Bathinda Love Story: बठिंडा की एक सुनहरी शाम थी, जब सूरज की ढलती किरणें शहर की छतों पर अपनी लालिमा बिखेर रही थीं। प्रिंस और मलिका एक ऊँची इमारत की छत पर बैठे थे। हल्की ठंडी हवा मलिका की जुल्फों से खेल रही थी। मलिका, जो अब तक अपनी जिंदगी के तूफानों से थक चुकी थी, प्रिंस के कंधे पर सिर रखकर जैसे अपनी सारी दुनिया भूल गई थी।
प्रिंस ने धीरे से उसका हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी उंगलियों को सहलाते हुए बोला, “मलिका, तुमने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ झेला है, लेकिन अब ये अंधेरा खत्म होने वाला है। तुम मेरे लिए सिर्फ एक दोस्त नहीं हो, तुम वो सुकून हो जिसकी तलाश मुझे बरसों से थी।”
मलिका की आँखों में नमी तैर गई। उसने प्रिंस की ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “सब यही कहते हैं प्रिंस, पर वक्त आने पर साथ छोड़ देते हैं। मेरे अपनों ने मुझे भुला दिया, क्या तुम भी एक दिन मुझे भूल जाओगे?”
प्रिंस ने तुरंत उसके होठों पर अपनी उंगली रखी और उसे चुप कराते हुए उसके बेहद करीब आ गया। उसने मलिका की आँखों में गहराई से देखते हुए धीरे से फुसफुसाया, “भूलना तो उन्हें पड़ता है जो यादों में होते हैं, तुम तो मेरी रूह में बसती हो। यकीन न आए तो मेरा दिल धड़का कर देख लो, वहाँ सिर्फ तुम्हारा नाम सुनाई देगा।”
उस पल माहौल में एक अजीब सी कशिश थी। मलिका को लगा जैसे वक्त वहीं थम गया हो। प्रिंस ने उसके माथे को चूमा और उसके कान के पास झुककर कहा, “लोग कहते हैं प्यार अंधा होता है, पर मेरा प्यार तो बस तुम्हें देखना चाहता है। तुम मेरी ‘मलिका’ हो और मैं तुम्हारा ‘काकू’।”
मलिका उस रात इतनी भावुक हो गई कि उसने अगले ही दिन फैसला कर लिया कि वह इस ‘काकू’ नाम को हमेशा के लिए अपनी खाल पर उकेर लेगी। उसने अपनी गर्दन के बाईं तरफ छोटे अक्षरों में बड़ी खूबसूरती से ‘काकू’ लिखवाया। उस समय उसे लगा था कि यह टैटू उनकी अमर प्रेम कहानी का गवाह बनेगा, वह इस बात से अनजान थी कि यही स्याही एक दिन उसकी आखिरी पहचान बनकर रह जाएगी।
Bathinda Love Story: अब सिलसिलेवार पढ़े पूरी कहानी
अकेलेपन के उन दिनों में मलिका का सहारा बना उसका स्मार्टफोन। इंस्टाग्राम और फेसबुक की चमक-धमक वाली दुनिया में उसकी मुलाकात प्रिंस से हुई। प्रिंस, जो बठिंडा में ही रहता था और पहले मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था।
उनकी बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। प्रिंस की मीठी बातों ने मलिका के जख्मों पर मरहम का काम किया। प्रिंस भी अकेला था। उनके बीच घंटों तक वीडियो कॉल और चैटिंग चलने लगी। प्रिंस अक्सर कहता:
“मलिका, तुम बहुत अकेली रही हो, अब मैं हूँ न। मैं तुम्हें दुनिया की हर खुशी दूँगा।”
धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। पिछले 3-4 महीनों से वे एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए थे। प्रिंस उसे घुमाने ले जाता, उसे अच्छे कैफे में खाना खिलाता। मलिका को लगने लगा था कि शायद खुदा ने प्रिंस को उसकी जिंदगी के खालीपन को भरने के लिए ही भेजा है। वह प्रिंस के प्यार में इस कदर पागल थी कि उसने अपनी गर्दन पर प्रिंस का निक नेम ‘काकू’ टैटू करवा लिया था। वह टैटू महज स्याही नहीं, मलिका का प्रिंस के प्रति अटूट विश्वास था।
Bathinda Love Story: एक शाम, जो आखिरी साबित हुई
8 फरवरी की वो शाम बठिंडा में बेहद ठंडी थी। प्रिंस ने मलिका को फोन किया, “मलिका, आज घर आ जाओ। बहुत दिन हो गए सुकून से बैठे हुए।” मलिका खुश थी। वह तैयार होकर प्रिंस के घर पहुँची।
शुरुआत में सब कुछ बहुत रूमानी था। हल्की रोशनी, धीमी आवाज में संगीत और उन दोनों की बातें। प्रिंस उसे बता रहा था कि वह उसके बिना कितना अधूरा महसूस करता है। वे साथ में हंसे, पुरानी बातें कीं। मलिका ने नहीं सोचा था कि प्रिंस के इस प्यार भरे चेहरे के पीछे एक शक का ज़हर पल रहा है।
प्रिंस को पिछले कुछ दिनों से लगने लगा था कि मलिका किसी और से भी बात करती है। वह शक की आग में जल रहा था। उस रात प्रिंस नशे में धुत था। जैसे-जैसे रात गहराती गई, बातों का सिलसिला ‘लव’ से हटकर ‘लॉयल्टी’ (वफादारी) पर आ गया।
Bathinda Love Story: जब शक ने प्यार का गला घोंटा
अचानक प्रिंस का लहजा बदल गया। “तुम आजकल फोन पर किससे बिजी रहती हो?” प्रिंस ने चिल्लाकर पूछा।
मलिका दंग रह गई। “प्रिंस, तुम क्या कह रहे हो? मेरा तुम्हारे अलावा है ही कौन?”
