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रियल लव स्टोरी

राँग नंबर से शुरू हुई एक लव स्टोरी, छत्तीसगढ़ की पूर्णिमा और शंकर की वो अधूरी दास्तान जो रूह कंपा दे

love story hindi: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक छोटा सा शांत गांव—बाजार कुर्रीडीह। चारों तरफ हरियाली, खेतों की सोंधी खुशबू और एक सीधी-सादी जिंदगी। इसी गांव में पूर्णिमा सोरी अपने पति योगेंद्र और अपनी दो नन्हीं बेटियों के साथ एक साधारण जीवन बिता रही थी। love story hindi

योगेंद्र लोकल साइकिल स्टैंड चलाता था। सुबह से ढलती शाम तक काम, और फिर घर लौटना—ज़िंदगी की यह गाड़ी बिना किसी बड़े बदलाव के पटरी पर दौड़े जा रही थी। love story hindi

पूर्णिमा घर का कामकाज निपटाती, बेटियों की देखभाल करती, पर कभी-कभी जब दोपहर की खामोशी घर को घेर लेती, तो उसे लगता कि उसकी ज़िंदगी का दायरा बेहद सीमित हो चुका है। योगेंद्र अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त रहता, पर उस रिश्ते में वह भावनात्मक गर्माहट या संवाद नहीं बचा था, जिसकी ख़वाहिश अक्सर कोई दिल करता है। love story hindi

फिर करीब एक साल पहले, एक दोपहर यह सन्नाटा टूटा। पूर्णिमा रसोई में काम कर रही थी कि उसका फोन बजा। स्क्रीन पर एक अनजाना नंबर था।

पूर्णिमा ने फोन उठाकर कहा, “हेलो… कौन बोल रहे हैं?”

दूसरी तरफ से एक भारी और अजनबी आवाज़ आई, “हेलो! अरे रामेश्वर भाई, आप बोल रहे हैं क्या?”

पूर्णिमा ने थोड़ा हिचकिचाते हुए जवाब दिया, “नहीं, आप गलत नंबर मिला रहे हैं। यह रामेश्वर जी का नंबर नहीं है।“

“ओह, मुझे माफ कीजिएगा बहन जी! गलत नंबर लग गया।“—सामने वाले ने बड़ी सादगी और तमीज से माफी मांगी।

यह अजनबी था शंकर सूर्यवंशी। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के दलौदा तहसील का रहने वाला एक 40 वर्षीय शख्स। वह किसी काम से अपने दोस्त को फोन लगा रहा था, लेकिन किस्मत ने धमतरी के इस एक छोटे से गांव से उसका संपर्क जोड़ दिया था। बात वहीं खत्म हो जानी चाहिए थी, लेकिन एक राह भटके हुए कॉल ने नियति का नया रास्ता चुन लिया था।

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love story hindi : शंकर सूर्यवंशी (40) मंदसौर जिले के दलौदा तहसील का रहने वाला है।

love story hindi बातों के धागे और दिल का जुड़ाव

उस घटना के दो दिन बाद, उसी नंबर से फिर एक कॉल आया।

“हेलो… उम्मीद है इस बार गलत नंबर नहीं होगा,”—शंकर ने चुटकी लेते हुए कहा।

पूर्णिमा की हंसी छूट गई, “जी, यह वही गलत नंबर ही है!”

शंकर ने भी हंसते हुए कहा, “अरे! लगता है मेरा फोन खुद–ब–खुद आपका ही नंबर मिलाने लगा है। वैसे, क्या मैं आपका शुभ नाम जान सकता हूं? मेरा नाम शंकर है।“

शुरुआत की वो चंद मिनटों की औपचारिक बातें धीरे-धीरे लंबी बातचीत में बदलने लगीं। शंकर स्वभाव से काफी मुखर और बातों का धनी था। वह मध्य प्रदेश की अपनी जिंदगी, खेतों और अपने अनुभवों के किस्से सुनाता। वहीं पूर्णिमा, जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की नीरसता से ऊब चुकी थी, शंकर की बातों में एक नया आकर्षण महसूस करने लगी।

कुछ ही हफ़्तों में, बातें केवल दोपहर के खाली समय तक सीमित नहीं रहीं। सुबह की पहली चाय से लेकर रात को योगेंद्र के सो जाने के बाद तक, फोन पर संदेशों और कॉल्स का सिलसिला चलने लगा।

