Karwa Chauth Story रिया और रोहन की शादी को अभी महज़ दो साल हुए थे। दोनों एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी में उच्च पदों पर कार्यरत थे। जहाँ एक तरफ रोहन एक शांत, सुलझा हुआ और विचारशील इंसान था, वहीं रिया ऊर्जा से भरपूर, महत्वाकांक्षी और अपनी परंपराओं को दिल से चाहने वाली महिला थी। Karwa Chauth Story
कॉर्पोरेट जगत की इस आपाधापी में, जहाँ लोग अक्सर अपनी जड़ों को भूल जाते हैं, रिया के लिए करवा चौथ केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि रोहन के प्रति अपने अगाध प्रेम, निष्ठा और समर्पण को व्यक्त करने का एक पावन माध्यम था। Karwa Chauth Story
शादी का यह दूसरा करवा चौथ था। पिछला करवा चौथ तो नए-नए रिश्ते के उत्साह में बीत गया था, लेकिन इस बार परिस्थितियाँ थोड़ी कठिन थीं। कंपनी में एक नए विदेशी क्लाइंट का बड़ा प्रोजेक्ट लॉन्च होने वाला था, जिसकी मुख्य ज़िम्मेदारी रिया के कंधों पर थी।
सुबह के तीन बज रहे थे। रोहन की माँ ने गाँव से फोन पर ही सरगी के सारे दिशा-निर्देश दे दिए थे। रोहन ने नींद भरी आँखों से उठकर रसोई में रिया के लिए मेवे, फल और मीठी मट्ठी की थाली सजाई। Karwa Chauth Story
“रिया, सुबह के सवा तीन बज रहे हैं। उठ जाओ, सरगी का समय हो गया है,” रोहन ने नर्मी से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।
रिया ने आँखें मलते हुए उठकर रोहन को देखा। उसके चेहरे पर हल्की सी थकान थी, लेकिन आँखों में एक अलग सी चमक थी। उसने सरगी खाई और पानी पीकर अपने दिन की शुरुआत की।
“रिया, क्या आज सच में पूरे दिन ऑफिस का काम करना ज़रूरी है? तुम लीव क्यों नहीं ले लेतीं? बिना पानी पिए 12 घंटे लैपटॉप के सामने बैठना आसान नहीं होगा,” रोहन ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा।
“रोहन, यह लॉन्च मेरे करियर के लिए बहुत अहम है। और रही बात व्रत की, तो जब दिल में प्यार और नीयत में सच्चाई हो, तो भगवान हर मुश्किल आसान कर देते हैं,” रिया ने रोहन का हाथ चूमते हुए मुस्कुराकर कहा।
Karwa Chauth Story: जिम्मेदारियों का बोझ और एक ख़ामोश चिंता
सुबह के आठ बजते ही रिया का लैपटॉप नोटिफिकेशन और ईमेल्स की आवाज़ों से बजने लगा। सुबह नौ बजे से रात के आठ बजे तक लगातार ज़ूम कॉल्स, प्रेजेंटेशन्स और टीम मीटिंग्स की कतार लगी हुई थी।
जैसे-जैसे दिन ढलता गया, सूरज की गर्मी के साथ-साथ रिया के शरीर की थकावट भी बढ़ने लगी। बिना अन्न और जल के लगातार बोलना और स्क्रीन पर आँखें टिकाए रखना उसकी परीक्षा ले रहा था। दोपहर के दो बजे तक उसका सिर दर्द से फटने लगा था और होठ सूखने लगे थे।
उधर रोहन ने उस दिन ऑफिस से कैजुअल लीव ली थी। वह चाहता तो दोस्तों के साथ बाहर जा सकता था या आराम से सो सकता था, लेकिन उसका पूरा ध्यान रिया पर ही टिका था। वह दिन भर चुपचाप घर में घूमता रहा।
जब रिया मीटिंग में होती, तो रोहन धीरे से कमरे में आता, एसी का तापमान सही करता, उसके थके हुए पैरों के पीछे तकिया लगा देता और स्क्रीन की ब्राइटनेस कम कर देता।
