Live-in Love Tragedy हरियाणा के छोटे शहर रतिया में एक सामान्य-सी जिंदगी शुरू हुई थी सिमरन की। नाम था सिमरन उर्फ सिम्मी, उम्र 34 साल। वह फतेहाबाद जिले के वार्ड नंबर 13 की रहने वाली थी। जिंदगी की शुरुआत में उसने शादी की, एक बेटा और एक बेटी हुई। लेकिन घरेलू कलह बढ़ती गई।
छह साल पहले पंचायती तरीके से तलाक हो गया। कोर्ट में केस अभी भी चल रहा था। माता-पिता ने उसे घर से बेदखल कर दिया। सिमरन अकेली रह गई, लेकिन अपने 9 साल के बेटे को अपने पास रखा। बेटी पिता के साथ चली गई।
Live-in Love Tragedy जीवन की मजबूरियों ने सिमरन को ऑर्केस्ट्रा डांस की दुनिया में धकेल दिया। वह स्टेज पर नाचती, लोगों की तालियां बजवाती। यह काम आसान नहीं था- रातें देर तक, यात्राएं, भीड़ का शोर। लेकिन इससे कमाई होती, बेटे की पढ़ाई चलती। तीन महीने पहले वह सिरसा आ गई थी, जहां ऑर्केस्ट्रा ग्रुप में काम मिला। हिसार रोड के पास एक किराए के मकान में रहती थी, जहां कई अन्य लड़कियां भी रहती थीं – दिल्ली और नेपाल से आई हुईं।
Live-in Love Tragedy: स्टेज पर हुई पहली मुलाकात
इसी दुनिया में मिला सुनील। सुनील, 40 साल का, जींद जिले के ढाणी रामगढ़ का रहने वाला। वह भी ऑर्केस्ट्रा प्रोग्राम्स में आता-जाता रहता। दोनों की पहली मुलाकात एक स्टेज शो के दौरान हुई। सिमरन डांस कर रही थी, सुनील नीचे बैठा तालियां बजा रहा था।
शो खत्म होने के बाद बातें हुईं। सुनील की मुस्कान में एक सादगी थी, जो सिमरन को भा गई। सुनील ने कहा, “तुम्हारी एनर्जी कमाल की है।” सिमरन हंसी। फिर सोशल मीडिया पर चैट शुरू हुई। मैसेज, कॉल्स, मिलना-जुलना। धीरे-धीरे दोनों करीब आए।
पांच महीने पहले उनका रिश्ता लिव-इन में बदल गया। सुनील अक्सर सिमरन से मिलने आता। रात के समय कमरे में घंटों बातें करते। सुनील कहता, “तुम्हारे बिना अब जिंदगी अधूरी लगती है।” सिमरन को लगता, शायद यह उसकी जिंदगी का नया अध्याय है।
तलाक के दर्द के बाद पहली बार किसी ने उसे इतना महत्व दिया। सुनील का भाई हरियाणा पुलिस में पंचकूला में सिपाही था, लेकिन सुनील खुद साधारण जिंदगी जीता था। दोनों के बीच प्यार गहरा होता गया। सिमरन सोचती, “शायद अब सब ठीक हो जाएगा। बेटे के साथ एक नया परिवार।”
Live-in Love Tragedy: सोशल मीडिया पर युवक से दोस्ती
लेकिन प्यार में छिपी थी एक दरार। दो महीने पहले सिमरन की मुलाकात रानियां के एक युवक से हुई। सोशल मीडिया पर बातें शुरू हुईं। हल्की-फुल्की चैट, हंसी-मजाक। सिमरन को लगा, यह बस दोस्ती है। लेकिन सुनील को पता चल गया तो वह जलने लगा।
“तुम मेरे साथ हो या किसी और के?” वह पूछता। सिमरन समझाती, “बस बातें हैं, कुछ नहीं।” लेकिन सुनील का मन नहीं मानता। झगड़े बढ़ने लगे। फोन पर चिल्लाना, मिलने पर बहस। सिमरन थक गई। वह सोचती, “क्यों सब कुछ बिगड़ रहा है?”
