Devar Bhabhi ki kahani : चंडीगढ़ के सेक्टर-11 की एक खूबसूरत कोठी में रिया के दिन किसी नीरस कैलेंडर की तरह बीत रहे थे। उसकी शादी को तीन साल हो चुके थे। उसके पति, मानव, एक इंटरनेशनल लॉ फर्म में सीनियर पार्टनर थे।
मानव की दुनिया सिर्फ फाइलों, कोर्ट हियरिंग्स और देर रात तक चलने वाली बिजनेस कॉल्स तक ही सीमित थी। रिया के लिए उसके पास ना तो समय था और ना ही भावनाएं। रिया के लिए वह शादी सिर्फ एक घर की चारदीवारी बनकर रह गई थी। Devar Bhabhi ki kahani
रिया ने इस तन्हाई से ध्यान हटाने के लिए महीनों पहले सिक्किम और गैंगटोक के एक बेहद खूबसूरत ट्रिप की प्लानिंग की थी। उसकी हसरत थी कि वह अपनी शादी की तीसरी सालगिरह पहाड़ों की शांत वादियों में मनाए। लेकिन एन वक्त पर मानव के सामने एक नया और बड़ा केस आ गया। Devar Bhabhi ki kahani

“रिया, बी प्रैक्टिकल!” मानव ने लैपटॉप से नजरें हटाए बिना कहा था। “मैं इस वक्त केस छोड़कर नहीं जा सकता। तुम समझती क्यों नहीं?”
“मानव, मैंने तीन महीने से इस ट्रिप की तैयारी की थी,” रिया की आवाज में निराशा साफ झलक रही थी। “हम दोनों ने सालों से साथ में एक हफ्ता भी नहीं बिताया।”
“ठीक है, तो एक काम करो,” मानव ने अपने छोटे भाई साहिल की तरफ इशारा करते हुए कहा, जो वहीं बैठकर अपनी गिटार ट्यून कर रहा था। “साहिल, तुम भाभी के साथ चले जाओ। वैसे भी तुम्हारा फोटोग्राफी का प्रोजेक्ट बाकी है, वहां तुम्हें अच्छे शॉट्स मिल जाएंगे। रिया का ट्रिप भी कैंसिल नहीं होगा और तुम्हारा काम भी हो जाएगा।”
रिया स्तब्ध रह गई। मानव ने अपनी पत्नी की भावनाओं को एक ‘एडजस्टमेंट’ में बदल दिया था।
साहिल ने रिया की तरफ देखा। साहिल, जो 25 साल का एक आज़ाद ख्याल, संवेदनशील और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर था, जानता था कि उसकी भाभी अंदर से कितनी अकेली है। वह घर में वही एक इंसान था जो रिया की अनकही उदासी को समझता था। Devar Bhabhi ki kahani
“अगर भाभी को कोई ऐतराज न हो, तो मैं साथ चल सकता हूँ,” साहिल ने धीमी और अदब भरी आवाज में कहा।
रिया ने कुछ पल सोचा। वह इस घर की घुटन में अकेले नहीं रहना चाहती थी। उसने एक गहरी सांस ली और सिर हिला दिया।

Devar Bhabhi ki kahani: सिक्किम का सफर और पहली धुंध
चंडीगढ़ से बागडोगरा एयरपोर्ट और वहां से गैंगटोक का पहाड़ी रास्ता। जीप जैसे-जैसे ऊँचाई पर चढ़ रही थी, तीस्ता नदी का नीला पानी और हरे-भरे पहाड़ आंखों के सामने तैरने लगे।
मानव के साथ रहते हुए रिया भूल ही चुकी थी कि खुलकर मुस्कुराना क्या होता है। लेकिन साहिल का बेफिक्र अंदाज़, रास्तों में बजते उसके पुराने हिंदी गाने और उसकी बचकानी बातें रिया के चेहरे पर बरसों बाद एक असली मुस्कान ले आईं।
गैंगटोक में दो दिन बिताने के बाद, वे उत्तरी सिक्किम के एक छोटे और बेहद शांत गांव ‘लाचेन’ के लिए रवाना हुए। यहाँ नेटवर्क न के बराबर था और चारों तरफ बर्फ से ढकी चोटियां और चीड़ के जंगल थे। Devar Bhabhi ki kahani