दोपहर तीन बजे की एक प्रेजेंटेशन के दौरान रिया की आवाज़ हल्की सी लड़खड़ाने लगी। रोहन ने तुरंत किचन में जाकर एक गीला तौलिया और बर्फ का पानी तैयार किया। जैसे ही मीटिंग खत्म हुई, रोहन ने वह गीला तौलिया रिया की गर्दन और माथे पर रख दिया।
“रिया, प्लीज… मेरी तरफ देखो,” रोहन ने उसके पास बैठकर बड़ी संजीदगी से कहा। “अगर तुम्हारी तबीयत बिगड़ रही है, तो थोड़ा सा पानी पी लो। कोई भगवान तुमसे नाराज़ नहीं होगा। मेरे लिए तुम्हारी लंबी उम्र से ज़्यादा ज़रूरी तुम्हारी सेहत है।”
रिया ने अपनी सूखी आँखों से रोहन को देखा। उसने रोहन के हाथ को अपने दोनों हाथों में लिया और बेहद प्यार से बोली, “रोहन, यह सिर्फ पानी न पीने का नाम नहीं है। यह मेरे लिए एक विश्वास है। जब मैं तुम्हारे लिए यह थोड़ा सा कष्ट सहती हूँ, तो मुझे महसूस होता है कि हमारा रिश्ता कितना गहरा है। तुम बस मेरे साथ रहो, मुझे और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है।”
रोहन ने कुछ नहीं कहा। उसने बस रिया को देखा और गहरे विचार में डूब गया।
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Karwa Chauth Story: ढलती शाम और सुहाग का शृंगार
शाम के सात बज चुके थे। ऑफिस का आखिरी कॉल खत्म होते ही रिया ने राहत की साँस ली। उसका शरीर पूरी तरह टूट रहा था, लेकिन मन में पूजा का उत्साह वैसा ही बना हुआ था। वह अपने कमरे में गई और उसने अपनी आलमारी से लाल रंग की कांजीवरम साड़ी निकाली, जो उसने अपनी शादी के रिसेप्शन में पहनी थी।
उसने अपने हाथों में काँच की लाल चूड़ियाँ पहनीं, बालों में मोगरे का गजरा सजाया, माथे पर लाल बिंदी लगाई और पैरों में महावर लगाया। थकावट के बावजूद जब उसने शीशे में खुद को देखा, तो उसके चेहरे पर सुहागन का वो नूर झलक रहा था जो केवल सच्चे प्रेम से आता है।
दूसरी तरफ, रोहन भी तैयार हो चुका था। उसने सफेद रंग का कॉटन का कुर्ता-पायजामा पहना था, जिसमें वह बेहद सौम्य और रोबदार लग रहा था।
जब रिया तैयार होकर बाहर आई, तो रोहन उसे देखता ही रह गया।
“क्या देख रहे हो ऐसे?” रिया ने थोड़ा शर्माते हुए पूछा।
“यही कि दो साल बाद भी जब तुम लाल साड़ी पहनती हो, तो मेरी धड़कनें वैसे ही तेज़ हो जाती हैं जैसे पहली बार हुई थीं,” रोहन ने उसके करीब आकर उसके गालों को छूते हुए कहा।
रिया ने अपना सिर रोहन के सीने पर टिका दिया। रोहन की छाती की धड़कन सुनकर उसकी दिन भर की पूरी थकान जैसे एक पल में छूमंतर हो गई।
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Karwa Chauth Story: बालकनी का सन्नाटा और छलनी का जादू
रात के आठ बजने वाले थे। दोनों अपने फ्लैट की विशाल बालकनी में आए। पूरा शहर नीचे जगमगा रहा था और आसमान में धीरे-धीरे चाँद अपनी रोशनी बिखेरने के लिए तैयार हो रहा था।
रिया ने पूजा की पीतल की थाली सजाई—उसमें दीया जलाया, चावल, फूल, रोली रखी और जल से भरा तांबे का करवा सजाया। साथ ही वह छलनी भी रखी, जिसकी ओट से उसे अपने चाँद का दीदार करना था।