9 फरवरी की शाम। सिमरन ने फैसला किया, आज कुछ अच्छा करेगी। बेटे को लेकर हिसार रोड के थिएटर में ‘बॉर्डर-2’ फिल्म देखने गई। फिल्म खत्म हुई, बेटा खुश था। सिमरन ने उसे हॉस्टल में छोड़ा- प्राइवेट स्कूल का हॉस्टल, जहां वह पढ़ता था। रात करीब 9 बजे वह अपने कमरे पर लौट आई। कमरा छोटा था, लेकिन उसका अपना। दो फ्रेंड्स- एक दिल्ली वाली, एक नेपाल वाली, भी साथ थीं।
रात 12 बजे दरवाजे पर दस्तक हुई। सुनील आया। सिमरन ने दरवाजा खोला। सुनील की आंखों में गुस्सा था। दोनों कमरे में घुसे। सिमरन ने फ्रेंड्स को नीचे के रूम में सोने के लिए भेज दिया। कमरे में अकेले। बात शुरू हुई। सुनील ने पूछा, “वो रानियां वाला लड़का कौन है? तुम उससे क्यों बात करती हो?” सिमरन ने कहा, “सुनील, बस दोस्ती है।
Live-in Love Tragedy: गुस्सा जब हद से गुजर जाए
तुम क्यों इतना शक करते हो?” लेकिन सुनील का गुस्सा बढ़ता गया। चिल्लाना शुरू। “तुम मुझे धोखा दे रही हो!” सिमरन रोने लगी। “मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा।”
झगड़ा बढ़ा। काफी देर तक कमरे से चिल्लाने की आवाजें आती रहीं। सुनील ने सिमरन का गला दबाया। सिमरन छटपटाई, लेकिन संघर्ष किया। लेकिन सुनील का गुस्सा इतना था कि उसने गला घोंट दिया। सिमरन बेहोश हो गई, फिर मौत हो गई। सुनील को होश आया।
उसने देखा- सिमरन बेड पर पड़ी है, सांस नहीं चल रही। डर लगा। पछतावा हुआ। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। उसने सिमरन की चुन्नी उठाई। फंदा बनाया। खुद को फांसी लगा ली। दोनों की लाशें कमरे में पड़ी रहीं।
मंगलवार सुबह दरवाजा नहीं खुला। फ्रेंड्स ने मकान मालकिन को बताया। मालकिन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची। सुनील फंदे पर लटका मिला, सिमरन बेड पर मृत। जांच शुरू हुई। सिमरन का फोन लॉक था। बेटा आया, उसने मां का फोन अनलॉक किया।
कॉल डिटेल्स से पता चला- सुनील अक्सर आता था। परिजन पहुंचे- सिमरन का पूर्व पति, मौसी। उन्होंने बताया, “सिमरन ऑर्केस्ट्रा में काम करती थी। दूसरे युवक से बातें करती थी, इसी से तलाक हुआ।”
Live-in Love Tragedy: सिमरन के संघर्ष की कहानी
पुलिस ने फोन चेक किया। सुनील और सिमरन के बीच मैसेज मिले- प्यार भरे, फिर झगड़े वाले। रानियां वाले युवक से चैट्स भी। पुलिस ने कहा, झगड़ा ईर्ष्या से हुआ। हालांकि, दूसरे युवक की पुष्टि नहीं की।
सिमरन की जिंदगी एक संघर्ष की कहानी थी। तलाक के बाद अकेली, बेटे की जिम्मेदारी, ऑर्केस्ट्रा में काम। सुनील से मिला प्यार- लिव-इन रिलेशन, जो शुरू में सपनों जैसा था। मिलना, बातें, साथ रहना। लेकिन ईर्ष्या ने सब बर्बाद कर दिया। एक रात का झगड़ा, गुस्सा, हत्या, फिर सुसाइड। सिमरन का 9 साल का बेटा अब अनाथ हो गया। बेटी पिता के पास। परिवार टूटा हुआ।
यह कहानी प्यार की है, लेकिन गलत तरीके से जीए गए प्यार की। लिव-इन में विश्वास, ईमानदारी की कमी, शक की आग ने दोनों की जिंदगी खत्म कर दी। सिरसा का फौजी चौक पास का मकान अब सिर्फ एक दर्दनाक याद बन गया। जहां कभी हंसी-मजाक होता था, वहां अब सन्नाटा है।
सिमरन सोचती होगी, “काश सुनील समझता।” सुनील के मन में आखिरी पल पछतावा रहा होगा। लेकिन अब सब खत्म। एक प्रेम कहानी जो रोमांटिक शुरू हुई, ट्रेजिक अंत पर पहुंची। हरियाणा की इस छोटी सी घटना में बड़ा सबक है – प्यार में शक और गुस्सा कितना खतरनाक हो सकता है। Live-in Love Tragedy
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