Rewari Love story: योगेश पलवल के नांगल ब्राह्मण गाँव का साधारण युवक था। 2017 में उसने अयोध्या की एक युवती से लव मैरिज की। शुरुआत में उनकी दुनिया रंगीन सपनों से भरी थी। दोनों ने एक छोटे से घर में हंसी-खुशी के साथ अपने जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाई। वक्त बीता तो दो बच्चों की किलकारियाँ गूंजने लगीं-एक छह साल की बेटी और दस महीने का बेटा। लेकिन जहां प्रेम की मिठास थी, वहीं धीरे-धीरे दरारें भी दिखने लगीं। रोज़मर्रा की नोकझोंक ने रिश्ते की नींव हिला दी। झगड़े बढ़ते गए और अंततः पत्नी बच्चों को लेकर मायके चली गई।
पत्नी के चले जाने के बाद योगेश की ज़िंदगी जैसे सुनसान हो गई। घर की दीवारें अब खालीपन से गूंजती थीं। वह काम से लौटकर चुपचाप कोने में बैठ जाता और अक्सर बच्चों की तस्वीरें देखकर आंसू बहाता। दोस्त उसे समझाते, “समय सब ठीक कर देगा।” पर उसके लिए समय जैसे ज़हर बन चुका था। अकेलेपन की आग में वह धीरे-धीरे जल रहा था। शराब उसका सहारा बनने लगी, मगर दिल की तन्हाई मिटाने में वह भी असफल रही। ऐसे में उसे किसी ऐसे कंधे की तलाश थी, जिस पर सिर रखकर वह अपने टूटे सपनों की कहानी कह सके।
इसी दौरान फेसबुक पर उसकी मुलाक़ात प्रिया से हुई। प्रिया करनाल की रहने वाली थी और खुद भी रिश्तों के जंजाल में उलझ चुकी थी। उसने पहले अपने भाभी के भाई टिंकू से शादी की थी। परिवार ने विरोध किया, लेकिन बाद में मान गए। फिर भी रिश्ता टिक न सका। इसके बाद प्रिया का टिंकू के ममेरे भाई से अफेयर हुआ, जो कुछ समय बाद खत्म हो गया। अब वह भी अकेली थी, बच्चों के साथ संघर्ष कर रही थी। जब योगेश और प्रिया की ऑनलाइन चैट शुरू हुई, तो दोनों को लगा कि शायद यह रिश्ता उनके जख्मों पर मरहम रख सके।
चैट्स रात-दिन बढ़ती गईं। एक दिन योगेश ने लिखा-
“प्रिया, काश तुम सामने होतीं तो मैं कह पाता कि मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूँ।”
प्रिया ने जवाब दिया-
“योगेश, मुझे लगता है तुम मेरी तकलीफ़ समझते हो। जब तुमसे बात करती हूं तो लगता है ज़िंदगी अभी बाकी है।”
धीरे-धीरे ये शब्द उनके लिए सुकून का ज़रिया बन गए। मोबाइल स्क्रीन पर चमकते अक्षर उनके दिलों में नई रोशनी भरते थे। दोनों ने तय किया कि अब यह रिश्ता सिर्फ चैट तक सीमित नहीं रहेगा।
पहली मुलाक़ात यादगार रही। योगेश ने पहली बार जब प्रिया को देखा, तो उसे यक़ीन नहीं हुआ कि इतनी दुख झेलने वाली महिला अब भी इतनी खूबसूरत मुस्कान रख सकती है। प्रिया ने भी योगेश की आंखों में सच्चाई देखी। कॉफी टेबल पर बैठे-बैठे दोनों ने देर तक बातें कीं। उस दिन प्रिया ने मन ही मन सोच लिया- यह आदमी मेरे अकेलेपन का जवाब है। योगेश के लिए भी यह मुलाक़ात एक नई दुनिया की दहलीज़ थी। उनके दिलों में फिर से मोहब्बत ने दस्तक दी थी।
Rewari Love story: लिव-इन का सफ़र और मीठी नज़दीकियां
फेसबुक की दोस्ती अब मिलने-जुलने में बदल चुकी थी। योगेश और प्रिया के बीच मुलाक़ातें बढ़ने लगीं। हर मुलाक़ात में उनका अकेलापन थोड़ा और कम हो जाता। प्रिया कहती-“जब मैं तुम्हारे साथ होती हूँ तो लगता है जैसे सारी परेशानियाँ कहीं गुम हो गई हों।” योगेश मुस्कुराता और उसके हाथ पकड़कर कहता- “अब से तुम्हें कभी अकेला नहीं रहने दूँगा।” यह वादा उसके दिल की गहराइयों से निकला था। धीरे-धीरे दोनों ने तय किया कि अब वे साथ रहेंगे और अपनी अधूरी ज़िंदगी को मिलकर पूरा करेंगे।
