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रोमांटिक कहानियां

देहरादून: 10 साल की तन्हाई और एक रात का अहसास, जब मर्चेंट नेवी अफसर के आगोश में थमी सिंगल मदर की तन्हाई

romantic story in hindi: देहरादून की सर्द हवाओं और हल्की धुंध के बीच, 36 साल की श्वेता अपने ब्यूटी पार्लर केछोटे से केबिन में बैठी थी। कांच की खिड़की के बाहर राजपुर रोड की बत्तियां मध्यम रोशनी बिखेर रही थीं। श्वेता एक ‘सिंगल मदर’ थी।romantic story in hindi

पति से अलग होने के बाद उसकी ज़िंदगी का दायरा बेहद सीमित हो गया था—सुबह दो छोटे बच्चों के लिए नाश्ता बनाना, उन्हें स्कूल छोड़ना, पार्लर संभालना और ढलती शाम के साथ वापस घर लौट आना। romantic story in hindi

इस पूरी भागदौड़ में उसकी अपनी इच्छाएं, उसका अपना वजूद कहीं खो सा गया था। 36 की उम्र में भी उसके चेहरे पर एक अलग सी मासूमियत और कशिश थी, लेकिन उसकी आँखों में हमेशा एक खामोश उदासी तैरती रहती थी। romantic story in hindi

romantic story in hindi माजरी ग्रांट का बुलावा और एक अनजानी शुरुआत

उस शनिवार की शाम श्वेता को एक ब्राइडल बुकिंग के लिए देहरादून से थोड़ा बाहरी इलाके ‘माजरी ग्रांट’ के एक बड़े से होमस्टे में जाना था। शादी वाले घर में चहल-पहल, शहनाई की धुनें और रिश्तेदारों का शोर था।

दुल्हन बनी 24 साल की रिया बेहद खुश थी। श्वेता ने अगले तीन-चार घंटों तक पूरे समर्पण के साथ रिया को तैयार किया। मेकअप की आखिरी परत लगाने और चुनरी सेट करने के बाद जब रिया शीशे के सामने खड़ी हुई, तो उसकी आँखों में एक चमक आ गई।

“दीदी, आपने तो मुझे सच में परी जैसा बना दिया!” रिया ने श्वेता का हाथ थामते हुए कहा।

श्वेता के चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई, “तुम्हारी खुशी ही मेरी असली मेहनत का फल है, रिया।”

रात के लगभग 11 बज चुके थे। बारात आने में अभी थोड़ा वक्त था, लेकिन श्वेता का काम पूरा हो चुका था। उसे अपने बच्चों की चिंता सताने लगी थी, जिन्हें वह अपनी पड़ोसी के पास छोड़ कर आई थी। उसने अपना भारी-भरकम मेकअप किट समेटा और बाहर जाने के लिए कदम बढ़ाए।

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romantic story in hindi वो पहली मुलाकात

तभी कमरे के दरवाजे पर एक लंबा, गठीले बदन और सांवले रंग का शख्स खड़ा दिखाई दिया। हल्की दाढ़ी, गहरी आँखें और गहरे नीले रंग के कुर्ते-पजामे में वह बेहद शालीन लग रहा था। यह दीपेंद्र था—रिया का बड़ा भाई। 35 साल का दीपेंद्र मर्चेंट नेवी में था और साल में कुछ महीनों के लिए ही देहरादून आता था।

दीपेंद्र ने आगे बढ़कर श्वेता का भारी बैग देखा और बहुत ही सहज लहजे में कहा, “आप श्वेता जी हैं न? रिया बता रही थी कि आपने उसे बहुत खूबसूरत सजाया है। थैंक यू सो मच।”

श्वेता ने शर्माते हुए सिर झुकाया, “यह तो मेरा काम था, दीपेंद्र जी।”

दीपेंद्र ने अपनी कलाई पर बंधी घड़ी देखी, “रात के ग्यारह बज गए हैं। इस वक्त यहाँ माजरी ग्रांट की तरफ से देहरादून शहर के लिए कोई कैब या ऑटो मिलना लगभग नामुमकिन है। आप कैसे जाएँगी?”

