Toxic Relationship: मेरठ की बेगमपुल की सड़कों पर शाम ढल रही थी। ठंडी हवा के झोंकों के बीच 24 साल की रेणू अपनी गोद पर हाथ रखे बैठी थी। उसके भीतर एक नन्ही सी जान धीरे-धीरे सांस ले रही थी- उसका होने वाला बच्चा।
यह उसकी पहली प्रेग्नेंसी थी, एक ऐसा अहसास जिसे दुनिया की हर महिला के लिए सबसे खूबसूरत माना जाता है। लेकिन रेणू के लिए यह सफर खुशियों से ज्यादा, आंसुओं और मानसिक कशमकश से भरा था। वह एक ऐसे चौराहे पर खड़ी थी, जहां एक तरफ उसका अतीत था और दूसरी तरफ उसकी आने वाली संतान का भविष्य।
Toxic Relationship: वह प्यार, जो सिर्फ एकतरफा था
रेणू की कहानी कुछ साल पहले शुरू हुई थी, जब उसकी जिंदगी में वह शख्स आया जिसे वह कभी अपना सब कुछ मानती थी। वह उससे बेपनाह प्यार करती थी। प्यार में इंसान अक्सर सामने वाले की कमियों को नजरअंदाज कर देता है, और रेणू ने भी यही किया। जब से वह उसकी जिंदगी में आया था, रेणू की हंसी-खुशी और सुव्यवस्थित जिंदगी धीरे-धीरे पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई। वह शख्स न सिर्फ अजीब मिजाज का था, बल्कि उसका बर्ताव भी रेणू के प्रति बेहद रूखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला था।
कई महीनों तक इस बुरे बर्ताव को सहने के बाद, आखिरकार कुछ महीने पहले रेणू ने हिम्मत जुटाई। उसने तय किया कि वह इस घुटन भरे रिश्ते में और नहीं रह सकती/सकता। अपने और अपने होने वाले बच्चे की भलाई के लिए उसने उससे रिश्ता तोड़ लिया। लेकिन दिल का मामला इतना आसान कहां होता है?
रिश्ता टूटने और उसके बुरे व्यवहार को जानने के बाद भी, रेणू के दिल के किसी कोने में उसके लिए प्यार अब भी बाकी था। वह जानती थी कि यह प्यार गलत है, वह यह भी अच्छी तरह समझती थी कि वह आदमी न तो उसके लिए अच्छा है और न ही उसके होने वाले बच्चे के लिए। फिर भी, यादें और जज्बात उसे कभी-कभी कमजोर कर देते थे।

Toxic Relationship: जिम्मेदारी से भागता एक पिता
रिश्ता टूटने के बाद भी वे दोनों एक अजीब से रिश्ते में बंधे थे। वे कभी-कभी दोस्तों की तरह बात करते थे, लेकिन यह दोस्ती भी सिर्फ उस लड़के की शर्तों पर चलती थी। वह रेणू से सिर्फ तभी बात करता था जब उसका मूड ठीक होता था या जब उसे अपनी कोई जरूरत पूरी करनी होती थी। इसके उलट, जब रेणू को कभी सहारे की जरूरत होती या वह अपनी मर्जी से उससे बात करना चाहती, तो वह सीधे मुंह कह देता, “तुम मुझे परेशान कर रही हो।”
प्रेग्नेंसी का समय किसी भी महिला के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान हर कदम पर डॉक्टर के चेक-अप, दवाइयां और आने वाले बच्चे की तैयारियां करनी होती हैं। लेकिन इस पूरे सफर में वह लड़का कभी रेणू के साथ डॉक्टर के पास नहीं गया। उसने अपने होने वाले बच्चे के लिए एक छोटा सा खिलौना या कपड़े का टुकड़ा तक नहीं खरीदा। जिम्मेदारी उठाने के नाम पर वह हमेशा पीछे हट जाता।
रेणू ने अकेले ही हिम्मत जुटाई। उसने दिन-रात एक करके अपनी आने वाली संतान के लिए जरूरत की हर एक चीज का इंतजाम पहले से ही कर लिया। दूसरी तरफ, उस बच्चे का पिता अपनी कमाई को जिम्मेदारी से दूर रहकर शराब, महंगे वीडियो गेम्स और बाहर के होटलों में खाना खाने पर बर्बाद करता रहा। मेरठ के शास्त्रीनगर इलाके में वह रेणू से महज आधे घंटे की दूरी पर रहता था। दोनों में से किसी के पास कार नहीं थी, लेकिन दूरी सिर्फ रास्तों की नहीं, उनके इरादों की भी थी।