एक शाम, जब वे एक चाय के बगान के पास टहल रहे थे, मौसम ने अचानक करवट ली। ठंडी, बर्फीली हवाएं चलने लगीं और हल्की-हल्की बर्फबारी शुरू हो गई।
रिया ने ठंड से ठिठुरते हुए अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ा। साहिल ने तुरंत अपना भारी जैकेट उतारा और बिना कुछ कहे रिया के कंधों पर डाल दिया।
“साहिल, तुम्हें ठंड लग जाएगी,” रिया ने जैकेट वापस करने की कोशिश की।
साहिल ने रिया का हाथ धीरे से रोक लिया। उसकी उंगलियां बहुत गर्म थीं और रिया का हाथ ठंड से सुन्न।
“भाभी, आपका ख्याल रखना मेरी जिम्मेदारी है,” साहिल ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा। साहिल की आवाज में ऐसा ठहराव था जो रिया ने कभी मानव की आवाज में नहीं सुना था। “और वैसे भी, जमने से ज्यादा मुझे अच्छा लगेगा अगर आप मुस्कुराती रहें।”
रिया ने साहिल की आंखों में देखा। वहां कोई छलावा नहीं था, सिर्फ एक निश्छल परवाह थी। उस रात कॉटेज की बालकनी में बैठकर दोनों ने देर रात तक बातें कीं। रिया ने पहली बार किसी के सामने अपना दिल खोला—अपने अधूरे सपनों, अपनी तन्हाई और अपने टूटते रिश्ते के बारे में बताया। साहिल ने बिना किसी जजमेंट के सिर्फ उसकी बातों को सुना, एक सच्चे हमदर्द की तरह।

Devar Bhabhi ki kahani: कॉटेज की वो बर्फीली रात
अगले दिन वे और ऊँचाई पर बसे गुरुडोंगमार लेक की तरफ गए, लेकिन दोपहर तक अचानक ऐसा भयानक बर्फीला तूफान (Blizzard) आया कि रास्तों पर बर्फ की मोटी परत जम गई। उनकी गाड़ी एक जगह फंस गई। ड्राइवर ने बताया कि रात यहीं एक छोटे से लकड़ी के होमस्टे (कॉटेज) में बितानी होगी, क्योंकि रास्ते सुबह ही साफ हो पाएंगे।
उस छोटे से कॉटेज में सिर्फ एक ही कमरा रहने लायक था, जिसमें लकड़ी की एक पुरानी अंगीठी (Fireplace) जल रही थी। बाहर माइनस 8 डिग्री तापमान था और बर्फीली हवाएं खिड़कियों के शीशों से टकराकर सीटी बजा रही थीं। Devar Bhabhi ki kahani
कॉटेज के मालिक ने उन्हें गरम सूप दिया और अंगीठी में लकड़ियां डालकर चला गया।
कमरे में सिर्फ अंगीठी की पीली और गर्म रोशनी फैली हुई थी। माहौल में एक अजीब सा सन्नाटा और खिंचाव था।
रिया कॉटेज की खिड़की के पास खड़ी होकर बाहर गिरती बर्फ को देख रही थी। उसने शॉल लपेट रखी थी, लेकिन फिर भी वह कांप रही थी।
साहिल अंगीठी के पास से उठा और दो कप गरम कॉफी लेकर रिया के पास आया।
“लीजिए भाभी, यह आपको थोड़ी राहत देगा,” साहिल ने कप उसकी तरफ बढ़ाया।
रिया ने कप लिया, लेकिन उसकी उंगलियां इतनी कांप रही थीं कि कॉफी छलकने लगी। साहिल ने तुरंत कप को साइड टेबल पर रखा और रिया के दोनों हाथों को अपने हाथों में भर लिया। वह अपने हाथों की गरमाहट से रिया के जमे हुए हाथों को सेंकने लगा।
“आप इतनी ठंड में खिड़की के पास क्यों खड़ी हैं?” साहिल ने बेहद नजाकत से पूछा।
“क्योंकि… क्योंकि मुझे डर लग रहा है साहिल,” रिया की आवाज कांप गई।
“बर्फ से? या तूफान से?”