मार्च 2024 की होली के दिन दोनों ने नया घर बसाने का फैसला लिया। रेवाड़ी के धारूहेड़ा सेक्टर-6 की एक तीन मंजिला इमारत में उन्होंने किराए पर कमरा लिया। घर छोटा था, लेकिन उनके लिए यह किसी महल से कम नहीं था। बेड, परदे और किचन की छोटी-छोटी चीज़ों को सजाते हुए वे ऐसे खुश थे मानो नया जीवन शुरू हो गया हो। प्रिया ने कहा- “यह कमरा हमारा आशियाना है।” योगेश ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया-“और तुम मेरी रानी।” इन लम्हों में उन्हें बीते सारे ग़म भुला देने की ताक़त मिल गई थी।
Rewari Love story धीरे-धीरे उनके बीच मोहब्बत और गहरी होने लगी। रात को छत पर बैठकर दोनों देर तक बातें करते। प्रिया तारों की ओर इशारा करके कहती- “देखो योगेश, वो तारा जैसे हम पर नज़र रख रहा है।” योगेश मुस्कुराकर कहता- “नहीं, वो तारा भी हमारी मोहब्बत से जल रहा है।” फिर वह उसकी उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फंसा लेता। गर्मियों की ठंडी रातों में ये छोटे-छोटे रोमांटिक पल उनकी दुनिया को मीठा बना देते थे। दोनों को लगता कि अब उनकी ज़िंदगी पटरी पर लौट आई है और दुनिया उन्हें कभी जुदा नहीं कर पाएगी।
हालांकि बच्चों का सवाल बीच-बीच में सिर उठाता। प्रिया तीन बच्चों की मां थी। जब वे बच्चों के साथ होती, तो योगेश थोड़ा खीझ जाता। लेकिन प्रिया उसे प्यार से मनाती। एक बार उसने हंसते हुए कहा- “अगर बच्चे तुम्हें पसंद नहीं, तो मुझे भी मत पसंद करो। मैं तो उन्हीं के लिए ज़िंदा हूँ।” योगेश ने उस वक़्त मजाक में कह दिया- “बस तुम रहो मेरे साथ, बाकी सब देख लेंगे।” मगर प्रिया की आँखों में एक डर उतर गया। वह जानती थी कि बच्चों को लेकर उनका रिश्ता कभी पूरी तरह आसान नहीं होगा।
फिर भी मोहब्बत का जादू उन पर हावी था। कभी प्रिया उसके लिए पसंदीदा खाना बनाती, तो कभी योगेश बाज़ार से फूल लेकर आता। वह गुलाब की खुशबू प्रिया के बालों में सजा देता और कहता- “इनसे ज़्यादा खूबसूरत तो तुम हो।” प्रिया शर्मा जाती और उसकी बाँहों में खो जाती। उनके कमरे की दीवारें इस मोहब्बत की गवाह बन गई थीं। मोहब्बत ने उन्हें मजबूती दी थी, लेकिन सतह के नीचे छिपी कड़वाहट धीरे-धीरे ज़हर की तरह फैल रही थी, जिसका असर जल्द ही दिखाई देने वाला था।
Rewari Love story: बच्चों की चाहत और रिश्ते की दरारें
समय बीतने के साथ बच्चों का मुद्दा बार-बार उनके बीच आने लगा। प्रिया अपने तीनों बच्चों से बहुत प्यार करती थी। वे उसकी ज़िंदगी की धड़कन थे। लेकिन योगेश जब भी बच्चों को कमरे में खेलते देखता, तो उसके चेहरे पर खिन्नता आ जाती। एक रात उसने गुस्से में कहा- “प्रिया, ये बच्चे मेरे नहीं हैं। मैं इनके साथ नहीं रह सकता।” प्रिया की आँखों में आँसू आ गए। उसने धीमी आवाज़ में कहा- “तो फिर मेरे साथ भी नहीं रह सकते। क्योंकि मैं माँ होने के नाते कभी उन्हें छोड़ नहीं सकती।”
झगड़े के बावजूद वे साथ रहते। कभी रात को बहस होती और सुबह फिर दोनों सामान्य हो जाते। मगर बच्चों पर तकरार ख़त्म नहीं होती थी। योगेश शराब पीकर आता और गुस्से में प्रिया से मारपीट तक करने लगता। वह कहता- “या तो बच्चे छोड़ो, या मुझे।” प्रिया चीखती- “पागल हो गए हो? माँ अपने बच्चों को कैसे छोड़ सकती है?” कमरे में बच्चों की रोती आवाज़ें गूंजतीं। पड़ोसी सोचते, ये बस आम दांपत्य कलह है, लेकिन असल में उनका रिश्ता धीरे-धीरे टूटने की कगार पर था।
