Devar bhabhi ki kahani: सिद्धार्थ एक बेहद हैंडसम, खुशमिज़ाज और सफल डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी का मालिक था। ज़िंदगी में हर खुशी थी, सिवाय एक सच्चे साथी के। परिवार वालों का दबाव उस पर बढ़ता जा रहा था कि वह शादी कर ले। हर दूसरे सप्ताहांत उसकी माँ कोई न कोई रिश्ता लेकर आ जातीं।
परेशानी यह थी कि परिवार जिस तरह की रूढ़िवादी या अत्यधिक पारंपरिक लड़कियों से उसकी बात चला रहा था, सिद्धार्थ उनके साथ कोई भावनात्मक जुड़ाव (Emotional Connection) महसूस नहीं कर पाता था। Devar bhabhi ki kahani
इसी घर में रहती थी उसकी भाभी, अनन्या।
अनन्या की शादी सिद्धार्थ के बड़े भाई, मानव से चार साल पहले हुई थी। मानव एक बहुत बड़ा इनवेस्टमेंट बैंकर था—दुनिया भर के दौरों, देर रात तक चलने वाली बैठकों और शेयर मार्केट के आंकड़ों में उलझा रहने वाला इंसान। अनन्या के लिए मानव के पास ना तो वक्त था और ना ही कोई भावनात्मक परवाह। अनन्या पेशे से एक इंटीरियर डिजाइनर थी, बेहद ग्रेसफुल, समझदार और गहरी सोच रखने वाली महिला।
पूरे घर में सिद्धार्थ ही एक ऐसा इंसान था जो अनन्या की खामोशी को समझता था। जब भी घर में तनाव होता, दोनों छत पर चाय के कप के साथ बैठकर खूब बातें करते और एक-दूसरे के चेहरे पर मुस्कान ले आते। दोनों के बीच एक बेहद निश्छल और खूबसूरत दोस्ती थी।

Devar bhabhi ki kahani: लव गाइड की एंट्री
एक रविवार की सुबह, जब सिद्धार्थ की माँ ने उसे एक और लड़की की तस्वीर दिखाकर अल्टीमेटम दे दिया, तो सिद्धार्थ भागता हुआ अनन्या के स्टडी रूम में गया।
“भाभी! बचा लीजिए मुझे,” सिद्धार्थ ने नाटकीय अंदाज़ में अपने हाथ जोड़ते हुए कहा। “माँ इस बार मेरी सगाई करवा कर ही मानेंगी। उस लड़की से मेरी दो मिनट बात हुई और मुझे लगा जैसे मैं किसी इंटरव्यू में बैठा हूँ।”
अनन्या अपनी हंसी नहीं रोक पाई। उसने किताब साइड में रखी और बोली, “तो तुम खुद अपने लिए लड़की क्यों नहीं ढूंढ लेते, सिड? आखिर तुम्हें कैसी लड़की चाहिए?”
“मुझे वो चाहिए जो मुझे समझे… जैसे आप समझती हैं,” सिद्धार्थ के मुंह से सहजता से निकल गया।
एक पल के लिए कमरे में खामोशी छा गई। अनन्या ने थोड़ा संभलते हुए नजरें झुका लीं। Devar bhabhi ki kahani
सिद्धार्थ ने तुरंत बात संभालते हुए कहा, “मेरा मतलब है… आप लड़कियों की साइकोलॉजी बहुत अच्छे से समझती हैं। क्यों न आप मेरी ‘लव गाइड’ बन जाएं? आप मुझे डेटिंग टिप्स दीजिए, मेरी पर्सनालिटी को ग्रूम कीजिए, और बताइए कि आज के दौर में लड़कियों से बातचीत की शुरुआत कैसे की जाती है।”
अनन्या ने पहले तो मना किया, लेकिन सिद्धार्थ के बचकाने और मिन्नत भरे अंदाज़ के आगे वह हार गई।
“ठीक है,” अनन्या ने मुस्कुराकर शर्त रखी, “लेकिन जो मैं कहूँगी वही करना पड़ेगा। तुम्हें एक परफेक्ट डेट बनना सिखाऊँगी।”

