Jakhal Village Romance हरियाणा की रियल लव स्टोरी की श्रंखला में आज हम आपको लेकर चलते हैं हरियाणा के फतेहाबाद जिले के टोहाना कस्बे में। कहते हैं कि प्यार कब, किस उम्र में और किससे हो जाए, कहा नहीं जा सकता। प्यार एक ऐसा गहरा समुद्र है जिसकी गहराई ही शायद नापी जा सकती हो।
यह कहानी उस महिला की है, जिसकी शादी 25 साल पहले हो चुकी है और वह तीन बच्चों की मां है। इन में दो बेटे और एक बेटा है। टोहाना के नजदीक ही कस्बा है जाखल। जाखल की व्यास कालोनी की रहने वाली पूजा और उसके पति नसीब की जिंदगी बड़े आराम से कट रही थी। 45 साल का नसीब एक होनहार और मेहतनकश व्यक्ति था। करीब 42 साल की उसकी पत्नी पूजा भी बेहद ही समझदार महिला है।
Jakhal Village Romance पति को लगी शराब पीने की लत
दोनों एक छोटे से मकान में अपने तीनों बच्चों के साथ जीवनयापन कर रहे थे, लेकिन इसी बीच नसीब को शराब पीने की लत लग गई। यह लत ऐसी लगी कि वह दिनरात शराब के नशे में ही डूबने लगा। उसे यह भी ध्यान नहीं रहता है कि उसकी पत्नी को उसकी जरुरत है। उसके तीनों बच्चों को अच्छी परवरिश की जरुरत है।
धीरे धीरे नसीब ने अपनी पत्नी पूजा पर ध्यान देना बंद कर दिया, और छोटी-छोटी सी बातों पर पूजा के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। जिस कारण पूजा अकेलापन महसूस करने लगी।
जाखल की व्यास कालोनी का ही रहने वाला श्रवण, नसीब के घर के पास ही रहता था। इस कारण श्रवण का नसीब के घर भी आना जाना हो जाता था। पूजा और श्रवण की नजर कब एक दूसरे से टकरा गई। किसी को कुछ पता ही नहीं चला।

Jakhal Village Romance एक नई प्रेम कहानी का जन्म
यहां से एक नई प्रेम कहानी जन्म लेती है। श्रवण उम्र में पूजा से थोड़ा छोटा था, लेकिन उसकी बातों में वो ठहराव था जिसकी पूजा को इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत थी। नसीब जब शराब के नशे में धुत होकर घर के आंगन में सो जाता या पूजा पर चिल्लाता, तब दीवार के उस पार श्रवण की खामोश हमदर्दी पूजा को महसूस होती थी।
शुरुआत हुई छोटी-छोटी मदद से। कभी घर का कोई नल खराब होता, तो कभी बच्चों की पढ़ाई में कोई दिक्कत आती, श्रवण हमेशा ढाल बनकर खड़ा हो जाता। पूजा ने सालों से वह ‘आदर’ नहीं पाया था, जो श्रवण की नज़रों में उसे दिखता था। वह उसे केवल तीन बच्चों की माँ या नसीब की पत्नी के रूप में नहीं देखता था, वह उसे ‘पूजा’ के रूप में देखता था।
Jakhal Village Romance पूजा की आंखों और दिल में छिपा दर्द बाहर आया
एक शाम, जब नसीब हमेशा की तरह मोहल्ले के ठेके पर था, पूजा घर पर अकेली थी, श्रवण आ गया और पूजा से बोला- “आज फिर उदास हो? चेहरे की रंगत बता रही है कि मन में तूफ़ान चल रहा है।”
पूजा ने एक लंबी सांस ली और अपनी चुनरी का पल्लू उंगलियों में लपेटते हुए बोली, “आदत सी हो गई है श्रवण। जब तक घर में शोर न हो, अब तो नींद भी नहीं आती। बस ये सोचती हूँ कि क्या मेरी पूरी जिंदगी इन्हीं गालियों और शराब की बदबू के बीच कटेगी?”
श्रवण ने आगे बढ़कर दीवार के सहारे हाथ रखा और धीमे स्वर में कहा, “जिंदगी काटने के लिए नहीं, जीने के लिए होती है पूजा। तुमने सबको संभाला, बच्चों को पाला, नसीब के नखरे झेले… लेकिन खुद को कहाँ खो दिया? तुम्हारी इन आँखों में आज भी वही चमक है, जो शायद बीस साल पहले रही होगी।”
पूजा की आँखें छलक आईं। इतने सालों में किसी ने उसकी आत्मा को नहीं छुआ था। उसने दबी आवाज में कहा, “अब इन बातों का क्या फायदा? वक्त हाथ से रेत की तरह फिसल चुका है।”
“रेत अगर मुट्ठी से फिसलती है, तो धरती पर नया घरौंदा बनाने के काम भी आती है,” श्रवण ने उसकी आँखों में आँखें डालकर कहा। उस पल टोहाना की ठंडी हवा ने जैसे उनके बीच की हिचक को उड़ा दिया।
Jakhal Village Romance सुहाने मौसम ने कराया दो दिलों का मिलन
एक दिन हल्की बारिश होने के कारण मौसम सुहाना था। नसीब अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर था और बच्चे भी घर पर नहीं थे। घर के आंगन में मिट्टी की सोंधी महक फैली थी। पूजा अकेली थी। तभी दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई।
श्रवण हाथ में एक छतरी लिए खड़ा था, लेकिन वह खुद पूरी तरह भीगा हुआ था।
पूजा बोली “तुम इस बारिश में यहाँ? पागल हो क्या, कोई देख लेता तो?”
श्रवण अंदर आया और दरवाजा बंद करते हुए बोला, “आज देखने और दिखाने का डर पीछे छोड़ आया हूँ। बस तुम्हारा चेहरा देखने का जी किया।”
श्रवण धीरे-धीरे उसके करीब आया। पूजा के दिल की धड़कनें तेज हो गईं। उसने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन दीवार ने उसे रोक लिया।

