Saharanpur Romantic Love Story : करीब 10 साल पहले, यूपी के सहारनपुर की रहने वाली उमा ने दुनिया की परवाह किए बिना अपने प्यार के लिए घर की दहलीज लांघी थी। उसने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर लव मैरिज की। उस वक्त उसे लगा था कि उसका हमसफर ही उसकी पूरी कायनात है।
उमा, तब महज बीस साल की, एक साधारण परिवार की बेटी थी। उसके पिता और भाई सख्त थे, लेकिन उमा का दिल किसी और पर आ गया था। वह लड़का पेंटर था, हाथ से दिव्यांग, लेकिन उमा को उसकी आंखों में वो जज्बा नजर आता था जो उसे दुनिया की हर रुकावट से पार ले जा सकता था।
घरवालों ने विरोध किया, धमकियां दीं, लेकिन उमा ने फैसला कर लिया। “प्यार में क्या घरवालों की मर्जी?” वह सोचती। एक रात, चुपके से दोनों ने मंदिर में शादी कर ली। लव मैरिज थी ये, जो उमा के लिए सपनों की शुरुआत लगती थी।
Saharanpur Romantic Love Story शादी के बाद की कड़वी हकीकत
शादी के बाद जीवन की असलियत सामने आई। सहारनपुर के रमजानपुरा में छोटा सा घर किराए पर लिया। पति दिनभर पेंटिंग करता, उमा घर संभालती। जल्द ही एक बेटा हुआ, आठ साल का होने वाला था अब। लेकिन धीरे-धीरे दरारें पड़ने लगीं। पति का दिव्यांग होना कोई समस्या नहीं था, लेकिन उमा के चरित्र पर शक करने लगा वह। “तू बाहर ज्यादा घूमती है,” वह कहता। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े। उमा को लगता, ये प्यार नहीं, बंधन है। पहले भी उमा किसी रिश्ते में रही थी, लेकिन वो लंबा नहीं चला। अब ये शादी भी टूटने की कगार पर थी।
दो साल पहले, आखिरकार उमा ने फैसला किया। “मैं अकेली रहूंगी,” उसने कहा। बेटा पिता के साथ रह गया, कभी-कभार मिलने आता। उमा गंगोत्री कॉलोनी में किराए का कमरा ले कर रहने लगी। घरवालों ने तो पहले ही रिश्ता तोड़ दिया था। पिता ने कहा था, “तेरे लिए हमसे कोई नाता नहीं।” उमा अकेली थी, लेकिन आजाद।

पति से अलगाव और अकेलापन
इसी अकेलेपन में बिलाल आया, जैसे कोई तूफान। दो साल पहले की बात है। उमा को काम पर जाना था, टैक्सी बुलाई। ड्राइवर था बिलाल, 27 साल का जवान लड़का, सहारनपुर के नकुड़ में रहता था। कार में बैठते ही बातें शुरू हो गईं। “कहां जाना है मैडम?” बिलाल ने मुस्कुरा कर पूछा। उमा ने पता बताया, लेकिन रास्ते में ट्रैफिक जाम हो गया।
दोनों बात करने लगे। बिलाल ने कहा, “ये शहर कितना व्यस्त है, लेकिन लोग अकेले हैं।” उमा ने हंस कर जवाब दिया, “हां, मैं भी अकेली हूं।” बस, वो पहली मुलाकात थी। बिलाल की आंखों में वो चमक थी जो उमा को सालों बाद महसूस हुई। अगले दिन फिर टैक्सी बुलाई, वही बिलाल आया। “क्या संयोग है,” उमा ने कहा। बिलाल ने हंसकर जवाब दिया, “संयोग नहीं, किस्मत।”
Saharanpur Romantic Love Story टैक्सी ड्राइवर बिलाल से पहली मुलाकात
धीरे-धीरे मुलाकातें बढ़ीं। बिलाल उमा को लेने आता, कभी कॉफी शॉप पर रुकते। उमा को बिलाल की सादगी पसंद आई। उमा हिंदू थी, बिलाल मुस्लिम, लेकिन प्यार में मजहब कहां आड़े आता? एक शाम, बिलाल ने उमा को यमुना नदी के किनारे ले जाकर कहा, “उमा, तुम्हारी आंखें जैसे सितारे हैं। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”