“पूर्णिमा, आज तुमने क्या बनाया?”—शंकर फोन पर पूछता।

“बस वही रोज की दाल–चावल। तुम्हारी तरफ क्या बना है आज?”—पूर्णिमा शर्माते हुए जवाब देती।

“खाने में जो भी हो, पर अगर तुम्हारे साथ बैठकर खाने को मिले, तो बात ही कुछ और होगी,”—शंकर की आवाज़ में एक अजीब सा खिंचाव और अपनापन होता, जो पूर्णिमा के दिल को छू जाता।

पूर्णिमा ने वर्षों से ऐसा कोई मीठा अहसास महसूस नहीं किया था। उसे लगने लगा कि शंकर केवल एक अजनबी नहीं, बल्कि उसके दिल की तन्हाई को समझने वाला एकमात्र इंसान है। दोनों के बीच एक गहरा रोमांटिक संबंध आकार लेने लगा था। जो शुरुआत एक राँग नंबर से हुई थी, वह अब दोनों के वजूद का सही और सबसे खूबसूरत हिस्सा बन चुकी थी।

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love story hindi : मर्डर का आरोपी योगेंद्र सोरी (38)।

love story hindi मीलों दूर का सफर और पहली मुलाकात

महीनों तक फोन की स्क्रीन पर एक-दूसरे की तस्वीरें देखकर और रात-रात भर बातें करके जब दिल का सब्र टूटने लगा, तो शंकर ने एक दिन कहा, “पूर्णिमा, अब यह दूरी सहन नहीं होती। मैं तुमसे मिलना चाहता हूं। धमतरी आना चाहता हूं।“

पूर्णिमा का दिल ज़ोर से धड़का, “लेकिन… मेरे पति, गांव वाले? सब क्या कहेंगे? यहां आना आसान नहीं है।“

“मुझे किसी की परवाह नहीं। मैं तुमसे मिलने आऊंगा। तुम बस इतना बताओ कि क्या तुम मुझे देखना चाहती हो?”—शंकर ने सीधे दिल से सवाल किया।

पूर्णिमा इनकार नहीं कर सकी। शंकर मध्य प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके धमतरी पहुंचा।

जब पहली बार दोनों धमतरी के एक शांत मोड़ पर मिले, तो वक्त जैसे थम सा गया था। फोन की स्क्रीन से परे, एक-दूसरे को सामने देखकर दोनों की आंखें भर आईं। शंकर ने पूर्णिमा का हाथ अपने हाथों में थाम लिया।

“तुम तस्वीरों से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो, पूर्णिमा,”—शंकर ने उसकी आंखों में झांकते हुए धीमे से कहा।

पूर्णिमा ने अपनी नजरें झुका लीं और मुस्कुराते हुए कहा, “और तुम जैसा बोलते हो, बिल्कुल वैसे ही सच्चे लगते हो।“

उस पहली मुलाकात में दोनों ने एक-दूसरे के साथ कुछ बेहद भावुक और खूबसूरत पल बिताए। शंकर समय-समय पर पूर्णिमा से मिलने धमतरी आता-जाता रहने लगा। कभी किसी मंदिर के बहाने, तो कभी शहर के किसी कोने में—उनका प्यार दूरियों और समाज के बंधनों से बेपरवाह होकर फलने-फूलने लगा।

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love story hindi थाने में बैठी मृतक की पत्नी।

love story hindi मंदसौर का वो हसीन सफर

प्यार जब गहरा होता है, तो इंसान जोखिम उठाने से भी पीछे नहीं हटता। रिश्ते को बने जब एक साल के करीब होने आया, तो पूर्णिमा के मन में भी शंकर की दुनिया देखने की इच्छा जगी।

एक दिन पूर्णिमा ने हिम्मत जुटाई। उसने योगेंद्र को बताया कि वह अपने किसी पुराने रिश्तेदार के घर कुछ दिनों के लिए बाहर जा रही है। पूर्णिमा अपनी दोनों नन्हीं बेटियों को साथ लेकर शंकर के घर—मंदसौर के दलौदा पहुंची।

