Punjabi Woman Romance: कनाडा की एक ठंडी सुबह थी। एयरपोर्ट के बाहर खड़े लोग अपने-अपने भविष्य का बोझ उठाए खामोशी से कतार में लगे थे। किसी की आंखों में डर था, किसी में पछतावा और किसी में अधूरे सपनों की थकान। उसी भीड़ में खड़ी थी रूपिंदर कौर।
चेहरे पर लंबी यात्रा की थकावट थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा बोझ उसकी आंखों में था। वह कनाडा से डिपोर्ट होकर भारत लौट रही थी। जिस ज़िंदगी को वह बेहतर भविष्य की शुरुआत मानकर आई थी, वही ज़िंदगी अब उसे खाली हाथ लौटा रही थी।
उसी कतार में कुछ दूरी पर खड़ा था हरकंवलप्रीत सिंह। पंजाब के फरीदकोट जिले के गांव बल्लूआणा का रहने वाला हरकंवलप्रीत भी उसी हालात से गुजर रहा था। उसके लिए भी यह वापसी हार जैसी थी। दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे,
लेकिन हालातों की समानता ने अनजाने में उन्हें एक ही भावनात्मक धरातल पर ला खड़ा किया था। जब फ्लाइट के लिए आगे बढ़ते हुए हल्की बातचीत शुरू हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह साधारण-सी मुलाकात एक दिन पंजाब के फरीदकोट जिले के गांव सुखणवाला की छत तक पहुंच जाएगी।
पहले बस हालचाल हुआ, फिर वजह पूछी गई, और फिर ज़िंदगी की बातें होने लगीं। रूपिंदर कौर को पहली बार लगा कि कोई उसकी बात ध्यान से सुन रहा है। हरकंवलप्रीत को भी उसमें एक अपनापन दिखा। दोनों टूटे हुए थे, और शायद इसी टूटन ने उन्हें जोड़ दिया।
Punjabi Woman Romance: एक शादी, जिसमें प्रेम कभी पैदा ही नहीं हुआ
रूपिंदर कौर की ज़िंदगी पहले से ही एक रिश्ते में बंधी हुई थी। उसकी शादी 2023 में गांव बल्लूआणा के गुरविंदर सिंह से हुई थी। गांव सुखणवाला के लिए यह एक साधारण शादी थी, लेकिन रूपिंदर के लिए यह कभी पूरी तरह स्वीकार्य नहीं बन पाई। वह खुद को गुरविंदर से अलग समझती थी। उसे लगता था कि उसकी पढ़ाई, उसकी सोच और उसके सपने इस रिश्ते में घुट रहे हैं।
गुरविंदर सिंह शांत स्वभाव का इंसान था। वह मानता था कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। पत्नी को वक्त चाहिए, अपनापन धीरे-धीरे आएगा। लेकिन रूपिंदर के मन में वह जगह कभी बनी ही नहीं। वह अकसर उसे यह जताती कि वह उससे ज़्यादा पढ़ी-लिखी है। कई बार कहती कि उसकी शादी जबरदस्ती करवाई गई है और वह तलाक भी नहीं ले सकती। इन बातों से घर में तनाव बना रहता था, लेकिन गुरविंदर चुपचाप सब सहता रहा।
कनाडा जाना गुरविंदर के लिए नई शुरुआत की उम्मीद था। उसे लगा कि नया देश, नया माहौल शायद रिश्ते को भी नया रूप दे दे। लेकिन रूपिंदर के लिए कनाडा उस रिश्ते से और दूर जाने का रास्ता बन गया।

डिपोर्टेशन से जन्मा रिश्ता
डिपोर्टेशन इंसान को अंदर से तोड़ देता है। रूपिंदर और हरकंवलप्रीत दोनों इस अपमान से गुजरे थे। शायद इसी वजह से वे एक-दूसरे के दर्द को बिना कहे समझने लगे। भारत लौटने के बाद बातचीत बंद नहीं हुई। फोन कॉल्स बढ़ती गईं। मैसेज देर रात तक चलते रहते।
धीरे-धीरे यह रिश्ता सिर्फ सहानुभूति नहीं रहा। इसमें भावनाएं घुलने लगीं। रूपिंदर को हरकंवलप्रीत में वह आज़ादी दिखी, जो उसे अपने पति के साथ कभी महसूस नहीं हुई। हरकंवलप्रीत को रूपिंदर में वह समझदारी और अपनापन दिखा, जिसकी उसे तलाश थी।
यह प्यार चोरी-छिपे पनप रहा था। बाहर की दुनिया के लिए रूपिंदर एक शादीशुदा महिला थी, लेकिन उसके दिल में गुरविंदर की जगह अब कोई और ले चुका था।