श्रवण ने साहस जुटाकर अपना हाथ पूजा के ठंडे पड़ते हाथों पर रखा। “पूजा, मैं जानता हूँ कि दुनिया इसे क्या नाम देगी, लेकिन मेरे लिए तुम सिर्फ एक एहसास हो। क्या तुम्हें डर लग रहा है?”
पूजा ने कांपते होठों से जवाब दिया, “डर दुनिया से नहीं श्रवण, खुद से लग रहा है। अगर मैं इस प्यार में बह गई, तो खुद को वापस कैसे ला पाऊँगी?”
श्रवण ने धीरे से उसके चेहरे पर आए भीगे बालों की लट को कान के पीछे किया। उसके स्पर्श में एक अजीब सी तपन थी जिसने पूजा के भीतर के अकेलेपन की बर्फ को पिघला दिया। श्रवण ने झुककर उसके माथे को चूमा।
“तुम्हें कहीं वापस जाने की जरूरत नहीं है,” श्रवण ने फुसफुसाते हुए कहा, “मैं तुम्हारा वो किनारा बनूँगा जहाँ तुम थक कर सुस्ता सको।”
पूजा ने अपनी आँखें मूंद लीं और पहली बार नसीब के डर से मुक्त होकर किसी के आगोश में खुद को सुरक्षित महसूस किया। उस रात टोहाना की बारिश ने दो रूहों के मिलन की गवाही दी, जो सामाजिक बेड़ियों से परे अपनी एक अलग दुनिया बुन रहे थे।