वहां के 4-5 दिन पूर्णिमा की जिंदगी के सबसे खूबसूरत और यादगार दिन थे। मंदसौर की आबोहवा, शंकर का बेपनाह प्यार और दोनों बेटियों के साथ बिताए गए वो पल किसी हसीन ख्वाब की तरह थे। शंकर पूर्णिमा का ऐसे ख्याल रखता जैसे वह उसकी अपनी पत्नी हो।

एक शाम, जब बेटियां सो रही थीं, शंकर और पूर्णिमा छत पर बैठे हुए थे। आसमान में चांद चमक रहा था और ठंडी हवा चल रही थी।

शंकर ने पूर्णिमा के कंधे पर अपना सिर रखते हुए कहा, “पूर्णिमा, काश यह वक्त यहीं ठहर जाए। काश तुम हमेशा के लिए मेरी होकर मंदसौर में रह जाओ।“

पूर्णिमा ने एक ठंडी सांस ली और उसकी उंगलियों में अपनी उंगलियां फंसाते हुए बोली, “शंकर, मेरा दिल तो यहीं छूट जाता है। पर मेरी दो बेटियां हैं… उनकी एक दुनिया है। पर इतना याद रखना, मेरा प्यार सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए है।“

उन 4-5 दिनों ने उनके बीच के प्यार के धागों को इतना मजबूत कर दिया कि अब अलग होना दोनों के लिए नामुमकिन सा लगने लगा था।

love story hindi खतरे की आहट और ‘रिश्तेदार‘ का नकाब

मंदसौर से लौटने के बाद पूर्णिमा का मन धमतरी में बिल्कुल नहीं लग रहा था। वह हर पल शंकर के ख्यालों में खोई रहती। उधर शंकर भी पूर्णिमा के बिना अकेलापन महसूस कर रहा था।

8 जुलाई 2026 की शाम, करीब 7 बजे।

धमतरी के बाजार कुर्रीडीह गांव में बारिश की हल्की फुहारें गिर रही थीं। तभी पूर्णिमा के घर के दरवाजे पर दस्तक हुई। पूर्णिमा ने दरवाजा खोला, तो सामने हाथ में एक छोटा सा बैग लिए शंकर खड़ा था।

पूर्णिमा चौंक गई और घबराकर बोली, “तुम… तुम यहां इस वक्त? किसी ने देख लिया तो?”

शंकर मुस्कुराया, “तुम्हारी याद इतनी आई कि रुका नहीं गया।“

तभी अंदर से योगेंद्र बाहर आया। उसने अजनबी शख्स को दरवाजे पर खड़ा देख पूछा, “पूर्णिमा, कौन हैं यह?”

पूर्णिमा का दिल हलक में आ गया, लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाला और झूठ गढ़ दिया—“यह… यह मेरे दूर के रिश्तेदार हैं। मध्य प्रदेश से किसी काम से आए थे, तो मुझसे मिलने आ गए।“

योगेंद्र सीधा-साधा इंसान था। उसने बिना किसी शक के शंकर का स्वागत किया, “आइए–आइए, अंदर बैठिए। बहुत दूर से आए हैं आप।“

रात को पूर्णिमा ने सबके लिए खाना बनाया। घर के हॉल में एक अजीब सी खामोशी और तनाव था, जिसे केवल पूर्णिमा और शंकर ही महसूस कर रहे थे। एक ही टेबल पर बैठकर सबने खाना खाया। पति योगेंद्र, प्रेमी शंकर, दोनों बच्चियां और पूर्णिमा—सब एक ही छत के नीचे थे।

रात करीब 11 बजे, घर के बड़े से हॉल में सब सोने की तैयारी करने लगे। एक तरफ बच्चियां सो गईं, पास में ही योगेंद्र सो गया और दूसरी तरफ शंकर के लिए बिस्तर लगा दिया गया। पूर्णिमा भी अपने बिस्तर पर लेट गई, लेकिन उसकी आंखों से नींद गायब थी।

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love story hindi वो खौफनाक रात और मोहब्बत का दर्दनाक अंत

रात के करीब 3 बज रहे थे। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। बाहर बारिश की हल्की बूंदें टपक रही थीं।

पूर्णिमा का मन बेचैन था। इतने करीब होकर भी शंकर दूर था। वह दबे पांव उठी और शंकर के बिस्तर के पास चली गई। दोनों अंधेरे में एक-दूसरे के बेहद करीब थे। प्यार और जज्बातों के उस गुबार में दोनों यह भूल गए कि वे किस खतरनाक मोड़ पर खड़े हैं। वे एक-दूसरे की बांहों में खो गए—सब कुछ भुलाकर, हर अंजाम से बेखबर।