कनाडा से लौटने के कुछ हफ्तों बाद की बात थी। पंजाब की सर्द रात धीरे-धीरे ठंडी सांसें भर रही थी। गांव से थोड़ी दूर, एक शांत जगह। अंधेरे दो चेहरे साफ दिख रहे थे, रूपिंदर कौर और हरकंवलप्रीत सिंह। दोनों लंबे समय से चुप थे। यह वह चुप्पी नहीं थी जिसमें दूरी हो, बल्कि वह जिसमें बहुत कुछ कहा जाना बाकी हो।
रूपिंदर की उंगलियां अनजाने में अपनी शॉल के किनारे से खेल रही थीं। उसकी आंखें सामने देख रही थीं, लेकिन मन कहीं और भटक रहा था।कनाडा की ठंडी कतारें, डिपोर्टेशन का अपमान, और फिर यह आदमी, जिसने बिना सवाल किए उसका दर्द सुना था। हरकंवलप्रीत ने उसकी बेचैनी महसूस की। उसने कुछ नहीं कहा, बस थोड़ा उसके पास आया, इतना कि दोनों की सांसें एक-दूसरे को महसूस कर सकें।
Punjabi Woman Romance: और जब दोनों एक दूसरे में समा गए
उस पल में कोई वादा नहीं था, कोई योजना नहीं थी। सिर्फ़ यह एहसास था कि दोनों टूटे हुए दिल एक ही धड़कन ढूंढ रहे हैं। हरकंवलप्रीत ने धीरे से पूछा, “ठीक हो?”
रूपिंदर ने सिर हिलाया, लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं- ऐसा भरोसा, जो उसने पहले कभी किसी को नहीं दिया था।
वह पहली बार था जब रूपिंदर ने किसी के सामने खुद आत्मसमर्पण कर दिया। हरकंवलप्रीत की मौजूदगी उसे सुरक्षित लग रही थी। उसने अपनी हथेली उसकी हथेली पर रख दी। यह स्पर्श हल्का था, लेकिन उसके भीतर बहुत कुछ बदल गया। जैसे किसी ने लंबे समय से बंद दरवाज़ा धीरे से खोल दिया हो।
समय जैसे थम गया। बाहर हवा चल रही थी, भीतर धड़कनें तेज़ थीं। दोनों के बीच की दूरी अपने-आप कम होती चली गई। नज़रों का मिलना, फिर झुक जाना। सब कुछ बिना शब्दों के घट रहा था।
यह कोई जल्दबाज़ी नहीं थी; यह भरोसे की धीमी चाल थी। देखते ही देखते दोनों एक दूसरे में समा गए।यह पहली बार की नज़दीकी किसी आवेग की नहीं, बल्कि उस अपनत्व की थी जो दर्द से जन्म लेता है। रूपिंदर ने पहली बार महसूस किया कि किसी का पास होना सिर्फ़ शरीर का मामला नहीं होता; कभी-कभी यह उस खालीपन को भरने जैसा होता है, जिसे दुनिया समझ नहीं पाती।
सुबह होने से पहले वे अलग हुए, लेकिन दोनों जानते थे कि कुछ बदल चुका है। यह नज़दीकी एक शुरुआत थी-प्यार की, और अनजाने में उस रास्ते की भी, जो आगे चलकर बहुत अंधेरा होने वाला था।
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Punjabi Woman Romance: पंजाब की मिट्टी में दबा हुआ प्यार
कनाडा से लौटने के बाद रूपिंदर गांव सुखणवाला में रहने लगी। बाहर से सब कुछ सामान्य लगता था, लेकिन घर के भीतर तनाव साफ महसूस किया जा सकता था। गुरविंदर को पत्नी के व्यवहार में आए बदलाव साफ दिख रहे थे। फोन छुपाकर बात करना, बात-बात पर झुंझलाना और हर समय कहीं और खोए रहना-ये सब उसे बेचैन करने लगे।
उसने सवाल पूछे, लेकिन सीधे जवाब कभी नहीं मिले। धीरे-धीरे उसे हरकंवलप्रीत सिंह का नाम पता चला। शक गहराता गया और डर में बदल गया। उसने अपनी बहन को कई बार बताया कि उसे खतरा महसूस हो रहा है। उसे लगता था कि रूपिंदर और उसका प्रेमी मिलकर उसे रास्ते से हटा सकते हैं।
28 नवंबर को उसने बहन को घबराकर फोन किया। उसने कहा कि अब उसे पूरा यकीन हो गया है कि दोनों के बीच अवैध संबंध हैं और वे उसकी संपत्ति हड़पने के लिए उसे मरवा सकते हैं। बहन ने उसे शांत रहने को कहा और अगले दिन मिलने का भरोसा दिया। लेकिन वह अगला दिन कभी नहीं आया।
प्रेम का वह मोड़, जहाँ रास्ता बदल गया