एक दिन प्रिया ने बच्चों को बहन सीमा के पास छोड़ने का फैसला लिया। गर्मियों की छुट्टियों में उसने बच्चों को राजस्थान के बहरोड़ भेज दिया। वह चाहती थी कि कुछ समय योगेश के साथ अकेले बिताकर रिश्ते को फिर से संभाल सके। बच्चों के जाते ही घर में सन्नाटा पसर गया। प्रिया ने मुस्कुराकर कहा- “अब तो तुम्हें कोई शिकायत नहीं होगी।” योगेश ने कंधे उचकाते हुए कहा- “देखते हैं।” प्रिया ने चाहा कि यह खालीपन उन्हें और करीब लाएगा, लेकिन असल में यही खालीपन उनके लिए सबसे बड़ा तूफ़ान बनने वाला था।
Rewari Love story: यह मोहब्बत अब कैसे टिकेगी
2 जून को प्रिया बच्चों को छोड़कर वापस लौटी। कमरे में योगेश अकेला उसका इंतज़ार कर रहा था। प्रिया थकी हुई थी, मगर उसने उसे गले लगाते हुए कहा- “अब सिर्फ हम दोनों हैं, बिना किसी टेंशन के।” योगेश ने मुस्कुराने की कोशिश की, मगर उसके चेहरे पर गुस्से की लकीरें छिप नहीं पाईं। उस रात दोनों के बीच मामूली झगड़ा हुआ। प्रिया चाहती थी कि योगेश थोड़ा बदल जाए, मगर योगेश का दिल बच्चों की मौजूदगी और उनके ज़िक्र से ही तंग हो चुका था। वह समझ नहीं पा रहा था कि यह मोहब्बत अब कैसे टिकेगी।
3 जून की रात सब कुछ बदल गया। प्रिया की बड़ी बेटी चाहत ने माँ को फोन किया। लेकिन फोन बंद था। उसने योगेश को कॉल किया तो उसने झूठ बोलते हुए कहा—“तुम्हारी माँ सो रही है, सुबह बात कर लेना।” चाहत ने ज़िद की—“एक बार उठाकर बात करवा दो।” योगेश झुंझला गया और फोन काट दिया। प्रिया ने सुना तो बोली—“बच्चों को क्यों नहीं बात करने दी? वे मेरा सहारा हैं।” योगेश गुस्से से चिल्लाया- “बस! मुझे अब ये नाटक नहीं चाहिए।” उस रात उनका झगड़ा हिंसा में बदल गया।
Rewari Love story: खामोश रात और दो मौतें
3 जून की रात कमरे में चीख-पुकार गूंजी। प्रिया और योगेश के बीच बच्चों को लेकर बहस बढ़ती चली गई। प्रिया रोते हुए बोली—“मेरे बच्चों के बिना मैं अधूरी हूँ, उन्हें छोड़ नहीं सकती।” योगेश गुस्से में चिल्लाया-“मुझे ये बोझ मंज़ूर नहीं।” दोनों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रिया ने दरवाज़े की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन योगेश ने उसे पकड़ लिया। उस वक़्त उसका दिमाग पूरी तरह खो चुका था। गुस्से और पागलपन के उस क्षण में उसने ऐसा कदम उठाया, जिससे उनकी मोहब्बत का किस्सा हमेशा के लिए ख़त्म हो गया।
गुस्से में योगेश ने पास पड़ा हथियार उठाया और प्रिया पर वार कर दिया। चीख के साथ ही उसका शरीर ज़मीन पर गिर पड़ा। कमरे में सन्नाटा छा गया। प्रिया की आँखें खुली की खुली रह गईं, जैसे अब भी सवाल कर रही हों- “क्या यही तुम्हारा प्यार था?” खून बहता गया और फर्श पर फैल गया। योगेश हाँफ रहा था, उसकी आँखों में डर और पछतावा दोनों थे। वह समझ चुका था कि अब लौटने का कोई रास्ता नहीं। उस कमरे की चार दीवारें अब उसकी आत्मा पर बोझ बन चुकी थीं।
हत्याकांड के बाद योगेश ने सबसे पहले सोचा कि लाश को कैसे छुपाए। उसने बेड की ओर नज़र दौड़ाई। बेड भारी और अंदर से खाली था। उसने प्रिया के lifeless शरीर को खींचकर उसके भीतर डाल दिया। उसके हाथ कांप रहे थे, मगर वह लगातार खुद को समझा रहा था कि यही एकमात्र रास्ता है। जैसे ही उसने बेड को बंद किया, कमरे में एक डरावना सन्नाटा फैल गया। अब वही बेड, जिस पर दोनों हंसी-मजाक और प्यार भरे पल बिताते थे, मौत की गवाही देने लगा।