“नहीं…” रिया ने नजरें उठाईं। इस वक्त साहिल का चेहरा उसके बेहद करीब था। उसकी सांसों की गरमाहट रिया को अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी। “मुझे इस सन्नाटे से डर लग रहा है। और… और इस अहसास से डर लग रहा है जो मुझे तुम्हारे करीब ला रहा है।”
साहिल की धड़कनें तेज हो गईं। उसने आहिस्ता से रिया के चेहरे पर आ रही एक लट को हटाकर उसके कान के पीछे किया। उसकी उंगलियां रिया की गालों को छू गईं।
“क्या यह गलत है भाभी… कि मुझे आपकी यह तन्हाई देखी नहीं जाती?” साहिल की आवाज धीमी और गम्भीर हो गई। “क्या यह गलत है कि मैं चाहता हूँ कि आप जिंदगी का हर लम्हा मुस्कुराकर जिएं? मानव भाई शायद आपका स्टेटस समझ सकते हैं, लेकिन आपका दिल… आपका दिल कभी नहीं समझ पाए।”
रिया की आंखों से एक आंसू निकलकर गाल पर ढुलक गया। “साहिल… हम दोनों किस मोड़ पर खड़े हैं? तुम मेरे पति के छोटे भाई हो। यह समाज…”
“भाभी, समाज इस कमरे के बाहर है,” साहिल ने रिया के दोनों कंधों को थामते हुए उसे थोड़ा और करीब खींच लिया। “इस कमरे में सिर्फ आप हैं और मैं हूँ। और वो सच है जो हम दोनों इतने दिनों से एक-दूसरे की आंखों में देख रहे हैं।”
रिया का सारा सब्र टूट गया। उसने सालों से अपने अंदर दबाकर रखे उस दर्द, उस अकेलेपन को बह जाने दिया। उसने अपना सिर साहिल के सीने पर रख दिया।
साहिल ने बिना एक पल गंवाए अपनी दोनों बाहें रिया के गिर्द लपेट लीं और उसे मजबूती से अपने आगोश में भींच लिया। अंगीठी की रोशनी में दोनों के साए दीवार पर एक हो गए थे। साहिल ने रिया के माथे पर एक बेहद लंबा और रूहानी चुंबन दिया। वह महज एक स्पर्श नहीं था, वह एक वीरान पड़ी जिंदगी में बेपनाह मोहब्बत का इकरार था।
रिया ने साहिल की शर्ट को अपनी उंगलियों में कसकर भींच लिया। उस बर्फीली रात में, कॉटेज की उस छोटी सी दुनिया में, देवर और भाभी का रिश्ता पिघलकर दो आशिकों की रूह में तब्दील हो चुका था।

Devar Bhabhi ki kahani: कशमकश और वापसी का फैसला
सुबह जब सूरज की पहली सुनहरी किरणें बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ीं, तो पूरा मंजर चमक उठा। तूफान थम चुका था।
रिया जब उठी, तो उसने देखा कि साहिल उसके पास ही बैठा हुआ उसे एकटक देख रहा था। उसके चेहरे पर वही निश्छल और बेपनाह मोहब्बत थी।
रिया ने बिस्तर से उठते हुए अपनी नजरें झुका लीं। उसके अंदर फिर से मर्यादा और समाज का खौफ जाग रहा था।
“साहिल… कल रात जो हुआ…” रिया ने कांपती आवाज में कहा।
साहिल उठकर उसके पास आया और उसने रिया के दोनों हाथों को चूम लिया।
“कल रात जो हुआ रिया, वह कोई गलती नहीं थी,” साहिल ने पहली बार उसे ‘भाभी’ न कहकर ‘रिया’ पुकारा। “वह इस दुनिया का सबसे पवित्र सच था। मैंने तुमसे कभी किसी मतलब के लिए प्यार नहीं किया। मैं जानता हूँ कि चंडीगढ़ वापस जाकर चीजें आसान नहीं होंगी। लेकिन मैं तुम्हें उस घुटन भरी जिंदगी में वापस अकेला नहीं छोड़ सकता।”
“लेकिन मानव? तुम्हारा परिवार?” रिया की आंखों में डर था।
“मैं मानव भाई से बात करूंगा,” साहिल ने पूरी दृढ़ता से कहा। “मैं उन्हें बताऊंगा कि एक औरत सिर्फ पैसों और सुविधाओं से नहीं जीती, उसे सम्मान और प्यार चाहिए होता है। अगर वे तुम्हें वो खुशी नहीं दे सकते, तो उन्हें तुम्हें आजाद कर देना चाहिए।”
रिया ने साहिल की आंखों में देखा। वहां कोई कायरता नहीं थी, सिर्फ अपनी मोहब्बत के लिए स्टैंड लेने का एक मजबूत इरादा था।

Devar Bhabhi ki kahani: नया रास्ता
सिक्किम का वह सफर खत्म हो चुका था, लेकिन रिया और साहिल की जिंदगी का एक नया सफर शुरू होने जा रहा था।
जब वे चंडीगढ़ पहुंचे, तो घर का माहौल वैसा ही शांत था। मानव अपने लैपटॉप पर किसी नई डील में व्यस्त था। लेकिन इस बार रिया पहले जैसी कमजोर और खामोश नहीं थी। साहिल के प्यार ने उसे अपने हक के लिए खड़े होने की ताकत दे दी थी।
साहिल ने रिया का हाथ थामा और दोनों मानव के स्टडी रूम में दाखिल हुए।
मानव ने नजरें उठाईं, “ओह! तुम लोग आ गए? ट्रिप कैसा रहा?”