Devar bhabhi ki kahani: नज़दीकियों का नया सिलसिला
अगले दो हफ़्तों तक घर का माहौल पूरी तरह बदल गया।
अनन्या सिद्धार्थ को अलग-अलग कैफे और रेस्टोरेंट में ले जाती। वह उसे सिखाती कि एक औरत के साथ बातचीत के दौरान आँखों में देखकर कैसे बात की जाती है, बॉडी लैंग्वेज कैसी होनी चाहिए और छोटी-छोटी परवाह (जैसे कार का दरवाजा खोलना या कोट पहनना) कैसे दिल जीत लेती है।
यह सब एक ‘ट्रेनिंग’ और हंसी-मजाक के तौर पर शुरू हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे इस दिखावे के पीछे की भावनाएं असली रूप लेने लगीं।
एक शाम, महरौली के एक विंटेज कैफे में, जहाँ से कुतुब मीनार का खूबसूरत नज़ारा दिख रहा था, दोनों मॉक-डेट (Mock Date) पर बैठे थे।
अनन्या ने सिद्धार्थ की शर्ट का कॉलर ठीक करने के लिए हाथ बढ़ाया। जब उसकी उंगलियां सिद्धार्थ की गर्दन से छुईं, तो सिद्धार्थ की धड़कनें अचानक तेज़ हो गईं। उसने अनन्या का हाथ बीच में ही रोक लिया। Devar bhabhi ki kahani
“क्या हुआ सिड?” अनन्या ने हैरानी से पूछा। उसकी उंगलियां अभी भी सिद्धार्थ की ग्रिप में थीं।
“भाभी… आई मीन, अनन्या…” सिद्धार्थ ने पहली बार उसका नाम लिया, उसकी आवाज मखमली और गम्भीर हो गई। “अगर कोई लड़का अपनी डेट को इस तरह देखे, जैसे मैं इस वक्त तुम्हें देख रहा हूँ, तो उस लड़की को कैसा लगेगा?”
अनन्या की सांसें अटक गईं। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में उसने सिद्धार्थ की आँखों में देखा। वहाँ कोई चंचलता नहीं थी, सिर्फ एक बेपनाह और शिद्दत भरा आकर्षण था।
“उसे… उसे डर लगेगा, सिड,” अनन्या ने कांपती आवाज में अपनी उंगलियां छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा।
“किस बात का डर? कि वो इस चेहरे के प्यार में पड़ जाएगी?” सिद्धार्थ ने उसकी आँख में आँखें डालकर पूछा।
अनन्या ने अपनी नजरें फेर लीं। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसने सालों से अपने अंदर दबाकर रखी उस औरत को महसूस किया था जिसे कोई इतनी शिद्दत और सम्मान से देख रहा था।

Devar bhabhi ki kahani: जलन और सच का अहसास
कुछ ही दिनों में सिद्धार्थ की माँ ने एक बेहद अमीर और आधुनिक लड़की, शालिनी, के साथ उसकी शादी की बातचीत लगभग पक्की कर दी। सिद्धार्थ ने माँ का दिल न दुखाने के लिए शालिनी से एक-दो बार मिलना स्वीकार कर लिया।
एक शाम, सिद्धार्थ शालिनी को उसी कैफे में ले गया जहाँ वह अक्सर अनन्या के साथ जाता था। संयोग से, अनन्या भी अपने किसी क्लाइंट से मिलने उसी कैफे के दूसरे कोने में बैठी थी।
अनन्या ने दूर से देखा कि सिद्धार्थ शालिनी के साथ हँस-हँसकर बातें कर रहा था। वह वही सारे मैनर्स इस्तेमाल कर रहा था जो अनन्या ने उसे सिखाए थे। शालिनी उसके लतीफ़ों पर खिलखिला रही थी और सिद्धार्थ का हाथ थाम रही थी।
अचानक, अनन्या के सीने में एक तेज़ दर्द उठा। एक अजीब सी जलन और तड़प उसके पूरे वजूद में फैल गई। उसे अहसास हुआ कि उसने जिस परिंदे को उड़ना सिखाया था, अब जब वह किसी और के आँगन में जाने वाला था, तो उसका अपना दिल टूट रहा था।
वह क्लाइंट की मीटिंग अधूरी छोड़कर वहाँ से उठकर चली गई।
रात को जब सिद्धार्थ घर लौटा, तो उसने देखा कि घर के पिछले हिस्से वाले बगीचे में झूले पर अनन्या अकेली बैठी रो रही थी। Devar bhabhi ki kahani
सिद्धार्थ चुपचाप जाकर उसके पास बैठ गया।
“क्या हुआ अनन्या? तुम बिना बताए कैफे से क्यों चली आईं?” सिद्धार्थ ने चिंता से पूछा।
अनन्या ने अपने आँसू पोंछे और गुस्से में बोली, “तुम वहाँ शालिनी के साथ खुश थे न सिड? तो मेरे बारे में क्यों पूछ रहे हो? जाओ, उसी के साथ वक्त बिताओ! तुम्हारी सगाई तो तय ही हो गई है।”
सिद्धार्थ के चेहरे पर एक धीमी सी मुस्कान आ गई। वह झूले से उठा और अनन्या के सामने घुटनों के बल बैठ गया।
“तुम्हें जलन हो रही है ना?” सिद्धार्थ ने धीमी आवाज में पूछा।
“हाँ! हो रही है जलन!” अनन्या का सब्र टूट गया और वह चीख पड़ी। “मुझे जलन हो रही है कि मैंने तुम्हें दूसरों के लिए तैयार किया, और जब तुम परफेक्ट बन गए, तो तुम किसी और के होने जा रहे हो! मुझे जलन हो रही है कि मैं वो लड़की नहीं हूँ जिसके साथ तुम अपनी बाकी ज़िंदगी बिता सको!”
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Devar bhabhi ki kahani: दिल का इकरार
सिद्धार्थ ने बिना एक पल गंवाए अनन्या का चेहरा अपनी हथेलियों में थाम लिया। उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे।
“पगली…” सिद्धार्थ ने रूंधे गले से कहा, “तुम्हें क्या लगा कि मैं शालिनी में दिलचस्पी रख रहा था? मैं तो बस यह देखना चाहता था कि क्या तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए वही आग जल रही है जो पिछले कई हफ़्तों से मुझे जला रही है!”
अनन्या स्तब्ध रह गई। “क्या?”
“मैंने जिस भी लड़की से बात की, मैं उसमें सिर्फ तुम्हें ढूंढ रहा था,” सिद्धार्थ ने अपनी पेशानी अनन्या की पेशानी से टिका दी। दोनों की साँसें एक-दूसरे में घुलने लगीं। “तुम मेरी लव गाइड नहीं थी अनन्या… तुम मेरी मोहब्बत थी। मैं किसी शालिनी या किसी और से शादी नहीं कर सकता। मेरा दिल सिर्फ तुम्हारा है।”
“लेकिन सिड… मानव? यह समाज?” अनन्या ने कांपते हुए कहा।
“मानव ने तुम्हें कभी पत्नी का दर्जा दिया ही नहीं,” सिद्धार्थ ने दृढ़ता से कहा। “उसने इस रिश्ते की नींव उसी दिन तोड़ दी थी जिस दिन उसने तुम्हें तन्हा छोड़ दिया। मैं तुम्हें कोई गलत रास्ता अपनाने को नहीं कहूँगा। हम छुपकर कुछ नहीं करेंगे। हम दुनिया के सामने अपना सच रखेंगे।”
अनन्या ने अपनी आँखें बंद कर लीं और सिद्धार्थ के गले से लग गई। बरसों बाद उसने महसूस किया कि किसी के आगोश में होना और महफ़ूज़ महसूस करना क्या होता है।

