Secret Love : मैं यह कहानी आज किसी से नहीं, खुद से कह रही हूं। शायद इसलिए कि जब शब्द बाहर निकलते हैं, तो दर्द थोड़ा हल्का हो जाता है।
यह कहानी मेरी है-एक ऐसी कहानी जो दोस्ती से शुरू हुई, खामोशी में पली, उम्मीदों में उलझी और अंत में मुझे खुद से रू-बरू कर गई।
मेरा नाम दीपिका है ओर मैं हरियाणा के फरीदाबाद में रहती हूं। मैं फरीदाबाद की एक ऑटो मोबाइल कंपनी में काम करती हूं। करीब दो साल पहले की बात है। मैं तब सत्ताईस साल की थी। ज़िंदगी अपने पूरे रंगों में थी- काम, दोस्त, वीकेंड की हँसी, देर रात की बातें। हमारा दोस्तों का एक ही ग्रुप था। वही हंसी-मज़ाक, वही पुराने किस्से, वही कॉमन यादें। और उसी भीड़ में वह भी था- उनतीस साल का, थोड़ा रहस्यमयी, थोड़ा बेपरवाह, और अपनी बातों में अजीब-सी गर्माहट रखने वाला।
शुरुआत दोस्ती से ही हुई थी। कोई फिल्म, कोई पार्टी, कोई अचानक बना प्लान। फिर कहीं बीच में, बिना कोई नाम दिए, दोस्ती ने एक मोड़ ले लिया। उसने साफ कहा था- “इसे हमारे बीच ही रहने दो।”
उस वक्त मुझे यह शर्त अजीब नहीं लगी। शायद इसलिए कि उस खामोशी में भी एक अपनापन था। हम चोरी-छिपे ड्रिंक के लिए निकल जाते, या वह बस “थोड़ी देर बात करने” के बहाने मेरे फ्लैट पर आ जाता। बातें होतीं, हँसी होती, और फिर हम शारीरिक संबंध बनाते थे।
Secret Love : और जब हद पार हो गई
उस शाम बारिश हल्की-हल्की हो रही थी। खिड़की से आती ठंडी हवा कमरे में अजीब-सा सुकून घोल रही थी। वह सोफ़े पर बैठा था, और मैं उसके सामने ज़मीन पर, घुटनों को सीने से लगाए। हम दोनों चुप थे, लेकिन वह खामोशी भारी नहीं थी। उसमें अपनापन था।
उसने धीरे से मेरा हाथ थामा। उसकी उँगलियों की गर्माहट मेरे भीतर तक उतर गई। मैंने नज़र उठाकर उसे देखा, और पल भर के लिए दुनिया रुक गई।
वह मेरे क़रीब आया, जैसे कोई डर रहा हो कि ज़रा-सी जल्दी सब तोड़ देगी। उसके माथे ने मेरे माथे को छुआ। साँसें पास थीं, दिलों की धड़कनें साफ़ सुनाई दे रही थीं।
उस पल में कोई वादा नहीं था, कोई सवाल नहीं- बस दो लोग थे, जो एक-दूसरे में थोड़ी देर के लिए घर ढूँढ रहे थे।
वह मेरे क़रीब आकर रुक गया। पल भर के लिए हम दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे, जैसे आँखों में ही अधूरी बातें पूरी हो रही हों। उसकी साँसें मेरी साँसों से टकराईं, और दिल की धड़कन अचानक तेज़ हो गई।
उसने बहुत हल्के से मेरी ठुड्डी उठाई। उसकी उँगलियों का स्पर्श इतना नर्म था कि मैं चाहकर भी पीछे नहीं हट पाई।
Secret Love : आने वाला कल-सब कहीं दूर चला गया
उसके होंठ मेरे होंठों से धीरे से मिले- न कोई जल्दबाज़ी, न कोई दावा। वह एक सवाल जैसा था, और मेरा ठहर जाना उसका जवाब। वह किस लंबी नहीं थी, लेकिन उसमें इतनी गर्माहट थी कि मेरी आँखें अपने आप बंद हो गईं।
उस पल में समय थम गया। बाहर की दुनिया, आने वाला कल-सब कहीं दूर चला गया।
वह किस बस एक स्पर्श नहीं थी, वह उन जज़्बातों की स्वीकारोक्ति थी, जिन्हें हम शब्दों में कहने से हमेशा डरते रहे।
हमने शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन उस रात यह सिर्फ़ शरीर का मिलन नहीं था, यह उन बातों का जवाब था, जो हम कभी कह नहीं पाए।
हम दोनों जानते थे कि हम दोनों के बीच बन रहे शारीरिक संबंध क्या है। शारीरिक संतुष्टि से ज्यादा कुछ नहीं। कोई वादा नहीं, कोई भविष्य नहीं- बस एक सादा-सा अरेंजमेंट। दो लोग, जो एक-दूसरे के साथ सुकून और शारीरिक संंबंध बनाने का थ्रिल ढूँढ रहे थे। मैंने खुद को यही समझाया कि दिल को इसमें शामिल नहीं करना है। यह आसान होना चाहिए था। पर दिल, दिल कहां नियम मानता है?