“लगता है आज चाँद भी तुमसे मुकाबला करने में थोड़ा वक्त लगा रहा है,” रोहन ने रिया की कमर में हाथ डालते हुए मज़ाक किया।
“बस कुछ ही देर रोहन, फिर मुझे पानी पिला देना, मुझे बहुत तेज़ प्यास लगी है,” रिया ने लाड़ से रोहन के कंधे पर सिर रखते हुए कहा।
तभी काले बादलों का घूंघट हटाकर आसमान में दूधिया चाँद मुस्कुराने लगा।
रिया के चेहरे पर एक असीम शांति छा गई। उसने सबसे पहले हाथ जोड़कर चाँद को प्रणाम किया और तांबे के करवे से जल अर्पित किया। इसके बाद उसने पूजा की थाली उठाई और दीया जलाकर आरती की। Karwa Chauth Story
अब वह पल आ गया था जिसका इंतज़ार वह सुबह से कर रही थी। रिया ने कांपते हाथों से छलनी उठाई। उसने छलनी के एक तरफ जलते हुए दीये की लौ रखी और दूसरी तरफ से आसमान के चाँद को देखा।
फिर, धीरे से छलनी का रुख रोहन के चेहरे की तरफ मोड़ दिया।
दीये की पीली रोशनी में रोहन का चेहरा किसी देव प्रतिमा जैसा लग रहा था। उसकी आँखों में रिया के लिए असीम सम्मान, प्यार और एक अजीब सी नमी थी। रिया ने छलनी नीचे की और रोहन के पैर छूने के लिए झुकी।
लेकिन रोहन ने उसे झुकने नहीं दिया। उसने तुरंत रिया की बाहों को थामकर उसे ऊपर उठाया और सीधे अपने गले से लगा लिया।
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Karwa Chauth Story: बराबरी का सच और अटूट बंधन
“रोहन, पहले पूजा पूरी कर लेने दो… फिर गले लगाना,” रिया ने मुस्कुराते हुए कहा।
रोहन ने थाली से जल का गिलास उठाया। उसने एक चम्मच पानी लिया और रिया के होठों से लगा दिया। जैसे ही पानी की वो ठंडी बूंदें रिया के सूखे होठों को छूती हुई गले से नीचे उतरीं, रिया को लगा जैसे उसमें नई जान आ गई हो।
रोहन ने मिठाई का एक टुकड़ा भी रिया को खिलाया।
“चलो, अब मेरी पूजा पूरी हुई। अब तुम भी कुछ खा लो,” रिया ने राहत की साँस लेते हुए कहा।
लेकिन रोहन ने जो किया, उसकी उम्मीद रिया ने सपने में भी नहीं की थी।
रोहन ने पानी का वही गिलास अपने होठों से लगाया और एक बड़ा घूँट पी लिया। फिर उसने थाली से मिठाई उठाकर खुद अपने मुँह में रख ली।
रिया यह सब देखकर हैरान रह गई। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
“रोहन! यह तुम क्या कर रहे हो? तुमने बिना हाथ-मुँह धोए, बिना कुछ सोचे पानी पी लिया? और तुमने तो सुबह से कुछ… रुकिए!” रिया अचानक रुक गई। उसने रोहन के चेहरे को गौर से देखा।
रोहन की रंगत थोड़ी उड़ी हुई थी, उसके होठ भी सूखे थे और उसके चेहरे पर भी दिन भर की थकान का असर साफ़ दिख रहा था।
“रोहन… सच-सच बताओ, क्या तुमने दिन में कुछ खाया था?” रिया की आवाज़ में घबराहट और शक साफ झलक रहा था।
रोहन ने अपनी नज़रे झुका लीं और चुप रहा।
“रोहन! मैं तुमसे कुछ पूछ रही हूँ! क्या तुमने दोपहर में खाना खाया था?” रिया ने उसके कुर्ते को पकड़कर हिलाया।
रोहन ने रिया के दोनों हाथों को अपनी हथेलियों में थाम लिया और बेहद नर्मी से कहा, “रिया… जब मेरी पत्नी मेरी लंबी उम्र के लिए, मेरी सलामती के लिए दिन भर बिना अन्न-जल के तड़प सकती है, तो क्या मेरा यह फर्ज नहीं बनता कि मैं भी उसके साथ उस दर्द को बाँटूँ?”