Rewari Love story: कानों में गुंजती रही प्रिया की आवाज
प्रिया की लाश छुपाने के बाद योगेश ने कमरे में चहलकदमी शुरू की। उसके कानों में प्रिया की बातें गूंज रही थीं—“बच्चे मेरी ज़िंदगी हैं।” उसका दिमाग सुन्न हो चुका था। उसने फोन उठाया और इंस्टाग्राम पर वीडियो रिकॉर्ड किया। उसमें उसने लिखा—“यह कलयुग है महोदय, यहाँ कर्म काले और स्टेटस भगवान वाले होते हैं।” यह उसकी आखिरी पोस्ट थी। वह शायद दुनिया को यह बताना चाहता था कि उसका दर्द समाज नहीं समझेगा। लेकिन असल में वह अपने अपराध को तर्क देने की नाकाम कोशिश कर रहा था।
उस रात देर तक योगेश ने कमरे में शराब पी। फिर उसने पंखे से रस्सी बांधी और बेड पर खड़ा हो गया। उसी बेड पर जिसमें प्रिया की लाश छुपी थी। यह दृश्य बेहद भयावह था। उसने आखिरी बार चारों ओर देखा, गहरी सांस ली और फंदे से झूल गया। उसकी आँखों से आँसू बह निकले, मानो वह अपने कर्मों का बोझ सहन नहीं कर पा रहा था। 6 जून को जब दरवाज़ा तोड़ा गया, तो लोग सिर्फ योगेश को फंदे से लटका देख पाए। लेकिन सच यह था कि उसके पैरों के नीचे मौत की दूसरी कहानी दबे पड़ी थी।
Rewari Love story: पुलिस की चूक और खौफनाक सच का खुलासा
6 जून की सुबह पड़ोसियों को कमरे से बदबू आने लगी। उन्होंने पहले सोचा कि शायद कोई जानवर मरा होगा। लेकिन जब गंध तेज़ हुई तो शक पक्का हो गया। पुलिस को सूचना दी गई। दरवाज़ा अंदर से बंद था, इसलिए तोड़ना पड़ा। जैसे ही दरवाज़ा खुला, सभी की नज़र पंखे पर पड़ी। योगेश का शव रस्सी से लटक रहा था। पुलिस ने जल्दी-जल्दी शव को नीचे उतारा और औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी। किसी ने अंदाज़ा भी नहीं लगाया कि उसी कमरे में एक और लाश मौजूद थी।
पुलिस ने कमरे की सामान्य तलाशी ली, मगर बेड पर ध्यान नहीं दिया। बेड वही था जिस पर योगेश खड़ा होकर फंदे से झूला था। लेकिन उसे खोलने की ज़हमत किसी ने नहीं उठाई। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और मामला आत्महत्या मान लिया गया। कमरे को ताला लगाकर चाबी मकान मालिक को सौंप दी गई। पुलिस ने रिपोर्ट में लिखा-“मानसिक तनाव और वैवाहिक कलह के चलते आत्महत्या।” इस लापरवाही ने उस सच को छुपा दिया जो अभी उजागर होना बाकी था।
दिन बीतते गए। इलाके में लोग हैरान थे कि बदबू क्यों कम नहीं हो रही। सभी को लगा शायद योगेश का शव ही इसकी वजह था। मगर सच और भी भयावह था। 19 जून को योगेश के पिता गिरीराज अपने बेटे का सामान लेने के लिए मकान मालिक के साथ कमरे में पहुंचे। वे टूट चुके थे, लेकिन बेटे की निशानियां अपने साथ ले जाना चाहते थे। कमरे में नज़र दौड़ाते ही उनकी नज़र बेड पर पड़ी। उन्होंने सोचा कि इसे भी ले चलेंगे, मगर जब उठाने लगे तो बेड असामान्य रूप से भारी लगा।
Rewari Love story: बंद बैड से खुला प्यार का राज
गिरीराज और मकान मालिक ने बेड खोलने का फैसला किया। जैसे ही उन्होंने सामान हटाना शुरू किया, अंदर से एक हाथ दिखाई दिया। दोनों के चेहरों का रंग उड़ गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जब पहुँची और बेड पूरी तरह खोला गया, तो अंदर से प्रिया का शव बरामद हुआ। बदबू असहनीय थी और शव बुरी तरह सड़ चुका था। यह दृश्य इतना भयानक था कि वहां मौजूद लोग काँप उठे। पुलिस को अब समझ आया कि योगेश ने आत्महत्या से पहले अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या की थी।
