long distance relationship: उत्तराखंड के खूबसूरत शहर देहरादून को ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यहाँ की ठंडी और सुहानी शामें किसी का भी दिल बहला सकती हैं, लेकिन नेहा के लिए यह शामें अक्सर थोड़ी लंबी और उदास हो जाती थीं। long distance relationship
नेहा देहरादून के एक सरकारी बैंक में सीनियर मैनेजर थी। वह जितनी अपने काम में सख्त और अनुशासित थी, दिल से उतनी ही भावुक और रोमांटिक थी।
नेहा की शादी छह महीने पहले ही अमित से हुई थी। अमित भारतीय मर्चेंट नेवी में एक काबिल ऑफिसर था। दोनों की शादी के अभी महज पच्चीस दिन ही बीते थे कि अमित को एक बड़े कार्गो शिप पर छह महीने के लंबे असाइनमेंट के लिए निकलना पड़ा। नई-नई शादी के बाद इस तरह की जुदाई किसी इम्तिहान से कम नहीं थी।
एक शाम नेहा बैंक का सारा काम निपटाकर घर लौटी। घर में कदम रखते ही उसे उस सन्नाटे ने घेरा जिसकी अब उसे आदत हो चुकी थी। उसने कपड़े बदले, रसोई से अपने लिए एक कप कॉफी बनाई और बेडरूम में आकर बैठ गई।
बेड के एक हिस्से पर अमित की मर्चेंट नेवी की सफेद शर्ट रखी थी। नेहा जब भी अमित को बहुत मिस करती, वह उस शर्ट को अपने सीने से लगा लेती थी, क्योंकि उसमें आज भी अमित के पसंदीदा परफ्यूम की हल्की सी खुशबू बाकी थी। long distance relationship
तभी नेहा का फोन बजा। स्क्रीन पर ‘अमित का वीडियो कॉल’ चमक रहा था। नेहा के चेहरे पर तुरंत एक बड़ी सी मुस्कान तैर गई। उसने झट से कॉल उठाया।

स्क्रीन पर अमित अपनी नेवी की यूनिफॉर्म में मुस्कुरा रहा था। बैकग्राउंड में समंदर की ऊंची लहरें दिख रही थीं।
“जय हिंद, मैडम मैनेजर! कैसी हैं आप? आज बैंक में कितने लोन पास किए?” अमित ने सैल्यूट मारते हुए मज़ाक में कहा।
नेहा ने नकली गुस्सा दिखाते हुए मुंह फुला लिया, “तुमसे तो मुझे बात ही नहीं करनी। छह महीने होने को आए हैं अमित, और तुम वहाँ लहरों से दिल लगा बैठे हो। तुम्हें अंदाज़ा भी है कि मुझे यहाँ कितनी याद आती है?”
अमित ने कैमरे के पास आकर कहा, “अरे बाबा, माफ़ी चाहता हूँ। लेकिन समंदर की इन लहरों में भी मुझे तुम्हारी ही आवाज़ सुनाई देती है। अच्छा सुनो, तुम्हारा जन्मदिन आ रहा है अगले हफ्ते। क्या गिफ्ट चाहिए मेरी जान?”