रिया की आँखों से आँसुओं की धारा बह निकली, “तुम… तुमने भी व्रत रखा था?”
“हाँ रिया,” रोहन ने मुस्कुराते हुए उसके आँसू पोंछे। “मैंने सुबह सरगी के वक्त ही तय कर लिया था। जब तुम मेरे लिए भूखी-प्यासी रह सकती हो, तो मैं कैसे अकेले खाना खा सकता था? प्यार में कभी कोई एक इंसान त्याग नहीं करता रिया। प्यार तो बराबरी का नाम है।”
“लेकिन तुमने मुझे बताया क्यों नहीं? दिन भर तुम मेरे सामने पानी का गिलास लेकर घूमते रहे, मेरी देखभाल करते रहे और मुझे भनक तक नहीं लगने दी!” रिया रोते-रोते रोहन की छाती पर अपना सिर पटकने लगी।
“अगर मैं तुम्हें बता देता, तो तुम मेरी चिंता में अपनी पूजा ठीक से नहीं करतीं और मुझे जबरदस्ती कुछ न कुछ खिला देतीं,” रोहन ने उसे अपनी बाहों में कसकर भींचते हुए कहा। “तुम्हारी लंबी उम्र मेरे लिए उतनी ही कीमती है रिया, जितनी मेरे लिए तुम्हारी। अगर मेरी उम्र लंबी हो जाए और तुम मेरे साथ न रहो, तो ऐसी लंबी उम्र का मैं क्या करूँगा?”
रोहन के इन शब्दों ने रिया के दिल को इस कदर छू लिया कि उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं बचे। वह बस रोहन के सीने से लगी रही और उसकी धड़कनों को सुनती रही।
आज उसे समझ आया कि सच्चा हमसफ़र किसे कहते हैं। सच्चा हमसफ़र वह नहीं होता जो सिर्फ आपकी खुशी में शरीक हो, बल्कि वह होता है जो आपकी तपस्या में चुपचाप आपका साया बनकर आपके साथ खड़ा रहे।
आसमान में चाँद पूरी चमक के साथ दमक रहा था और नीचे बालकनी में दो दिल एक-दूसरे की बाहों में समाए हुए थे।
रोहन ने रिया का चेहरा ऊपर उठाया, उसकी आँखों में झाँका और उसके माथे पर अपने होठ रख दिए।
“हैप्पी करवा चौथ, मेरी बराबर की पार्टनर,” रोहन ने फुसफुसाया।
“हैप्पी करवा चौथ, मेरे हमसफ़र,” रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, और इस बार उसकी आँखों में आँसू नहीं, बल्कि गर्व और बेहिसाब मोहब्बत की चमक थी।
उस रात दो कॉर्पोरेट दुनिया के इंसानों ने यह साबित कर दिया था कि आधुनिकता चाहे कितनी भी बढ़ जाए, अगर रिश्तों में बराबरी, सम्मान और सच्चा प्यार हो, तो पुरानी परंपराएँ भी एक नया और बेहद खूबसूरत रूप ले लेती हैं। Karwa Chauth Story
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महेश कांत शिवा (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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