यह खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई। पड़ोसी सन्न थे—“हमें लगा महिला तो बच्चों के पास चली गई होगी।” किसी ने शक तक नहीं किया था। पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठने लगे। कैसे संभव था कि एक कमरे में दो लाशें हों और पुलिस एक ही देख पाए? अब सच सामने था—पहले प्रिया की हत्या, फिर योगेश की आत्महत्या। वह बेड, जो कभी उनके प्यार और सपनों की जगह था, अब उनकी मौतों का सबसे बड़ा गवाह बन चुका था।
Rewari Love story:परिवार का दर्द और समाज की चर्चाएँ
प्रिया की मौत की खबर जब करनाल स्थित उसके घर पहुँची, तो मातम छा गया। माँ-बाप रोते हुए कह रहे थे- “हमारी बेटी ने गलत रास्ता चुना, लेकिन मरने की हक़दार नहीं थी।” भाई-बहन स्तब्ध थे। बच्चों को जब सच्चाई बताई गई तो वे फूट-फूटकर रोने लगे। बड़ी बेटी चाहत ने कहा—“मैंने आखिरी बार माँ से बात करनी चाही थी, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।” इन मासूम शब्दों में एक टीस छिपी थी, जिसने सबको रुला दिया। यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि तीन बच्चों का बचपन भी तबाह हो गया था।
योगेश के पिता गिरीराज की हालत और भी दयनीय थी। बेटा आत्महत्या कर चुका था और अब उसी बेटे का राज़ खोलने वाले वही बने। वे बार-बार कहते—“काश उस दिन बेड नहीं उठाया होता, तो शायद ये मंजर मेरी आँखों के सामने न आता।” उनका मन ग्लानि से भरा था। उन्होंने अपने ही हाथों से उस बेड का ताला खोला, जिसमें बहू जैसी प्रिया का शव छिपा था। समाज के ताने और पुलिस की लापरवाही उनके दर्द को और गहरा कर रहे थे।
Rewari Love story: अंतिम भावनाएँ और ट्रैजिक एंड
योगेश और प्रिया की कहानी की शुरुआत मोहब्बत से हुई थी। उन्होंने सोचा था कि साथ रहकर अकेलेपन को मिटा लेंगे। फेसबुक की दोस्ती से शुरू हुआ रिश्ता कुछ ही महीनों में गहरी चाहत में बदल गया। प्रिया ने अपने बच्चों तक को पीछे छोड़ दिया ताकि योगेश के साथ नया जीवन जी सके। योगेश ने भी अपनी पुरानी पत्नी और बच्चों से दूरी बना ली। दोनों ने सपना देखा था—एक ऐसी दुनिया का, जहाँ बस वो और उनका प्यार हो।
फंदे पर झूलने से पहले योगेश ने इंस्टाग्राम पर आखिरी वीडियो बनाया। उसने लिखा—“यह कलयुग है महोदय, यहाँ कर्म काले और स्टेटस भगवान वाले होते हैं।” यह उसकी पीड़ा थी, समाज से शिकायत थी और शायद अपनी बेबसी का इज़हार भी। फंदे पर लटकते समय उसने आखिरी बार बेड की ओर देखा, जहाँ उसकी प्रिया सो रही थी- हमेशा के लिए। शायद उसके मन में यही था कि अब मौत के बाद ही वह उससे फिर मिल सकेगा।
यह कहानी एक सबक छोड़ जाती है। प्यार खूबसूरत होता है, लेकिन जिम्मेदारियों से भागकर किया गया प्यार अंततः दर्द ही देता है। रिश्ते सिर्फ चाहत से नहीं, बल्कि समझ और त्याग से चलते हैं। योगेश और प्रिया की मोहब्बत में जुनून था, लेकिन धैर्य नहीं। नतीजा यह हुआ कि दोनों मौत के अंधेरे में खो गए। उनकी याद अब उस मकान, उस बेड और उन बच्चों के आंसुओं में बस गई है। यह एक अधूरी प्रेमकथा है, जो हमेशा एक सवाल छोड़ जाएगी- क्या सच्चा प्यार जिम्मेदारियों से भागकर पूरा हो सकता है? Rewari Love story
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