“मुझे कोई गिफ्ट-विफ्ट नहीं चाहिए। बस तुम चाहिए हो। क्या तुम मेरे बर्थडे पर छुट्टी लेकर नहीं आ सकते?” नेहा की आँखों में हल्की सी नमी आ गई।
अमित का चेहरा थोड़ा गंभीर हुआ, “नेहा, तुम तो जानती हो न कि शिप बीच समंदर में है, यहाँ से अचानक छुट्टी मिलना मुमकिन नहीं है। मैं वादा करता हूँ, अगली बार तुम्हारे जन्मदिन पर साथ रहूँगा।”
नेहा ने एक ठंडी सांस ली और बोली, “जानती हूँ। चलो, तुम अपना ख्याल रखना।” दोनों ने फोन रख दिया। फोन पर इस तरह फ्लर्ट करना और एक-दूसरे को चिढ़ाना ही अब उनकी जिंदगी का सहारा था।

long distance relationship: जन्मदिन का सरप्राइज और मोमबत्तियों की रोशनी
अगले हफ्ते नेहा का जन्मदिन था। बैंक में काम का इतना प्रेशर था कि वह अपना जन्मदिन लगभग भूल ही चुकी थी। शाम के सात बज चुके थे। नेहा थकी-हारी अपनी स्कूटी से घर पहुँची। बाहर कड़ाके की ठंड थी और हल्की बूंदाबांदी हो रही थी।
नेहा ने जैसे ही घर के मुख्य दरवाजे पर चाबी लगाई, वह हैरान रह गई। दरवाजा पहले से ही अनलॉक था। उसका दिल ज़ोर से धड़का, ‘क्या घर में कोई चोर घुसा है?’ उसने डरते-डरते पैर आगे बढ़ाए।
लेकिन जैसे ही वह लिविंग रूम में दाखिल हुई, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। पूरे घर की लाइटें बंद थीं। उसकी जगह ज़मीन पर और टेबल पर दर्जनों छोटी-बड़ी मोमबत्तियां जल रही थीं, जिनकी मद्धम और सुनहरी रोशनी पूरे घर को एक जादुई महल जैसा लुक दे रही थी। हवा में मोगरे की अगरबत्ती और ताजे गुलाबों की महक तैर रही थी।
long distance relationship: वो राेमांटिक सरप्राइज
नेहा उलझन और घबराहट में अपने बेडरूम की तरफ बढ़ी। बेडरूम का दरवाजा आधा खुला था। जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, पीछे से दो मजबूत बांहों ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। नेहा चीखने ही वाली थी कि एक जानी-पहचानी, भारी और बेहद रोमांटिक आवाज़ उसके कानों के पास गूंजी, “हैप्पी बर्थडे, मेरी सुंदर बैंक मैनेजर!”
यह अमित था! वह मर्चेंट नेवी की अपनी उसी सफेद शर्ट में था जिसे नेहा रोज़ गले लगाती थी। अमित ने नेहा को पीछे से कसकर पकड़ रखा था।
नेहा को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था। वह मुड़ी और अमित के सीने पर हाथ रखकर उसे छूकर देखने लगी, “अमित? तुम? तुम यहाँ कैसे? तुमने तो कहा था कि शिप बीच समंदर में है!”
अमित खिलखिलाकर हंस पड़ा, “वह तो तुम्हें सरप्राइज देना था बाबा! कैप्टन से रिक्वेस्ट करके मैंने पोर्ट पर ही अपनी जगह दूसरे ऑफिसर को अरेंज किया और सीधे फ्लाइट पकड़कर देहरादून आ गया। अपनी बीवी का बर्थडे कोई मिस करता है क्या?”
नेहा की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। वह अमित के सीने से लिपट गई और अपनी छोटी-छोटी मुट्ठियों से उसके सीने पर मारने लगी, “तुम बहुत बुरे हो अमित! बहुत गंदे हो! मुझे इतना रुलाया, इतना तड़पाया!”

long distance relationship: संकोच का पिघलना और चादर के नीचे की रात
अमित ने मुस्कुराते हुए नेहा के आंसू पोंछे और उसे गोद में उठा लिया। छह महीने की इस लंबी दूरी ने उनके बीच के प्यार और चाहत को और ज्यादा बढ़ा दिया था। अमित ने उसे बेड पर बिठाया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया।
“चलो, अब रोना बंद करो। आज के दिन सिर्फ मुस्कुराहट होनी चाहिए,” अमित ने नेहा के सैंडल उतारे और उसके पैरों को हल्के से सहलाया।
