पंजाब में संगरूर के गांव बखोपीर में जब सुबह का सूरज उगता था, तो कुलविंदर सिंह के छोटे से घर में किलकारियां गूंज उठती थीं। छह साल की जसनूर, पांच साल का अरमानदीप और ढाई साल का नटखट रिहानदीप—ये तीन मासूम चिड़ियां अपने घर के आंगन की जान थीं।
घर की माली हालत बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन खुशियों की कोई कमी न थी। पति कुलविंदर ट्रक चलाकर रात-दिन पसीना बहाता था ताकि अपने बच्चों को एक अच्छा भविष्य दे सके। वह अक्सर कई-कई दिनों तक घर से दूर पंजाब की सड़कों पर ट्रक दौड़ाता, लेकिन जब भी लौटता, उसके हाथों में बच्चों के लिए कोई न कोई खिलौना या उनकी पसंद की टॉफी जरूर होती।
पत्नी लवप्रीत घर पर रहती थी। साल 2018 में जब उसकी शादी हुई थी, तब वह महज 18 साल की थी। लवप्रीत के लिए जीवन साधारण चल रहा था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, अकेलापन और स्मार्टफोन की आभासी दुनिया उसके जीवन पर हावी होने लगी।

Instagram Romance डिजिटल स्क्रीन और धोखे की शुरुआत
मार्च 2026 के उन दिनों में, जब वसंत की हवाएं ढल रही थीं, लवप्रीत ने अपने खाली समय को काटने के लिए इंस्टाग्राम पर रील्स देखना और वक्त बिताना शुरू किया। इसी आभासी समंदर में तैरते हुए उसकी मुलाकात फाजिल्का के जलालाबाद निवासी हरजीत सिंह से हुई। हरजीत एक निजी संस्था में काम करता था।
शुरुआत में मामूली चैट से शुरू हुई यह बातचीत जल्द ही घंटों लंबे फोन कॉल्स में बदल गई। हरजीत की मीठी-मीठी बातें लवप्रीत को एक अलग ही दुनिया का एहसास कराने लगीं। लवप्रीत यह भूलने लगी कि उसके तीन मासूम बच्चे हैं जो अपनी मां के आंचल की छांव में सांस ले रहे हैं और एक पति है जो दूर कहीं किसी हाईवे पर सिर्फ उनके सपनों को पूरा करने के लिए नींद से समझौता कर रहा है।
धीरे-धीरे यह जान-पहचान एक गहरे अफेयर में बदल गई। दोनों के बीच चोरी-छिपे मुलाकातें होने लगीं। लवप्रीत अपने तीनों मासूमों को सहेली के पास छोड़ देती और अमृतसर जाने का बहाना बनाकर हरजीत से मिलने पहुंच जाती।
स्क्रीन पर नजर आने वाला प्यार अब लवप्रीत के दिल दिमाग पर एक ऐसा जुनून बन चुका था, जिसने उसकी ममता, उसके विवेक और उसकी इंसानियत को पूरी तरह धुंधला कर दिया था।

Instagram Romance सपनों का महल और आड़े आते तीन मासूम
जैसे-जैसे महीने बीतते गए, लवप्रीत और हरजीत का रिश्ता और गहरा होता गया। लवप्रीत अब उस छोटे से गांव और अपने पति कुलविंदर के साथ अपनी जिंदगी नहीं बिताना चाहती थी। वह हरजीत के साथ एक नई दुनिया बसाना चाहती थी। लेकिन उस नई दुनिया की तरफ जाने वाले रास्ते में तीन मासूम जिंदगियां खड़ी थीं—जसनूर, अरमानदीप और रिहानदीप।
लवप्रीत के मन में एक अजीब सा अंधकार पनपने लगा। वह किसी भी कीमत पर उस घर को छोड़कर भागना चाहती थी। उसने अपने दिमाग में एक खौफनाक ताना-बाना बुना।
बाद में पुलिस पूछताछ में उसने दावा किया कि वह बच्चों की जान नहीं लेना चाहती थी, वह सिर्फ उन्हें इस हद तक बीमार करना चाहती थी कि उसका पति कुलविंदर बच्चों की देखभाल और अस्पताल के चक्करों में बुरी तरह उलझ जाए। और उसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर वह चुपचाप अपने प्रेमी हरजीत के साथ फरार हो जाए।
पर क्या कोई मां अपने ही बच्चों को तड़पाने के लिए ज़हर जैसा जानलेवा कदम उठा सकती है? यह सवाल आज भी इंसानियत को शर्मसार करता है।