लेकिन, नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।

अचानक हॉल के दूसरे कोने में हलचल हुई। योगेंद्र की नींद खुल गई। प्यास लगने के कारण जब वह पानी पीने उठा, तो उसकी नज़र पूर्णिमा के बिस्तर पर पड़ी—वह खाली था।

योगेंद्र की नजरें अंधेरे में टटोलती हुई शंकर के बिस्तर की तरफ गईं। वहां जो दृश्य था, उसने योगेंद्र के पैरों तले से जमीन खिसका दी। उसकी पत्नी, जिसे उसने अपनी जिंदगी माना था, उस ‘रिश्तेदार’ के साथ आपत्तिजनक हालत में थी।

योगेंद्र का खून खौल उठा। वर्षों का विश्वास, समाज का डर और धोखे का गुस्सा एक साथ उसके दिमाग पर हावी हो गया। उसकी आंखें गुस्से से लाल हो गईं। उसने अपने होश खो दिए।

घर के कोने में लकड़ी काटने वाली कुल्हाड़ी रखी थी। योगेंद्र ने बिना एक पल गंवाए भारी कुल्हाड़ी उठा ली।

“योगेंद्र… नहीं!”—पूर्णिमा की चीख हवा में गूंज उठी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अंधेरे में कुल्हाड़ी की तेज धार चमकी और योगेंद्र ने पूरी ताकत से शंकर के गले पर ताबड़तोड़ वार कर दिया।

“आह!”—शंकर के मुंह से एक चीख निकली और खून का फव्वारा फूट पड़ा। बिस्तर खून से लाल हो गया। पूर्णिमा बदहवास होकर चिल्लाने लगी, बच्चियां डर के मारे रोने लगीं। शंकर बुरी तरह तड़प रहा था, उसकी सांसें उखड़ने लगी थीं।

पूर्णिमा ने अपने होश संभाले। अपने प्रेमी की ढलती सांसों को बचाने के लिए उसने तुरंत 108 एम्बुलेंस को फोन किया। जब तक एम्बुलेंस आई, पूर्णिमा शंकर का सिर अपनी गोद में रखे रोती रही, “शंकर… आंखें खोलो! तुम्हें कुछ नहीं होगा… मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगी!”

पूर्णिमा खुद खून से सने कपड़ों में गंभीर रूप से घायल शंकर को लेकर जिला अस्पताल भागी। लेकिन कुल्हाड़ी का वार इतना गहरा था कि डॉक्टरों ने जांच करते ही शंकर को ‘मृत’ घोषित कर दिया।

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love story hindi: जेल की सलाखें और अधूरी दास्तान

घटना की सूचना मिलते ही केरेगांव थाने की पुलिस अस्पताल और फिर वारदात के स्थान बाजार कुर्रीडीह गांव पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और लहूलुहान कुल्हाड़ी को जब्त कर लिया। आरोपी पति योगेंद्र सोरी को गांव से ही गिरफ्तार कर लिया गया। उसने बिना किसी झिझक के अपना जुर्म कबूल कर लिया।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की आगे की जांच शुरू कर दी।

धमतरी का वह छोटा सा गांव आज भी इस घटना से सन्न है।

जो कहानी एक गलती से लगे ‘राँग नंबर’ से शुरू हुई थी, जिसमें महीनों की हसीन बातें थीं, मंदसौर की खूबसूरत यादें थीं, और दो दिलों का बेपनाह प्यार था—वह कानून की फाइलों में दर्ज एक ‘हत्याकांड’ बनकर रह गई।

योगेंद्र अब सलाखों के पीछे अपनी बर्बादी का मातम मना रहा है, शंकर हमेशा के लिए खामोश होकर मिट्टी में मिल चुका है, और पूर्णिमा अपनी दो मासूम बेटियों के साथ उस सूने घर में खड़ी है—जहां अब न पति का साया बचा है, न प्रेमी का प्यार। बस रह गई है तो एक ‘राँग नंबर’ से शुरू हुई अधूरी और खूनी प्रेम कहानी की दर्दनाक गूंज। love story hindi

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Mahesh kant Lillu
Mahesh kant Lillu (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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