नेहा का दिल तेज़ी से धड़क रहा था। छह महीने बाद अपने पति का यह शारीरिक स्पर्श उसे एक अजीब सी सिहरन दे रहा था। वह थोड़ी शर्मा गई और उसने अपनी नज़रें नीची कर लीं।
“क्या बात है नेहा? फोन पर तो तुम बड़ी-बड़ी बातें करती हो, और आज जब मैं सामने हूँ, तो तुम्हारी बोलती बंद हो गई?” अमित ने उसे चिढ़ाते हुए कहा।
“तुम चुप रहो। इतने दिनों बाद मिले हो, मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है,” नेहा ने तकिया ओढ़ते हुए कहा।
long distance relationship: चादर के नीचे दो दिलों की धड़कन
अमित मुस्कुराया। वह जानता था कि लॉन्ग डिस्टेंस के बाद कपल्स के बीच एक शुरुआती हिचकिचाहट होती है। वह बेड पर नेहा के पास लेट गया और बेड पर बिछी भारी, गर्म ऊनी चादर को अपने हाथों में लिया। अमित ने एक झटके में उस चादर को फैलाया और नेहा के साथ खुद को भी उस चादर के नीचे ढक लिया।
अब उस गर्म चादर के अंदर, देहरादून की उस सर्द रात में, सिर्फ वो दोनों थे। बाहर मोमबत्तियां पिघल रही थीं, और चादर के भीतर दो दिलों की हिचकिचाहट पिघल रही थी।
चादर के भीतर मद्धम अंधेरे में नेहा ने अमित की आँखों में देखा। अमित की आँखों में अपनी पत्नी के लिए अगाध प्रेम और लालसा साफ़ दिख रही थी। अमित ने धीरे से नेहा की कमर में हाथ डाला और उसे अपने और करीब खींच लिया। दोनों के शरीर के बीच अब कोई दूरी नहीं बची थी।
“अब बताओ नेहा, अब भी अजीब लग रहा है क्या? अब तो फोन का नेटवर्क भी हमें डिस्टर्ब नहीं कर सकता,” अमित ने नेहा के होठों के बिल्कुल करीब आकर फुसफुसाया।
नेहा ने अपनी बांहें अमित के गले में डाल दीं, “अमित… अब कभी मुझे छोड़कर इतनी दूर मत जाना।”
“कभी नहीं…” अमित ने कहा और उसके बाद शब्दों की जरूरत खत्म हो गई। उस रात, उस गर्म चादर के नीचे, छह महीने की जुदाई का सारा दर्द, अकेलापन और दूरियाँ हमेशा के लिए मिट गईं। सांसों की गर्माहट और धड़कनों की रफ़्तार ने एक ऐसी रोमांटिक दास्तान लिखी जिसे देहरादून की वो ठंडी रात हमेशा याद रखेगी।

long distance relationship: एक खुशनुमा सुबह और मीठी ठिठोली
अगली सुबह जब पहाड़ों के पीछे से सूरज निकला, तो धूप की एक किरण खिड़की के परदे से छनकर बेड पर पड़ी। नेहा अमित की बांहों में सिर रखकर गहरी नींद सो रही थी। अमित जाग चुका था और बहुत प्यार से नेहा के चेहरे पर बिखरी जुल्फों को हटा रहा था।
नेहा ने अपनी आँखें खोलीं और अमित को सामने देखकर मुस्कुराई, “गुड मॉर्निंग, कैप्टन!”
“गुड मॉर्निंग, मेरी वीआईपी मैनेजर! वैसे आज बैंक जाने का इरादा है या अपनी इस पर्सनल शिप को गाइड करने का मूड है?” अमित ने उसकी नाक खींचते हुए मज़ाक किया।
नेहा बेड पर उठकर बैठी और चादर को खुद पर लपेटते हुए बोली, “आज तो मैंने पहले से ही कैजुअल लीव (CL) ले रखी है। आज बैंक मैनेजर का हुक्म चलेगा। तुम्हें मेरे लिए स्पेशल चाय बनानी होगी।”
अमित हंसते हुए बेड से उतरा, “जो हुक्म मेरे आका! लेकिन चाय के बदले मुझे क्या मिलेगा?”
नेहा ने तकिया उठाकर उसकी तरफ फेंका और शरारत से मुस्कुराते हुए बोली, “चाय अच्छी हुई, तो रात को फिर से उसी चादर के नीचे आने की परमिशन मिलेगी!”
अमित खिलखिलाकर हंस पड़ा और रसोई की तरफ बढ़ गया। देहरादून के उस छोटे से घर में अब कोई सूनापन नहीं था, बल्कि लॉन्ग डिस्टेंस का वो इम्तिहान अब एक मुकम्मल और बेहद खूबसूरत रोमांटिक लाइफ में बदल चुका था। आपको यह कहानी कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें। long distance relationship




