Ludhiana live in partner : यह कहानी पंजाब की मिट्टी से निकली एक ऐसी लड़की की है, जिसके सपने आसमान छूने को बेताब थे, लेकिन जिंदगी ने उसे धरती पर ही पटक दिया। नाम था दिलजोत शर्मा, उम्र महज 25-26 साल। वह मानसा जिले के छोटे से गांव रल्ला की बेटी थी। परिवार में मां वीरपाल कौर आंगनवाड़ी वर्कर थीं, और घर की सादगी में ही दिलजोत ने पढ़ाई का जुनून पाला।
दिलजोत बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी। गांव रल्ला में रहते हुए उसने स्कूल की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उसका मन बड़ा सपना देखता था- जज बनने का। पंजाब में ज्यूडिशियरी की तैयारी के लिए अच्छी कोचिंग चाहिए थी, और मानसा जिले में ऐसी सुविधा नहीं थी।
इसलिए 2024 में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से BA, LLB पूरा करने के बाद वह लुधियाना आ गई। यहां वह जज बनने की तैयारी के साथ-साथ वकालत भी शुरू कर चुकी थी। उसने LLB के बाद वकालत के लिए पंजाब बार एसोसिएशन से रजिस्ट्रेशन भी करा लिया था।

Ludhiana live in partner : जरूरतमंदों के हकों के लिए लड़ती थी
लुधियाना पहुंचते ही दिलजोत ने अपनी सहेली रविंदर कौर के साथ रहना शुरू किया। रविंदर कौर पहले से ही शहर में थी और एक ऐसी संस्था से जुड़ी हुई थी जो मजदूरों और जरूरतमंदों के हकों के लिए लड़ती थी- एक लेफ्ट-लीनिंग या मजदूर यूनियन से जुड़ी संस्था। दिलजोत ने भी उसी संस्था के माध्यम से मजदूरों के केस लड़ने शुरू किए।
वह रोज लुधियाना कचहरी जाती, गरीब मजदूरों को मुफ्त कानूनी सलाह देती, उनके केस लड़ती। उसका मन था कि इंसाफ की लड़ाई में अपना योगदान दे। इसी संस्था के जरिए उसकी मुलाकात हुई जगदीश सिंह से, जो एक लेबर यूनियन के प्रधान थे। जगदीश गांव अकलिया के रहने वाले थे और मजदूरों के बीच काफी सक्रिय थे।
धीरे-धीरे दिलजोत और जगदीश के बीच नजदीकियां बढ़ीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जगदीश ने दिलजोत को अपने प्रेम जाल में फंसाया। मां वीरपाल कौर के अनुसार, जगदीश ने शादी का वादा किया, लेकिन वह पहले से शादीशुदा था। फिर भी दिलजोत उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। दिलजोत ने बाद में अपनी मां को भी इस बारे में बताया।

Ludhiana live in partner : हकीकत कुछ और थी
वह सोचती थी कि जगदीश उसके साथ खुशहाल जिंदगी बिता सकता है। लेकिन हकीकत कुछ और थी। जगदीश किसी और महिला के संपर्क में आ गया था। इससे दोनों के बीच अक्सर झगड़े होने लगे। दिलजोत मानसिक तनाव में रहने लगी। वह डिप्रेशन में चली गई।
5 जनवरी 2026 को लुधियाना में ताजपुर रोड स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में किराए के कमरे में दिलजोत का शव मिला।उसकी सहेली रविंदर कौर ने अलमारी में एक सुसाइड नोट पाया, जिसमें दिलजोत ने लिखा था कि वह खुद से तंग आ चुकी है, मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान है, बीमारी से तंग है। शुरुआत में पुलिस ने इसे सुसाइड मान लिया और अननैचुरल डेथ के तहत कार्रवाई की। दिलजोत के परिवार को खबर मिली तो वे मानसा से लुधियाना पहुंचे। अंतिम संस्कार भी हो गया।

लेकिन मां वीरपाल कौर का मन नहीं माना। उन्होंने सुसाइड नोट को फर्जी बताया। उनका कहना था कि उनकी बेटी ने ऐसा कुछ नहीं लिखा होगा। उन्होंने पुलिस को बताया कि दिलजोत की मौत जगदीश सिंह के धोखे और उकसावे की वजह से हुई। जगदीश अब किसी और के साथ था, जिससे दिलजोत को बार-बार झगड़े झेलने पड़ते थे।
वीरपाल कौर ने आरोप लगाया कि जगदीश ने बेटी को फंसाया, शादी का झांसा दिया, लेकिन कोर्ट मैरिज से इनकार कर दिया। कुछ लोगों ने बताया कि दोनों ने शादी भी कर ली थी, लेकिन कानूनी मान्यता के लिए कोर्ट मैरिज की बात पर जगदीश भागता रहा।