साहिल ने रिया का हाथ और कसकर पकड़ा और मानव की आंखों में आंखें डालकर बोला, “मानव भाई, ट्रिप बहुत खूबसूरत था… क्योंकि वहां रिया को वो प्यार और तवज्जो मिली, जो उसे इस घर में कभी नहीं मिली।”
मानव हैरान होकर खड़ा हो गया, “यह तुम क्या कह रहे हो साहिल? तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया?”
“दिमाग नहीं भाई, दिल जाग गया है,” साहिल ने बिना किसी डर के कहा। “रिया आपकी पत्नी जरूर हैं, लेकिन आपने उन्हें सिर्फ एक शो-पीस बनाकर रखा है। हम दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं। और आज हम यहाँ आपसे छुपाकर भागने नहीं आए हैं, बल्कि आपको यह बताने आए हैं कि रिया अब इस बेजान रिश्ते में नहीं रहेगी।”
मानव गुस्से से लाल हो गया, लेकिन जब उसने रिया की तरफ देखा, तो रिया की आंखों में कोई डर नहीं था।
“मानव,” रिया ने गम्भीर और शांत आवाज में कहा, “मैंने तीन साल तक इस शादी को बचाने की हर संभव कोशिश की। लेकिन तुमने मुझे कभी अपना माना ही नहीं। साहिल ने मुझे सिखाया कि जिंदगी जीना किसे कहते हैं। मैं तुम्हारे साथ अब और नहीं घुट सकती।”
घर में काफी हंगामा हुआ, परिवार ने विरोध किया, लेकिन साहिल और रिया अपने फैसले पर अडिग रहे। मानव को आखिरकार अपनी गलती का अहसास हुआ कि उसने अपनी महत्वाकांक्षाओं के चक्कर में अपनी पत्नी को खुद से कितना दूर कर दिया था। भारी दिल से ही सही, उसने रिया को तलाक देने की सहमति दे दी। Devar Bhabhi ki kahani
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Devar Bhabhi ki kahani in hindi
कुछ महीने बीत गए। मनाली की ऊँची पहाड़ियों पर बने एक छोटे से लकड़ी के घर में, जिसकी बालकनी से सेब के बागान दिखते थे, रिया चाय के दो कप लेकर बाहर आई।
साहिल अपने कैमरे से उड़ते हुए परिंदों की तस्वीरें ले रहा था। रिया को देखकर उसने कैमरा नीचे किया और मुस्कुराते हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया।
“किस सोच में खोई हो?” साहिल ने रिया के बालों को सहलाते हुए पूछा।
“सोच रही हूँ कि अगर उस दिन मानव ने तुम्हें मेरे साथ न भेजा होता, तो शायद मैं आज भी उस अंधेरे कमरे में अपनी जिंदगी ढूंढ रही होती,” रिया ने साहिल के सीने पर अपना सिर टिकाते हुए कहा।
“पहाड़ों का सफर तो सिर्फ एक बहाना था रिया,” साहिल ने उसकी ठोड़ी को ऊपर उठाकर उसके होठों पर एक हल्का सा चुंबन जड़ा, “किस्मत ने तो हमारी रूहों का मेल बहुत पहले ही लिख दिया था।”
बाहर पहाड़ों पर हल्की-हल्की धूप खिल रही थी और दो आजाद पंछी अपने नए आशियाने में मोहब्बत की एक नई इबारत लिख रहे थे। Devar Bhabhi ki kahani
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