Jakhal Village Romance उलझनें और समाज का आईना
प्यार जितना गहरा होता गया, मुश्किलें उतनी ही बढ़ती गईं। जाखल जैसे छोटे कस्बे में दीवारें भी सुनती हैं। पूजा और श्रवण का अक्सर मिलना-जुलना मोहल्ले की औरतों की नजरों में आने लगा। नसीब, जो नशे में धुत रहता था, उसे भी अब कुछ आहट होने लगी थी।
पूजा के मन में एक बड़ा द्वंद्व चल रहा था। एक तरफ उसके तीन बच्चे थे, जिनका भविष्य और मान-सम्मान उससे जुड़ा था, और दूसरी तरफ श्रवण का वह निस्वार्थ प्रेम जिसने उसे फिर से ‘जिंदा’ होने का एहसास कराया था।
एक दोपहर, जब नसीब घर पर नहीं था, श्रवण ने पूजा से कहा, “पूजा, चलो यहाँ से कहीं दूर चलते हैं। जहां हमें कोई नहीं जानता होगा। मैं मेहनत मजदूरी करूँगा, तुम्हें रानी बनाकर रखूँगा।”
पूजा की आँखों में आंसू आ गए। उसने श्रवण का हाथ थामकर कहा, “श्रवण, काश ये इतना आसान होता। ये जो तीन बच्चे हैं, ये मेरे जिगर के टुकड़े हैं। अगर मैं तुम्हारे साथ चली गई, तो दुनिया इन्हें ‘एक बेवफा की औलाद’ कहकर पुकारेगी। क्या तुम चाहते हो कि मेरे प्यार की कीमत मेरे बच्चे चुकाएं?”
श्रवण खामोश हो गया। उसे अहसास हुआ कि पूजा का प्यार सिर्फ एक पुरुष के लिए नहीं, बल्कि अपनी गरिमा और ममता के बीच का एक कठिन संघर्ष है।

Jakhal Village Romance कहानी का एक नया मोड़
पूजा और श्रवण का रिश्ता अब केवल शारीरिक आकर्षण नहीं रह गया था, वह एक-दूसरे का मानसिक सहारा बन चुका था। पूजा ने नसीब को छोड़ने का फैसला तो नहीं किया, लेकिन उसने अब नसीब के जुल्मों के आगे झुकना बंद कर दिया था। श्रवण के प्यार ने उसे वो ताकत दी कि वह समाज और अपने शराबी पति के सामने खड़ी हो सके।
नसीब को जब उनके रिश्ते की भनक लगी, तो उसने घर में हंगामा किया। लेकिन पूजा ने पहली बार चिल्लाकर कहा, “तुमने मुझे कब पत्नी माना? तुम तो शराब के नशे में ये भी भूल गए थे कि मेरा वजूद क्या है। अगर श्रवण ने मुझे सम्मान दिया, तो इसमें गुनाह उसका नहीं, तुम्हारी नाकामी का है।”
श्रवण और पूजा आज भी उसी कस्बे में रहते हैं। उनके बीच का संवाद अब आँखों से होता है। नसीब की शराब नहीं छूटी, लेकिन पूजा ने जीना सीख लिया है। वह जानती है कि दीवार के उस पार कोई है, जो उसे आज भी उसी शिद्दत से चाहता है, और यही एहसास उसे हर रोज नई सुबह देखने की हिम्मत देता है।

Jakhal Village Romance अचानक लापता हो गया नसीब
2 मार्च 2026 का दिन था। अचानक से पूजा का पति नसीब गायब हो गया। जब वह पूरी रात नहीं लौटा तो परिजनों ने तलाश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं लग सका। जिसके बाद 3 मार्च को परिवार की ओर से थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
DSP जयभगवान बताते हैं कि, पुलिस जांच में सामने आया कि नसीब की पत्नी पूजा और उसके दोस्त श्रवण की भूमिका संदिग्ध है। पूछताछ के लिए दोनों को बुलाया गया, जहां उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने मिलकर नसीब का गला दबाकर हत्या की और शव को नहर में फेंक दिया।
DSP ने आगे बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि नसीब शराब पीकर पूजा से मारपीट करता था। वह मारपीट की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालने की धमकी भी देता था। इसी प्रताड़ना से तंग आकर पूजा ने नसीब की हत्या की योजना बनाई। वारदात वाली रात नसीब ने शराब पी रखी थी। दोनों ने पहले उसे नशे की गोलियां दीं और फिर सोते समय उसका गला दबा दिया।
नोट- इस सत्यकथा में कुछ काल्पनिक सीन क्रिएट किए गए हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
Divyanka Sirohi Death Mystery: ग्लैमर की चकाचौंध के पीछे छिपा दर्द, क्या है मौत की असली वजह