उमा का दिल धड़का। सालों बाद किसी ने उसे इतना खास महसूस कराया। दोनों ने हाथ पकड़े, नदी की लहरों को देखा। वो पहला रोमांटिक पल था। बिलाल ने उमा के बालों में फूल लगाया, “तुम मेरी राजकुमारी हो।” उमा ने शरमा कर कहा, “और तुम मेरे राजकुमार।”
बिलाल ने धीरे से उमा के बालों में हाथ फेरा। जेब से एक फूल निकाला और उसके बालों में लगा दिया। उमा ने आंखें बंद कर लीं। बिलाल का हाथ उसकी कमर पर आ गया। दोनों करीब आए। होंठों ने होंठों को छुआ। वो पहला चुंबन था, नरम, गहरा, जैसे समय थम गया हो। नदी की लहरें ताल दे रही थीं। बिलाल ने उमा को और कसकर बाहों में लिया। उमा ने उसके सीने पर सिर टिका दिया।
“मैं तुम्हारी हूं… हमेशा,” उमा ने कहा। बिलाल ने उसके माथे पर चुंबन दिया, “और मैं तुम्हारा।”

बिलाल ने शुरू किया उमा का खर्च उठाना
रिश्ता गहरा होता गया। बिलाल ने उमा का खर्च उठाना शुरू किया। दोनों सहारनपुर की गंगोत्री कॉलोनी में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। उमा को सजने-संवरने का शौक था। बिलाल उसे नए कपड़े लाता, “ये ड्रेस पहनो, तुम पर जंचेगी।” एक रात, दोनों कमरे में अकेले थे।
एक शाम, बिलाल ने कमरे को खास बनाया। लाइट्स ऑफ, चारों तरफ छोटी-छोटी मोमबत्तियां। हल्की सी संगीत बज रही थी – कोई पुराना रोमांटिक गाना। उमा अंदर आई तो हैरान रह गई।
“ये सब… मेरे लिए?” उसने आश्चर्य से पूछा। बिलाल ने मुस्कुराकर कहा, “सिर्फ तुम्हारे लिए। आज हमारा स्पेशल डिनर।”
उमा ने अपनी पसंदीदा लाल ड्रेस पहनी, वो ड्रेस जो बिलाल ने ही गिफ्ट की थी। वो ड्रेस उसके शरीर पर ऐसे लिपटी थी जैसे कोई दूसरी खाल। बिलाल की आंखें ठहर गईं।
“तुम आज… बहुत खूबसूरत हो,” वह बोला। उमा शरमाई, “तुम्हारी वजह से।”
Saharanpur Romantic Love Story वो पहला रोमांटिक सीन
दोनों ने साथ खाना खाया। फिर बिलाल ने उमा को उठाकर बिस्तर की ओर ले जाया। मोमबत्तियों की रोशनी में दोनों के चेहरे चमक रहे थे। बिलाल ने उमा के गाल पर हाथ रखा, धीरे से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। चुंबन गहरा होता गया। उमा के हाथ बिलाल के बालों में फिसलने लगे। बिलाल ने उसकी गर्दन पर किस किया, फिर कंधे पर। उमा की सांसें तेज हो गईं।
“बिलाल… मुझे प्यार करो,” उमा ने फुसफुसाया। बिलाल ने उसे और करीब खींचा। दोनों एक-दूसरे में खो गए। बिलाल के हाथ उमा की पीठ पर फिसले, ड्रेस के ज़िप को धीरे से खोला। उमा ने उसकी शर्ट उतारी। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सटे। बिलाल ने उमा के कानों में कहा, “तुम मेरी दुनिया हो।” उमा ने जवाब दिया, “और तुम मेरी सांस।”

बिलाल पर शादी का दबाव
लेकिन बिलाल के घर में दबाव बढ़ रहा था। वह चार भाई-बहनों में था, परिवार शादी के लिए जोर दे रहा था। “अब उम्र हो गई, रिश्ता कर ले,” मां कहती। बिलाल उमा के कारण टालता रहा, लेकिन आखिरकार राजी हो गया। निकाह तय हो गया, 14 दिसंबर को बारात लेकर जानी थी।
उमा को पता चला तो झगड़ा हुआ। “तुम मुझसे शादी करोगे न?” उमा ने पूछा। बिलाल ने गुस्से में कहा, “परिवार का दबाव है।” उमा रोई, लेकिन बिलाल के मन में डर बैठ गया। “कहीं उमा घर आकर सब बता दे तो?” वह सोचता। उसने उमा को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।
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Saharanpur Romantic Love Story सरप्राइज गिफ्ट क्या था?