Instagram Romance रक्षाबंधन का दिन और वो जहरीली मिठाई
अगस्त का महीना था। रक्षाबंधन का पावन त्यौहार था—वह दिन जो भाई-बहन के अटूट प्यार और रक्षा के संकल्प का प्रतीक होता है। 28 अगस्त को लवप्रीत की ननद और नंदोई घर आए। पूरा परिवार खुश था। बच्चों के चेहरे पर त्यौहार की रौनक थी। जाते-जाते ननद-नंदोई प्यार से बच्चों के लिए मिठाई के डिब्बे देकर गए।
लेकिन लवप्रीत के दिमाग में तो शैतान सवार था। मेहमानों के जाते ही उसने रसोई की आलमारी में रखी कीटनाशक की शीशी निकाली। उसने बड़ी ही बेरहमी से उस मिठाई में ज़हर मिला दिया।
“बेटा, आओ मिठाई खा लो…” लवप्रीत की आवाज़ में उस दिन ममता की जगह मौत की कड़वाहट थी।
छह साल की जसनूर, पांच साल का अरमानदीप और ढाई साल का नटखट रिहानदीप—तीनों दौड़े चले आए। जिस मां की गोदी में सिर रखकर वे दुनिया भर का सुकून महसूस करते थे, उसी मां के हाथों से उन्होंने ज़हर से सनी मिठाई का निवाला खा लिया। मिठाई खाते ही तीनों बच्चों की मुस्कान अचानक चीखों में बदल गई।

Instagram Romance अस्पताल के गलियारे और एक–एक करके बुझते तीन चिराग
मिठाई खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों के पेट में भयानक दर्द होने लगा। वे तड़पने लगे, उनके मुंह से झाग आने लगा। घर में चीख-पुकार मच गई। ट्रक पर मौजूद कुलविंदर को जब फोन गया, तो उसके पांव तले जमीन खिसक गई। वह बदहवास भागता हुआ घर पहुंचा।
बच्चों की हालत इतनी नाजुक थी कि उन्हें तुरंत चंडीगढ़ पीजीआई (PGI) रेफर किया गया। अस्पताल के सफेद गलियारों में कुलविंदर अपने बच्चों को बचाने के लिए डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़ रहा था, जबकि लवप्रीत अंदर ही अंदर अपने प्लान के सफल होने का इंतजार कर रही थी।
लेकिन ज़हर की खुराक बहुत ज्यादा थी।
29 और 30 अगस्त की दरमियानी रात को पांच साल के अरमानदीप ने तड़प-तड़पकर अपने पिता की बांहों में दम तोड़ दिया। कुलविंदर का कलेजा फट गया। बदकिस्मत पिता को लगा कि शायद यह कोई दैवीय प्रकोप या अचानक फैली कोई बीमारी है। सदमे में डूबे परिवार ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए मासूम अरमानदीप का अंतिम संस्कार कर दिया।
अभी एक बच्चे की चिता की राख ठंडी भी नहीं हुई थी कि 2 सितंबर को छह साल की नन्ही जसनूर की सांसें भी उखड़ गईं। एक के बाद एक दो बच्चों की मौत ने पूरे गांव को सन्न कर दिया। कुलविंदर अपनी सुध-बुध खो बैठा था। लेकिन लवप्रीत की आंखों में आंसू का एक कतरा तक नहीं था।
तीसरा और सबसे छोटा बच्चा, ढाई साल का रिहानदीप, जो अभी ठीक से चलना भी नहीं सीखा था, चंडीगढ़ पीजीआई के आईसीयू में ज़िंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। आखिर 11 सितंबर को उस मासूम ने भी अपनी आंखें हमेशा-हमेशा के लिए मूंद लीं।
एक ही पखवाड़े में एक हंसता-खेलता परिवार पूरी तरह तबाह हो गया। कुलविंदर का घर श्मशान बन चुका था।

