेट पालने और घर की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए हर छोटा-मोटा काम करना शुरू किया।
कभी उन्होंने लॉटरी के टिकट बेचे, तो कभी कुछ और काम किया। मुकेश के मन में कोई हिचकिचाहट या शर्म नहीं थी; उनके लिए अपने परिवार की खुशियां सर्वोपरि थीं। लक्ष्मी ने भी कभी कम साधनों की शिकायत नहीं की, बल्कि हर मुश्किल में मुस्कुराकर मुकेश का हौसला बढ़ाया।
इसी बीच, सालों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड एक अलग राज्य बन गया। राज्य तो बन गया, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ था। अब एक नया आंदोलन शुरू हुआ- उत्तराखंड के आंदोलनकारी युवाओं को सरकारी नौकरी देने की मांग का आंदोलन।
मुकेश, जो शुरुआत से ही इस मिट्टी के हक के लिए लड़ रहे थे, इस आंदोलन में भी कूद पड़े। हालात धीरे-धीरे गंभीर होते गए। सरकार और प्रशासन का रवैया आंदोलनकारियों के प्रति उदासीन था। एक दिन, नौकरी की मांग और सरकार की बेरुखी से आहत होकर, मुकेश ने आंदोलन के दौरान आत्मदाह (खुद को आग लगाने) का प्रयास कर डाला। इस घटना से हड़कंप मच गया और पुलिस ने मुकेश को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
यह लक्ष्मी की जिंदगी का सबसे कठिन और अंधकारमय दौर था। पति जेल में था, घर में बूढ़ी सास और छोटे-छोटे बच्चों की जिम्मेदारी अकेले लक्ष्मी के कंधों पर आ गई थी। घर में पैसों की तंगी थी और समाज के लोग तरह-तरह की बातें बना रहे थे। लेकिन लक्ष्मी, जो एक फौजी की बेटी की तरह मजबूत और मुकेश के प्यार में समर्पित थीं, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
लक्ष्मी ने आंसुओं को पोंछा, अपनी चूड़ियां और जो कुछ भी थोड़ा-बहुत संचय था, उसे दांव पर लगाया, लोगों से मिन्नतें कीं और किसी न किसी तरह रुपयों का इंतजाम करके अपने पति मुकेश की जमानत कराई। जब मुकेश जेल से बाहर आए और उन्होंने लक्ष्मी के चेहरे पर थकान लेकिन आंखों में वही पुराना भरोसा देखा, तो मुकेश की आंखों से भी आंसू छलक आए।
Success Love Story: संघर्ष से सफलता का सवेरा
कहते हैं कि रात चाहे कितनी भी लंबी और काली क्यों न हो, सुबह का सूरज जरूर निकलता है। मुकेश और लक्ष्मी के त्याग, संघर्ष और सच्चे प्यार की तपस्या आखिरकार रंग लाई।
सरकार को आंदोलनकारियों की मांग के आगे झुकना पड़ा। मुकेश वर्मा को उनके आंदोलनकारी कोटे और योग्यता के बल पर संभागीय परिवहन विभाग (RTO) में सरकारी नौकरी मिल गई। धीरे-धीरे मुकेश अपनी ईमानदारी और मेहनत की बदौलत प्रमोट होकर आज विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
आज का समय उस दौर से बिल्कुल अलग है। वो किराए का छोटा सा कमरा अब एक आलीशान और खुशहाल आशियाने में बदल चुका है। बेटा मयंक, जो अब बड़ा और आत्मनिर्भर हो चुका है, उसकी शादी हो चुकी है और वह अपनी पत्नी (जो उसकी कॉलेज फ्रेंड थी) के साथ एक सुखद जीवन जी रहा है। बेटी समीक्षा भी पढ़-लिखकर एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी में बहुत ही बढ़िया और सम्मानजनक जॉब कर रही है।
देहरादून के मोहित नगर की गलियों से शुरू हुई यह दास्तान आज सफलता के उस मुकाम पर है, जहां मुकेश और लक्ष्मी जब भी अपने अतीत को मुड़कर देखते हैं, तो उनकी आंखों में आंसू तो आते हैं, लेकिन वो आंसू दुख के नहीं बल्कि गर्व के होते हैं।
उनका यह सफर उन तमाम युवाओं के लिए एक जिंदा मिसाल है जो यह सोचते हैं कि प्यार सिर्फ अच्छे दिनों का साथी है। मुकेश और लक्ष्मी ने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे का हाथ थामकर दुनिया जीत लेने का नाम है। Success Love Story
Story BY- Mahesh Kumar Shiva
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