श्वेता के चेहरे पर हल्की परेशानी उभर आई, “मैं सड़क तक पैदल चली जाऊँगी, शायद कोई शेयरिंग ऑटो मिल जाए…”

“बिल्कुल नहीं,” दीपेंद्र ने तुरंत बीच में टोकते हुए कहा। “इतनी देर रात मैं आपको अकेले जाने नहीं दे सकता। मेरी रॉयल एनफील्ड बाहर खड़ी है, मैं आपको आपके घर तक छोड़ देता हूँ।”

श्वेता ने झिझकते हुए मना करने की कोशिश की, “नहीं-नहीं, आपके घर में शादी का माहौल है। आपकी ज़रूरत होगी यहाँ। मैं चली जाऊँगी।”

“सब काम हो चुके हैं श्वेता जी, बस बारात का इंतज़ार है। और मेरी बहन को इतना सुंदर बनाने के बाद अगर मैं आपको सुरक्षित घर न पहुँचाऊँ, तो यह मेरी नाफरमानी होगी। चलिए,” दीपेंद्र का लहज़ा ऐसा था जिसमें एक अजीब सा भरोसा और अपनापन था, जिसे श्वेता चाहकर भी नकार नहीं पाई।

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romantic story in hindi बुलेट का सफ़र और दिल के राज

होमस्टे के बाहर ठंड काफी बढ़ चुकी थी। हल्की ओस गिर रही थी। दीपेंद्र ने अपनी बुलेट स्टार्ट की। उसकी भारी आवाज़ रात के सन्नाटे को चीरती हुई गूँज उठी।

“बैठिए,” दीपेंद्र ने पीछे मुड़कर देखा।

श्वेता ने झिझकते हुए अपना भारी बैग संभाला और बुलेट की पिछली सीट पर बैठ गई। उन दोनों के बीच एक अनकही दूरी थी। श्वेता ने बुलेट के पीछे लगे ग्रैब हैंडल को कसकर पकड़ लिया ताकि दीपेंद्र से उसका कोई शारीरिक स्पर्श न हो।

बुलेट ने माजरी ग्रांट की सुनसान सड़कों से गुजरना शुरू किया। दोनों तरफ चीड़ और साल के लंबे-लंबे पेड़ थे, जिनकी पत्तियों से छनकर आती ठंडी हवा चेहरे को छू रही थी।

“ठंड ज्यादा है न?” दीपेंद्र ने शीशे में श्वेता को देखते हुए थोड़ी तेज़ी से पूछा ताकि हवा के शोर में उसकी आवाज़ पहुँच सके।

“हाँ, देहरादून में इस बार ठंड थोड़ी जल्दी आ गई है,” श्वेता ने अपनी साड़ी के पल्लू को गले से सटाते हुए जवाब दिया।

“रिया बता रही थी कि आपके दो प्यारे-प्यारे बच्चे हैं?” दीपेंद्र ने बातचीत का सिलसिला शुरू किया।

श्वेता के होठों पर एक माँ वाली स्वाभाविक मुस्कान तैर गई, “हाँ, एक बेटा है आठ साल का और बेटी छह साल की। मेरी पूरी दुनिया वही हैं।”

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romantic story in hindi वो एक सवाल और बदला हुआ अहसास

“और उनके पापा? वो क्या करते हैं?” दीपेंद्र ने अनजाने में पूछ लिया।

बुलेट की रफ्तार के बीच एक पल के लिए सन्नाटा छा गया। श्वेता ने एक गहरी सांस ली, “हम पाँच साल पहले अलग हो चुके हैं। अब बच्चों की ज़िम्मेदारी और पार्लर… बस यही मेरी ज़िंदगी है।”

दीपेंद्र को तुरंत अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने शीशे में देखा, श्वेता की आँखें झुकी हुई थीं। दीपेंद्र का दिल एक पल के लिए पसीज गया। उसने बहुत ही नर्मी से कहा, “आई एम सॉरी श्वेता जी, मेरा वो मतलब नहीं था। पर एक बात कहूँ? दो बच्चों को अकेले संभालना और खुद के दम पर काम करना… इसके लिए बहुत हौसला चाहिए। आई रियली रिस्पेक्ट यू।”

‘रिस्पेक्ट’… यह एक ऐसा शब्द था जो श्वेता ने सालों से अपने लिए नहीं सुना था। अक्सर लोग एक अकेली महिला को सहानुभूति या फिर गलत नज़रों से देखते थे। लेकिन दीपेंद्र की आवाज़ में जो सच्चाई थी, उसने श्वेता के दिल की किसी बंद खिड़की को खोल दिया।

romantic story in hindi एक झटका और मिटती हुई दूरियाँ

अचानक, सड़क के एक मोड़ पर एक बड़ा सा गढ्ढा आ गया। दीपेंद्र ने तुरंत ब्रेक लगाया। झटके के साथ श्वेता आगे की ओर खिसकी और उसका पूरा वजूद दीपेंद्र की चौड़ी पीठ से जा टकराया। श्वेता के दोनों हाथ खुद-ब-खुद दीपेंद्र की कमर के इर्द-गिर्द लिपट गए।