Instagram Romance शक की सुई और एक वायरल ऑडियो का खौफनाक सच
दो बच्चों की मौत के बाद ही पुलिस और डॉक्टरों को दाल में कुछ काला नजर आने लगा था। एक ही घर के तीन बच्चे एक के बाद एक क्यों मर रहे थे?
भवानीगढ़ थाने के एसएचओ यशपाल शर्मा की देखरेख में पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू की। पुलिस का पहला शक मिठाई पर गया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रक्षाबंधन पर मिठाई के दो डिब्बे आए थे। एक डिब्बा कुलविंदर के परिवार के पास था और दूसरा डिब्बा परिवार के दूसरे सदस्यों के बच्चों ने खाया था। ताज्जुब की बात यह थी कि दूसरा डिब्बा खाने वाले सभी बच्चे पूरी तरह स्वस्थ थे।
इसका सीधा मतलब था कि ज़हर मिठाई की दुकान से नहीं आया था, बल्कि घर के भीतर ही मिलाया गया था।
पुलिस ने जसनूर और रिहानदीप का पोस्टमॉर्टम कराया। रिपोर्ट आते ही डॉक्टरों ने साफ कर दिया—दोनों मासूमों की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि शरीर में गहरे ज़हर (कीटनाशक) के जाने से हुई है।
इसी बीच, पुलिस के हाथ एक बेहद चौंकाने वाली कॉल रिकॉर्डिंग लगी। यह रिकॉर्डिंग लवप्रीत और उसकी एक परिचित महिला के बीच की थी।
लवप्रीत: “हेलो, हां फोन ता चक्क ले…” (हेलो, हां फोन तो उठा ले…)
दूसरी महिला: “हां बोल, चक्क लेया, चक्क लेया, हां दस।” (हां बोल, उठा लिया, बता।)
लवप्रीत: “तैनू पता है वो दवाई कित्थों मिलदी है?” (तुझे पता है वो दवाई कहां मिलती है?)
दूसरी महिला: “ना बहन मैनू ता नहीं पता कित्थों मिलदी है, मैं ता वेखी भी नहीं दवाई… किहड़ी दवाई भला?” (ना बहन मुझे तो नहीं पता कहां मिलती है, मैंने तो देखी भी नहीं… कौन सी दवाई?)
लवप्रीत: “मैं ता इस तरह कहनी हां… कोई मरदे-मरान वाली दवाई कित्थों मिलदी है?” (मैं तो ऐसे कह रही थी… कोई मारने–मरने वाली दवाई कहां मिलती है?)
दूसरी महिला (चौंककर): “हाए हाए! बहन मैनू ता नहीं पता… पता करके दसदी हां।” (हाए हाए! बहन मुझे तो नहीं पता… पता करके बताती हूं।)
इस ऑडियो रिकॉर्डिंग ने लवप्रीत का सारा नकाब उतारकर फेंक दिया। वह ज़हर की तलाश कर रही थी और उसकी साजिश बहुत पहले से बुनी जा रही थी।

Instagram Romance खाकी का शिकंजा और बेनकाब हुई मां
पुलिस ने बिना देर किए कुलविंदर और लवप्रीत को हिरासत में लिया। दोनों से अलग-अलग कमरों में कड़ाई से पूछताछ की गई।
जब पुलिस ने लवप्रीत के सामने मिठाई के दूसरे डिब्बे की सच्चाई, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और उसकी कॉल रिकॉर्डिंग रखी, तो वह टूट गई। उसकी जुबान लड़खड़ाने लगी। जिस मां ने तीन मासूमों को नवजात से बड़ा किया था, उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
लवप्रीत ने रोते हुए पुलिस से कहा, “मैं सिर्फ उन्हें बीमार करना चाहती थी ताकि कुलविंदर उनकी देखभाल में लग जाए और मैं हरजीत के साथ भाग जाऊं…”
लेकिन पुलिस कानून की नजर से देख रही थी। एक मां जिसने अपने ही हाथों से अपने बच्चों को ज़हर दिया, उसकी इस दलील में कोई सच्चाई नज़र नहीं आ रही थी। पुलिस ने लवप्रीत और उसके प्रेमी हरजीत सिंह के खिलाफ हत्या (धारा 302) और साजिश रचने का मामला दर्ज कर लवप्रीत को गिरफ्तार कर लिया। प्रेमी हरजीत फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में छापेमारी जारी है।
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आज संगरूर का वो घर पूरी तरह वीरान है। कुलविंदर सिंह अपने खाली आंगन को देखता है तो उसे अपने बच्चों की हंसी की आवाजें सुनाई देती हैं। जो खिलौने कल तक बच्चों के हाथों में थे, आज वे कमरे के एक कोने में धूल खा रहे हैं।
एक बाप जिसने दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार को संजोया था, आज उसके पास रोने के लिए भी कोई कंधा नहीं बचा है।
यह दर्दनाक कहानी सिर्फ एक अपराध की दास्तान नहीं है, बल्कि यह उस कड़वी हकीकत का आईना है जहाँ सोशल मीडिया की बनावटी दुनिया इंसान के रिश्तों, उसकी नैतिकता और यहाँ तक कि मां की पवित्र ममता पर भी भारी पड़ रही है। इंस्टाग्राम के कुछ हफ्तों के प्यार के लिए तीन मासूम कलियों को खिलने से पहले ही मसल दिया गया।
लवप्रीत आज सलाखों के पीछे है, लेकिन यह सवाल पूरे समाज के सीने में खंजर की तरह चुभ रहा है—“आखिर यह कैसा प्यार था, जिसने एक मां से उसकी ममता छीन ली और तीन बेगुनाह मासूमों को मौत की नींद सुला दिया?” Instagram Romance
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