एक ओर जहां नकुड़ में बिलाल के घर में उसके निकाह की तैयारी चल रही थी वहीं दूसरी ओर 6 दिसंबर 2025 की शाम, बिलाल स्विफ्ट कार लेकर उमा के कमरे पर आया। “सरप्राइज है, घूमने चलो,” उसने उमा से कहा। उमा खुश हो गई। बड़े चाव से तैयार हुई, पसंदीदा ड्रेस पहनी, एक घंटा लगाया। “कहां ले जा रहे हो?” उसने पूछा।
बिलाल मुस्कुराया, “बस, देखती जाओ।” कार में बैठकर, हथनीकुंड बैराज पहुंचे, कुछ देर वहां रके और फिर बिलाल ने कार को हिमाचल के पांवटा साहिब की तरफ मोड़ दिया। “होटल में रुकेंगे,” वह बोला। उमा उत्साहित थी, बातें करती रही। बिलाल चुप था, मन में तूफान। रात 8 बजे, अंधेरा छा गया। पांवटा में कमरे तलाशे, लेकिन पर्यटकों की भीड़ मिली। इसके बाद बिलाल गाड़ी को लेकर जंगल की तरफ चल दिया।
कार घुमाते रहे, एकांत ढूंढते। कलेसर नेशनल पार्क से गुजरे। रात गहराई। आखिरकार, बहादरपुर गांव की सीमा से पहले कार रोकी। बिलाल पिछली सीट पर गया, बहाना बनाया। उमा अपनी धुन में थी। अचानक, बिलाल ने सीट बेल्ट से गला दबाया। उमा छटपटाई, लेकिन मौका नहीं मिला। शरीर बेजान हो गया। बिलाल ने कार आगे बढ़ाई, आधा किलोमीटर दूर।

बिलाल ने उतारे उमा के कपड़े
फिर लाश को पॉपुलर की नर्सरी में ले गया। मीट काटने वाले छुरे से गर्दन काटी, कपड़े उतारे ताकि पहचान न हो। सिर पॉलिथीन में डाला, कार में रखा और हिमाचल- हरियाणा की सीमा पर लालढांग की खाई में फेंक दिया। घर लौटा, मोबाइल फॉर्मेट किया, सब डिलीट। सुबह निकाह की शॉपिंग में जुट गया, जैसे कुछ हुआ न हो।
7 दिसंबर को यमुनानगर में उमा की सिर कटी लाश मिली। शरीर पर केवल दो छोटे कपड़े ही थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया। यमुनानगर पुलिस ने पांच दिन तक शव की पहचान कराने के प्रयास किए, लेकिन जब कोई शव की पहचान के लिए नहीं आया तो पुलिस ने बॉडी का अंतिम संस्कार करा दिया। इसके बाद भी पुलिस ने अपनी जांच जारी रखी।
Saharanpur Romantic Love Story इस तरह सुलझा मामला
आखिरकार 13 दिसंबर को पुलिस को क्लू मिल ही गया। सीसीटीवी खंगाले गए तो जिस जगह लाश फेंकी गई थी, उससे कुछ दूर यूपी नंबर की गाड़ी दिखाई दी। बस यहीं से पुलिस ने बिलाल का पता लगा लिया।
यमुनानगर पुलिस जब नकुड में बिलाल के घर पहुंची तो उसकी बहन का निकाह हो रहा था। पुलिस ने तुरंत बिलाल को काबू कर लिया। पुलिस की पूछताछ में बिलाल टूट गया। उसने कबूल किया किया कि उमा की बेल्ट से गला दबाकर हत्या करने के बाद गर्दन को काटकर अलग फेंक दिया था।
ये कहानी एक ऐसे प्यार की थी, जो ट्रेजेडी में बदल गई। उमा का प्यार, बिलाल का जुनून, लेकिन डर ने सब बर्बाद कर दिया। रोमांस की शुरुआत मीठी थी, लेकिन अंत कड़वा। उमा की आंखों में सपने थे, बिलाल के दिल में राज। लेकिन प्यार में कभी-कभी छिपे राज मौत बन जाते हैं।
Note: कथा पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। कुछ काल्पनिक सीन क्रिएट किए गए हैं, जिनका वास्तविक घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीें है। Saharanpur Romantic Love Story