एक बिजली सी कौंध गई दोनों के शरीर में।

श्वेता का साँस रुक सा गया। उसने तुरंत अपने हाथ पीछे खींचने चाहे, लेकिन बुलेट अभी भी अनियंत्रित थी। दीपेंद्र ने महसूस किया कि श्वेता का पूरा शरीर काँप रहा था—शायद ठंड से, या फिर उस अचानक हुए अहसास से।

“अरे… आई एम sorry! गढ्ढा दिखा नहीं,” दीपेंद्र ने गाड़ी की स्पीड कम करते हुए कहा।

“कोई… कोई बात नहीं,” श्वेता की आवाज़ में एक अजीब सी हड़बड़ाहट और भारीपन था।

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romantic story in hindi बर्फ सा पिघलता मन

“श्वेता जी,” दीपेंद्र ने बहुत आत्मीयता से कहा, “पीछे ग्रैब हैंडल मत पकड़िए, हाथ ठंडे पड़ जाएँगे आपके। और मुझे पकड़ने में कोई बुराई नहीं है, मैं गिरने नहीं दूंगा आपको।”

श्वेता ने कुछ पल सोचा। रात की वो ठंडी हवा, बुलेट की धीमी होती धड़कन और सामने खड़े पुरुष की पीठ से निकलती वो गर्माहट… श्वेता की सालों की जमी हुई बर्फ जैसे पिघलने लगी थी। उसने धीरे से अपने दोनों हाथ दीपेंद्र की कमर के चारों तरफ डाल दिए और अपना एक गाल हल्के से उसकी पीठ पर टिका दिया।

दीपेंद्र के भीतर एक अजीब सा सुकून भर गया। उसने महसूस किया कि श्वेता की पकड़ में एक भरोसा था, एक तड़प थी उस स्पर्श की जो सालों से उसे नहीं मिला था।

जैसे-जैसे बुलेट आंसवाला रोड से होते हुए शहर की ओर बढ़ रही थी, उनके बीच की खामोशी गहरी होती जा रही थी, लेकिन वो खामोशी अब अजनबी नहीं थी। उसमें एक अजीब सा रोमांटिक खिंचाव था।

“आप हमेशा देहरादून में ही रहते हैं?” श्वेता ने बहुत दबी हुई आवाज़ में पूछा, उसका चेहरा अभी भी उसकी पीठ के करीब था।

“नहीं,” दीपेंद्र ने एक हाथ से हैंडल संभाला और दूसरे हाथ से धीरे से श्वेता के उन हाथों को छुआ जो उसकी कमर पर बंधे थे। “मैं मर्चेंट नेवी में हूँ। छह महीने समुद्र में रहता हूँ और छह महीने यहाँ। लेकिन सच कहूँ श्वेता, आज से पहले मुझे कभी देहरादून इतना खूबसूरत नहीं लगा।”

श्वेता ने अपनी आँखें बंद कर लीं। दीपेंद्र की उंगलियों की छुअन उसकी त्वचा पर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर रही थी। सालों बाद किसी मर्द की छुअन में उसे हवस नहीं, बल्कि एक सुरक्षा और चाहत का अहसास हो रहा था।

“समुद्र में अकेलेपन से डर नहीं लगता?” श्वेता ने पूछा।

“लगता था,” दीपेंद्र ने कहा और उसके हाथ को थोड़ा और कसकर थाम लिया। “लेकिन अब लगता है कि असली अकेलापन तो किनारे पर रहने वाले लोग महसूस करते हैं। जैसे तुम…”

‘तुम’… दीपेंद्र ने पहली बार उसे ‘आप’ की जगह ‘तुम’ कहा था। यह शब्द श्वेता के कानों में मिठास बनकर घुला।

श्वेता ने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी पकड़ थोड़ी और मजबूत कर ली। उसकी साड़ी का पल्लू हवा में उड़ रहा था, और उसके लंबे बाल दीपेंद्र के कंधों को छू रहे थे। दोनों ही इस सफर के खत्म होने से डर रहे थे। वो रात, वो सड़क और वो अहसास… सब कुछ जैसे वहीं थम जाए, ऐसी ख्वाहिश दोनों के दिलों में जाग उठी थी।

romantic story in hindi गली का मुहाना और दिल के जज़्बात

आधे घंटे का सफर जैसे कुछ पलों में बीत गया। बुलेट श्वेता की गली के मुहाने पर आकर रुक गई।

इंजन बंद होते ही एक गहरा सन्नाटा छा गया। श्वेता धीरे से उतरी। उसके कदम थोड़े डगमगा रहे थे। उसने अपने बिखरे बालों को समेटा और दीपेंद्र की तरफ देखा।