Ludhiana live in partner : दिलजोत की मां के आरोप
वीरपाल कौर ने यह भी कहा कि दिलजोत की सहेली रविंदर कौर भी इस मामले में शामिल हो सकती है, क्योंकि वह संस्था से जुड़ी थी और जगदीश के करीब थी। मां की मांग थी कि हत्या का केस दर्ज हो, न कि सिर्फ सुसाइड। उन्होंने जगदीश और सहेली को नामजद करने की मांग की।
पुलिस ने शुरुआत में मामले को सुसाइड ही माना, लेकिन 25 दिन की जांच के बाद, ACP सुमित सूद के नेतृत्व में जांच हुई। जगदीश सिंह और उसकी एक साथी महिला ने पुलिस को बताया था कि दिलजोत मानसिक तनाव में थी, उसके डाइजेस्टिव सिस्टम में दिक्कत थी।
लेकिन मां के बयानों पर पुलिस ने जगदीश सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Section 108 BNS) का मामला दर्ज कर लिया। जांच अधिकारी ASI कृष्ण लाल ने पुष्टि की कि FIR दर्ज हो गई है और आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
इस बीच, दिलजोत के साथ काम करने वाले एक्टिविस्ट्स और लेफ्ट ऑर्गनाइजेशंस ने भी आवाज उठाई। ‘जस्टिस फॉर दिलजोत’ कमेटी बनी, जिसने मानसा में SSP ऑफिस और लुधियाना में पुलिस कमिश्नरेट के बाहर प्रदर्शन की घोषणा की। CPI (ML) लिबरेशन के नेता सुखदर्शन सिंह नट्ट ने कहा कि मौत रहस्यमय है, सिर्फ सुसाइड नहीं लगती। पंजाब स्टेट कमीशन फॉर वुमन ने भी सुसाइड नोटिस लिया और लुधियाना पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी।

Ludhiana live in partner : अधूरे रह गए सपने
दिलजोत की कहानी एक तरफ सपनों की है—एक गरीब गांव की लड़की जो जज बनकर इंसाफ लाना चाहती थी, मजदूरों के लिए लड़ रही थी। दूसरी तरफ धोखे, विश्वासघात और मानसिक पीड़ा की। वह लुधियाना आई थी पढ़ाई और जज बनने के सपने लेकर, लेकिन यहां उसे प्यार का नाम पर धोखा मिला। जगदीश सिंह जैसे व्यक्ति ने उसके विश्वास का फायदा उठाया, शादी का वादा किया, लेकिन जब बात कानूनी शादी की आई तो मुकर गया। झगड़े बढ़े, तनाव बढ़ा, और आखिरकार 5 जनवरी को उसकी जिंदगी थम गई।
मां वीरपाल कौर आज भी इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। उनका कहना है कि बेटी की मौत सुसाइड नहीं, बल्कि उकसावे और धोखे की वजह से हुई। पुलिस ने अब कदम उठाया है, लेकिन परिवार को पूरा इंसाफ चाहिए—हत्या का केस, सहेली का नामजद होना, और सच्चाई का सामने आना।

Ludhiana live in partner : कई सवाल छोड़ गई दिलजोत की मौत
यह कहानी सिर्फ दिलजोत की नहीं, बल्कि उन हजारों लड़कियों की है जो सपने लेकर शहर आती हैं, मेहनत करती हैं, लेकिन रिश्तों के जाल में फंसकर टूट जाती हैं। दिलजोत शर्मा- एक होशियार, मेहनती, इंसाफपसंद लड़की, जिसके सपने अधूरे रह गए।
लेकिन उसकी मौत ने सवाल खड़े किए हैं: क्या इंसाफ की लड़ाई लड़ने वाली को खुद इंसाफ मिल पाएगा? क्या जगदीश सिंह जैसे लोग जवाबदेह होंगे? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल दिलजोत की याद में पंजाब की यह धरती शोक और सवालों से भरी है।
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