बहस बढ़ती गई। प्रिंस के सिर पर खून सवार था। मलिका का रोना और चिल्लाना उसे सच नहीं, बल्कि नाटक लग रहा था। जब मलिका ने शोर मचाना शुरू किया, तो पड़ोसियों के डर से प्रिंस ने पास पड़ा चाकू उठाया और मलिका की गर्दन पर रख दिया।
“चुप हो जाओ, वरना अंजाम बुरा होगा!” प्रिंस ने धमकी दी।
मलिका डरी हुई थी, पर उसने अपना पक्ष रखना बंद नहीं किया। नशे और गुस्से के अंधेपन में प्रिंस ने पहला वार मलिका की गर्दन के बाईं तरफ किया। मलिका तड़पकर जमीन पर गिर पड़ी। उसके गले पर बना वह ‘काकू’ टैटू अब खून से लथपथ था। प्रिंस वहीं नहीं रुका, उसने मलिका के सीने (दिल) पर एक के बाद एक 5-6 वार किए। मलिका की सांसें थम गईं।
Bathinda Love Story: वह लाल सूटकेस और गुनहगार की कार
हत्या के बाद जब प्रिंस का नशा उतरा, तो वह कांप उठा। लेकिन यह पश्चाताप की कंपकंपी नहीं, पकड़े जाने का डर था। उसने पहले लाश को जलाने की कोशिश की, ताकि पहचान मिट सके। लेकिन जैसे ही मांस जलने की बदबू फैली, वह डर गया कि पड़ोसी जाग जाएंगे। उसने तुरंत आग बुझाई।
मलिका दुबली-पतली थी। प्रिंस ने घर में रखा एक लाल रंग का बड़ा सूटकेस निकाला। उसने अपनी उस प्रेमिका को, जिसे वह कभी बाहों में भरने के सपने देखता था, मोड़कर उस बैग में ठूंस दिया। दो दिनों तक वह लाश उस सूटकेस में बंद उसके घर में ही पड़ी रही।
11 फरवरी की सुबह, सूरज निकलने से पहले, प्रिंस ने उस सूटकेस को अपनी i-20 कार की डिग्गी में रखा। वह बठिंडा-मलोट रोड की ओर निकल पड़ा। सुनसान जगह देखकर उसने वह सूटकेस खेतों की तरफ फेंक दिया और चैन की सांस लेकर घर लौट आया। उसे लगा कि कहानी खत्म हो गई।
Bathinda Love Story: नियति का न्याय: एक टैटू ने खोला राज
कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छोड़ ही देता है। 11 फरवरी की दोपहर कुछ आवारा कुत्तों ने उस सूटकेस को नोंचना शुरू कर दिया। बदबू फैली तो खेतों में काम कर रहे लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस को जब लाश मिली, तो वह अधजली हालत में थी। पहचान करना मुश्किल था, लेकिन मलिका की गर्दन पर बना वह ‘काकू’ टैटू साफ नजर आ रहा था। पुलिस ने जांच शुरू की। मुखबिरों और सोशल मीडिया की छानबीन से पता चला कि यह लड़की अक्सर प्रिंस नाम के युवक के साथ देखी जाती थी।
जब पुलिस प्रिंस के घर पहुँची, तो वह हैरान रह गया। उसे लगा था कि वह बच गया है। पुलिस की सख्ती के आगे उसने सब उगल दिया।
Bathinda Love Story: निष्कर्ष: समाज के लिए एक सबक
मलिका और प्रिंस की यह कहानी एक दुखद चेतावनी है। एक तरफ मलिका थी, जिसने प्यार की खातिर अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, और दूसरी तरफ प्रिंस, जिसके लिए प्यार से बड़ा उसका ‘अहंकार’ और ‘शक’ था।
बठिंडा की सड़कों पर वह लाल सूटकेस आज भी उन मासूम लड़कियों की दास्तां बयां करता है, जो डिजिटल दुनिया के छलावे में आकर अपनी जान गंवा बैठती हैं। मलिका की गर्दन पर बना ‘काकू’ का टैटू अब बस एक पुलिस फाइल का हिस्सा है, जो चीख-चीख कर कह रहा है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती और हर ‘आई लव यू’ कहने वाला इंसान प्रेमी नहीं होता।
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