स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी में दोनों एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे। श्वेता के चेहरे पर एक अजीब सा आकर्षण था—उसकी झुकी हुई पलकें, गुलाबी होते गाल और हल्की सी कंपकंपी।

“थैंक यू दीपेंद्र…” श्वेता की आवाज़ बहुत धीमी थी।

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romantic story in hindi आगोश में सिमटी तन्हाई

दीपेंद्र बुलेट से उतरा और उसके बिल्कुल करीब आकर खड़ा हो गया। दोनों के बीच महज कुछ इंच की दूरी थी। दीपेंद्र की गहरी आँखों में एक अजीब सी तड़प थी। उसने अपना हाथ उठाया और श्वेता के चेहरे पर आई एक आवारा लट को उठाकर उसके कान के पीछे समेट दिया।

उसकी उंगलियाँ श्वेता के गाल से छुईं। श्वेता की साँसें तेज हो गईं। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।

“श्वेता,” दीपेंद्र ने बहुत गहरे और रूहानी लहजे में कहा, “क्या यह हमारी आखिरी मुलाकात है?”

श्वेता ने आँखें खोलीं। उसकी आँखों में पानी की एक हल्की परत थी, जिसमें उम्मीद और डर दोनों साफ़ दिख रहे थे। “मैं… मैं एक बच्चों की माँ हूँ दीपेंद्र। मेरी ज़िंदगी में इन सब चीज़ों के लिए जगह नहीं है।”

दीपेंद्र ने आगे बढ़कर श्वेता के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया। उसकी हथेलियों की गर्माहट श्वेता की आत्मा तक पहुँच गई।

“ज़िंदगी सिर्फ ज़िम्मेदारियाँ निभाने का नाम नहीं है श्वेता। तुम्हें भी खुश रहने का, प्यार महसूस करने का उतना ही हक है जितना किसी और को। मैं तुमसे कोई वादा या शर्त नहीं माँग रहा… बस इतना चाहता हूँ कि इस अकेली राह पर जब भी तुम्हें किसी कंधे की ज़रूरत हो, मुझे याद कर लेना।”

श्वेता का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसने दीपेंद्र की छाती पर अपना सिर रख दिया। दीपेंद्र ने अपनी बांहें उसके चारों ओर फैला दीं और उसे अपने आगोश में ले लिया। उस ठंडी रात में, सड़क के उस कोने पर, दो तन्हा रूहें एक-दूसरे में सिमट गई थीं। वो कोई जिस्मानी वासना नहीं थी, बल्कि दो दिलों का एक-दूसरे के प्रति समर्पण था।

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romantic story in hindi एक नए सवेरे की ओर

कुछ पलों तक उस आगोश में रहने के बाद, श्वेता धीरे से पीछे हटी। उसने दीपेंद्र की तरफ देखा, एक बहुत ही हसीन और सच्ची मुस्कान के साथ।

“मेरा पार्लर… राजपुर रोड पर ‘लुक एंड स्टाइल’ के नाम से है,” श्वेता ने शर्माते हुए कहा। “अगर कभी चाय पीने का मन करे… तो आ सकते हो।”

दीपेंद्र के चेहरे पर एक दिलकश मुस्कान खिल उठी। “मैं कल ही आ रहा हूँ श्वेता। चाय के लिए… और तुम्हारे लिए।”

श्वेता ने अपना बैग संभाला और पीछे मुड़कर अपने घर के दरवाजे की तरफ बढ़ गई। दरवाजे पर पहुँचकर उसने एक बार फिर पीछे मुड़कर देखा। दीपेंद्र अभी भी वहीं खड़ा उसे देख रहा था।

उस रात जब श्वेता अपने कमरे में पहुँची और शीशे के सामने खड़ी हुई, तो उसे लगा कि जैसे उसका पुराना वजूद लौट आया हो। उसकी आँखों में अब वो उदासी नहीं थी, बल्कि एक नया सवेरा था—एक ऐसी मोहब्बत का सवेरा, जो उम्र और हालात की जंजीरों से परे थी। romantic story in hindi

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Mahesh kant Lillu
Mahesh kant Lillu (Xlaila Editor) पिछले 15 वर्षों से डिजिटल मीडिया से जुडे़ हैं। देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं देने के बाद, वर्तमान में वह एक बड़े मीडिया घराने में बतौर चीफ सब एडिटर (डिजिटल) कार्यरत हैं। खबरों के साथ-साथ दिल को छू लेने वाली कहानियों और जज्बातों को पन्नों पर उतारना उनका पैशन है, और अपने ब्लॉग xlaila पर कहानियों को जीवंत करना उनका हुनर है।
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