Secret Love : मेरे अंदर का सबकुछ बिखर गया
समय बीतता गया। और फिर एक दिन उसने बताया कि उसकी ज़िंदगी में कोई और आ गई है। वह भी हमारे ही ग्रुप की थी।
मुझे याद है, वह पल जैसे किसी ने भीतर कुछ तोड़ दिया हो। मैंने मुस्कुराकर “अच्छी बात है” कहा, लेकिन अंदर कहीं कुछ बिखर गया। कुछ हफ्तों बाद, एक पब में, उसने सबके सामने बड़ी बेपरवाही से उनकी सगाई की घोषणा कर दी। लोग तालियां बजा रहे थे, बधाइयां दे रहे थे। मैं भी वहीं खड़ी थी, भीड़ में अकेली।
उस रात मैं देर तक सो नहीं पाई। अगले कई हफ्तों तक भी नहीं। दिल टूटने का एहसास किसी तेज़ हादसे जैसा नहीं होता; यह धीरे-धीरे फैलता है, जैसे स्याही पानी में घुल रही हो।
फिर एक दिन मैंने खुद से कहा- अब बस। आगे बढ़ो। यह कभी तुम्हारा था ही नहीं।
हमारे पूरे ग्रुप को शादी में बुलाया गया था। मैंने फैसला किया कि मैं जाऊँगी। मजबूती दिखाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को यह साबित करने के लिए कि मैं टूटकर भी खड़ी रह सकती हूं। मैंने एक नई ड्रेस खरीदी, किलर हील्स लीं, और शीशे के सामने खड़े होकर खुद से कहा- “तुम ठीक हो।”
सच कहूँ तो, मन के किसी कोने में एक नन्ही-सी उम्मीद अब भी थी कि शायद वह मुझे देखेगा और समझेगा कि उसने क्या खोया है।
Secret Love : फिर अचानक दरवाजे पर दस्तक ने झकझोरा
शादी से एक रात पहले, जब मैं खुद को अगले दिन के लिए तैयार कर रही थी, दरवाज़े पर दस्तक हुई।
मैंने खोला, और वह सामने खड़ा था। बिल्कुल शांत, जैसे कुछ भी अजीब नहीं हुआ हो। उसने नाइट-कैप का कोई बहाना बनाया।
मुझे पता था कि मुझे क्या करना चाहिए। दरवाज़ा बंद कर देना चाहिए था। लेकिन कमज़ोरी के उस पल में, मैंने उसे अंदर आने दिया।
हम बैठे, पुराने दिनों की बातें कीं। हंसे। खामोश हुए। और फिर, उन अधूरी भावनाओं के बोझ तले, हमने एक बार फिर शारीरिक संबंध बनाए।
उस रात में कोई खुशी नहीं थी। सिर्फ़ एक पुराना दर्द था, जो आख़िरी बार आवाज़ मांग रहा था।
अगले दिन वह शादी के मंडप में गया।
और मैं-मैं अपने आँसू भीतर ही कहीं रोककर बैठी रही। बाहर से सब सामान्य था, भीतर कुछ हमेशा के लिए बदल चुका था।
सब खत्म हो जाने के बाद भी, सबसे मुश्किल हिस्सा यह नहीं था कि वह मेरी ज़िंदगी से चला गया। सबसे मुश्किल यह स्वीकार करना था कि मैंने खुद को उस स्थिति में जाने दिया।
मुझे अपने आप से नफ़रत होने लगी। इसलिए नहीं कि मेरा दिल टूटा, बल्कि इसलिए कि मैंने अपनी दोस्त-उसकी दुल्हन-को धोखा दिया।
यह अपराधबोध हर रात मेरे साथ सोता, हर सुबह मेरे साथ उठता।
Secret Love : मैंने जिंदगी से बहुत कुछ सीखा
धीरे-धीरे, मैंने समझना शुरू किया। यह कहानी सिर्फ़ मेरी गलती की नहीं थी। मैं कमज़ोर थी, लेकिन वह स्वार्थी था। उसने उस इंसान को धोखा दिया जिसे उसे अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी कसमें देनी थीं।
अगर वह मेरे साथ ऐसा कर सकता था, तो वह किसी और के साथ भी कर सकता था। शायद शादी का सर्टिफिकेट भी उसे नहीं रोक पाता।
एक दिन, बहुत हिम्मत जुटाकर, मैंने खुद के लिए बाउंड्री तय कीं। मैंने तय किया कि अब मैं उसकी ज़िंदगी का वह छिपा हुआ कोना नहीं बनूंगी। मैंने उसे साफ कह दिया कि मुझे ऐसे शादीशुदा आदमी में कोई दिलचस्पी नहीं है, जो अपनी कसमों को हल्के में ले।
उस फैसले के बाद सब कुछ आसान नहीं हुआ। लेकिन हर दिन थोड़ा-सा हल्का होता गया। मैंने सीखा कि प्यार का मतलब सिर्फ़ किसी के पास होना नहीं होता, बल्कि खुद की इज़्ज़त बचाए रखना भी होता है।
मैंने यह भी सीखा कि छिपकर जीने वाला रिश्ता कभी पूरा नहीं होता।
आज, जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो उस कहानी में सिर्फ़ दर्द नहीं दिखता। मुझे अपनी ताक़त भी दिखती है- वह ताक़त, जिसने मुझे टूटने के बाद भी आगे बढ़ना सिखाया।
मैं अब जानती हूँ कि मैं किसी की परछाईं बनकर नहीं, बल्कि एक खुले, ईमानदार और ख़ास रिश्ते की हक़दार हूं।
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह बस एक चैप्टर था-कठिन, लेकिन ज़रूरी। आगे की कहानी अभी लिखी जानी है। और इस बार, मैं उसे पूरे उजाले में लिखूँगी।
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