Toxic Relationship: खोखली धमकियां और असली इरादे
जब उस लड़के को पता चला कि रेणू मां बनने वाली है, तो उसने एक नया नाटक शुरू कर दिया। वह कहने लगा कि वह अपने बच्चे से मिलना-जुलना चाहता है। लेकिन उसकी शर्तों की सनक देखिए—वह चाहता था कि मेरठ के एक कोने से दूसरे कोने तक शिशु को लेकर मिलने के लिए सारी यात्रा खुद रेणू ही करे, जबकि वह खुद अपनी जगह से हिलने को तैयार नहीं था।
बात सिर्फ मिलने तक ही नहीं रुकी। उसने रेणू को डराना शुरू किया कि वह बच्चे को अपने पास रखेगा और उसे रेणू से छीन लेगा। शुरुआत में रेणू इस धमकी से बुरी तरह घराब गई। एक मां के लिए अपने बच्चे से अलग होने का डर सबसे बड़ा होता है। लेकिन जब रेणू ने ठंडे दिमाग से उसकी इस जिद के पीछे की वजह सोची, तो कड़वा सच सामने आ गया।
वह लड़का उस मासूम को किसी प्यार या पिता के कर्तव्य के कारण अपने पास नहीं रखना चाहता था। असल में, वह सरकार की तरफ से मिलने वाले ‘काउंसिल हाउस’ (कल्याणकारी आवास योजना) का लाभ उठाना चाहता था। वह एक नवजात शिशु को सिर्फ एक जरिया समझ रहा था ताकि उसे मुफ्त का घर मिल सके।
उसे एक बच्चे को पालने की असली जिम्मेदारी, रातों की नींद खराब होने, उसकी सेहत और परवरिश के खर्चों का जरा सा भी अंदाजा नहीं था। उसकी बातें सिर्फ खोखली धमकियां और अपने स्वार्थ को पूरा करने का एक जरिया थीं।
इश्क का गोरखधंधा: स्नैपचैट पर लेडी डॉक्टर को जाल में फंसाया; दर्दनाक रियल स्टोरी
Toxic Relationship: आत्मसम्मान की जागृति: रेणू का फैसला
एक शाम, रेणू मेरठ के एक पार्क में बैठी थी। उसने अपने चारों तरफ हंसते-खेलते बच्चों को देखा। उसने सोचा कि आमतौर पर तो यही कहा जाता है कि बच्चे के सबसे अच्छे हित में यही होता है कि उसका अपने दोनों माता-पिता के साथ गहरा रिश्ता हो। लेकिन क्या ऐसे पिता के साथ रिश्ता होना सही है जो लगातार बुरा बर्ताव करता हो? जो खुद जिम्मेदारियों से भागता हो और बच्चे को सिर्फ एक मोहरा समझता हो?
जवाब उसके भीतर से आया- बिल्कुल नहीं। अगर आपके एक्स-बॉयफ्रेंड ने आपके साथ बुरा बर्ताव किया है, तो जाहिर है कि एक मां होने के नाते आप सबसे पहले अपने बच्चे को उस नकारात्मक माहौल से सुरक्षित रखना चाहेंगी। रेणू ने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी सांस ली। उसने खुद से कहा कि अब घबराने का वक्त नहीं है।
उसकी धमकियां सिर्फ कागजी शेर की तरह खोखली हैं। भारत के कानून और अदालतों के नियम इतने कमजोर नहीं हैं कि कोई भी आकर एक मां से उसकी गोद उजाड़ दे। सिर्फ कोई कानूनी अदालत ही यह फैसला दे सकती है कि बच्चा किसके साथ रहेगा, और जो व्यक्ति खुद शराब और फिजूलखर्ची में डूबा हो, कोर्ट कभी भी एक मासूम का भविष्य उसके हाथों में नहीं सौंपेगा।
रेणू ने तय कर लिया कि वह अब इस डर के साए में नहीं जिएगी। वह इस अजीब इंसान के चंगुल से, उसके हर बुरे बर्ताव से और इस अस्त-व्यस्त जिंदगी से हमेशा के लिए बाहर निकलना चाहती है। उसने अपने दिल में बचे-खुचे कमजोर प्यार को हमेशा के लिए दफन कर दिया।

Toxic Relationship: एक नई सुबह की ओर
कुछ हफ्ते बाद, मेरठ के एक अस्पताल में एक नन्ही किलकारी गूंजी। रेणू ने एक बेहद स्वस्थ और प्यारे बच्चे को जन्म दिया। जब उसने अपने शिशु को पहली बार अपनी बांहों में लिया, तो उसे महसूस हुआ कि दुनिया की कोई भी ताकत उसे कमजोर नहीं कर सकती। वह अब अकेली नहीं थी, वह एक मां थी।
उसके एक्स-बॉयफ्रेंड ने कुछ बार फोन करने की कोशिश की, अपनी वही पुरानी शर्तें और धमकियां दोहराईं। लेकिन इस बार रेणू के पास डर नहीं, बल्कि एक चट्टान जैसा आत्मविश्वास था। उसने साफ शब्दों में कह दिया कि अगर उसे अपने बच्चे से मिलना है, तो उसे कानूनी रास्ता अपनाना होगा और एक जिम्मेदार इंसान बनना होगा। जैसा कि उम्मीद थी, जिम्मेदारी का नाम सुनते ही वह लड़का दोबारा पलटकर नहीं आया।
रेणू ने मेरठ में ही एक छोटा सा काम शुरू किया। उसने अपने बच्चे के सुरक्षित और मुस्कुराते हुए भविष्य को ही अपनी जिंदगी का एकमात्र लक्ष्य बना लिया। उसकी जिंदगी से वह बुरा दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका था। वह उस जहरीले रिश्ते से पूरी तरह बाहर निकल चुकी थी।
उसने साबित कर दिया कि एक औरत भले ही प्यार में कितनी भी कमजोर क्यों न हो, लेकिन जब बात उसके बच्चे की सुरक्षा और स्वाभिमान की आती है, तो वह हर तूफान का रुख मोड़ने की ताकत रखती है। Toxic Relationship
एक महिला पाठक द्वारा भेजी गई सत्य कथा।
रोजाना लेटेस्ट रोमांटिक और रियल लव स्टोरी पढ़ने के लिए हमारे व्हाटसएप चैनल को फॉलो करें।