Devar bhabhi ki kahani: बगावत और नई सुबह
अगले ही दिन, सिद्धार्थ ने अपने भाई मानव और अपनी माँ को ड्राइंग रूम में बैठाया। अनन्या भी सिद्धार्थ के बराबर में खड़ी थी।
सिद्धार्थ ने बिना किसी भूमिका के साफ-साफ कह दिया कि वह शालिनी से शादी नहीं करेगा। उसने मानव की आँखों में देखकर कहा, “मानव भाई, आप अपनी दुनिया में बहुत सफल हैं, लेकिन एक पति के तौर पर आप पूरी तरह नाकाम रहे हैं। आपने अनन्या को इस घर में सिर्फ एक शो-पीस बनाकर रखा है।”
मानव गुस्से से भड़क उठा, “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे निजी मामलों में बोलने की?”
“यह सिर्फ इनका मामला नहीं है, अब यह मेरा भी मामला है,” सिद्धार्थ ने अनन्या का हाथ अपने हाथ में ले लिया। “हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं। अनन्या आपके साथ एक बेजान रिश्ते में नहीं घुटेगी। अगर आपको थोड़ी सी भी इंसानियत बाकी है, तो इन्हें सम्मान से आज़ाद कर दीजिए।”
घर में भूचाल आ गया। माँ ने बहुत रोना-धोना किया, लेकिन जब मानव ने अनन्या की आँखों में वो खालीपन और सिद्धार्थ के लिए वो अटूट निष्ठा देखी, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि उसने जिस रिश्ते को कभी सींचा ही नहीं, उस पर हक जताने का उसे कोई अधिकार नहीं है।
मानव ने गरिमा के साथ अनन्या को तलाक देने की सहमति दे दी।

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छह महीने बाद, गोवा के एक खूबसूरत बीच के किनारे, ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी में एक बेहद सादा शादी का मंडप सजा था।
सफेद शेरवानी में सिद्धार्थ और हल्के गुलाबी जोड़े में अनन्या एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े थे।
सिद्धार्थ ने जब अनन्या के गले में मंगलसूत्र पहनाया और उसकी मांग में सिंदूर भरा, तो अनन्या की आँखों से खुशी के दो आँसू छलक पड़े।
“अब तो रोना बंद करो, मेरी लव गाइड,” सिद्धार्थ ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा और उसके गालों पर अपने होंठ रख दिए।
अनन्या मुस्कुरा दी और सिद्धार्थ के सीने पर अपना सिर टिका दिया। समुंदर की लहरें उनके कदमों को छू रही थीं, और दो रूहें अपने उस ‘दिल के सौदे’ में पूरी तरह खो चुकी थीं, जहाँ न कोई नक़ाब था, न कोई मजबूरी—सिर्फ और सिर्फ बेपनाह मोहब्बत थी। Devar bhabhi ki kahani
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