रूपिंदर और हरकंवलप्रीत के लिए गुरविंदर अब सिर्फ पति नहीं रहा था। वह उनके रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट बन चुका था। उनका प्यार अब सिर्फ साथ रहने की चाह नहीं था, बल्कि एक साथ भविष्य देखने का सपना बन चुका था। और उस सपने में गुरविंदर की कोई जगह नहीं थी।
योजना धीरे-धीरे बनी। हरकंवलप्रीत ने अपने दोस्त विश्वजीत कुमार को साथ लिया। तय हुआ कि रात में कार से गांव सुखणवाला आया जाएगा। रूपिंदर घर के भीतर सब संभालेगी। यह सब इतना ठंडे दिमाग से तय किया गया, जैसे भावनाओं ने इंसानियत को पूरी तरह ढक दिया हो।
Punjabi Woman Romance: 28–29 नवंबर की रात: जब प्यार ने खून का रंग लिया
उस रात घर के भीतर सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन भीतर ही भीतर एक तूफान चल रहा था। गुरविंदर सिंह की हत्या घर के अंदर ही की गई। या तो उसे जहरीली दवा दी गई या फिर गला घोंटकर मार दिया गया। शरीर पर कोई स्पष्ट चोट के निशान नहीं थे।
मौत के बाद शव को घर की छत पर फेंक दिया गया, ताकि लगे कि किसी और ने वारदात को अंजाम दिया है। अलमारियां तोड़ी गईं, सोने के गहने गायब किए गए, ताकि हत्या को लूट का रूप दिया जा सके।
करीब रात 11 बजे परिवार के सदस्य जतिंदर सिंह ने एक अजनबी युवक को घर से निकलते देखा। गेट खुद रूपिंदर कौर ने खुलवाया था। थोड़ी देर बाद घर में शोर मच गया।
आधी रात का शोर और झूठा विलाप
कुछ देर बाद गांव में हड़कंप मच गया। रूपिंदर कौर रोती-चिल्लाती बाहर आई और कहने लगी कि उसके पति को किसी ने मार दिया है। ग्रामीण इकट्ठा हुए और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस पहुंची तो छत पर पड़ा शव सच्चाई बयां कर रहा था। शुरुआती पूछताछ में ही शक गहराया और रूपिंदर कौर को गिरफ्तार कर लिया गया।
सीडीआर और वीरइंद्र कौर की चुप्पी
जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले गए। यहीं से वीरइंद्र कौर का नाम सामने आया। पता चला कि वह रूपिंदर कौर की पुरानी सहपाठी थी और हत्या की साजिश की पूरी जानकारी होने के बावजूद उसने यह बात पुलिस से छुपाई थी।
इसी आधार पर वीरइंद्र कौर को भी गिरफ्तार किया गया और दो दिन के रिमांड पर लिया गया।

गिरफ्तारी, बरामदगी और जेल
पुलिस ने हरकंवलप्रीत सिंह और उसके दोस्त विश्वजीत कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई कार और चोरी किए गए सोने के गहने बरामद कर लिए गए। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
प्यार, जो छत तक तो पहुँचा, लेकिन ज़िंदगी तक नहीं
यह कहानी प्यार से शुरू हुई थी। दो टूटे हुए दिलों से, एक ठंडी सुबह से। लेकिन जब यह प्यार जिम्मेदारी, सच और इंसानियत से टकराया, तो अपराध बन गया। गांव सुखणवाला की छत पर पड़ा गुरविंदर सिंह का शव सिर्फ एक इंसान की मौत नहीं था, बल्कि उस प्यार की भी मौत थी, जिसने गलत रास्ता चुन लिया।
डीएसपी तरलोचन सिंह ने बताया कि पुलिस ने थाना सदर फरीदकोट की मृतक की पत्नी रुपिंदर कौर और उसके प्रेमी बठिंडा के गांव बल्लूआणा निवासी हरकंवलप्रीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज करते हुए रुपिंदर कौर को गिरफ्तार भी कर लिया है, जबकि उसके प्रेमी की तलाश की जा रही है। मृतक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए फरीदकोट के मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या की यह वारदात प्रेम संबंधों के चलते अंजाम दी गई है। Punjabi Woman Romance
